संस्करण: 01 अगस्त- 2011

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नार्वे का निक्करधारी

ईसाई आतंकी ब्रेविक से इतना खफा क्यों है संघ

    अंग्रेजी में कहावत है 'बर्डस आफ दे सेम फीदर गैदर टुगेदर' (एक ही किस्म के पंखों वाले पंछी साथ जुटे रहते हैं)। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रस्तुत कहावत पूरी दुनिया में पांव पसार रहे उग्र दक्षिणपंथ पर बिल्कुल फिट बैठती है। नार्वे की राजधानी ओस्लो में सरकारी बिल्डिंग को बम से उड़ा देनेवाले ...........

  ? सुभाष गाताड़े


गीता के नाम पर शिक्षा को साम्प्रदायिक रंग दे रहे हैं

बेल्लारी के नवाब

     र्नाटक के एक मंत्री का बयान आया है कि कर्नाटक के स्कूलों में हिन्दुओं के धर्मग्रन्थ गीता को जो नहीं स्वीकार करेगा उसे यह देश छोड़ देना चाहिए । कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में गीता के अध्ययन को लगभग अनिवार्य कर दिया गयाहै । इसके बारे में जब शिक्षा विभाग के मंत्री ने बात की गयी तो उसने कहा कि गीता इस देश का महाकाव्य हैऔर उसे भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को सम्मान देना चाहिए । 

? शेष नारायण सिंह


यूरोप में नस्लीय घृणा का नया दौर शुरू

      यूरोप के सर्वाधिक संपन्न देशों में से एक नार्वे में जो कुछ घटा उससे न सिर्फ यूरोप वरन् सारा विश्व थर्रा गया। घृणा कैसे किसी व्यक्ति पर हावी हो जाती है,यह घटना उसका जीवंत प्रमाण है। यह घटना 23जुलाई दिन शुक्रवार की है जब एक युवक ने एक कैम्प में शामिल लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं और कुछ ही मिनटों में लगभग 100 लोगों को भून डाला। मरने वालों में बड़ी संख्या में बच्चे व महिलायें थीं। 

? एल.एस.हरदेनिया


संदेह के घेरे में लोकायुक्त संगठन

    न दिनों देशभर में अन्ना हजारे के जन लोकपाल बिल की चर्चा है, जिसे लागू करवाने के लिए वे देशव्यापी आंदोलन करने जा रहे हैं। हजारे को विश्वास है कि इस बिल के लागू हो जाने के बाद भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकेगा। संभवत: यह उनकी खुशफ़हमी है, क्योंकि मध्यप्रदेश में जिस तरह संवैधानिक संस्था भ्रष्टाचार के मामलों की लीपापोती करने में जुटी है,उससे तो यही लगता है कि भ्रष्टाचार सत्य है और शाश्वत भी,लोकायुक्त नामक संवैधानिक संस्था का गठन इसलिए किया गया, 

? महेश बाग़ी


दिग्विजय ने ऐसा क्या कह दिया

    कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह एक बार फिर संघ परिवार के निशाने पर हैं। मध्यप्रदेश में बीजेपीहुकूमत की सरपरस्ती में उनके खिलाफ लगातार विरोध-प्रदर्शन प्रायोजित किए जा रहे हैं। गोया कि पूरा संघ परिवार उन्हें पानी पी-पी कर कोसने में लगा हुआ है। दिग्विजय का कसूर जाने तो वह महज इतना है कि उन्होंने हालिया मुंबई बम धमाकों में किसी भी आतंकी संगठन की भूमिका होने से साफ इंकार नहीं किया था। फिर वह चाहे दक्षिणपंथी हिंदू आतंकी संगठन ही क्यों न हो।

? जाहिद खान


'पर उपदेश कुशल बहुतेरे'

राजनीति का एक असली फंडा

   थाकथित विदूषक अपने ज्ञान और चतुराई को बघारने के लिए किसी मंच पर चढ़ने की जुगत आखिर तलाश ही लेते हैं और तब वे किसी राजनैतिक दल का पल्ला पकड़ लेते है। अपने ज्ञान और अपनी तथाकथित चतुराई का सहारा लेकर ऐसे लोग क्लास-टीचर की भूमिका में आ जाते हैं। ऐसे लोग नेताओं की सूची में अपना नाम दर्ज करा लेते हैं, और वह राजनैतिक दल जिसके वे थिंकटैंक बन जाते हैं, उसको बौध्दिकता का विशेषज्ञ मानकर समय-समय पर उसका चेहरा आगे कर देते हैं।

? राजेन्द्र जोशी


पुलिसिया चेहरे की वीभत्स सच्चाई

       हीं पढ़ा था कि आपका स्वभाव ही आपका भविष्य है। इस सारगर्भित वाक्य में एक बहुत ही बड़ी सच्चाई छिपी है। हमारे देश की पुलिस का स्वभाव कैसा है,इसे हम सभी जानते हैं। इसके बाद ग्वालियर के जीआरपी थाने में एक युवक सुनील तोमर की हत्या से यह स्पष्ट हो जाता है कि  हमारे देश में पुलिसिया चेहरा आज भी बदशक्ल है। पुलिस विभाग में उमराव सिंह उइके और रामनरेश जैसे लोग बहुत ही कम है,जो अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनते हैं।

? डॉ.महेश परिमल


सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता झांसी की रानी में बदलाव के संदर्भ में :-

साहित्य में राजनीति एजेंडा

    राजनीति के स्तर पर अब तक पाठय पुस्तकों में इतिहास के पन्नों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने की कोशिशें होती रही हैं। नए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ऐसा संभव भी है। लेकिन इधर राष्ट्रवाद और राष्ट्रबोध का दंभ भरने वाली मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने साहित्य के साथ खिलवाड़ करते हुए एक रचना की रचनात्कमकता को विकृत कर उसे छठी कक्षा की पाठय-पुस्तक में शामिल किया है। वह भी एक ऐसी लोकप्रसिध्द कविता के साथ जिसके आज भी कई पद लाखों लोगों को कंठस्थ होंगे .............

? प्रमोद भार्गव


परिवार के अस्तित्व के लिए ज़रूरी है :  

महिला-हिंसा पर विराम

     हाल ही में दमोह जिले के आंवरी बरखेरा में दहेज लोलुप पति द्वारा पत्नी का ख़ून पीने की जो घटना उजागर हुई है वह हैवानियत का ऐसा उदाहरण है जो समाज के लिए कलंक है। महेश अहिरवार नामक युवक दहेज की खातिर अपनी पत्नी दीपा को निरन्तर प्रताड़ित कर रहा था। यहां तक कि वह सीरिंज से दीपा का ख़ून निकालकर पी जाता था। उसने दीपा के शरीर के विभिन्न हिस्सों से खून निकालकर पिया और दहेज की मांग पूरी न होने के कारण सात माह की गर्भवती दीपा की जान लेने का प्रयास भी किया।

? डॉ. गीता गुप्त


बाजार में कौन रहे यह उपभोक्ता  की मर्जी?

    केन्द्र सरकार की  मल्टी ब्रांड रिटेल क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए तैयारी है,सचिवों की समिति ने इस क्षेत्र में 51फीसदी तक एफडीआई को मंजूरी पर सहमति जताई है। अब औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग इस पर कैबिनेट नोट तैयार करेगा और संभावना है कि कैबिनेट से स्वीकृति के बाद इसका रास्ता खुल जाएगा।लेकिन इसके विरोधी भी काफी मुखर हो रहें हैं। मुख्य विपक्षी दल बीजेपी द्वारा इसे खुदरा कारोबार से जुड़े देश के तीस करोड़ नागरिकों के रोजगार पर खतरे के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

? डॉ. सुनील शर्मा




  1 अगस्त-2011

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