संस्करण: 01 सितम्बर- 2014

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क्या प्रेम को धर्म की सीमाओं में बांधा जा सकता है?

     सारे विश्व में, संबंधित समुदाय के ''सम्मान'' को, उस समुदाय की महिलाओं के शरीर से जोड़कर, संकीर्ण व सांप्रदायिक ताकतें,हिंसा और तनाव फैलाती आईं हैं। यह सांप्रदायिक राजनीति में निहित पितृसत्तात्मक मूल्यों का प्रकटीकरण है। हमें यह याद है कि किस प्रकार अलग-अलग समुदायों के दो युवकों के वाहनों की टक्कर को ''हमारी लड़की'' की इज्जत को ''दूसरों'' द्वारा लूटने का स्वरूप दे दिया गया था।     

? राम पुनियानी


100 दिन, वादे लापता, इरादे जाहिर

        रेंद्र मोदी सरकार के 100 दिन पूरे हो चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेताओं ने जनता को कई तरह के सपने दिखाए। लेकिन यथार्थ के कठोर धरातल वे कितने फलीभूत हुए या होने की संभावना है, सरकार के 100 दिनों के कामकाज से स्वत: स्पष्ट हो जाता है। पिछले 100 दिनों में सरकार एक भी काम ऐसा नहीं किया जो उम्मीदें जगाता हो अलबत्ता कम से कम 10 ऐसे काम किए हैं जो सरकार और पार्टी के इरादे साफ जाहिर करते हैं। 

?

विवेकानंद


स्वागत हिन्दू पाकिस्तान

     हा जाता है कि आदतें मनुष्य का पीछा नहीं छोड़ती और संघ परिवार उसका अपवाद नहीं है। दरअसल उसने इसने इसमें महारत हासिल की हो। ऐसी आदतों में शुमार है उसके अगुआओं की पुरानी फितरत कि विवादास्पद बातें कह देना, लोगों की प्रतिक्रिया जांचना और अगर मामला उल्टा पड़े तो तुरन्त कह देना कि उसे मीडिया ने तोड़ा मरोड़ा था।

 ? सुभाष गाताडे


सावरकर का पुर्नवास

      राजग नेतृत्व की पिछली केन्द्र सरकार के शासन काल में वीर सावरकर के नाम से प्रसिध्द विनायक दामोदर सावरकर का चित्र 26 फरवरी 2003 को संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में महात्मा गांधी के बगल में लगाया गया। अब मोदी सरकार के आने के बाद स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सावरकर की छवि स्वतंत्रता सेनानी की तरह गढ़ने के लिए 'रोड टू फ्रीडम' नामक डाक्यूमेंटरी का प्रसारण दूरदर्शन पर किया गया। गौरतलब है कि गांधी से जुड़ी हुई एक डाक्यूमेंटरी जो कि बीबीसी के लिए महेश प्रभु ने बनाया था उसका भी नाम 'गांधी रोड टू फ्रीडम' था।

? अनिल यादव


क्या कायम रहेगा यूपी में बसपा का इकबाल

            से बाजार की प्रबंधन शैली का नतीजा समझा जाए अथवा नरेन्द्र मोदी की राजनैतिक शैली का जादू, उत्तर प्रदेश के दलित मतदाताओं द्वारा हालिया लोकसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में जबरजस्त वोटिंग की गई। इस जबजस्त वोटिंग को कुछ लोग संघ का दलितों के बीच जमीनी स्तर पर काम करने का नतीजा भी मान रहे हैं। वजह चाहे जो भी हो, दलितों की नेता कहलाने वाली मायावती इन दिनों अपने इतिहास का सबसे बुरा दिन देख रही हैं।

 ?  रीना मिश्रा


धर्मस्थलों के हादसे रुक सकते हैं

         र्मस्थलों पर होने वाले हादसों की सूची में एक और वृध्दि हो गयी है। गत दिनों चित्रकूट के कामतानाथ मन्दिर के पास कामदगिरि में सोमवती अमावस्या के अवसर पर जुटी भीड़ में भगदड़ मच जाने से दस लोगों की मौके पर ही मृत्यु हो गयी और 25 से अधिक लोग गम्भीर रूप से घायल हो गये। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि उक्त घटना भी पिछली अनेक घटनाओं की तरह एक हिन्दू तीर्थ स्थल में  पूजा उपासना के लिए पवित्र मानी जाने वाली तिथि में उसी तरह से घटित हुयी जिस तरह से पिछली अनेक घटनाएं घटी थीं, फिर भी न तो शासन ने और न ही तीर्थस्थल के प्रबन्धकों ने ही कोई सावधानी बरती थी।

? वीरेन्द्र जैन


'......गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं ! '

      विता-कहानियों में प्राय: यह बताया जाता है कि सपनों के टूट जाने पर कैसे लोग चिल्ला उठते हैं लेकिन जागी ऑंख के सपने टूटने पर जो हताशा और ठगे जाने का भाव पैदा होता है उसे इन दिनों देश में देखा जा सकता है। दुष्यन्त कुमार का एक मशहूर शेर है - 'कैसे मंजर सामने आने लगे हैं, गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं।'

?  सुनील अमर


सोलहवी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनेगा या नहीं

     भारत के संविधान की मुख्य विशेषता यह है वह लोकतंत्र को मजबूत करने का संदेश देता है। यह पूर्णत: लचीला है। लोकतंत्र में बहुमत दल को सत्ता मिलती है उसका नेता प्रधानमंत्री बनता है तथा कम संख्या वाले दल के नेता को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया जाता है। शासक दल की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने, मनमानी, निरंकुश शासन का मुखर बिरोध करने का दायित्व प्रजातंत्र में विरोधी दल को दिया है।

? विजय कुमार जैन


खंडवा अभी तक सामान्य नहीं हुआ है

        खंडवा के कलेक्टर श्री अग्रवाल ने हमें 5:30 अपरान्ह मिलने का समय दिया था। हम लोग ठीक 5:30 बजे कलेक्टरेट पहुँच गए थे। इंतजार करते आधे घंटे से ज्यादा समय बीत गया था। हमने उनके पी.ए.से जानना चाहा कि आखिर इतना समय क्यों लग रहा है।  

? एल.एस.हरदेनिया


स्कूलों तक पहुॅचा  रैंगिंग का आतंक ?

      ग्वालियर के सिंधिया स्कूल का हाइप्रोपाइल रैंगिग मामला चर्चा में है। रैंगिंग से पीड़ित बच्चा जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। स्कूल प्रशासन पालकों से माफी मॉग रहा है और सरकार न्यायिक जॉच की बात कर रही हैं। हो सकता है प्रशासनिक जॉच में दोषी पाए छात्रों को दंडित किया जाए?या फिर यह भी संभव है कि उन्हें भविष्य में सुधरने की चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा क्योंकि आखिर बच्चे तो हैं?

? डॉ. सुनील शर्मा


मीडिया से दूर आदिवासी के सवाल

        प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में आदिवासी समुदाय का योगदान महत्वपूर्ण है। शहरी मानसिकता  और उसके पीछे छिपे बाजार ने अपने स्वार्थ की खातिर जल, जंगल, जमीन,जानवर को काफी नुकसान पहॅुचाया है। बाजारवाद और शहरीकरण की कीमत हमें बिगडते पर्यावरण, बढते प्रदूषण ,लगातार नष्ट होती जैव विविधता के रूप में चुकानी पड रही है। बाढ, सूखा, भूकम्प, गिरते पहाड, भूस्लखन सहित अन्य प्राकृतिक आपदाएं सीधा इशारा करती हैं कि प्रकृति का बेहिसाब दोहन बंद किया जाये।                   

? अमिताभ पाण्डेय


5 सितम्बर : शिक्षक दिवस पर विशेष

शिक्षक भूल रहे अपना सामाजिक दायित्व

      क जमाना था जब शिक्षक को राष्ट्र निर्माता के रूप में अपार सम्मान दिया जाता था। आज भी उसकी भूमिका बदली नहीं है मगर समाज में उसका सम्मान निरन्तर घटता जा रहा है। डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, न्यायाधीश, कलाकार आदि किसी से भी उसकी तुलना संभव नहीं है। इन सबको गढ़ने वाला शिक्षक ही है, फिर भी वह समाज में हाशिए पर है। इक्कीसवी शताब्दी के समाज को शिक्षक से बहुत अपेक्षाएं हैं।

? डॉ. गीता गुप्त


  01 सितम्बर- 2014

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