संस्करण: 01 दिसम्बर- 2014

सार्क में क्या सिकुड़ गया था 56 इंची सीना

?  विवेकानंद

               लोकसभा चुनाव से पहले झूठ की नैया पर सवार हुई बीजेपी छप्परफाड़ बहुमत से चुनाव जीतने के बाद भी अपने दिमागफाड़ बतोलेबाजी से बाज नहीं आ रही है। हाल ही में हमारे माननीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह जी ने बताया कि भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी दाउद इब्राहिम पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर रह रहा है। गृहमंत्री जी का कहना था कि मीडिया में चल पड़ा डॉन को पकडना नामुमकिन नहीं मुमकिन है। राजनाथ सिंह के बयान और उसके बाद मीडिया के बखान से समझ नहीं आया कि कौन किसे बेवकूफ बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्री जनता को बेवकूफ बना रहे हैं और मीडिया इसमें उनका साथ दे रहा है या फिर मीडिया मोदी के मंत्रियों में हवा भरने में जुटा है और वे बेवजह फूलकर कुप्पा हुए जा रहे हैं। यह सवाल इसलिए उठे क्योंकि जिसकी शक्ल सूरत तक हमारे देश की सरकार, सुरक्षा एजेंसियों ने सालों से नहीं देखी उसका पता गृह मंत्री निकाल लाते हैं और वह मीडिया जो उसकी बरसों पुरानी फोटो दिखा दिखाकर मनगढ़ंत कहानियां गढ़ता रहता है वह गृह मंत्री के दावे को सोलह आना सच बताने पर आमादा हो जाता है। इससे बड़ा मजाक भला और दूसरा इस देश के साथ क्या हो सकता है? दूसरी बात, पकडने और सजा देने के लिए दाउद इब्राहिम ही जरूरी क्यों है, मुंबई हमलों के मास्टर माइंड हाफिज सईद क्यों नहीं? जबकि उसके विशय में हम सब जानते हैं, वह पाकिस्तान में खुलेआम घूमता है, भारत के खिलाफ जहर उगलता है और पाकिस्तान सरकार उसे समाजसेवी बताती है। क्योंकि मोदी सरकार के किसी भी एक मंत्री ने पिछले 6 महीने में उस दुर्दांत दरिंदे का नाम नहीं लिया? क्या उसको सजा दिलाना भारत सरकार की जिम्मेदारी नहीं है? इससे साबित होता है कि नरेंद्र मोदी जी की सरकार हवा में तीर चलाकर लोगों को बेवकूफ बना रही है।

               अब जरा सार्क सम्मेलन की बात करते हैं। संयोग से 26 नवंबर को सार्क देशों के सम्मेलन को नरेंद्र मोदी संबोधित करने वाले थे और इसी दिन मुंबई हमले की बरसी थी। सुबह से सारा मीडिया पिला पड़ा था कि नरेंद्र मोदी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सामने मुंबई हमलों का मुद्दा उठाएंगे। यह उम्मीद बेमानी नहीं थी। पीएम मोदी के पास अच्छा मौका था कि वे पाकिस्तान पर इस बात का दबाव बनाएं कि पाक सरकार वहां खुलेआम घूम रहे भारत के गुनहगारों को सजा दिलाए। लेकिन ताज्जुब तब हुआ जब मोदी सिर्फ इतना कहकर शांत हो गए कि मुंबई हमलों का दर्द कभी नहीं भूलेगा। 56 इंची सीने वाला शेर दिल प्रधानमंत्री आखिर सार्क के मंच से यह क्यों नहीं कह सका कि पाकिस्तान को भारत में खून बहाने वाले को सजा दिलाए? ऐसी कौन सी मजबूरी थी? क्या पीएम और उनके मंत्री भारत में ही रहकर गरजना जानते हैं? मुंबई हमले का मास्टर माइंड हाफिज सईद आज भी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहा है। आज तक हाफिज भारत सरकार के हाथ नहीं लगा है और न ही पाकिस्तान ने उसे इसके लिए दोषी माना है। मान लिया कि यूपीए सरकार कमजोर थी, लेकिन इस ताकतवर सरकार के सामने ऐसी क्या मजबूरी थी जो ऐन मुफीद मौके पर अपने हक की बात नहीं कर सकी। वह भी तब जबकि आतंक के खिलाफ कई देशों ने मोदी की बातों का समर्थन भी किया था। हम सिर्फ इस बात की ढपली बजा रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की ओर देखा तक नहीं। जब इतना गुस्सा है पाकिस्तान के दुस्साहस पर तो उसे सार्क के मंच पर जाहिर क्यों नहीं किया। क्या मोदी सरकार पाकिस्तान से सिर्फ सीमा विवाद पर ही बात करना चाहती है, भारत में खून की होली खेलने वालों को सजा दिलाने में उसकी दिलचस्पी नहीं है? यह इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि मोदी सार्क में जो गुस्सा नवाज को लेकर झलका या उन्होंने दिखाया उसके बुनियाद में कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की अलगाववादियों से बात करना है। जबकि उनका यह गुस्सा इस बात को लेकर भी होना चाहिए था कि पाकिस्तान भारत द्वारा सौंपे गए अनेकों सबूतों को नकार कर भारत के दुश्मनों को ससम्मान पनाह दिए हुए है और दूसरी लज्जाजनक बात यह है कि स्मृति ईरानी के ज्योतिषी को हाथ दिखाने को इश्यू बना लेने वाले मीडिया ने इस बात पर चर्चा नहीं की कि आखिर मोदी ने मुंबई हमलों की बरसी पर मुंबई के लिए पाकिस्तान से न्याय की मांग क्यों नहीं की? पीएम मोदी नवाज से नहीं मिलना चाहते थे न मिलते, लेकिन पाकिस्तान से यह सवाल तो पूछ सकते थे कि भारत का मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी होते हुए भी कैसे ये खुलेआम घूमता है? अन्य सात राष्ट्रों से भी यह सवाल कर सकते कि आतंकवाद से मिलकर लडने का दावा करने वाले आखिर मुंबई के अपराधी को भारत को सौंपने के लिए पाकिस्तान पर दबाव क्यों नहीं बना रहे हैं? क्या इसी तरह एकजुट होकर आतंक से मुकाबला किया जाएगा। मोदी से यह उम्मीद इसलिए भी है क्योंकि बतौर बीजेपी मोदी सर्वशक्तिमान हैं। लेकिन पाकिस्तान से सवाल पूछना तो दूर उन्होंने यह भी नहीं कहा कि भारत पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से सबसे ज्यादा पीडि़त है। हालांकि यह सारी बातें वे चुनाव से पहले खूब किया करते थे और पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात भी किया करते थे, लेकिन जब मौका आया तो आतंक परस्त देश के नुमाइंदे के सामने 56 इंच का सीना सिकुड़ गया। दूसरी ओर आतंकियों पनाह देने वाले देश का प्रधानमंत्री भारत सरकार की उम्मीदों पर पानी फेर गया और कोई कुछ नहीं कर सका। सार्क देशों के बीच होने वाले मोटर व्हीकल पैक्ट का रास्ता रोकते हुए पाकिस्तान ने कहा है कि उसका देश अभी आंतरिक तौर पर इस समझौते के लिए तैयार नहीं है। भारत और श्रीलंका ज्यादातर सार्क देश इस समझौते के लिए तैयार हैं। लेकिन पाकिस्तान ने कहा कि वह सार्क देशों के बीच पीपुल टु पीपुल कांटैक्ट और सामान के आवाजाही के लिए अभी तैयार नहीं है। पाकिस्तान के इस रुख से दक्षिण एशिया में मुक्त व्यापार को लागू करने की दिषा में भारत के प्रयासों को झटका लगा है। इससे पहले भी सम्मेलन में आने से पहले नवाज शरीफ ने सार्क देशों के मुंह पर तमाचा जड़ा था। जियो टीवी के मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने प्लेन में मीडिया से बातचीत में कहा- सार्क ने अपने बनने के बाद से पिछले 30 सालों में कोई खास तरक्की नहीं की है, जबकि यूरोपीय यूनियन और दूसरे क्षेत्रीय संगठन कहीं आगे निकल गए हैं। ऐसे में भारत के पास पर्याप्त अवसर था कि वह सार्क संगठनों में शामिल सभी देशों को इस बात के लिए तैयार करता कि वे पाकिस्तान के दुस्साहस को और अधिक न बढने दें। लेकिन सभी घरों के शेर निकले।

 

? विवेकानंद