संस्करण: 20 फरवरी- 2012

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उमा भारती और

उत्तर प्रदेश के चुनाव

           मा भारती की भाजपा में वापिसी और उनका मध्य प्रदेश से निष्कासन ही नहीं अपितु उसके बाद का घटनाक्रम भी नाटकीय रहा है। भाजपा जैसी रामलीला पार्टी में यह बहुत अस्वाभाविक भी नहीं है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में उन्हें न केवल चुनाव का स्टार प्रचारक ही बनाया गया अपितु एक सीट से उम्मीदवार भी बनाया गया है। जब प्रदेश भाजपा का कोई दूसरा कोई बड़ा नेता यह दावा भी नहीं कर रहा है कि अगर भाजपा की सरकार बनी तो उसे ही मुख्यमंत्री बनाया जायेगा किंतु तब उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ने वाले प्रमुख नेताओं में मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और एनडीए शासन काल में केन्द्रीय सरकार में मंत्री रही उमा भारती का दिवास्वप्न अस्वाभाविक नहीं है बशर्ते कि वे ..........

  ? वीरेन्द्र जैन


आखिर खुर्शीद ने

गलत क्या कह दिया

        हिंदुत्वादी प्रचारतंत्र एक ऐसा सामाजिक-राजनीतिक माहौल निर्मित करने में सफल हो गया है जिसमें मुसलमानों के विकास से बारे में कुछ भी कहना तुष्टिकरण और साम्प्रदायिक माना जाने लगा है। इस माहौल की गिरफ्त में पिछले दिनों चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को भी आते देखा गया। जिसने कांग्रेस नेता और केंद्रिय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के पिछडे मुसलमानों के आरक्षण सम्बंधी बयान पर उनके खिलाफ भाजपा के आरोपों को उसके ही चश्में से देखते हुये उनके खिलाफ राष्ट्रपति को पत्र लिख दिया। 

? शाहनवाज आलम


विधायिका के पावन मंदिर में 'पोर्न फिल्म'

कर्नाटक में आहत हुई संसदीय गरिमा

      नेक मामलों में तीन के आंकड़े को शुभ नहीं माना जाता है। कहा जाता है कि तीन व्यक्ति एक साथ घर से बाहर नहीं निकलते यदि ऐसा हुआ होता है तो जिस काम के लिए वे निकले हैं उसमें बाधा आ जाती है। इसी मान्यता के आधार पर ही यह कहावत प्रचलित हुई है-'तीन तिगाड़ू-काम बिगाड़ू। इसी तरह के तीन के आंकड़े की एक मिसाल कर्नाटक विधानसभा सत्र के दौरान सामने आई जब तीन मंत्रियों ने एक साथ बैठकर कुछ ऐसा करिश्मा कर दिखाया कि उनकी राजनैतिक पार्टी तो शर्मसार हुई ही साथ ही उनको स्वयं को भी मंत्री पद से हाथ धोना पड़ गया।

? राजेन्द्र जोशी


यह कैसा अंधेर,

हर तरफ मुसलमानों के जलवे

          त्तर प्रदेश विधान सभा के चुनाव क्या आ गये, मुसलमानों के तो माने जलवे हो गये.  हर जगह मुसलमानों की धूम नजर आ रही है।  जिन्हें मुसलमान फूटी आंख नहीं भाते थे, वे भी इस समय मुसलमानों से गलबहियां कर रहे हैं। हर बड़े नेता के साथ चाहे वह किसी भी पार्टी का हो, मुसलमानों की भीड़ दिखाने के प्रयास किये जा रहे हैं।  टी0वी0 कैमरे नेताओं की भीड़ में शामिल लोगों को दिखाते समय और किसी की कवरेज करें न करें दाढ़ी टोपी वाले मुसलमानों की कवरेज जरूर कर रहे हैं।  कल तक आतंकवाद के पर्यायवाची शब्द के रूप में प्रयुक्त होने वाले मुस्लिमों को अब कैरेक्टर सर्टिफिकेट दिये जा रहे हैं। 

? मोकर्रम खान


सरकार के लिए शिक्षा नहीं,

उद्योग प्राथमिकता

         शिक्षा तक सबकी पहुंच बनाने के लिए केन्द्र और राज्य की सरकार गांव-गांव में, मजरे, टोले, फलिये तक हर जगह स्कूल खोल देना चाहती है। देश के दूर सुदूर इलाकों में पर्याप्त संख्या में स्कूल खोल दिये जाये ऐसी भावना सरकार की है। इस दिशा में काम भी हो रहा है। इसके बाद भी अनेक, गांव शहर ऐसे है जहां पर्याप्त संख्या में स्कूल आजादी के 63 वर्ष बाद भी नहीं खुल पाये है। ज्यादा से ज्यादा स्कूल खोले जाये इसके लिए सरकार प्रतिवर्ष बजट की राशि का एक बड़ा भाग स्वीकृत कर देती है।

 ? अमिताभ पाण्डेय


सिर्फ़ कानून बनाने से

नहीं मिटेगा भ्रष्टाचार

           ध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आए दिन विभिन्न मंचों से भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ने का  ऐलान करते रहते हैं। पिछले दिनों उन्होंने मप्र भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम पारित कराने के लिए केन्द्र सरकार के ख़िलाफ उपवास करने की धमकी भी दी थी। इसके बाद केन्द्र ने इस अधिनियम को मंजूरी दी। अब शिवराज इसे अपनी उपलब्धि के रूप में बखान कर रहे हैं,जबकि हकीकत कुछ और ही है। दरअसल पिछले दिनों मध्यप्रदेश के विभिन्न अंचलों में आयकर विभाग और लोकायुक्त के छापों में सरकारी मुलाजिमों से करोड़ों रु.की काली कमाई बरामद हुई थी।  

? महेश बाग़ी


स्वामी विवेकानंद की डेढ़ सौ वीं जयंती पर विशेष

भारतीय समाज विवेकानन्द की नजर में

       स्वामी विवेकानंदजी ने भारत के प्रत्येक निवासी को भारत भारतीय कहा है। उन्होंने एक स्थान पर कहा है कि ''गर्व से बोलो कि मैं भारतवासी हूॅ और प्रत्येक भारतवासी मेरा भाई है। बोलो कि अज्ञानी भारतवासी,दरिद्र भारतवासी,ब्राम्हण भारतवासी,चांडाल भारतवासी सब मेरे भाई हैं। तुम केवल कमर में ही कपड़ा लपेटे गर्व से पुकारकर कहो कि भारतवासी मेरा भाई, भारतवासी मेरा प्राण है''। पिछले कुछ वर्षों से स्वामी विवेकानंद को संकुचित हिन्दुत्व विचारधारा में आस्था रखने वाले लोग अपने प्रेरणा स्त्रोत के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। वे यह भूल जाते हैं कि स्वामीजी ने हिन्दू धर्म तथा उसके दर्शनशास्त्र को कभी संकुचित दुष्टिकोण से नहीं देखा।

? एल.एस. हरदेनिया


ग्रामीण विकास के लिए जरुरी हैं

'पुरा' जैसी योजनाऐं

        

      देश के कुल छह लाख से अधिक गॉवों के विकास और खुशहाली के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा बीस से अधिक योजनाऐं चलाई जा रही हैं। इसका नतीजा यह है कि ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े बाबू से लेकर उच्चाधिकारियों तक एक भी ऐसा व्यक्ति मिलना मुश्किल है जिसे इन सभी योजनाओं का नाम भी याद हो! अक्सर तो एक ही उद्देश्य को लेकर एकाधिक योजनाऐं लागू कर दी गयी हैं जिनके क्रियान्वयन में टकराव जैसी स्थिति बनती रहती है। इन दो दर्जन के करीब योजनाओं में से अधिकांश तो मृतप्राय पड़ी हुई हैं।

 

? सुनील अमर


महिलाओं की उच्च शिक्षा के लिए

अलग से महिला विश्वविद्यालय

     हिलाओं में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अब आनेवाले पांच सालों के भीतर 20 महिला विश्वविद्यालय अलग से खोले जायेंगे। यहांसिर्फ लड़कियों को उच्च शिक्षा मुहैया करायी जायेगी साथही उनके लिए अलग से, आर्थिक तंगी से निपटने के लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था होगी। यह एक सुखद और खुशी की बात है कि सरकारी स्तर पर तथा सरकारी संस्थानों द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की कम उपस्थिति से पार पाने का किसी रूप में प्रयास किया जा रहा है।

? अंजलि सिन्हा


संदर्भ :- चैन्नई में छात्र द्वारा शिक्षिका की हत्या-

किताबों से फूटती हिंसा

    ह सच्चाई कल्पना से परे लगती है कि विद्या के मंदिर में पढ़ाई जा रही किताबें हिंसा की रक्त रंजित इबारत भी लिखेंगी ? लेकिन हैरत में डालने वाली बात है कि यह हृदयविदारक घटना एक हकीकत बन चुकी है। देश के महानगर और शैक्षिक गुणवत्ता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाले महानगर चैन्नई में एक 15 वर्षीय नाबालिग छात्र ने अपनी ही शिक्षिका की चाकू घोंप-घोंप कर क्र्रूरतापूर्वक हत्या कर दी। छात्र मोहम्मद इरफान, शिक्षिका उमा महेश्वरी से इसलिए नाराज था, क्योंकि उसने अभिभावकों से छात्र के विद्यालय नहीं आने की शिकायत की थी।

 

? प्रमोद भार्गव


सोनी सोरी प्रकरण :

लोकतंत्र का बदनुमा चेहरा

     सोनी सोरी की कहानी अब कोई नई कहानी नहीं रही न यह उस दिन शुरू हुई थी जब उन्हें पुलिस के दबाव में दंतेवाड़ा छोड़कर भागना पड़ा था, न उनके किसी अंजाम पर खत्म हो जायेगी लोकतंत्र के आवरण तले चलने वाली दमन और उत्पीडन की यह कहानी अलग-अलग रूप में लगातार दुहराई गयी है और आज भी यह बदस्तूर जारी है महानगरों के आरामदेह कमरों में बैठकर हम विकास को आंकड़ो की भाषा से पकडने की कोशिशें करते हुए नए-नए माल्स और उपभोक्ता वस्तुओं की चमक से चुंधियाई ऑंखों से सत्ताओं के बदलने और आभासी आन्दोलनों के घटाटोप के इतने आदी होते जा रहे हैं कि देश के एक बड़े हिस्से के लगातार यातना-गृह में तब्दील होते जाने को देख ही नहीं पाते

? अशोक कुमार पाण्डे


विज्ञान दिवस : 28 फरवरी पर विशेष

विज्ञान के विकास के लिए -विज्ञान शिक्षण की सुचारू व्यवस्था बनें

    देश भर के स्कूली पाठयक्रम में बच्चों को विज्ञान के चमत्कार नामक निबंधा रटाया जाता है। जिसमें बच्चे पढ़ते है कि विज्ञान की बदौलत आज आम आदमी को वो सुविधाएँ हासिल हो गई हैं जो कि पुराने समय के राजाओं के पास भी नहीं थी। जिससे आज आम आदमी की जिंदगी पहले से काफी सुखद और सुरक्षित हो गई है। इस तरह विज्ञान के चमत्कारों को पढ़कर और लिखकर बच्चे निबंध का पर्चा पास कर लेते है। अधिकांश छात्रों के मस्तिष्क से निबंध की रटाई और परीक्षा के साथ विज्ञान की बातें समाप्त हो जाती हैं। लेकिन कुछेक छात्रों के मस्तिष्क में यह प्रश्न चिन्ह भी बनता है कि विज्ञान ने यह कैसे किया?

 

? डॉ. सुनील शर्मा


  20 फरवरी- 2012

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