संस्करण: 21 मार्च -2011

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हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए

 

  ध्यप्रदेश में खंडवा के गवर्नमेंट कालेज के एक प्रोफेसर को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के सदस्यों ने दौड़ा दौड़ा कर पीटा। उसका चेहरा काला किया और उसे लात घूंसों और जूतों से मारा । >शेष नारायण सिंह


मध्यप्रदेश आर्थिक बदहाली की ओर


  नास्तिकवाद के प्रणेता महर्षि चावाक के एक श्लोक की पंक्ति है-ऋणं कृत्वा घृतं पीवेत यानी कर्ज लेकर भी घी पी जाओ। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने चार्वाक के इस श्लोक को अपना आदर्श मान लिया है। >महेश बाग़ी


भाजपा और छद्म का नाता

 

  हा जाता है कि अपनी अभिव्यक्ति के लिए लोग उन्हीं शब्दों का प्रयोग करते हैं जिनसे वे निश-दिन दो चार होते रहते हैं। भाजपा ने अपने ऊपर लग रहे साम्प्रदायिकता के आरोप को नकारने के लिए अपने विरोधी दलों >वीरेंद्र जैन


भाजपा की नज़र में भूखे मुसलमान को रोटी खिलाना भी तुष्टीकरण है

 

  भोपाल का नाम भोजपाल करने की घोषणा के बाद, समाज को बांटने वाली एक और घोषणा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कर दी। >एल.एस.हरदेनिया


आरक्षण की सियासत

कहां तक उचित है जाटों के लिए आरक्षण की मांग

 

   पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह या संविधान सभा समिति के अध्यक्ष रणबीर हुड्डा (वर्तमान मुख्यमंत्री के पिता) या सर छोटूराम -इनमें क्या समानता ढूंढी जा सकती है ? >सुभाष गाताड़े


शेष राम सिंह कैसे काबू आएं ?

  पुलिस के मुताबिक पिछले कई वर्षों से रामसिंह राधिका का पीछा कर रहा था। छेड़छाड़ करने के कारण उसकी पिटाई भी हो चुकी थी। पता चला है कि घटना वाले दिन भी उसने राधिका को रोकने का प्रयास किया था >अंजलि सिन्हा


आडवाणी शिकश्त अक्ल ने

खाई बड़े गुरूर के बाद

 

  भाजपा के कमांडर इन चीफ लालकृष्ण आडवाणी ने हाल ही में कहा है कि 1992 में हुये बाबरी विधवंस ने पार्टी की विश्घ्वसनीयता को काफी नुकसान पहुंचाया है। >मोकर्रम खान


भूमंडलीकरण के ख़तरे

 

  बीती सदी के उत्तरार्ध्द में हम अगर तेजी के साथ भूमंडलीकरण की तरफ बढ़े थे तो इस सदी के शुरुआती दशक से हम वैश्विक गाँव का आनन्द उठाने लगे हैं। >सुनील अमर


रेल की पटरी पर आन्दोलन कब तक ?

 

  क बार फिर आरक्षण का मुद्दा सुर्ख़ियों में है। अब आरक्षण के विरुध्द होने वाले आन्दोलन ठण्डे पड़ चुके हैं। लेकिन आरक्षण का मसला आज भी विवादास्पद है। >डॉ. गीता गुप्त


बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार हो

 

  र्ष केन्द्र सरकार का बहुप्रतीक्षित खाद्य सुरक्षा अधिनियम  लगभग तैयार है तथा खाद्य मंत्रालय का  कहना है कि अनाज की जगह नगद सब्सिडी का वितरण किया जाए। >डॉ. सुनील शर्मा


पुराणों में भी उठी हैं सुनामी की लहरें

 

  जापान के जलजले से पूरा विश्व अचंभित है। एक तरफ सुनामी, दूसरी तरफ भूकम्प और तीसरी तरफ ज्वालामुखी का फटना। एक साथ इतनी विपदाएँ? >डॉ. महेश परिमल


21 मार्च -2011

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