संस्करण: 19  सितम्बर- 2011

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उनका असली मकसद कुछ और था

            स बात से शायद ही कोई इनकार करेगा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बुजुर्ग समाजकर्मी अण्णा हजारे के नेतृत्व में चले अभियान ने देश के सार्वजनिक जीवन में अभूतपूर्व हलचल पैदा की है। उनके अनशनास्त्र ने देश के हर खास-ओ-आम को भारतीय समाज में व्याप्त इस गंभीर बीमारी के बारे में शिद्दत से सोचने पर मजबूर किया है। लेकिन अण्णा और उनके सहयोगियों यह दावा कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता कि यह अभियान, जिसे कि वे एक व्यापक आंदोलन कह रहे हैं........

  ? अनिल जैन


''वर्तमान स्वरूप के जनलोकपाल बिल को सरकार को हर हाल में क्यों नकार देना चाहिए और, आखिर क्यों नहीं अन्ना हजारे!''

     पने दृष्टिकोण को समझाने के लिए, भारत के 64 वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2011) से जब से मैंने अन्ना हजारे के समर्थकों से बहस की शुरूआत की है,और बदले में मुझ पर राष्ट्र-विरोधी और भ्रष्ट होने के इलजाम लगे हैं,वह भी सिर्फ इस लिए कि मैं अन्ना हजारे का समर्थन नहीं करता,मैं समझता हूँ कि मुझे भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है और इसीलिए मैं अपने विश्वासों को यहाँ पुख्ता स्वरूप में रखना चाहता हूँ जो यह स्पष्ट करेगा - ''वर्तमान स्वरूप के जनलोकपाल बिल को सरकार को हर हाल में क्यों नकारना चाहिए और, आखिर क्यों नहीं अन्ना हजारे!!''।

? गौरव पंधी


अडवाणीजी की रथयात्रा

बहुत देर कर दी मेहरवाँ आते आते

      वैसे तो अडवाणीजी पार्टी संगठन या सदन में किसी पद पर नहीं हैं, पर अटलजी को भुला दिये जाने, व मुरली मनोहर जोशी को हाशिये पर कर दिये जाने के बाद वे भाजपा के सुप्रीमो बन गये हैं। अध्यक्ष कोई भी बना रहे पर उनकी उपेक्षा करके भाजपा में कुछ भी नहीं हो सकता। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी की इस घोषणा के बाद कि अगले चुनाव में किसी को भी भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश नहीं किया जायेगा...

? वीरेन्द्र जैन


राजनीतिक रथयात्राऐं

और उत्तर प्रदेश

    त्तर प्रदेश में राजनीतिक यात्राओं-रथयात्राओं का दौर शुरु हो गया है। तीन खास रथयात्राऐं होंगी, जिनमें समाजवादी पार्टी की रथयात्रा प्रारम्भ हो चुकी है और भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी व प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे की यात्राऐं शीघ्र ही शुरु होनी है। ये सारी यात्राऐं इसलिए हो रही हैं क्योंकि प्रदेश में विधानसभा के चुनाव नजदीक आ चुके हैं और उनकी सिर्फ तारीख घोषित होनी बाकी है।

? सुनील अमर


संघ को सांप्रदायिक बिल से आपत्ति क्यों ?

    तीन साल बाद हुई एकता परिषद की बैठक में भाजपा शासित रायों के मुख्यमंत्रियों ने जमकर हंगामा किया क्योंकि उन्हें सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद द्वारा तैयार किया गया सांप्रदायिक हिंसा विधेयक रास नहीं आया। लेकिन यहां बात भाजपा शासित रायों के अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का है,जिसके इशारे और नीति पर चलते हुए बिल का विरोध किया गया, आखिर एक सबसे बड़े गैर राजनीतिक और समाज सेवक संगठन को किसी कानून से क्या लेना-देना?

 

? विवेकानंद


यह है भाजपा का असली चेहरा

     नैतिकता और शुचिता का दंभ भरने वाली भारतीय जनता पार्टी का असली चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है,कर्नाटक में हुए खनन घोटाले में श्रीनिवास रेड्डी और जी.एस.जर्नादन रेड्डी तिहाड़ जेल की हवा खा रहे हैं। यह पहल कर्नाटक की भाजपा सरकार ने नहीं की है,वह तो उन्हें बचाने में लगी थी। हटाए गए मुख्यमंत्री ने येदियुरप्पा ने तो उन्हें क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन अंतत: कोर्ट ने शिकंजा कसा और अब रेड्डी बंधु जेल में हैं........

 

? महेश बागी


मामा की पुलिस बना रही

भांजियों के एमएमएस: मामा बेबस

       बिहार में लालू यादव ने 15 साल तक लगातार राज किया वह भी बगैर कोई विकास कार्य किये  यह आठवां अजूबा थाविकास के बड़े बड़े दावे करने वाले योध्दा चुनाव हार गये किंतु लालू अजेय रहे लालू ने इस अजूबे को संभव बनाया केवल एक फार्मूले से,वह था गरीब जनता के दिलो में सीधी (घुस) पैठ लालू कभी गांव की महिलाओं को हेलीकाप्टर से राउंड लगवा देते, कभी गरीबों के घर बैठ कर खाना खा लेते, कभी साइकिल पर चलते, ठेठ देहाती अंदाज में लोगों से मिलते और बात करते

? मोकर्रम खान


नरेन्द्र मोदी कर रहे हैं झूठा प्रचार

मोदी निर्दोष नहीं, निचली अदालत तय करेगी-सर्वोच्च न्यायालय

    गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में सर्वोच्च न्यायालय द्वार हाल में दिये गये निर्देश की संपूर्ण देश में मिश्रित प्रतिक्रिया हुई है। जहां भारतीय जनता पार्टी उसे लेकर उत्सवी मुद्रा में है वहीं जिन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका लगाई थी वे इसे अपनी विजय बता रहे हैं। सच पूछा जाए तो वास्तविक स्थिति दोनों के बीच की है। सर्वोच्च न्यायालय ने जहां एक ओर नरेन्द्र मोदी को अपराधी नहीं माना है, वहीं उसने उन्हें निर्दोष भी घोषित नहीं किया है। 

? एल.एस.हरदेनिया


कतिपय नेताओं की नेतागिरी भाषण और बयानबाजी के अलावा जीरो हैं !

बयानों से भावनाप्रधान लोगों का दिल जीतने की अद्वितीय कला,

     तिपय नेताओं की नेतागिरी की पहचान मात्र इतनी होती है कि वे बयानवीर और मंचीय भाषण के अविजात यौध्दा बनना चाहते हैं। ऐसे शख्सों को मैं ही नहीं करोड़ों लोग चिन्हित कर चुके हैं जो भाषणबाजी और मीडिया से जारी उनके द्वारा बताए गये मार्ग पर अपनी नैया मझधार तक ले जाते हैं और बीच मंझधार की लहरों में फंसकर थपेड़ों से घबरा जाते हैं। ऐसे लोग डोंगे का चप्पू वापसी की ओर मोड़कर किनारे पर बैठकर अपना ही सिर धुनते रहते हैं। ऐसे बयानबाजी योध्दा मीडिया में अपना अखाड़ा तैयार कर बयानबाज चेम्पियन का खिताब हासिल कर अपनी लोकप्रियता का पैमाना मानते हैं।

? राजेन्द्र जोशी


25 सितम्बर 'विश्व हृदय दिवस' विशेष

आसान है : हृदय रोगों से बचाव

   

      ल्लेखनीय है कि सितम्बर माह का अन्तिम रविवार 'विश्व हृदय दिवस' के रूप में मनाया जाता है। यह एक जागरूकता अभियान है जिसमें दुनिया भर के चिकित्सक, फार्मास्युटिकल कम्पनियां और सामाजिक संस्थाएं बढ़-चढ़कर भाग लेती हैं। इसका विशेष उद्देश्य हृदय रोग की बढ़ती समस्याओं से छुटकारा पाना है। शोधकर्ताओं का मानना है कि समूचे विश्व में प्रति वर्ष 2.3करोड़ लोग हृदय रोग के कारण मृत्यु के मुख में चले जाते हैं और लगभग बीस लाख ऐसे नये हृदय रोगी सामने आते हैं,जिनकी शल्य क्रिया आवश्यक होती है।

 

? डॉ. गीता गुप्त



व्यंग्य

     

भले हैं बाबा राम देव

रहते नंगे, भरते जेब

आप बना ली दुनिया सारी

हमको देते ज्ञानोपदेश



  19सितम्बर-2011

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