संस्करण: 21 अप्रेल-2014

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किताबों के बहाने राजनीतिक हमले

     सोलहवीं लोकसभा के लिए हो रहे आम चुनाव देश में हुए पिछले आम चुनावों से भिन्न हैं जो सबसे बड़े विपक्षी दल के एक व्यक्ति की तानाशाही में बदलने और उसके द्वारा चुनाव जीतने के सारे हथकण्डे अपनाने के लिए जाने जा रहे हैं। इस राजनेता ने पहले तो अपने दल और पितृ संगठन के सक्रिय नेताओं को हाशिये पर किया और बाद में न केवल अपने विपक्षियों को दल बदलने के लिए उत्प्रेरित कर दो दर्जन से अधिक टिकिट तो हाल ही में दल बदल करके आने वाले लोगों को दिये हैं अपितु दूसरे दलों से टिकिट प्राप्त भिंड, और नामांकन दाखिल करने के बाद नोएडा, भी दलबदल करवाया है।        

? वीरेन्द्र जैन


सेवानिवृत्त अफसरों के लिए हो आचार संहिता

        प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी किताब 'द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर' को हाल ही में बाजार में उतारा है। किताब सुर्खियों में है क्योकि वह देश के प्रधानमंत्री की कथित कमजोरी को उजागर करती है। किताब की जबरदस्त बिक्री हो रही है, बुक स्टोर्स पर भी, और इंटरनेट पर भी। चूंकि किताब चुनाव के दौरान आयी है, इसलिए यह प्रश्न उठना लाजमी है कि कहीं पुस्तक के लेखक को विपक्षी दल द्वारा लालच देकर चुनावी मोहरा तो नहीं बनाया गया है, ऐसा हो भी सकता है क्योंकि यहाँ ऐसा होता रहा है। 

? ओ.पी.शर्मा


नारी के कष्ट पर महानता की चादर

     ह किसी एक युग की बात या कोई एक घटना नहीं है, यह सदियों से होता आ रहा है। नारी अपने जीवन में जो कष्ट झेलती है, उसके कष्टों को दूर करने, भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति रोकने के स्थान पर इन्हें इसकी महानता निरूपित करना आरंभ कर दिया जाता है, ताकि वह अपने प्रति हुए अन्याय के खिलाफ आवाज न उठा सके। 

 ? विवेकानंद


जो पत्नी के प्रति वफादार नहीं रहा

क्या वह देश के प्रति रहेगा?

      भी तक आमतौर पर यह समझा जाता था कि नरेन्द्र मोदी ने मुसलमानों के साथ गंभीर अन्याय किया है, परंतु अब यह भी साफ हो गया है कि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ भी उतना ही गंभीर अन्याय किया है। पिछले कई दिनों से यह बात चर्चा में थी कि नरेन्द्र मोदी विवाहित हैं और उनकी पत्नी गुजरात की किसी जगह एकाकी जीवन बिता रही हैं। अनेक बार अनेक लोगों ने यह मुद्दा उठाया कि नरेन्द्र मोदी विवाहित हैं और अपनी पत्नी के साथ उपेक्षा का व्यवहार कर रहे हैं। अनेक लोगों द्वारा इस तरह के आरोप लगाने के बावजूद नरेन्द्र मोदी इस प्रश्न पर मौन साधे रहे।

? एल.एस.हरदेनिया


मोदीमय भाजपा

              भी अपने चाल ,चलन और चरित्र पर इठलाती - इतराती रही भाजपा का नरेन्द मोदी का राजनीतिक विस्तार के साथ ही व्यक्तित्व केन्द्रित हो जाना एक तल्ख सच्चाई बन चुकी है। यद्यपि पहले भी भाजपा अपने नेतृत्व चयन में जिस प्रजातांत्रिक प्रक्रिया का ढ़िढोंरा पिटती रहती थी , वह एक छलावा ही था, क्योंकि तब भी भाजपा का नेतृत्व प्रजातांत्रिक प्रक्रिया से इतर बन्द कमरे में आर एस एस  प्रमुख के द्वारा चयनित होता था और आज भी हो रहा है पर पहले कम से कम  एक शर्म  की चादर खिंची रहती थी पर इस बार यह चादर भी तार -तार हो गया।

 ?   देवेन्द्र कुमार


इन्हीं को सौपें हम देश की बागडोर ?

           कैसे विकट समय में हम जी रहे हैं कि देश के चोटी के नेता भी अपनी जबान से मवालियों को मात देते नजर आ रहे हैं! लोकतंत्र में किसी नेता को परखने का सही समय चुनाव ही होता है, जब वह हाथ जोड़े और सिर झुकाए मतदाताओं के पास जाता है। चुनाव का यह आम दृश्य होता है। बजाय इसके, इधर राष्ट्रीय स्तर के कुछ नेताओं में अपराधियों जैसी ढ़िठाई दिख रही है। अब तक देखने में यही आता था कि मतदाताओं को लुभाने के लिए नेता लोग तमाम तरह के ऐसे वादे और घोषणाऐं करते रहते थे जिसके पूरा होने के बारे में मतदाताओं को पहले ही दिन से शक़ रहता था लेकिन इस चुनाव में तो न सिर्फ मतदाताओं को धोखा देने बल्कि संवैधानिक व्यवस्थाओं से टकराने और उनकी ऑख में धूल झोंकने का भी काम नेताओं द्वारा हो रहा है।

? सुनील अमर


नरेंद्र मोदी की नई सोशल इंजीनियरिंग में

ब्राहमण बाहर कर दिए गए हैं

      लोकसभा चुनाव 2014 अभियान जोरों पर है। इस चुनाव में सूचना क्रान्ति के दमदार असर को साफ देखा जा सकता है। लोकसभा चुनाव 2009 में भी इंटरनेट का इस्तेमाल हुआ था लेकिन हर हाथ में इंटरनेट नहीं था। उन दिनों यह बहस चल रही थी कि कम्प्यूटर ,टेलिविजन सेट और सेल फोन को एक ही इंस्ट्रूमेंट में रहना है ,देखें कौन जीतता है। अब यह बहस तय हो चुकी है , सेल फोन ने बाजी मार ली है।अब कंप्यूटर और टेलिविजन का काम  भी सेल फोन के जरिये हो रहा है। जाहिर है एक बहुत बड़े वर्ग के पास हर तरह की सूचना पंहुंच रही है।

?  शेष नारायण सिंह


इस्लामिक आतंकवाद :

क्या पुलिस एवं उसके मुखबिरों की देन है ?

     बर आयी है कि न्यूयॉर्क शहर के पुलिस विभाग ने अपनी विवादास्पद हो चुकी जासूसी इकाई - डेमोग्रेफिक यूनिट - को अन्तत: बन्द करने का निर्णय लिया है जो मुस्लिम समुदाय को निशाना बना कर काम करती थी। न केवल उसके एजेण्ट मुस्लिम छात्र समूहों का हिस्सा बनते थे, मस्जिदों में अपने नुमाइन्दों को भेजते थे, रेस्तरां, जिम या सैलून में जारी बातचीत को गुपचुप टेप करते थे और इसी के आधार पर सूचनाओं का विशाल भंडार संग्रहित करने में लगे थे। सालों तक इन सूचनाओं को एकत्रित करने के बाद भी वह आतंकवाद को लेकर एक अदद मामले में सूत्र देने में नाकामयाब रहे।

 

? सुभाष गाताड़े


खुफिया एजेंसियों की जवाबदेही से

डर क्यों?

        देश में इन दिनों सोलहवीं लोकसभा के लिए आम चुनाव चल रहे हैं और सभी राजनैतिक दलों ने अपने चुनावी घोषणापत्र भी जारी कर दिए हैं। इन चुनावी घोषणापत्रों में आतंकवाद, नक्सलवाद, आंतरिक सुरक्षा समेत कई समस्याओं से निपटने की रणनीति अपनी-अपनी तरह से दलों द्वारा घोषित की गई है। लेकिन, देश की खुफिया एजेंसियों को संसद के प्रति जवाबदेह बनाने के सवाल पर लगभग सभी दलों के घोषणापत्र में एक अजीब सी चुप्पी दिखती है।     

? हरे राम मिश्र


किन्नर : स्वतंत्र पहचान को मिला

वैधानिक आधार

     सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में किन्नर समुदाय के लोगों को स्त्री पुरूष से अलग तीसरी लैंगिक पहचान की मान्यता देने का फैसला देते हुए केन्द्र तथा राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि इस समुदाय के लोगों को सामाजिक तथा शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग अर्थात ओबीसी में शामिल किया जाए। इससे शिक्षा तथा नौकरियों में उनके लिए आरक्षण का रास्ता खुलेगा। उनके लिए कितना प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए इसके बारे मे कोर्ट ने कुछ नहीं कहा है तथा यह तय करना सरकार का काम है।

? अंजलि सिन्हा


म.प्र. में महिला कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी

        म.प्र. में महिला कर्मचारियों की कार्यस्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। यह आरोप नहीं वरन वास्तविकता है। कारण है व्यवस्था में सामंती व्यवहार का शामिल होते जाना। आज व्यवस्था अर्थात विभागीय उच्चाधिकारियों द्वारा अपने अधीनस्थ महिला कर्मचारियों से बदसलूकी और यौन प्रताड़ना की बातें तो सामने आ रही हैं साथ ही सरकार द्वारा भी लगातार महिला कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की  जा रही हैं।

? डॉ. सुनील शर्मा


पंजाब में बेलन ब्रिगेड अनोखा अभियान

      म आदमी पार्टी का चुनाव चिह्न झाड़ू है, झाड़ू से जो नहीं किया जा सकता है, वह काम बेलन से बहुत ही अच्छी तरह से किया जा सकता है। पंजाब में इस समय 'बेलन बिग्रेड' की काफी चर्चा है। कई जागरूक महिलाएं मिलकर 'बेलन बिग्रेड' चला रही हैं। इस काम में उन्हें सफलता भी मिली है। इससे महिलाओं का प्रभुत्व समाज में बढ़ा है। ये महिलाएं जब भी किसी शराबी को देखती हैं, तो उस पर बेलन लेकर टूट पड़ती हैं।      

? डॉ. महेश परिमल


विज्ञापन में स्त्री

        ज तमाम कम्पनियां घर में प्रयुक्त होने वाली सामान्य वस्तुओं से लेकर विशेष किस्म के प्रोडक्ट तक स्त्री विज्ञापनों के जरिए प्रमोट करती हुई नजर आती हैं। खाने के सैकड़ों डिब्बाबंद व्यवसायिक उत्पाद, मसाले, साबुन, शैम्पू, हैंडवाश, बर्तन, फिनाइल, डीओ, तेल, विभिन्न तरह के लोशन, क्रीम, टॉयलेट क्लीनर से लेकर पुरुषों के दैनंन्दिन प्रयोग की चीजों के विज्ञापनों में सुंदर एवं आकर्षक स्त्री दिखाई देती हैं।

? शैलेन्द्र चौहान


  21 अप्रेल-2014

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