संस्करण: 1 जुलाई -2013

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मुखर्जी, धारा 370 और भाजपा

       म्बे समय तक हिन्दु महासभा में सक्रिय और बाद में संघ सुप्रीमो गोलवलकर की सलाह/मार्गदर्शन/सहयोग से 'भारतीय जनसंघ' की स्थापना करनेवाले श्यामाप्रसाद मुखर्जी, को हर साल संघ-भाजपा की तरफ से उनके मृत्युदिन पर याद किया जाता है। न केवल इस बार जनाब मोदी एवं जनाब आडवाणी ने अलग अलग स्थानों पर सभाओं को सम्बोधित किया बल्कि मुखर्जी की याद के बहाने आडवाणी ने परोक्ष रूप से संघ-भाजपा के वर्चस्वशाली तबके पर हमला किया। मुखर्जी की सभी को साथ लेकर चलने की कोशिशों की उनकी चर्चा एक तरह से पार्टी के अन्दर उनको अलग थलग करने में मुब्तिला लोगों की आलोचना थी।  

? सुभाष गाताड़े


मोदी का हिमालयी चमत्कार

15000 गुजराती तीर्थयात्रियों को बचाने के बड़े-बड़े दावे दर्शाते है

कि उनके काम में प्रचारतंत्र कितना सक्रिय है।

       शुक्रवार, 21 जून 2013 की शाम को जब संपूर्ण भारतवर्ष उत्तराखण्ड और हिमालय क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदाओं के सदमें से चकराया हुआ था, तभी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी कुछ अधिकारियों के साथ देहरादून में उतरे। रविवार को दावा किया गया कि उन्होने उत्तराखण्ड त्रासदी में फॅंसे 15000 गुजरातियों को सुरक्षित निकाल लिया है और उन्हे उनके घर वापस भेज दिया गया है।

? अभीक बर्मन


उत्तराखंड तबाही

अपनों को भी पसंद नहीं आया

मोदी की मदद का तमाशा

          हरहाल मोदी ने ऐसा क्यों किया इसके पीछे उनकी मनोवृत्ति स्पष्ट है। अहंकार जब हद से गुजर जाता है, तब अहंकारी व्यक्ति खुद ही अपयश के रास्ता अख्तियार कर लेता है। गुजरात में तीन बार सरकार बना लेने से मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का अहंकार इतना विशाल हो गया है कि उन्हें अपने सामने हर व्यक्ति छोटा दिखता है। चंद लोगों के जयजयकार करने से न जाने मोदी के मन में यह भाव कहां से उत्पन्न हो गया कि वे जो कहेंगे, उसे सर्वसम्मति प्राप्त होगी और उसे ही सही मान लिया जाएगा।

 ? विवेकानंद


मोदी उत्तराखंड पीड़ितों की खातिर नहीं

अपनी इमेज बनाने के लिए गए थे

      पिछले कुछ दिनों से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठतम नेता लालकृष्ण आडवानी फिर सुर्खियों में हैं। नरेन्द्र मोदी उनकी उत्तराखंड यात्रा के कारण और उनके द्वारा अभी हाल में दिए गए बयानों के कारण समाचारों में छाए रहे और आडवाणी, कश्मीर से धारा 370 को हटाने की अपनी मांग को लेकर समाचारों में रहे।

? एल.एस.हरदेनिया


उत्तराखंड की विनाशलीला

शिव की जटा से न खेलें

         पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा भगीरथ की तपस्या के बाद गंगा धरती पर आई है। भगीरथ की तपस्या के बाद जब गंगा स्वर्ग से धरती पर आने के लिए तैयार हुई तो एक बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया कि वह यदि धरती पर उतरी तो अपने वेग के कारण वह सबकुछ तबाह कर देगी। उस समस्या का हल निकाला गया। हल यह था कि गंगा सीधे धरती पर नहीं आएगी, बल्कि वह शिव की जटा पर गिरेगी और फिर वहां से वह धरती पर जाएगी।  

 ?   उपेन्द्र प्रसाद


उत्तराखंड की मौजूदा मुसीबत के

पीछे फर्जी तरक्की के सपने हैं

                  मुझे उत्तराखंड के मौजूदा मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के स्वर्गीय पिता हेमवतीनंदन बहुगुणा का वह इंटरव्यू कभी नहीं भूलता जो उन्होंने 1974 में उस वक्त की सम्मानित हिंदी समाचार पत्रिका दिनमान को दिया था । टिहरी बाँध की प्रस्तावना बन चुकी थी ,स्व बहुगुणा जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और टिहरी बाँध के बारे में उनका वह इंटरव्यू लिया गया था।  

? शेष नारायण सिंह


आखिर मुँह कब खोलेंगे

नितीश कुमार जी

      जादी के बाद की सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री रही श्रीमती इन्दिरा गान्धी की सबसे बड़ी आलोचना इस बात के लिए की गयी कि उन्होंने देश में इमरजेंसी लगायी थी जिसमें अभिव्यक्ति की आजादी पर नियंत्रण करने की व्यवस्था है। भले ही बाद के टिप्पणीकारों ने अपनी समीक्षा में कहा कि इमरजेंसी में जब झुकने के लिए कहा गया तो वे स्वत: लेट गये। पर इमरजैंसी हटने के बाद अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा को ही मुख्य मुद्दा बनाया गया था व दुबारा सत्ता में लौटने के बाद श्रीमती गान्धी ने स्वयं भी कहा था कि अब वे कभी इमरजैंसी नहीं लगायेंगीं। 

? वीरेन्द्र जैन


राजनीति करने के चक्कर में

भूल गये लोग शालीनता और प्रेम की वाणी

      'वाणी' एक तरह से व्यक्ति का चारित्रिक प्रमाण है। वह जैसा बोलेगा समाज के सामने उसका वैसा चरित्र उजागर होगा। व्यक्ति यदि मृदुभाषी है प्रेम, सौहार्द और शालीनता की भाषा बोलता है तो सहज ही वह सबका दिल जीत लेता है। यदि उसकी  वाणी में कटुता, छल-कपट, वैमनस्यता या राग द्वेष है तो स्वाभाविक तौर पर लोग उसे पसंद नहीं करते हैं। ऐसे लोग कटुवाणी और छल-कपट की भाषा बोलकर स्वयं यह मान बैठते हैं कि वह अपने प्रतिद्वंद्वी पर आक्रमण कर रहे हैं और उसे परास्त करके ही पीछा छोड़ेंगे !

? राजेन्द्र जोशी


मप्र को खोखला करती शिव सरकार

        हते हैं कि जब दो देशों की सेनाएं युध्द मैदान में होती हैं और एक सेना को अपनी पराजय महसूस होती है तो वह धीरे-धीरे पीछे हटने लगती है। ऐसा करते समय वह अब अपने साथ लाई गई रसद सामग्री नष्ट कर देती है और कुएं, बावड़ी, तालाब आदि जलस्रोतों में बम फेंक देती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शत्रु सेना इन संसाधनों का इस्तेमाल न कर सके। मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी यही कर रहे हैं। संभवत: उन्हें यह अहसास हो गया है कि अब सत्ता में वापसी संभव नहीं है। इसलिए वह लोक-लुभावन योजनाओं के नाम पर कर्ज का बोझ बढ़ाते जा रहे हैं।

? महेश बाग़ी


बिना शह के भ्रष्टाचार संभव ही नहीं

       ध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने भाषण में कई बार लोकायुक्त को खुला हाथ देने की बात की है। पर यह उनकी आत्मप्रवंचना ही है। पिछले दिनों वन विभाग के एक अधिकारी के यहां मारे गए छापे में 40 करोड़ की बेनामी सम्पत्ति का पता चला। अब मंत्री की मेहरबानी के बिना क्या उच्च अधिकारी इतनी बड़ी सम्पत्ति के मालिक हो सकते हैं। यही हाल मत्स्य पालन अधिकारियों के यहां छापे से साबित हुई है। इन तमाम लोगों के यहां मारे गए छापे में 1200 करोड़ की बेहिसाबी सम्पत्ति का पता चला है। क्या मध्यप्रदेश में लोकायुक्त सो रहे हैं। उन्हें क्या नहीं पता है कि राज्य में कितना भ्रष्टाचार है।   

 

? डॉ. महेश परिमल


मध्यप्रदेश में महिलायें और शहर बढ़े, लड़कियां और गांव घटे

        मारे देश की यह एक अजीब विडंबना है कि सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद समाज में कन्या-भ्रूण हत्या की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। दुर्भाग्य है कि संपन्न तबके में यह कुरीति यादा है। स्त्री-पुरुष लिंगानुपात में कमी हमारे समाज के लिए कई खतरे पैदा कर सकती है। इससे सामाजिक अपराध तो बढ़ेंगे ही, महिलाओं पर होने वाले अत्याचार में भी वृध्दि हो सकती है। हाल ही में प्रकाशित केंद्रीय सांख्यिकी संगठन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में वर्ष 2001 से 2005 के अंतराल में करीब 6,82,000 कन्या भू्रण हत्याएं हुई हैं।

? राखी रघुवंशी


  1 जुलाई -2013

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