संस्करण: 1 अक्टूबर-2012

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विश्वासघात!

           माजसेवी अन्ना हजारे से जुड़े हालिया घटनाक्रमों से यह साफ हो गया कि टीम अन्ना को लेकर जिस तरह की खबरें आतीं रहीं,जिन्हें कभी विश्वास के काबिल नहीं समझा गया,वे निराधार नहीं थीं। ईमानदारी और लोकशाही का झंडा लेकर चल रही टीम अन्ना के भीतर भी स्वार्थ,तानाशाही और भ्रष्टाचार का बोलबाला था। जिसे अन्ना हजारे ने न केवल लंबे समय तक खुद सहा बल्कि उस पर पर्दा भी डाला। पर अब शायद पानी सिर से ऊपर हो चुका था या उन्हें एक मौका ऐसा मिल गया था कि वे खुद को अपनी बेलगाम टीम से अलग कर लें,सो उन्होंने बिना समय गंवाए कथित समाजसेवी अरविंद केजरीवाल के नाता तोड़ लिया।

? विवेकानंद


यह नफरत फिल्म से है या

अमरीका से

        फगानिस्तान में रूसी सेना की उपस्थिति के खिलाफ लादेन को पैदा करने वाले अमेरिका को जब लादेन और तालिबानों से तकलीफ होने लगी तब उसने इस्लाम और उसके मानने वालों को ही दुनिया का दुश्मन सिध्द कराने के लिए अपने प्रचारतंत्र को लगा दिया। इसी का परिणाम रहा कि इसे सभ्यताओं का युध्द बतलाया जाने लगा और दुनिया को मुस्लिम बनाम गैर-मुसलमान में बाँटने की कोशिशें की जाने लगीं। दुनिया भर में नकौला वसीली की फिल्म ''इनोसेंट आफ मुस्लिमस''पर उठी हिंसक प्रतिक्रिया को इन्हीं सन्दर्भों में समझने की जरूरत है। फिल्म के निर्माता हैं 'नकौला वसीली'हैं।   

? वीरेन्द्र जैन


राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति ने सी ए जी विनोद राय की

सी बी आई जांच की सिफारिश की थी

जांच की सिफारिश करने वाली

विशेषाधिकार कमेटी में रवि शंकर प्रसाद और बलबीर पुंज भी थे

   राज्य सभा की विशेषाधिकार समिति ने एक सांसद के साथ बदतमीजी के आरोप में 13 दिसंबर 2011 को  सदन के सामने एक रिपोर्ट पेश की थी जिसमें वित्ता मंत्रालय के दो बड़े अधिकारियों के आचरण की सी बी आई जांच का आदेश दिया था। एक अधिकारी संयुक्त सचिव स्तर का था जबकि दूसरा  फाइनेंशियल सर्विसेज विभाग में सचिव के रूप मेंतैनात था। सरकारी कंपनी आई एफ सी आई के सी ई ओ के पद पर नियुक्ति के केस में इन दोनों अधिकारियों पर नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया था । जानकार बताते हैं कि उनमें से एक अधिकारी वर्तमान सी ए जी विनोद कुमार राय ही हैं ।

? शेष नारायण सिंह


वन संरक्षण की संस्कृति  

            टते वन क्षेत्र से आज पूरी दुनिया चिंतित है। कोई ओजोन परत में छेद होने से, तो कोई जंगल में मौजूद प्रचुर जैव-विविधता के संरक्षण के लिए चिंतित है। लेकिन हजारों साल से वनों पर आश्रित आदिवासियों की चिंता इससे बिल्कुल अलग है। आदिवासी तो सिर्फ अपने अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों की खुशहाल जिंदगी के लिए जंगल बचाना चाहते हैं। आधुनिक समाज की सोच ने जीवन को लाभ की वस्तु बना दिया है, लेकिन आदिवासियों के लिए जंगल एक पूरी जीवन शैली है। आजीविका का साधन है।  

? एस के सिन्हा


भारतीय संविधान में

अंबेडकर की भूमिका

         गस्त 2012 में आई.बी.एन. चैनल द्वारा कराये गये एक सर्वेक्षण में महात्मा गाँधी के बाद दूसरे महान व्यक्तित्व का दर्जा डॉ.बी.आर.अंबेडकर को दिया जाना जितना सुखद लगा उतना ही प्रासंगिक एवं न्यायोचित भी। हिन्दुस्तान ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के नैतृत्व में आजादी की महान लड़ाई अहिंसा एवं सत्य के हथियार से जीती। आजाद हिन्दुस्तान को स्वतंत्रता,समानता एवं न्याय दिलाने के गाँधी के वादे को संविधान एवं कानून में ढालने का कार्य डॉ.बी.आर.अंबेडकर ने संविधान सभा की प्रारूप समिति के सभापति के रूप में कर देश में लोकतंत्र को ऐसी मजबूती दी कि वह तमाम आशंकाओं के बावजूद भी दुनिया का सबसे बड़ी जम्हूरियत वाला देश बनकर उभरा।

 ?   अजय सिंह गंगवार


गुजरात के बाहुबली आईपीएस

जेल के सींखचों के पीछे!

                  साधारणत: जेलों में गंभीर अपराधों में लिप्त लोग रहते हैं। परंतु गुजरात के जेलों की स्थिति भिन्न है। यहां की जेलों में अनेक पुलिस अधिकारी बंद है। इन पुलिस अधिकारियों में आई.पी.एस.(भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी भी शामिल हैं। जो अधिकारी इस समय जेल में है उनके नाम है डी.जी.बंजारा, अभय चूडासमा, राजकुमार पानडियन और विपुल अग्रवाल। इन सबका अपराध यह है कि इन्होंने आंख बंद कर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का साथ दिया है। इन सबने झूठी मुठभेड़ बताकर निर्दोष लोगों की हत्या की है। जेल में रह रहे इन अधिकारियों के अतिरिक्त अनेक ऐसे अधिकारी भी हैं जिनके हाथ खून से रंगे है।

? एल.एस.हरदेनिया


खण्डवा व हरदा जिले के जल सत्याग्रह के दमन से 

म.प्र. भाजपा सरकार का संघी चेहरा उजागर

      मानवीय मूल्यों की स्थापना, संवेदना के बिना संभव नहीं। भारतीय जन मानस ने संवेदना व सहिष्णुता को अपनपव की डोर में सहजता व सहनशीलता के मोती पिरोकर, भारतीय समाज को एक अलग पहचान दी, जो बल और वैचारिकता के थपेड़ों को सदियों से झेलता हुआ अल्लमा इकबाल  के शब्दों में कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारीय और मैथलीशरण गुप्त के शब्दों में पर भारत के सम भारत है के गौरव को अक्षुण बनाए रखा। किसी साप्ताहिक, पाक्षिक या मासिक पत्रिका के लिये, किसी महत्वपूर्ण घटना का समीक्षात्मक आलेख लिखने में, उपरोक्त संदर्भ, यद्यपि आवश्यक नहीं है किन्तु घटना के पीछे छिपी मानसिकता के विकसित होने का डर, अनुभव किये जाने पर, चुप रहना भी संभव नहीं।

? मो.यूनुस


क्या अब बेनकाब होंगे

भाजपा के भ्रष्टाचारी

      हाल ही में देश की न्यायप्रणाली ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने संबंधी दो महत्वपूर्ण फैसले दिए। पहला मामला अहमदाबाद हाईकोर्ट का है, जहां एक मामले की सुनवाई में अदालत ने आदेश दिया कि भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में राज्यपाल को राज्य शासन की अनुमति की जरूरत नहीं है और वे सीधे प्रकरण की जांच के आदेश दे सकते हैं। इसके ठीक दो दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी कि भ्रष्टाचारियों पर तीन माह में अभियोजन की स्वीकृति दी जाना चाहिए। ये दोनों फैसले मध्यप्रदेश के संदर्भ में बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। खासकर आला अफसरों और मंत्रियों से जुडे भ्रष्टाचार के मामले में मप्र ने अपनी साख खो दी है। 

? महेश बाग़ी


बड़े रिटेल का मिथक

        नमोहन सिंह सरकार के बहुप्रतीक्षित बिग टिकेट रिफार्म्स का आगाज़ हो चुका है और इनमें सबसे अधिक सूर्खियां रिटेल में विदेशी पूंजी निवेश ने बटोरी हैं। भारत सरकार का यह दावा है कि रिटेल में विदेशी पूंजी निवेश खोलने से 600 बिलियन डालर तक पूंजी यहां पहुंचेगी, दूसरी तरफ नीति के आलोचकों द्वारा अनुमान पेश किए जा रहे हैं कि वालमार्ट एवं उनके हमनवा कम्पनियों के आगमन से कितने लाख लोग बेरोजगार होंगे आदि।

? सुभाष गाताड़े


जब उस लड़की का धैर्य टूट गया !

       हेल्पलाइन का मतलब होता है जो व्यक्ति परेशानी में हो, उसे तत्काल सहायता उपलब्ध करना। ऐसा प्रतीत होता है कि लखनऊ पुलिस इस मामले में अलग राय रखती है। वरना ऐसी ख़बर प्रकाशित नहीं होती कि एक तरफ उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक दायरे में लड़कियों तथा महिलाओं के साथ बढ़ती छेड़छाड़ एवं यौनंहिंसा की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन द्वारा अलग से हेल्पलाइन शुरू करने का ऐलान होता और साथ साथ लखनऊ पुलिस का बयान भी जारी होता कि वह शिकायत दर्ज होने के सात दिन बाद आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

    

? अंजलि सिन्हा


लक्ष्य से भटकी जननी सुरक्षा

        ध्य प्रदेश की जननी संकट में हैं। राजधानी में महिलाओं की प्रसव के दौरान हुई मौतों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह स्थिति भी तब है जबकि भोपाल को सरकारी मायनों में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए एक दर्जा दिया जाता है, फिर भी यहां ऐसी स्थिति बनना प्रदेश के सुदूर इलाकों में महिलाओं को मिल रही चिकित्सा सुविधाओं का अंदाजा लगाने के लिए काफी है। अस्पताल प्रबंधन अपने बचाव में महिलाओं की गंभीर स्थिति और रैफर केस का ठोल पीट रहा है, लेकिन प्रसव के दौरान महिलाओं की स्थिति गंभीर क्यों हो गई ? गर्भवास्था के दौरान उनका स्वास्थ्य परीक्षण क्यों नही हो पाया ? इन सवालों के जबाव किसी के पास नहीं हैं।

? राखी रघुवंशी


सब्सिडी हैं भ्रष्टाचार की जनक?

       केन्द्र सरकार द्वारा रसोई गैस और डीजल पर सब्सिडी कम करने को लेकर सारे देश में विरोध के स्वर हैं। तमाम विरोधी पार्टियों को हो-हल्ला करने का एक अच्छा अवसर मिल गया है। फिलहाल में आम आदमी भी इस मुद्दे पर उत्तेजित है। मगर यही आम आदमी गैस एजेन्सी पर सर्दी,गर्मी और बरसात से बेपरवाह होकर घण्टों लाइन में खड़ा रहता है और उसका नम्बर आने वाला ही होता है तभी गैस एजेंसी में गैस खत्म हो जाती है तब वो इससे ज्यादा हताश और परेशान होता है।

    

? डॉ. सुनील शर्मा


  1 अक्टूबर-2012

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