संस्करण: 21  मई-2012

जनचेतना यात्रा यानि कांग्रेस का हल्ला बोल

? अनवर एम सिद्दीकी

                ध्यप्रदेश कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस जनचेतना यात्रा निकल रही है, यह यात्रा गाँव-गाँव जाकर बीजेपी कि चूलें हिलाने का प्रयास कर रही है, इस बार बीजेपी घिरती दिखाई दे रही है। कांग्रेस के सवाल और राहुल के तेवर तीखे है। तर्कों की कसौटी पर बीजेपी के लिए इनके जवाब दे पाना आसान नहीं है। दरअसल आठ साल का अरसा कम नहीं होता, प्रदेश में बीजेपी शासन के इन आठ सालों का मूल्यांकन  बिना किसी लाग लपेट के करें तो उपलब्धि के रूप में शून्य ही दिखाई देता है जो कि जनता के हिस्से में आया, हाँ नेताओं और अफसरों की जरूर बल्ले-बल्ले हुई। अफसर लापरवाह और गैर जिम्मेदार हो सकते हैं तो क्या मुख्यमंत्री भी ? बड़े कह गए हैं की झूठ के साथ हमेशा यह समस्या रहती है की उसे याद रखना पड़ता है, यानि झूठ भूल जाता है। भूलने की आदत मुख्य मंत्री जी की भी है और कहा यही जा रहा है की वो सिर्फ सच ही बोलते हैं। अब यही सच उनके गले की फांस बनता दिखाई दे रहा है, कांग्रेस सवालों के असलहे लेकर मैदान में है।

                प्रदेश में जिस विकास की दुहाई बीजेपी दे रही है उसमे बहुत बड़ा हिस्सा केंद्र का है अर्थात राशि केंद्र से मिली जिसका अधिकाँश हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। मंरेगा हो या फिर अन्य कोई योजना जो केंद्र द्वारा पोषित है-भ्रष्टाचार की मारी है। जैसा की अजय सिंह राहुल कह रहे हैं -महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण गांरटी योजना भारत सरकार की है। प्रदेश के 50 जिलों 52 हजार गांवों का हर वह व्यक्ति जिसके पास रोजगार नहीं है उसे मनरेगा के जरिए रोजगार की गारंटी दी गई है। यह सच है। पर मध्यप्रदेश सरकार का सच यह है कि सरकारी रिकार्ड के मुताबिक तीन हजार से अधिक अधिकारी कर्मचारी जिनमें आई.ए.एस. अफसर भी  शामिल है मनरेगा में भ्रष्टाचार कें दोषी पाए गए। इन्हें सजा देने में सरकार लेतलाली इसलिए कर रही है क्योंकि भाजपा सरकार के मंत्री और भाजपा संगठन के लोगों का अधिकारियों कर्मचारियों पर दबाव था कि उन्हें कमाकर पैसा दिया जाए इसलिए उन्हें भ्रष्टाचार का रास्ता अख्तियार करना पड़ा। इस तरह का भ्रष्टाचार केन्द्र सरकार की हर योजना में है। चाहे वह राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना हो, चाहे वह सामाजिक सुरक्षा पेंशन की बात हो, चाहे केन्द्र सरकार से मिलने वाली राशि के उपयोग का प्रश्न हो। यह सरकार केन्द्र और राज्य दोनों के विकास की राशि का उपयोग सिर्फ भ्रष्टाचार में ही कर रही है।

               अधिकारियों के बंगलों की  अलमारियां और लाकर रूपया उगल रहे हैं, उनकी पत्नियाँ चिल्ला-चिल्ला कर मंत्रयों को हिस्सा देने की बात कह रही हैं और मुख्य मंत्री जी नित नई-नई घोषणाओं का लालीपाप दिखाकर विकास के उद्धोषके साथ जनता को भरमाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस सच्चाई बताने मैदान में आ गई है जिसे जनता समझ भी रही है उसे अब सड़कों की दरारों,दरकते पहाड़ों और नदियों के छलनी हुए सीनों की सच्चाई नजर आने लगी है। वह समझ रही है की उनके गाँव के इर्द गिर्द बिखरी पड़ी भूगर्भीय संपदा का दोहन का धुल उड़ाते ट्रक और डम्पर कहाँ जा रहे है और रुपया उगल रहे हैं, वे यह भी समझ रहे हैं की उनके हिस्से तो सिर्फ धुल ही आई।

               किसान दिन-रात की जीतोड़ मेहनत के बाद मुख्यमंत्री द्वारा दिखाए गए सब्जबाग के सपनों में बिंधा जब गेहूं की फसल लेकर मंडी की ओर चला तो उसे यह भान था कि अच्छे  पैसे मिलेंगे और उसकी बांछें खिल जाएँगी मगर मंडी  पहुँचते ही उसका भ्रम टूट गया, वहां शोषण की बिसात बिछी हुई थी, व्यापारियों को बेचो या फिर समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए तौल खातिर अपनी बारी के लिए महीने भर से ज्यादा प्रतीक्षा करो। किसान इस चाल से भ्रमित हो जाये इसके लिया सरकार बारदाना-बारदाना चिल्लाकर केंद्र पर दोषारोपण करने लगी। किसान जब कुछ-कुछ समझ गया तो उसकी जबान भी खुली,विरोध्द के स्वर भी मुखरित होने लगे तो सरकार ने उन्हें संतुष्ट करने के बजाय दमन  की नीति अपनाई और गोली चलवा दी। रायसेन में एक किसान मारा गया। प्रदेश की मंडियों  में आज भी किसान परेशान है।

                 शिवराज सिंह की वो कृषि कबिनेट कहाँ गई, वो किसानों के फायदे की बातें क्या हुईं? स्वर्णिम प्रदेश बनाने का दावा करने वालों से अब कांग्रेस ही नहीं जनता भी सवाल करने लगी है कि सोना तो अधिकारियों के घरों से निकल रहा है(मंत्रियों  के यहाँ छपे पड़ें तो अकूत निकलने की संभावना है) प्रदेश तो पिछड़ेपन की फिसलन के रास्ते पर आ गया है सरकार, बताओ तो क्यों?

                  कांगेस ने ये जो जनचेतना यात्रा के बहाने बीजेपी पर हल्ला बोला है इसमें जनता भी अब अपने सुर मिलाती दिखाई दे रही है, इसको मिल रहे जनसमर्थन को देख मिशन 2013 बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने खड़ा दिखाई दे रहा है। कांग्रेस अगर चूक भी जाये तो मीडिया बीजेपी शासन के दौरान हुए भ्रष्टाचार के तथ्य परक समाचारों के साथ जनता के सामने सच्चाई परोस रहा है।

               एक ओर  तो शिवराज सिंह प्रदेश की बेटियों का मामा होने का दम भरते हैं वहीँ दूसरी और यही बेटियां गेंगरेप का शिकार हो रही हैं। महिलाएं दिनदहाड़े लुट रही हैं, घरों में डकैतियां  हो रही है, राह चलते लोग लुटे जा रहे हैं। सरे आम हत्याएं हो रही हैं। जल, जंगल और जमीन की अस्मिता भी खतरे में है, इनका बुरी तरह से दोहन हो रहा है और इन सब  में बीजेपी के लोगों की संलिप्तता की  बातें सामने आ रही हैं बावजूद इसके सरकार सुशासन की दुहाई दे रही है।

                क्या यह सच नहीं है कि प्रदेश की जनता इस फरेब से ऊब चुकी है। सच यह भी है कि जनता कभी खुद विरोध में नहीं उतरती। माना कि कांग्रेस बीजेपी की प्रतिद्वंद्वी पार्टी है मगर क्या हुआ जो  उसने पहल की  है। आखिर इस कथित सुशासन बनाम कुशासन की पोल खोलने किसी को तो आगे आना ही था, कांग्रेस ही सही। सरकार बताये कि क्या कांग्रेस के आरोप गलत हैं?

? अनवर एम सिद्दीकी