संस्करण: 21जुलाई-2008

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''पर्यावरण एवं मानव विसंगतियां''?

आज कल सारे विश्व में जो प्रकृति में परिवर्तन आया है उस पर गंभीर चिंतन हो रहा है। अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर सभी वैज्ञानिक यह खोज कर रहे हैं कि अगर समय पर हम नहीं जागे  >लक्ष्मण सिंह

      


देर आयद, दुरूस्त आयद !मधुकर सरपोतदार हाजिर हों !?
वाजपेयी सरकार के दिनों में शिवसेना के संसदीय दल के नेता रह चुके मधुकर सरपोतदार के चेहरे पर चिन्ता की उन लकीरों को पढ़ा जा सकता था, जब बम्बई दंगों के मुकदमों के निपटारे के लिए बनी विशेष अदालत ने उन्हें और उनके दो साथियों को एक साल की साधारण कैद >सुभाष गाताड़े


राजनीति की माया और 'माया' की राजनीति?
राजनीति की माया भी अपरम्पार है। राजनीति क्षेत्र में आज क्या है, कल क्या था और आगे क्या होने वाला है, इस पर कोई टिप्पणी करना या अनुमान लगाना अब बेमानी हो गया है। इसे ही राजनीति की माया कहा जा रहा है। माया का जब जिक्र होता है तब दो माया पर सहसा ही ध्यान चला जाता  >राजेन्द्र जोशी


  

पिछले चार वर्षों में पुलिस की प्रतिष्ठा
व दबदबे में भारी कमी आयी है?

सोमवार दिनांक 14 जुलाई की रात्रि को भोपाल के मेडिकल कॉलेज के परिसर में घटी घटना के कारण संपूर्ण व्यवस्था पर कलंक लग गया है। उस काली रात को डॉक्टरों ने पुलिस वालों को घेर-घेर कर मारा। इस घटना से प्रदेश में पुलिस की >एल.एस.हरदेनिया


आरक्षित पद समानुपातिक प्रणाली से भरे जायें?
हमारे संविधान ने सदियों से चले आ रहे भेदभाव को दूर करने के लिए समाज के उन वर्गों को समुचित प्रोत्साहन देने के प्रावधान किये हैं जो दबे कुचले रहे हैं तथा सामाजिक आर्थिक रूप से समाज के निचले पायदान पर स्थापित किये जाते रहे हैं। >वीरेन्द्र जैन


भारतीय संविधान में साम्प्रदायिक दलों के लिए कोई जगह नहीं है?

भारतीय लोकतंत्र को साम्प्रदायिकता और कट्टरपंथी मतान्धा शक्तियां आजादी के बाद से ही लगातार प्रदूषित करती आई है। उम्मीद थी कि जैसे-जैसे देश में साक्षरता बढ़ेगी, जनता की आर्थिक सामाजिक स्थिति में सुधार आयेगा और देश प्रगति पथ >विनय दीक्षित


 बागड़ के भय से उबरा खेत?
लोकतंत्र को कार्यपालिका और व्यवस्थापिका जिस तरह खोखला कर रही हैं, उसी तरह न्यायपालिका और लोकायुक्त जैसी संस्थाओं की ज़िम्मेदारी भी बढ़ती जा रही है। इस देश में लोकतंत्र अब तक  >महेश बाग़ी

              


किसान को खुशहाल बनाने की जरूरत ?
 किसान और कृषि से जुड़ी दो विरोधा भासी खबरें सर्वेक्षणों ने दी हैं। पहली खबर सरकारी क्षेत्र से आर्थिक जनगणना संबंधी है, जो दर्शाती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में गैर कृषि  > प्रमोद भार्गव


रासायनिक उर्वरकों पर सब्सिडी या धीमा जहर?
पिछले दिनों भारत सरकार के उर्वरक विभाग रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय का एक विज्ञापन देश के सभी प्रमुख अखबारों में प्रकाशित हुआ था। जिसमें उर्वरक के दाम और उन पर सब्सिडी संबंधी आंकड़े दर्शाये गए थे। इस विज्ञापन के अनुसार सरकार द्वारा रासायनिक उर्वरकों पर दी जा रही राज्य सहायता पिछले 4 वर्षों 15779 करोड़   >सुनील शर्मा

     


जी-8 सम्मेलन : करोड़ों का खर्च, नतीजा सिफर?
बी ते दिनों जापान में खाद्यान्न समस्या, जलवायु परिवहन, और आसमान छूती तेल की कीमतों पर लगाम लगाने का रास्ता खोजने के उद्देश्य से आपोजिट जी-8 सम्मेलन में दुनिया ने सबसे धनी आठ देशों के साथ तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों के जी-5 आउटीच समूह ने भी शिरकत की. तीन दिनों तक चले विचार मंथन  >नीरज नैयर


रियलिटी शो के बहाने जिंदगी से खिलवाड़?

कुकुरमुत्ते की तरह प्रतिदिन फैल रहे टीवी मनोरंजन चैनल अतिशीघ्र प्रसिध्दि पाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। ऐसे नए-नए कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं, जिसके जरिए ढेर सारा धन इकट्टठा किया जा सके। प्रसिध्दि और पैसे की लालशा के चलते ये चैनल युवाओं और मासूम बच्चों की जिंदगी के साथ जमकर खिलावड़ कर रहे हैं। आसमान को छुने की तमन्ना संजोए युवा वर्ग >एम.के.सिंह

    


आत्महत्या का प्रयास अपराध माना जाए?
ऐसा कौन-सा अपराध है, जिसमें सफल होने पर कुछ नहीं होता, किंतु विफल होने पर सजा होती है? आपने सही सोचा, जी हाँ वह अपराध है 'आत्महत्या'। क्या आत्महत्या को अपराध माना जाए? इसमें विफल होने वाले व्यक्ति के लिए जीवन एक अभिशाप बनकर रह जाता है। आप ही सोचें, एक गरीब >डॉ. महेश परिमल

 

21जुलाई2008

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