संस्करण: 21 फरवरी -2011

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सर्वोच्च न्यायालय का अहम फैसला :

ग्रामसभा, ग्रामपंचायत जैसी साझी जमीनों पर कब्जों को खाली करना होग
 

  म्पत्तिशाली लोगों, वर्चस्वशाली उद्यमियों को माटी के मोल या अवैध ढंग से आवंटन का सवाल दिल्ली से लेकर गांव की गलियों तक का जिंदा सवाल बन गया है। >सुभाष गाताड़े


धर्मांतरण रोकने के बहाने कुटिल राजनीति


  सुप्रसिध्द कथाकार प्रेमचन्द ने आज से सत्तर साल पहले लिखा था कि फासिस्म धर्म और देशभक्ति के मुखौटे लगा कर ही समाज के सामने प्रकट होता है। >वीरेन्द्र जैन


शिवराज का खंड-खंड पाखंड

 

  चपन में एक कहानी पढ़ी थी...एक लड़का बार-बार चिल्लाता था शेर आया...शेर आया, लोग परेशान होकर दौड़े चले आते थे। एक बार सचमुच शेर आया और लड़का चिल्लता रहा पर कोई नहीं आया। >विवेकानंद


अनशन के नाटक से हुई चौहान और भाजपा की जगहंसाई

 

  ध्यप्रदेश तो क्या, पूरे देश में शायद ही कोई मुख्यमंत्री इतनी मखौल और दया का पात्र बना होगा, जितना कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बनना पड़ा। >एल.एस.हरदेनिया


अब भगवा को भगवा से खतरा

 

   कुछ माह पूर्व गृह मंत्री चिदंबरम ने एक बयान दिया था कि भगवा आतंकवाद से सावधान रहने की आवश्यकता है। >मोकर्रम खान


उपवास का उपहास

  रह-तरह की नौटंकिया कर मीडिया की सुर्खियां बटोरने वाले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस बार अपने ही बुते जाल में फंस गए। >महेश बाग़ी


राजनीति में महत्व है-

चरणपादुका का और चरणसेवा का

 

  राज चलता है किसी सुविचारित नीति से और कोई चलती है संचालनकर्ता की वफादारी से, उसके समर्पित आचरण से और उसकी प्रतिबध्दता से। >राजेंद्र जोशी


ग्रामीण स्वास्थ्य के लिये तैयार होंगे ग्रामीण डाक्टर्स

 

  देश के ग्रामीण क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं में आमूल-चूल परिवर्तन लाने के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया ने तीन वर्षीय पाठय-क्रम की जिस योजना पर काम शुरु किया है >सुनील अमर


विश्वग्राम में बढ़ता नस्लभेद

 

  पूरी दुनिया में मानवाधिकारों की वकालात करने वाले व उसकी शर्तें विकासशील देशों पर थोपने की तानाशाही बरतने वाले अमेरिका की सरजमीं पर नस्लवाद कितना वीभत्स है >प्रमोद भार्गव


कृषि क्षेत्र में बेहतरी की स्थाई आस ?

 

  मानसून की मेहरबानी से इस सत्र में कृषि क्षेत्र में बेहतरी की आस नजर आ रही है। पिछले सप्ताह केन्द्रीय कृषि मंत्री द्वारा जारी ऑकडों के अनुसार इस चालू सत्र में खाद्यान्न उत्पादन >डॉ. सुनील शर्मा


पाकिस्तान का सूरज अस्ताचल की ओर...

  जिस दरख्त से पंछी अपना नाता तोड़ दें, जिस सागर से प्राणी अविश्वास करने लगे, जिस भूमि से लोग पलायन करने लगे, सोचो किन हालात में वे ऐसा करते होंगे? >डॉ. महेश परिमल


शिक्षा : घटती गुणवत्ता, बढता खर्च

 

  शिक्षा के प्रचार, प्रसार को दूरस्थ इलाकों में गांव-गांव तक पहुंचाने और हर बच्चे को शिक्षा से जोडने के लिए केन्द्र एवं राज्य की सरकार प्रतिवर्ष अपने बजट में विशेष प्रावधान करती है। >अमिताभ पाण्डेय


21 फरवरी -2011

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