संस्करण: 21  मई-2012

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नितिन गडकरी के हसीन सपने

           संघ-भाजपा परिवार में शामिल लोगों का हास्यबोध आम तौर पर बाकी लोगों की तुलना में कम होता है,यह तो जानी हुई बात है। मुमकिन है कि दशकों तक बड़ी मोहरी वाली हाफ पैण्ट और सफेद कमीज पहने हुए और उसी किस्म की विचित्र ड्रेस में हाजिर प्रचारकों के बौध्दिकों की घूंट पीते हुए सभी कुछ नीरस हो जाता हो।

               बहरहाल, संघ सुप्रीमो मोहन भागवत के आशीर्वाद से देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी का अध्यक्ष बने नितिन गडकरी -जिन्हें उन्हीं की नज़रे इनायत की वजह से दुबारा पद पर बने रहने का मौका मिलनेवाला है,जिसके लिए..............

  ? सुभाष गाताड़े


भाजपा में मनमानी से संघ की अकड़ ढीली हो गयी है

        रएसएस और भाजपा के सम्बन्ध कुछ कुछ अवैध सम्बन्धों जैसे हैं जिन्हें दिन के उजाले में छुपाये रखा जाता है किंतु ऍंधेरे में बनाये रखा जाता है। किंतु इनका यह सत्य भी ऐसे ही जग जाहिर है जैसा कि रहीम ने एक दोहे में कहा है-

                 खैर, खून, खाँसी, खुशी, बैर, प्रीति, मदपान

                  रहिमन दाबे न दबे, जानत सकल जहान

? वीरेन्द्र जैन


बारदाना समस्या म.प्र. सरकार की गलत नीतियों का परिणाम

    ध्यप्रदेश के किसानपुत्र कहलाने वाले मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जिनकी रूचि खेती से अधिक भूमि घोटाले, खनन एवं निर्माण के ठेकों में है, ने केन्द्र सरकार द्वारा संपूर्ण देश के लिये जारी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बोनस की घोषणा कर मिशन 2013के अंतर्गत लगातार दो वर्षों से स्वयं को किसानों का हितैषी  दिखाने की कोशिश की है लेकिन मूल रूप से वे अनाज माफियाओं के लिये कार्य कर रहे है तथा किसानों का अहित कर रहे हैं।

? हेमराज कल्पोनी विधायक, राजगढ़, म.प्र.

(लेखक मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य है एवं लेख में प्रकट विचार उनके व्यक्तिगत है।)


जनचेतना यात्रा यानि कांग्रेस का हल्ला बोल

          ध्यप्रदेश कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस जनचेतना यात्रा निकल रही है, यह यात्रा गाँव-गाँव जाकर बीजेपी कि चूलें हिलाने का प्रयास कर रही है, इस बार बीजेपी घिरती दिखाई दे रही है। कांग्रेस के सवाल और राहुल के तेवर तीखे है। तर्कों की कसौटी पर बीजेपी के लिए इनके जवाब दे पाना आसान नहीं है। दरअसल आठ साल का अरसा कम नहीं होता, प्रदेश में बीजेपी शासन के इन आठ सालों का मूल्यांकन  बिना किसी लाग लपेट के करें तो उपलब्धि के रूप में शून्य ही दिखाई देता है जो कि जनता के हिस्से में आया, हाँ नेताओं और अफसरों की जरूर बल्ले-बल्ले हुई।

? अनवर एम सिद्दीकी


राजनीति हो गई नौटंकी

नेता बन गये नट-जनता बजा रही तालिया

         र्तमान दौर में राजनीति का सारा का सारा परिदृश्य नौटंकीमय हो गया है। जब भी संचार माध्यमों में राजनीति से संबंधित खबरें पढ़ों या देखों ऐसा लगने लगता है मानों हम सत्ता संचालकों की रात दिन की गतिविधियों में जनहित से जुड़े मसलों के प्रति गंभीरता और उनकी चिंता नहीं, बल्कि उनकी अपनी स्वयं की वाहवाही के डायलाग सुन रहे हैं। नेतागण कुछ इस ढंग से राजनीति के मंच पर अपने आपको प्रस्तुत करते हैं जैसे रंगमंच पर नौटंकी का कोई पात्र अपना बहुरुपियां स्वरूप धारण कर दर्शकों के समक्ष उपस्थित हो रहा है। 

 ? राजेन्द्र जोशी


भाजपा सरकार की हैट्रिक का सवाल

           क्या भारतीय जनता पार्टी, मध्यप्रदेश में 2013 के विधानसभा चुनाव में सत्ता की 'हैट्रिक' नहीं बना सकी, तो उसका कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान होंगे ? क्योंकि बड़ी शिद्दत से वाकई यह महसूस किया जाने लगा है कि यहां सरकार की 'मार्केटिंग' बेहद कमजोर है और 2013की सफलता को लेकर मुख्यमंत्री सहित सरकार में बैठे लोगों का 'आत्मविश्वास'अतिरेक के शिखर पर है। वहीं दूसरी ओर लगता है प्रदेश संगठन के अगुआ प्रभात झा की राजनीतिक सूझबूझ, तत्परता, लगन और कार्यकर्ताओं से संवाद की तकनीक व्यावहारिक धरातल पर है। 

? महेश बाग़ी


पुण्यतिथि 27 मई पर विशेष

मध्यप्रदेश प्रवास के दौरान नेहरूजी के भाषणों के मुख्य अंश

       पंडित जवाहरलाल नेहरु आजादी आंदोलन के दौरान और देश के आजाद होने के बाद प्रधानमंत्री की हैसियत से संपूर्ण भारत का लगातार भ्रमण करते रहते थे। उनके भ्रमण की एक विशेषता यह रहती थी कि वे अपने भ्रमण के दौरान दिल्ली के बाहर रात बिताते थे। ऐसा करने से वे आम लोगों के संपर्क में आते थे। देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ उन्होंने मध्यप्रदेश के अनेक स्थानो की यात्राएं की। 1947 के पूर्व वर्तमान मध्यप्रदेश में शामिल अनेक क्षेत्रों में राजाओं का शासन था। अपने प्रवास के दौरान वे जन सभाओं को संबोधित करते थे। जनसभाओं में वे उस तरीके से भाषण देते थे जैसे कोई प्रोफेसर विश्वविद्यालय की क्लास में व्याख्यान दे रहा हो।

? एल.एस.हरदेनिया


बम्पर फसल के भण्डारण का संकट

      ध्यप्रदेश में गेहूं की जबरदस्त पैदावार के चलते उसके समर्थन मूल्य पर खरीदी और भण्डारण का जानलेवा संकट पैदा हो गया है। बोरियों की कमी की मांग उठा रहे आंदोलन कारी किसानों पर पुलिस गोलीबारी से बरेली के एक किसान की मोत हो गई। इस मौत के बाद समस्या के निराकरण की चिंता करने की बजाए राज्य और कैंद्र्र सरकार से जुड़े राजनीतिक नुमांइदों ने एक दूसरे पर सड़क से संसद तक दोषारोपण की झड़ी लगा दी। संसद में भाजपा के सांसदो ने जहां इस मुददे पर तत्काल बहस की मांग उठाई,वहीं इजाजत नहीं मिलने पर संसद के बाहर प्रर्दशन भी किया। सांसदो के इस हंगामें को इसलिए जायज ठहराया जा सकता है, क्योंकि बारदाना उपलब्ध कराने की प्राथमिक जवाबदारी कैंद्र सरकार की है,लेकिन यह कोई बाध्यकारी नहीं है।

? प्रमोद भार्गव


आंबेडकर के विचारों पर फासीवादी हमला

        फ्रांस में 1820 में लुईस फिलिप ने सत्ता संभालने के बाद मानहानि और राजद्रोह के कानूनों को और ज्यादा कड़ा कर दिया। फिलिप को उस समय के कार्टूनिस्टों का डर सताता रहता था। तब फ्रांस में मशहूर कार्टूनिस्ट फिलिपोन और हॉनर डयूमर सहित ढेर सारे कार्टूनिस्ट साम्राज्यवाद और पूंजीवाद के खिलाफ कार्टूनों के जरिये मोर्चा खोले हुए थे। 1831 में फिलिपोन को कार्टून की वजह से मानहानि के मामले 6 माह की जेल हुई। अगर आज भारत में शंकर पिल्लई जिंदा होते तो उन्हें एससी/एसटी एक्ट में फिलिपोन से कहीं ज्यादा समय जेल में गुजारने पड़ते।

? विजय प्रताप


गृहिणियों को भत्ता

    हली बार किसी सरकारी स्कीम के तहत गृहिणियों को रु.1,000/- प्रतिमाह भत्ते की शुरूआत गोवा में हो गयी है।  (टाइम्स ऑफ इण्डिया 13-5-12 ) वर्तमान सत्तासीन भाजपा ने चुनाव के दौरान अपने चुनावी घोषणापत्र में ऐलान किया था कि जीतने और सरकार में आने पर वह गृहिणियों को भत्ता देंगी। यह भत्ता उन परिवारों को मिलेगा जिनकी आय प्रतिवर्ष 3 लाख रुपये से कम होगी। सरकारी  सूचना में बताया गया है कि लगभग सव्वा लाख परिवार इसका लाभ उठाएंगे। महिला एवम् बालविकास अधिकारी ने मीडिया को बताया कि इस महंगाई के समय में गृहिणियों को घर सम्भालना मुश्किल हो रहा है। 

 

? अंजलि सिन्हा


जरुरी है निजी स्कूलों पर कानूनी सख्ती

     देश में सरकारी स्कूलों से कहीं ज्यादा निजी स्कूलों की संख्या है। सच्चाई यह है कि यदि निजी स्कूल न हों तो सबको स्कूल मयस्सर ही नहीं हो सकते। इसी के साथ एक कड़वा सच यह भी है कि जो थोड़ी बहुत पढ़ाई हो रही है,वह इन्हीं तथाकथित नर्सरी स्कूलों की ही बदौलत है। सरकारी प्राथमिक स्कूलों का आलम यह है कि उसमें पढ़ाने वाले अध्यापक भी अपने बच्चों वहॉ न पढ़ाकर निजी स्कूलों में ही पढ़ाते हैं। यह और बात है कि छात्रों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं को लेने के लिए वे अपने बच्चों का नाम उस सरकारी स्कूल में भी लिखाये रहते हैं। इस प्रकार निजी स्कूल जनता के लिए उसी तरह आवश्यक हो गये हैं जैसे निजी अस्पताल व डॉक्टर।

? सुनील अमर


दुनिया के अंत की भविष्यवाणियाँ और उनके पीछे का सच

    जाने-माने लेखक विक्टर ह्यूगो ने समय के बारे मैं कहा था कि समय की संकल्पना दुनिया की सभी सेनाओं से कई गुना ताकतवर है, यह एक विचार है जिसका कि अब समय आ गया है समय की प्रकृति के विषय मैं कई सवालों के उत्तर ढूँढने मैं अभी भी काफी समय लगेगा जैसे कि समय क्या है? समय का क्या कारण है? समय गुरुत्व को धीमा क्यों कर देता है? समय गति मैं धीमा क्यों होता है? क्या समय एक आयाम है? अरस्तू ने अनुमान लगाया कि समय शायद गति है...लेकिन फिर उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है गति धीमी या तीव्र हो लेकिन समय ऐसा नहीं होता। 

? राहुल शर्मा


'सत्यमेव जयते' और आमिर खान की प्रतिबध्दता के बहाने...

     सिने जगत के प्रसिध्द अभिनेता आमिर खान की सामाजिक प्रतिबध्दता दर्शाने वाले कार्यक्रम 'सत्यमेव जयते' की इन दिनों खांसी चर्चा है। लेकिन मैं सोच रही हूं कि कन्या भ्रूण हत्या और बच्चों के यौन शोषण पर केन्द्रित 'सत्यमेव जयते' की पिछली दोनों कड़ियों में सर्वथा नवीन अथवा हतप्रभ कर देने वाली बात क्या है ? कन्या भ्रूण हत्या का हृदयविदारक सत्य और उसके आंकड़े क्या पहली बार उजागर हुए है ?कौन नहीं जानता कि संतान के जन्म से पूर्व लिंग परीक्षण समृध्द वर्ग ही करवाता है और सर्वाधिक कन्या भ्रूण हत्या भी उक्त वर्ग में ही होती है ?प्रति वर्ष दस लाख कन्या भ्रूण हत्या का आंकड़ा आमिर की शोध का परिणाम नहीं है।

? डॉ. गीता गुप्त


  21 मई2012

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