संस्करण: 01 दिसम्बर- 2014

मिलावटी दूध का बढ़ता कारोबार

? शशांक द्विवेदी

            देश में कई सालों से चल रहें मिलावटी दूध के कारोबार को लेकर सुप्रीम कोर्ट रुख सख्त हो गया है । सुप्रीम कोर्ट ने मिलावटी दूध के मामले में उदासीन रवैया रखने करने के लिए केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई तथा संसद के शीतकालीन सत्र में संबंधित कानून में बदलाव की उम्मीद भी जताई। न्यायमूर्ति एम.वाई. इकबाल और न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह की खंडपीठ ने मिलावटी दूध के कारोबार पर रोक लगा पाने में केंद्र और राज्य सरकारों की निष्क्रियता पर सवाल खड़े किए तथा इस संबंध में केंद्र सरकार से 4 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।सुप्रीम कोर्ट ने मिलावटी दूध मामले में कहा कि, क्या दूध में सायनाइड मिलाया जाये, जिसे पीकर लोग तुरंत मरने लगे, तब सरकार कोई कानून बनाएगी?

                    दूध में केमिकल की मिलावट ने दूध की गुणवत्ता खत्म कर दी है । इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। लीवर एवं किडनी फेल होने जैसी जानलेवा बीमारियां भी केमिकल मिले दूध के कारण बढ़ रही है। वहीं अगर यूरिया आदि की मिलावट है तो मरीज को खून की उल्टी, लकवा या फिर अधिक गंभीर परिस्थिति में मौत भी हो सकती है। व्यावसायिक रूप में गाय ,भैंस पालने वालों से लेकर दूधिया और ठेकेदार सभी दूध की गुणवत्ता से खिलवाड़ कर रहे है। इसके बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों के खाद्य एवं स्वास्थ्य विभाग ने इसे रोकने को लेकर कोई गंभीर कदम नहीं उठाये है । सच बात तो यह है कि लोगों की सेहत से जुड़ा यह संवेदनशील मुद्दा सरकारों की प्राथमिकता सूची में ही नहीं है । दूध में मिलावट पर पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को मौजूदा कानून में बदलाव करने के निर्देश दिए थे। लेकिन इस निर्देश पर अभी तक कोई काम नहीं हुआ है । अधिकांश प्रदेशों में अभी फूड सेटी एवं स्टेंडर्ड एक्ट के तहत दोषी को अधिकतम 6 माह कैद की व्यवस्था है। लचीले कानून का लाभ मिलने से मिलावटखोरों की मानसिकता में बदलाव नहीं आ रहा है।

               भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा कृत्रिम एवं मिलावटी दूध के कारोबार पर देश भर में किए गए सर्वे में 68.4 प्रतिशत अधिक दूध निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिले दूध में से 66 फीसदी खुला दूध है। सिन्थेटिक और मिलावटी दूध तथा दूध के उत्पाद यूरिया, डिटरजेन्ट, रिफाइन्ड ऑयल, कॉस्टिक सोडा और सफेद पेंट आदि से तैयार हो रहे हैं और यह मानव जीवन के लिए बहुत घातक है क्योंकि इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

              नकली दूध बनाने के लिए रिफाइंड आयल एवं डिटर्जेंट लिक्विड का घोल तैयार किया जाता है। दूध में घी की मात्रा एवं आरएम वेल्यू बरकरार रखने के लिए कैमिकल मिलाया जाता है। शुद्ध दूध की आरएम वैल्यू 32 के आस पास होती है। केमिकल के उपयोग से आरएम वेल्यू 170 यानि शुद्ध दूध से पांच गुना अधिक। केमिकलों से निर्मित दूध फैक्ट्रियों में खरीद के दौरान फेट एवं आरएम के मामले में शुद्ध दूध की तरह ही खरा उतरता है। लेकिन लोगो द्वारा इसे पीने के उपयोग में लेने से स्वास्थ्य एवं सेहत को भारी नुकसान पहुंचता है।

             घरों में सामान्य तौर पर दूध में पानी के मिलावट की पहचान के लिए दूध को एक काली सतह पर छोड़ें। अगर दूध के पीछे एक सफेद लकीर छूटे तो दूध असली है नहीं तो इसमें मिलावट है । इसके साथ ही दूध में स्टॉर्च और यूरिया की पहचान के लिए दूध में दो बूंद टिंचर आयोडिन डालकर एक मिनट छोड़ दें। अगर दूध का रंग नीला हो जाए तो दूध में मिलावट है।

            दूध में डिटर्जेट की पहचान के लिए उसमें नींबू मिलाकर जाच की जा सकती है। दूध से बुलबुला उठता है तो दूध नकली है। नकली दूध को पानी में मिल्क पावडर मिलाकर बनाया जाता है। चिकनाई के लिए रिफाइन ऑयल व शैंपू का इस्तेमाल होता है । दूध में झाग बनाने के लिए वाशिंग पाउडर और दूध के सफेद रंग के लिए सफेदा मिलाया जाता है। दूध में मीठापन लाने के लिए ग्लूकोज का मिश्रण किया जाता है। इसी तरह कई और तरीकों और केमिकल की मदत से नकली या मिलावटी दूध बनाया जाता है ।

            देश के लगभग सभी हिस्सों में में मिलावटी दूध का गोरखधंधा कई सालों से बदस्तूर चल रहा है ।अधिक मुनाफा कमाने की चाहत में दूध कारोबारी सीधे-सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। हालात ये हो गये है कि मिलावटी दूध के सेवन से न केवल लोग बीमार हो रहे हैं, बल्कि किडनी, लीवर व हार्ट फेल जैसे मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसके इस्तेमाल से कैंसर होने की भी आशंका रहती है। जिन विभागों या लोगों पर मिलावटी दूध के गोरखधंधे को रोकने की जिम्मेदारी है वो पूरी तरह से लापरवाह बने हुए है । जिसका फायदा दूध कारोबारी उठा रहे हैं। बढ़ती जनसंख्या के सापेक्ष दूध की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है इसी वजह से मिलावटी दूध बेचने वालों के लिए ये मुनाफे का कारोबार है । कोई भी व्यक्ति दूध का सेवन स्वास्थ्य लाभ के लिए करता है। लेकिन मिलावटी दूध लोगों को बड़े पैमाने पर मरीज बना रहें है । दूध में मिलावट को लेकर बेशक सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती कर दी हो, लेकिन जमीनी स्तर पर पहले से तैयार खाद्य सुरक्षा कानून के पालन को लेकर भी कई खामियां हैं। मिलावटी दूध के मामले को लेकर अभी तक अधिकांश छोटे शहरों ,जिलों में कोई जांच लैब नहीं है। इतने बड़े पैमाने पर हो रही दूध की बिक्री के एवज में कस्बों और जिले के स्तर पर जांच संबंधी लैब ना होने से कोई आम व्यक्ति भी दूध में मिलावट की शिकायत नहीं कर पाता है । क्योंकि शिकायत से लेकर जांच तथा उसके बाद सजा होने तक के प्रावधान की प्रक्रिया काफी लंबी है। ब्रांडेड डेयरी कंपनियों के दूध में भी कई बार शिकायतें आती हैं, लेकिन संसाधन के अभाव में इसकी जांच नहीं हो पाती हैं।

            दूध के गोरखधंधे पर सुप्रीम कोर्ट के सीधे दखल के बाद उम्मीद की जानी चाहिए कि हालात में कुछ सुधार हो । कुल मिलाकर देश भर में मिलावटी दूध के कारोबार और इसके गोरखधंधे से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को ठोस नीति बनानी होगी । गाँव ,कस्बों और शहर में स्थानीय स्तर पर प्रशासन को इसके लिए स्पष्ट दिशा निर्देश और कड़े कानूनों का प्रावधान होना चाहिए तभी मिलावटी दूध के कारोबार पर अंकुश लग पायेगा ।

                
? शशांक द्विवेदी