संस्करण:  20 सितम्बर-2010   

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अयोध्या : अदालती फैसला क्या इस मसले पर नयी इबारत का सबब बनेगा ?

  मोहम्मद सलीम, जो अयोध्या के मन्दिरों में हररोज इस्तेमाल होने वाले फूलों के व्यापारी हैं और मधुसूदन सिंह, (दोनों बदले हुए नाम) जो अयोध्या की- 'अयुध्द' की- ऐतिहासिक साझी विरासत का चलता-फिरता एनसाइक्लोपीडिया है, दोनों इन दिनों बेहद परेशान हैं।>सुभाष गाताड़े

 


.........दंगा होगा कि नहीं?


  हा जाता है कि सट्टा खेलने वाले इस बात पर भी लाखों रुपयों का सट्टा लगा लेते हैं कि तय तिथि को दंगा होगा कि नहीं, और अपने दाँव को जीतने के लिए वे दंगा कराने वाली दोनों तरफ की ताकतों को यथा सम्भव मदद करते हैं ताकि वे लागत से ज्यादा कमा सकें।>वीरेंद्र जैन
 


भ्रष्टाचार और राहुल गाँधी का दृष्टिकोण
 

 से समय में, जब देश-विदेश की तमाम सर्वेक्षण एजेन्सियाँ यह निष्कर्ष निकाल रही हों कि भारत में प्रत्येक तीसरा व्यक्ति भ्रष्टाचारी है, काँग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गाँधी का युवाओं से यह आह्वान कि वे देश से भ्रष्टाचार दूर करने  के लिए आगे आयें,>सुनील अमर

 


कुर्सी शरणम् गच्छामि उजागर हुआ झारखंड में राजनैतिक दलों का असली चेहरा

  संसार में सबका अपना-अपना सच होता है। एक के सच के मायने किसी दूसरे के सच से मेल नहीं खाते। राजनीति भी एक ऐसा क्षेत्र है जहां प्रत्येक दलों के अपने-अपने सच होते हैं।>राजेंद्र जोशी
 


यात्रियों की जलसमाधि चरमराती व्यवस्था का प्रतीक

 प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में हुईं त्रासदीपूर्ण घटनाओं ने प्रशासन में व्याप्त कमियों और भ्रष्ट आचरण को उजागर किया है। >एल.एस.हरदेनिया
 


बाज़ारवाद के शिकंजे में लोक संस्कृति


  मय के साथ चलना समाज का नैतिक दायित्व है, किंतु जब समय संस्कृति पर ही प्रहार करने लगे तो उससे किनारा कर लेने में ही समाज की भलाई है।> महेश बाग़ी


शादी आजकल

   दिल्ली सरकार के मंत्रिमण्डल ने हिन्दू विवाह अधिनियम 1956 के धारा 7 की उपधारा को दिल्ली राज्य के लिए बदल दिया है जिसके चलते अब दिल्ली के बाहर के युवा भी यहां आकर अपनी शादी का पंजीकरण करा सकेंगे>अंजलि सिन्हा


मुल्क की मुख्यधारा में कैसे आएं मुसलमान

  मारे मुल्क में आजादी के बाद से ही मंसूबाबंद तरीके से मुल्क में एक सामान्यबोध विकसित कर दिया गया है कि ''मुसलमान मुख्यधारा में नहीं आना चाहते और मुख्यधारा में न आ पाने की वजह से ही वे पिछड़े हैं।> जाहिद खान


जातीय जनगणना का चक्रव्यूह

  यूपीए सरकार ने फैसला ले लिया है कि 2011 में जाति आधारित जनगणना कराई जाएगी। गणना की इस प्रणाली से कई अहं और नए पहलू सामने आएंगे।>प्रमोद भार्गव


भारतवर्ष का शत्रु कौन ?

  'राज-व्यवस्था' अत्यन्त संवेदनशील विषय है। राज्य के अन्तर्गत निवासरत सभी व्यक्तियों को मनोवैज्ञानिक सुरक्षा प्रदान करना, प्रत्येक राज्य का प्राथमिक दायित्व होता है। >डॉ. पुनीत कुमार


खाद्यान्न की रक्षा के लिए किसान सक्षम

   स समय भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में सड़ते अनाज की चर्चा है। उच्चतम न्यायालय ने भी खाद्यान्न को सड़ने देने की बजाए गरीबों में बांटने का निर्देश दिया है।>डॉ. सुनील शर्मा


कमाल की है हिन्दुस्तानी तहजीब

  क बार फिर देश के अनेक इलाके विदेश से आयातित सुअर बुखार यानी ''स्वाईन फ्लू'' के प्रकोप से दहशतजदा हैं पिछले बरस भी इसी मौसम में स्वाईन फ्लू'' ने देश के कई हिस्से में अनेक रोगियों की जान ले ली थी> चैतन्य भट्ट


कचरे में जिंदगी की तलाश

  रुपए से दवाएं खरीद सकते हैं, सेहत नहीं। यह बात लगभग सभी जानते हैं। इसके बावजूद देश-प्रदेश में लाखों लोग रोजी-रोटी के जुगाड़ में ऐसे काम कर रहे हैं, जिनका हासिल शरीर को बीमारियों का घर बनाना है।>अंश बाबा


20 सितम्बर-2010   

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