संस्करण: 21 जनवरी-2013

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राष्ट्रीय मोदीसेवक संघ

       पने आप को चरित्र निर्माण के लिए प्रतिबद्ध कहलानेवाले तमाम संगठनों में एक साझापन अवश्य दिखता है,फिर चाहे इस्लाम के नाम पर चलनेवाले संगठन हों या हिन्दु एकता के नाम पर चलनेवाली जमातें हों। वे सभी कथनी एवं करनी के अन्तराल के मामले में हमेशा आगे रहते हैं। बात शुचिता की होगी और खुद नैतिक पतन के प्रतीक दिखेंगे,बातें पारदर्शिता की होंगी मगर सबकुछ परदे के पीछे किसी सुप्रीमो के रिमोट कन्ट्रोल से संचालित होगा।

?   सुभाष गाताड़े


साल भर में गई तीन सरकारें

कमाल ये है कि भाजपा को यकीन नहीं?

       तुम्हारे पांवों के नीचे कोई जमीन नहीं,

                कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं।

                मैं बेपनाह अंधेरों को सुबह कैसे कहूँ,

                मैं इन नज़ारों का अंध तमाशबीन नहीं।

? विवेकानंद


कानून के ढाँचे में सुधार के साथ

पालन भी सुनिश्चित करना जरूरी

        प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रवासी भारतीय दिवस का उद्धाटन करते हुए गत 8 जनवरी को कोचीन में कहा कि जनता की उम्मीदों को पूरा करने के लिए कानूनी ढांचे में सुधार करना होगा। ऐसा कहते हुए वे परोक्ष में अपने समय के कानूनी ढाँचे की सीमाओं के संकेत दे रहे थे कि इन सीमाओं के अंतर्गत काम करते हुए सरकार सरकारें वे सारे काम नहीं कर पा रही हैं जिन्हेंवे जनता के हित में करना जरूरी समझती हैं। तय है कि प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी दिल्ली में हाल ही में हुए गैंग रेप या भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल की स्थापना को लेकर पिछले साल हुए आन्दोलनों की पृष्ठभूमि में आयी है।

? वीरेन्द्र जैन


जहां तक हो हमें युध्द से बचना चाहिये।

         स समय भारत-पाक सीमा पर जो खूनी तनाव चल रहा है उसके पीछे एक ऐसी घटना है जो अत्यधिक संवदेनशील है। घटना पिछले वर्ष 2012 की है जब कश्मीर में रहने वाली एक माँ पाक अधिकृत कश्मीर में रहने वाले अपने बेटों से मिलने निकल पड़ी। माँ के स्नेह को कोई देशों की सीमा नहीं बांधा सकती है। माँ किसी बाधा के बिना अपने बेटों के पास पहुँच गई। माँ तो अपने बेटों के पास पहुँच गई परन्तु इस घटना से खलबली मच गई। इसके बाद हमारी तरफ के सैनिकों ने सीमा पर पुख्ता इंतजाम करने के इरादे से कुछ निर्माण कार्य चालू किया। 2003 में हुये समझौते के अनुसार सीमा पर किसी भी प्रकार का निर्माण वर्जित है। इस पर पाकिस्तान की ओर से नाराजगी प्रगट की गयी। बाद में भारतीय पक्ष की ओर से यह स्वीकार किया गया कि किसी भी प्रकार का निर्माण युध्दबंधी की शर्तों का उल्लंघन है।

? एल.एस.हरदेनिया


चौटाला के घोटाले पर विलंबित फैसला

भ्रष्टाचार के मामले फास्ट ट्रैक कोर्ट में क्यों नहीं?

       शिक्षक भर्ती घोटाले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को एक सीबीआई अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद बाद भ्रष्टाचार से आहत देश का एक बहुत बड़ा समुदाय राहत की सांस ले रहा है। यह पहला मौका है, जब मुख्यमंत्री के पद का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्टाचार मे लिप्त पाए गए किसी राजनेता को किसी अदालत द्वारा दोषी पाया गया है।

 ?   उपेन्द्र प्रसाद


हिंदुत्व के ठेकेदारों की निगाह में नारी अस्मिता

                  दिल्ली में गत माह हुए सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में जहॉ देश और पूरी दुनिया से दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मॉग उठ रही है वहीं देश के भीतर हिन्दुत्व के कथित ठेकेदारों के लगातार आ रहे बयानों ने उनकी स्त्रियों के प्रति सामंती सोच को एक बार फिर उजागर किया है। यह महज संयोग नहीं कि इन ठेकेदारों में निचली पायदान के नेताओं से लेकर शीर्ष तक के मठाधीश शामिल हैं। इनके बयानों पर हैरत बिल्कुल नहीं हैं क्योंकि इनकी सोच ही यही है बल्कि इनकी इस सोच को एक बार पुन:रेखांकित करने की जरुरत है।  

? सुनील अमर


पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ फैलाई गई भ्रांतिया दूर

कर्मचारियों के रूख में आया बदलाव

      ध्यप्रदेश के शासकीय कर्मचारी बड़ी ही निष्ठा, लगन, मेहनत और कर्तव्यपरायणता से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते आ रहे हैं। जब जब भी देश में विभिन्न राज्यों के कर्मचारियों के कामकाज का तुलनात्मक अध्ययन होता है,मध्यप्रदेश के कर्मचारियों के कार्य निष्पादनों की सर्वत्र सराहना की जाती है। जिन सामाजिक और राजनैतिक परिस्थितियों में ये कर्मचारी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उसमें उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ता है।

? राजेन्द्र जोशी


कानून और समाज

क्या सलूक करें किशोरों के साथ?

      किशोरावस्था की उम्र को लेकर आज कल चर्चा जोरों पर है। दिल्ली सामूहिक बलात्कार के 6 आरोपियों में से एक की उम्र 18 साल से कम है। जुवेनाइल एक्ट के तहत वह अधिकतम तीन साल बालसुधारगृह में रहने के बाद छूट जाएगा और उसके साथ केस की सुनवाई जुवेनाइल अदालत में होगी। इस बीच सुझाव आ रहे हैं कि किशोरों में बढ़ते अपराध दर को देखते हुए यह उम्रसीमा घटा कर 16कर दी जाए। निश्चितही ऐसा निर्णय किसी खास केस से उभरी उत्तेजना के तहत नहीं किया जा सकता। कानूनी दृष्टि से किशोरावस्था की क्या उम्र होनी चाहिए इस पर आम सहमति बना कर तथा दुनिया भर में किशोरावस्था किसे माना जाता है इन सब आधारों पर छानबीन करके ही यह तय होना चाहिए।

? अंजलि सिन्हा


सुनिया बाई की मौत

        सुनिया बाई की मौत की खबर नहीं बनी। गत नवंबर में इस पीड़ादायक घटना के दौरान प्रत्यक्ष विदेश निवेश की सीमा बढ़ाने, विकास दर को मजबूत करने और कसाब को फांसी देने के इर्द गिर्द सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष की राजनीति, यहां तक कि अखबारों, समाचार चैनलों की खबरें भी यहीं केंद्रित रहीं।

              किसी बात के खबर होने के जो पैमाने गढ़े गये हैं, उसमें सुनिया बाई का नाम क्या इसीलिए शामिल नहीं हो पाया कि वे नागरिकों की जमीन छीने जाने के खिलाफ थीं। या कि सरकार उन्हें विकास की राह में रोड़ा मानती थी।

? वरुण शैलेश


सोशल मीडिया की बंदिशें

       सोशल मीडिया पर 'आजादी' के कुछ उदाहरण हैं। इजरायल ने फिलिस्तीन के गाजा शहर पर अपने नवंबर 2012 के ताजा हमलों में 100 लोगों से ज्यादा की हत्या कर दी। पूरी दुनिया में अमनपसंद लोगों को इस घटना ने परेशान किया। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी इस हमले का व्यापक विरोध हुआ। इस दौरान लोग इजराजय के हमलों के खिलाफ और हमले में मारे जा बच्चों और लोगों के समर्थन में ढेर सारी पोस्ट, तस्वीरे आपस में साझा कर रहे थे। लेकिन फेसबुक के एक प्रयोगकर्ता रिजवी अमीर अब्बास सैय्यद ने इस बात की शिकायत की कि 16 नवंबर, 2012 को फेसबुक ने इजरायल के हमले और अमेरिका के खिलाफ लिखी गई उनकी पोस्ट हटा दी और उन्हें दोबारा ऐसा पोस्ट नहीं करने की चेतावनी के साथ कुछ घंटों के लिए 'ब्लॉक' कर दिया।    

? विजय प्रताप


खाप पंचायतों के फरमानों पर अदालत का कड़ा रुख

        मारे देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के पहनावे और उनके द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पाबंदी संबंधी खाप पंचायतों के फरमानों को गैरकानूनी करार दिया है। न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के फरमान जीने के मौलिक अधिकार के खिलाफ हैं। अदालत का कहना था कि इस तरह से कोई शख्स किसी के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकता। अदालत ने खाप पंचायतों के समानांतर अदालत चलाने पर भी फटकार लगाई। अदालत ने खाप पंचायतों से कहा कि वे इस बारे में अपना जवाब 25 फरवरी तक दाखिल करें।

? जाहिद खान


योग-शिक्षा से भयभीत अमेरिका

       मेरिका के धर्मगुरु एवं मूल निवासी योग शिक्षा से भयभीत हैं, उन्हें आशंका है कि यदि योग की शिक्षा दी जाती रही तो उनके बच्चे भारतीय धर्म की ओर आकर्षित हो सकते हैं। इसी शंका के चलते केलिर्फोनिया नगर में कई अभिभावकों ने विद्यालयों में योग की शिक्षा से जुड़े पाठों को हटाने की मांग की हैं। अकेले इस शहर की पाठशालाओं में पांच हजार से भी ज्यादा बच्चे योग सिखकर स्वास्थ्य व आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे है।    

? प्रमोद भार्गव


  21 जनवरी-2013

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