संस्करण: 20 अगस्त-2012

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT


असम के दंगे और

बांग्लादेशियों का हौवा

           हले अस्तित्व में रहे  पूर्वी बंगाल के मुसलमान 20 वीं शताब्दी के प्रारंभ में असम में आकर बस गये थे किन्तु स्वार्थी तत्व यह साबित नही कर सकते है कि आज असम में रह रहे उनके वंशज वहाँ अवैध प्रवासी है।

? बनजीत हुसैन

(बनजीत हुसैन प्रजातंत्र और सामाजिक आंदोलन संस्था, संघोंघोई विश्वविद्यालय सिओल के पूर्व रिसर्च छात्र रहे है।)


भारतीय प्रशासनिक सेवा-

कितनी अच्छी, कितनी प्रासंगिक?

        भारत में व्यापार करने आई ईस्ट इंडिया कंपनी को शीघ्र ही यह पता चल गया था कि उसकी व्यापारिक भूमिका अब शासन करने की भूमिका में बदल गई है। राजस्व के बंदोबस्त के साथ ही शासन स्वत:प्रारंभ हो गया। यह राजस्व जिले को एकत्रित करना था,और इसके लिये एक सर्वे करने की आवश्यकता थी। राजस्व एकत्रित करने के लिये ऐसे अधिकारियों की जरूरत थी जो भूमि पर और उसे जोतने वाले किसानों पर नियंत्रण कर सके। भारत में यह जिला प्रशासन की शुरूआत थी।   

? डॉ. एम.एन.बुच


नौटंकी या नूरा कुश्ती

   देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी की इतनी हास्यास्पद स्थिति अब से पहले शायद कभी न रही होगी कि उसका राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्ता की लालच में एक ऐसे व्यक्ति की शरण में चला जाए जिसके मंच से जन आंदोलन के नाम पर देश के महानायकों का अपमान हुआ हो। एक ऐसे व्यक्ति को उन अमर शहीदों के बराबर का दर्जा दिया जाए जो धोखाधड़ी के आरोपों में जेल में बंद हो। और ऐसा एक बार नहीं, दो-दो बार हो। भाजपा नेताओं की इतनी संकीर्ण सोच तो शायद तब भी नहीं हुई सुनी जाती जब उसे महज दो सीटें मिली थीं।

? विवेकानंद


संदर्भ : रामदेव और अन्ना की बाजीगरी

बुनियादी सुधारों से ही दूर होगा भ्रष्टाचार

          बाबा रामदेव को बधाई हो एन. डी. ए. का हिस्सा बनने पर। इसी तरह अन्ना हजारे को भी बधाई राजनीति के दलदल में प्रवेश करने पर। इस तरह दोनों भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन मंजिल तक पहुंचने के पहले ही लड़खड़ा गए। परंतु इन दोनों आंदोलनों की असफलता महोत्सव मनाने का अवसर  नहीं। वैसे इनकी असफलता से वे सब प्रसन्न हैं जिन्हें  भ्रष्टाचार से मुहब्बत है। जो भ्रष्टाचार में गले तक डूबे हैं। वे भी प्रसन्न हैं जो भ्रष्टआचरण के सहारे राजनीति, समाज एवं प्रशासन के उच्च शिखरों पर पहुंचे हैं।

? एल.एस.हरदेनिया


वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति  ?

         मुंबई के आजाद मैदान में रज़ा अकादमी के आवाहन पर बुलायी गयी सभा एवं उसके बाद हुई हिंसा का सवाल इन दिनों सूर्खियों में है। मालूम हो कि असम एवं म्यांमार में अल्पसंख्यकों के साथ कथित तौर पर हो रही ज्यादती को लेकर शेष समाज के रूख के प्रति अपनी नाराजगी का इजहार करने के लिए इस सभा का आयोजन हुआ था,जहां किसी मौलाना के भाषण के बाद हिंसा भड़की। बताया गया कि मीडियाकर्मियों तथा उनके ओबी वाहनों, पुलिसकर्मियों या आम लोगों को भी निशाना बनाया गया,मैदान के आसपास रखी कारें भी आग के हवाले कर दी गयीं।

 ? सुभाष गाताड़े


राजनीति के मंच पर भई संतन मी मीर !

                  दी स्नान का हमारे पौराणिक काल से ही धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व चला आ रहा है। मूलत: भारतवर्ष एक भावना प्रधान देश है। प्रत्येक पर्व, उत्सव और त्यौहारों के अवसर पर नदियों में स्नान का लाभ लेने के लिए पवित्र नदियों के घाटों पर हजारों लाखों श्रध्दालुओं को नदी में डुबकी लगाते हुए देखा जा सकता है। नदियों के संगमों पर तो ऐसे अवसरों पर मेलों, जैसा दृश्य उपस्थित हो जाता है। तुलसीदास जी ने भी नदी के घाट और घाट पर एकत्रित होने वाले संतजनों का उल्लेख करते हुए अपनी भक्ति भावना का कुछ इस प्रकार वर्णन किया है-''चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीर। तुलसीदास चन्दन घिसे तिलक देत रघुवीर।''

? राजेन्द्र जोशी


मध्यप्रदेश में

कुशासन के कीर्तिमान

      से मध्यप्रदेश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि यहां एक ऐसी सरकार राज कर रही है, जो जनता के हितों का दिखावा तो करती है,पर वास्तव में इस सरकार के राज में सबसे ज्यादा दुखी आम जनता ही है। आए दिन अख़बारों में आम आदमी को प्रताड़ित किए जाने की ख़बरें प्रकाशित होती रहती हैं। कुछेक मामलों में सरकार की ओर से सांत्वना दी जाती है, जबकि संगीन मामलों से मुंह फेर लिया जाता है। ख़ासकर सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों द्वारा किए गए अत्याचारों पर तो सरकार संज्ञान लेने की जरूरत भी नही समझती। कुछ मामलों में तो सत्ता में बैठे लोगों की भागीदारी साफ नज़र आती है।

? महेश बाग़ी


जनहित में भी तो दिखें

असीमित अधिकार

      ध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने भ्रष्टाचार  और अवैध खनन पर सदन में चर्चा के लिए अडे  प्रमुख विपक्षी दल कॉग्रेस को आक्रामक तेवर दिखाने के बजाय सुरक्षात्मक रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया। अपने असीमित अधिकार का हवाला देकर विधानसभा अध्यक्ष ने कॉग्रेस के तेजतर्रार विधायकों चौधरी राकेशंसिंह तथा कल्पना परूलेकर को सदन में लाये गये एक प्रस्ताव के  आधार पर सदन की सदस्यता से ही  बर्खास्त कर दिया। देश प्रदेश के इतिहास में किसी विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विधायकों को विधायक पद के लिए अयोग्य करार दे देने,............

? अमिताभ पाण्डेय


कृषि वायदा पर

रोक से ही रुकेगी महंगाई

        देश में सूखे की आहट सुनते ही खाद्य वस्तुओं के दामों ने आग पकड़ ली है। दाम बढ़ने की रतार यह है कि बीते तीन महीनों के मुकाबले इनके दाम औसतन 35फीसदी तक बढ़ गए हैं। यदि दाल, खाद्यान्न,चीनी और तेल की कीमतों को जल्द ही काबू में नहीं किया गया,तो आने वाले दिनों में इनकी कीमतें उपभोक्ताओं को ओर भी रुलाएंगी। देखते-देखते थोक बाजार में दालों के दाम 1300 से 1400 रूपए प्रति क्विंटल और खाद्य तेलों के दाम 300से 500रूपए प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं। खुदरा बाजार में यदि देखें तो दालें 65से लेकर 75रूपए प्रति किलो, शक्कर 38 से 40 और खाद्य तेल 85 से 100 रूपए प्रति लीटर बिक रहा है।

? जाहिद खान


सउदी अरब : वोजदान का नाम ले खेलने

की जिद तो कर सकती हैं

       उदी अरब की 16 वर्षीय जुडो खिलाडी वोजदान शहरकरनी लन्दन आलिम्पिक खेल प्रतियोगिता में हार गयी है, लेकिन इस किशोरी के हार से महत्वपूर्ण ख़बर है खेलने के लिए उसका अपने देश सउदी अरब से बाहर जाना और उससे भी बड़ी ख़बर है कई बन्धन और प्रतिबन्ध का मुकाबला करते हुए खेलने के लिए हौसले का बनाए रखना। बनी बनायी परिपाठी को महिलाओं के पक्ष में तोड़ने का यह सन्देश महज खेल जगत के लिए नहीं होगा बल्कि रोजमर्रा के जीवन में लड़कियों को आगे करने के लिए प्रतिरोध करने का हौसला भी बढ़ेगा। वोजदान कहती हैं कि मैं खेल में हार गयी लेकिन मेरे देश की लड़कियां मेरे नाम का सहारा लेकर खेलने की जिद तो कर सकती हैं।

    

? अंजलि सिन्हा


  20 अगस्त2012

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved