संस्करण: 22दिसम्बर-2008

भारत को फिर बर्ड फ्लू ने झकझोरा

 

 

 

एम.के.सिंह

 

र्ड फ्लू ने एक बार फिर भारत में दस्तक दे दी है। इस बीमारी ने केंद्र के साथ-साथ कई राज्य सरकारों की नाक में दम कर दिया है। असम और पश्चिम बंगाल के अधिकांश जिले बर्ड फ्लू की चपेट में आ गए हैं। साथ ही पड़ोसी मेघालय में भी यह बीमारी पहुंच चुकी है। मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, झारखंड, बिहार और उड़ीसा समेत कई प्रदेशों में सतर्कता बरती जा रही है। कई राज्यों में ऐहतियातन सतर्कता बरती जा रही है। यह पांचवा मौका है जब देश में इस घातक बीमारी ने अपना पैर फैलाया है। फरवरी 2006 में पहली बार भारत के महाराष्ट्र राज्य में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। उस समय भी लाखों मुर्गे-मुर्गियों और पक्षियों को मारा गया था, फिलहाल असम में बीमारी की रोकथाम के लिए मुर्गियों का काम तमाम किया जा रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बर्ड फ्लू को घातक किस्म का बताया है। संगठन का कहना है कि अगर कारगर कदम नहीं उठाए गए तो मनुष्य भी बर्ड फ्लू की चपेट में आ सकते हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन ने इसे विश्वव्यापी महामारी घोषित कर दिया है। यह बात समझ से परे है कि जब आग लगती है तभी सरकारें कुआं खोदने का काम क्यों करती हैं? पहले से कोई व्यवस्था क्यों नहीं की जाती है ? हम ऐहतियातन कदम उठाने में क्यों देर कर देते हैं ? आदेशों के पालन में शिथिलता क्यों बरतते हैं ? इस बार भी बर्ड फ्लू से निपटने में शिथिलता बरती जा रही है। बीमारी से पीड़ित मुर्गे-मुर्गियों को मारने के अभियान में कोताही बरती जा रही है। स्थिति बेकाबू होने के बाद असम ने केंद्र सरकार से मदद मांगी है।

पहले उसने कोई कारगर कदम नहीं उठाया। पोल्ट्री उद्योग अरबों का नुकसान उठा चुका है। Hkारत के साथ-साथ पूरे विश्व में बर्ड फ्लू का खतरा लगातार फैल रहा है। चार साल में इस बीमारी ने 65 देशों को अपनी चपेट में ले लिया है और दो सौ से भी ज्यादा लोगों को लील लिया है। इसके संमण की चपेट में हर महीने एक नया देश आ रहा है। दिसंबर-2007 के बाद बांग्लादेश, भारत, चीन, मिस्त्र, जर्मनी , ब्रिटेन, इंडोनेशिया, ईरान, इजराइल, म्यांमार, पोलैंड, युक्रेन, तुर्की, रूस, वियतनाम और नाइजीरिया में बर्ड फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। कुछ देशों में यह रोग मुर्गे-मुर्गियों के साथ टर्की, बतखों और हंसों में भी फैल चुका है। डब्ल्यूएचओ का मानना है कि दुनिया Hk में वर्ष 2007 में बर्ड फ्लू के मामलों और इस बीमारी से मरने वालों की संख्या में कुछ कमी जरुर आई है, लेकिन इसकी चपेट में आने वाले देशों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2007 के दौरान इस रोग के कुल 83 मामले सामने आए और 55 रोगियों की मौत हो गई। इससे पिछले साल 115 मामले सामने आए थे और 79 रोगियों की मौत हुई थी, लेकिन अब ज्यादा चिंता की बात है कि 65 से अधिक देश इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं और हर साल यह संख्या बढ़ती जा रही है।

बर्ड फ्लू से इंडोनेशिया में सर्वाधिक 100 व्यक्तियों की मौत हुई है। बर्ड फ्लू 2003 में फैला था तब से 2007 तक इस रोग के कुल 346 मामले सामने आ चुके हैं और 213 रोगियों की मौत हो चुकी है। 2003 में इस रोग से मरने वालों की संख्या केवल चार थी, जो अगले वर्ष 32 और 2005 में 43 हो गई थी। यह रोग अब दक्षिण पूर्व एशिया के अलावा यूरोप के देशों को भी अपने चपेट में ले रहा है। हाल ही में ब्रिटेन में इसके वायरस पाए गए हैं। जिससे यूरोपीय देशों में खलबली मच गई। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों की कुल अनुमानित संख्या तो बहुत अधिक होगी। डब्ल्यूएचओ द्वारा जो आंकडे ज़ारी किए गए हैं, वे सरकारी या बड़े अस्पतालों द्वारा दी गई सूचना पर आधारित हैं। बर्ड फ्लू नाम की बीमारी से निपटने के प्रयासों के लिए संयुक्त राष्ट्र के संयोजक डॉक्टर डेविड नेबैरो जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के लिए भी काम करते हैं ने चेतावनी दी है कि दुनिया में इसी तरह की एक नई बीमारी से Hkविष्य में 15 करोड़ लोगों की मौत हो सकती है।

दुनिया भर में ये बीमारी क ी फैल सकती है। बर्ड फ्लू के वायरस में म्यूटेशन यानी अचानक बदलाव के कारण से बीमारी मनुष्यों में बहुत तेज़ी से फैलने का खतरा बढ़ गया है। जब पक्षी उड़कर दूर-दूर तक जाते हैं तो वो बीमारी को ी उन जगहों में फैला सकते हैं। ऐसी बीमारी अगर फैलती है तो उसमें कितने लोगों की जान बचाई जा सकती है ये इस पर निभर्र्र करेगा कि तमाम देशों की सरकारें इस बात को कितनी गभीरता से लेती हैं। वहीं शोधकर्ताओं का कहना है कि आम फ्लू के मुकाबले बर्ड फ्लू को फेफड़ों में बहुत गहरे तक संमण करना पड़ता है। यही वजह है कि मानव कोशिकाओं में बर्ड फ्लू के संमण के आसार कम होते हैं, लेकिन अगर कोई व्यक्ति संमित हो जाता है तो बर्ड फ्लू का वायरस (एच-5 एन-1) बहुत तेजी से फैलता है और नुकसान पहुंचाता है। बर्ड फ्लू का वायरस आसानी से उत्परिपर्तित हो सकता है, इसके बाद वायरस और भी घातक हो जाता है। एच-5 एन-1 वायरस आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता, लेकिन इसके म्यूटेशन यानी उत्परिवर्तन का डर जताया जा रहा है। अमरीकी वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि एच-5 एन-1 वायरस दो अलग विषाणुओं में बदल चुका है। जिससे मनुष्यों के लिए खतरा बढ़ गया है। विषाणुओं के कारण बर्ड फ्लू के लिए दवा बनाने के शोध का काम और जटिल हो गया है। 2005 से पहले यही माना जा रहा था कि बर्ड फ्लू एच-5 एन-1 वायरस की एक खास किस्म की उपजाति से होता है, लेकिन नए परीक्षणों से पता चला है कि इंडोनेशिया में एच-5 एन-1 वायरस की नई उपजाति सामने आई है। वैज्ञानिकों को डर है कि एच-5 एन-1 वायरस तेजी से मनुष्य में फैल सकता है जिसके बाद बर्ड फ्लू महामारी का रूप ले सकता है। बर्ड फ्लू रोग के वायरस 15 किस्म के होते हैं, लेकिन एच-5 एन-1 ही इंसानों को अपना निशाना बनाता है।

 विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि जैसे वायरस इस बार दिखाई दे रहे हैं, उस तरह के वायरस 1997 में नहीं देखे गए थे यानी पिछले दस सालों में उनमें बदलाव आया है। एक जगह से दूसरी जगह जाने वाले पक्षी इस वायरस को अपने साथ ले जाते हैं, लेकिन खुद इसका शिकार नहीं होते हैं। मुर्गियों को यह वायरस आसानी से पकड़ लेता है। पहले यही समझा जाता था कि बर्ड फ्लू सिर्फ पक्षियों को होने वाली बीमारी है, लेकिन हॉगकाँग में पहली बार एक व्यक्ति में 1997 मे बर्ड फ्लू के लक्षण पाए गए। वैज्ञानिकों का मानना है कि वे लोग इस वायरस का शिकार हो सकते हैं जो प्रावित मुर्गियों या पक्षियों के बहुत नजदीक रहते हैं। मुर्गियों के बीट में बर्ड फ्लू के वायरस होते हैं जो हवा के साथ उड़ने लगते हैं और सांस के रास्ते लोगों के शरीर में घुस जाते हैं। ऐसे में इस बीमारी से निपटने के लिए गंभीर प्रयास करने की ज़रूरत है। सभी देशों को बर्ड फ्लू से निपटने के लिए युध्दस्तर पर जुट जाना चाहिए, नहीं तो यह अर्थव्यवस्था को चौपट कर सकता है।

 

एम.के.सिंह