संस्करण: 20 जून-2011

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योगी का प्रपंच

  रमार्थ के ध्येय को जब स्वार्थ के आवरण में ढंककर आगे बढ़ाया जाता है तो उसका परिणाम बाबा रामदेव के अनशन की तरह होता है। कुछ लोगों को आपत्ति हो सकती है,लेकिन यह सत्य है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ और भारतीयों द्वारा विदेशों में जमा कराए गए काले धन को वापस लाने जैसा
 

 ? विवेकानन्द


होब्सन का विकल्प

  दो दशक से भी अधिक से, लगभग द्विध्रुवीय विश्व के खत्म होने के बाद से, विभिन्न देशों में कई लोगों ने होब्सन के विकल्प का सामना किया। भारत में, व्याप्त भ्रष्टाचार, जो मुक्त बाजार सुधारों के रूप में आया, के कारण लोगों ने कमर तोड़ गरीबी को भोगा। उन्होंने जिस विकल्प का सामना किया,वह धार्मिक फासीवाद बुरी तरह जिंदगी खत्म करने वाला था

? जावेद नक्वी


निगमानंद की मौत से

उठे सवाल

  भारतीय जनता पार्टी का कुरुप चेहरा एक बार फिर सामने आया है। हरिद्वार में पावन गंगा को प्रदूषणमुक्त कराने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे स्वामी निगमानंद की मौत ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। निगमानंद की मांग थी कि गंगा किनारे के पहाड़ों पर चल रहे स्टोन क्रेशर तत्काल बंद किए जांए,जिससे पर्यावरण संरक्षण हो और पवित्र गंगा नदी हरी-भरी रहे

? महेश बाग़ी


संदर्भ : साम्प्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक

राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही

तय करने वाला विधेयक

 

  मारे मुल्क में कई सालों से एक ऐंसे कानून की जरुरत महसूस की जा रही है,जो न सिर्फ साम्प्रदायिक,क्षेत्रीय और जातीय नफरत की बिना पर होने वाली हिंसा को रोकने में कारगर साबित हो,बल्कि दंगो,उपद्रवों से पैदा होने वाली समस्याओं को हल करने में सहायक हो,तथा गुनहगारों को सजा और पीड़ितों को इंसाफ दिला सके।

? जाहिद खान  


अब आपका स्वास्थ

कैसा है उमाजी?

 

    अंतत: उमा भारती को भाजपा में सम्मिलित कर लिया गया है। वे 2008 में मध्यप्रदेश का विधानसभा चुनाव हारने के बाद हिम्मत भी हार गयी थीं। भारतीय जनशक्ति, जो उनकी पार्टी का नाम था, पर कुछ दिनों से ऐसा लगने लगा था जैसे वह किसी उस आयुर्वेदिक दवा का ब्रांड नेम हो, जो भरपूर प्रचार के बाद भी बाजार में नहीं चल पायी।
? वीरेन्द्र जैन  


क्या यह नहीं है तुष्टिकरण?

 

  भाजपा समेत पूरा संघ परिवार, कांग्रेस पर मुसलमानों का तुष्टिकरण करने का आरोप लगाता रहा है परंतु ऐसा लगता है कि उसे स्वयं मुसलमानों का तुष्टिकरण करने से कोई परहेज नहीं है।  

? एल.एस.हरदेनिया  


एक अशोभनीय एवं शर्मनाक कृत्य

नृत्य-प्रदर्शन के लिए बापू की समाधि स्थल का इस्तेमाल प्रश्नों के घेरे में

  कोई भी व्यक्ति जब अपनी उपलब्धियों पर आंतरिक खुशी का एहसास करता है या किसी भी मांगलिक आयोजन में शामिल होता है तो सहज ही वह हार्दिक खुशियों के कारण झूमने लगता है। उसके हाथ-पांव और संपूर्ण अंग-प्रत्यंग इस तरह की हरकत करने लग जाते हैं जिससे यह प्रमाणित हो जाता है कि उस व्यक्ति ने अपने मन की मुराद पूरी करने में सफलता प्राप्त कर ली है 

? राजेन्द्र जोशी  


और भी हैं मंजूराव !

 

  जोधपुर के मनोरोग अस्पताल में डा मंजू राव हर रोज इन्तज़ार करती हैं कि कोई उन्हें अस्पताल से लेने आएगा। रात होते होते आशा निराशा में बदल जाती है। वह अब इलाज के बाद एकदम ठीक हैं और घर जाना चाहती हैं। पब्लिक एडमिनिस्टे्रशन में उन्होंने पी एच डी की है। माता पिता दोनों का देहान्त हो चुका है तथा तीन भाई हैं जो क्रमश: 58 साल, 60 साल और 70 साल के हैं।

? अंजलि सिन्हा  


ई-कोलाई से कैसे हो मुकाबला

 

               पिछले दिनों विश्व ने एक छोटे से बैक्टीरिया एंटेरोहेमोरेजिक एशेरिकिया कोलाई के आंतक के साये में लगभग पन्द्रह दिन मौत के खौफ से जूझते हुए बिताए,खासतौर पर यूरोपीय देशों में यह दहशत जमकर बरसी, क्योंकि इस जीवाणु ने सिर्फ 8000 से अधिक लोगों को अस्पताल तक ही नहीं पहुँचाया बल्कि अपनी धमाकेदार आमद से पूरे यूरोप और दुनिया के वैज्ञानिकों को चेता दिया कि .....

? शब्बीर कादरी


निजी स्कूल: शिक्षा या शोषण के केन्द्र?

  मेडम गोमती म.प्र. के  ग्रामीण इलाके में राज्य शिक्षा बोर्ड से संबध्द एक निजी स्कूल की प्राचार्य हैं। कक्षा दसवीं तक संचालित इस स्कूल की प्राचार्य मेडम गोमती को 2500 रूपये मासिक वेतन मिलता है। हालॉकि स्कूल संचालक ने स्कूल समय के बाद उनको अपना ब्यूटी पार्लर चलाने की अनूमति  दे रखी है। म.प्र.के ग्रामीण इलाके का ही एक अन्य स्कूल जो कि सीबीएसई से मान्यता प्राप्त है........

? डॉ. सुनील शर्मा


पारदर्शिता के लिए क्रांति का दौर

 

        देशव्यापी असंतोष ने यह तय कर दिया है कि देश एक और करबट लेने को आकुल है। लिहाजा न केवल राजनीति, प्रशासन, न्यायपालिका, रक्षा,स्वयंसेवी संगठन बल्कि कारोबारी और पत्रकार घरानों से भी यह अपेक्षा की जा रही है, कि वे उस चौहद्दी को पारदर्शी बनाएं जो भ्रष्टाचार और आय के स्त्रोत्रों को गोपनीय बनाए रखने का काम कर रही है

? प्रमोद भार्गव



ऑनर किलिंग पर राज्यों की

रहस्यमय खामोशी

 

        पिछले कुछ वर्षों में देश में ऑनर किलिंग के नाम पर कई प्रेमियों की हत्या हुई है। इस समय ये कुछ ज्यादा ही हो रही है। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि जब हत्याएँ हुई, वहाँ पर बहुत से प्रभावशाली लोगों के साथ स्थानीय राजनीतिज्ञ भी उपस्थित थे। अपने वोट बैंक को सलामत रखने के लिए ये नेता उपस्थित रहते हुए भी बाद में मौन साध लेते हैं

? डॉ. महेश परिमल


20 जून-2011

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