संस्करण: 19अक्टूबर -2009

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मंथन : शिव सरकार की
एक और नौटंकी
हने को मध्य  प्रदेश में एक चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार है, किंतु यथार्थ यह है कि यह सरकार लोकतांत्रिक मानदंडों पर कतई खरी नहीं उतर पा रही है। विकास कार्यों को गति देने की बजाय यह सरकार नौटंकियों में> महेश बागी


 

अप्रासंगिक हो गया सत्ता और राजनीति का पुराना ढर्रा
राहुल गांधी ने उठाया बदलाव का चुनौतीपूर्ण बीड़ा
रानीति और सत्ता के क्षेत्र में गुजरे जमाने की हकीकत कुछ और थी, वर्तमान जमाने की हकीकत कुछ और है तथा आने वाले समय की हकीकतें कुछ और ही होंगी। सामाजिक और राजनैतिक परिस्थितियों और देशकाल की  >राजेंद्र जोशी


 

कर्नाटक में राजा से रंक तक
सभी दे रहे हैं बाढ पीड़ितों को सहायता
यदि समाज में संवेदनशीलता हो तो प्रकृति के प्रकोप से उत्पन्न मुसीबत में उसकी कितनी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है यह कर्नाटक और विशेषकर बंगलौर शहर ने दिखा दिया है। हाल में कर्नाटक में बाढ़ और>एल.एस.हरदेनिया


 

पूजा स्थल -इबादतगाहें नहीं,
ज्ञान के मंदिरों की दरकार

मुल्क भर में सार्वजनिक जमीनों पर मंदिर-इबादतगाहों के अनाधिकृत निर्माण पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के फेसले की हिंदुस्तानी समाज में व्यापक प्रतिक्रिया हुई है। प्रगतिशील और रेशनल समूहों ने जहां >ज़ाहिद खान


 

महिला सरपंच कितनी प्रासंगिक ?
भारत में लोकतंत्र के विकेंद्रीकरण हेतु पंचायती राज व्यवस्था को अपनाया गया। दो अक्टूबर 1959 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस व्यवस्था का शुभारंभ किया था। तब कोई नहीं कह सकता था कि पंचायती राज >डॉ. गीता गुप्त


 

एक बोतल की वापिसी
(मिलते जुलते शीर्षक के लिए मरहूम कृष्ण चंदर की शोहरत से माफी मांगते हुये जिन्होंने मृत्यु से पहले 'एक गधे की वापिसी' नाम से बेहद मशहूर उपन्यास लिखा था) >वीरेंद्र जैन


आदिवासी परिवारों की संतान हैं भारतीय
भारत व भारतीयता के परिप्रेक्ष्य में नए शोध परक अध्यन ने तय किया है कि मूल भारतीय दो आदिवासी परिवारों की संतानें हैं। भारतीयों की उतपत्ति संबंधी इस सिध्दांत को आधुनिक डीएनए तकनीक के माध्यम से व्यापकी>प्रमोद भार्गव


अम्लीय वर्षा एक पर्यावरणीय संकट

संपूर्ण विश्व अभी ओजोन क्षरण और ग्रीन हाउस प्रभाव के दुष्परिणाम से उबर भी नहीं पाया है, कि अम्लीय वर्षा ने पर्यावरण को संकट में डाल दिया है। यह समस्या अभी विकसित देशों में तबाही मचा रही है, लेकिन वह दिल>स्वाति शर्मा


गोपाष्टमी 26 अक्टूबर 2009 के संदर्भ में
नस्ल सुधार से ही संभव है गोवंश संरक्षण

 

शु गणना 1983 के अनुसार देश में 20.5 करोड़ गोवंश था, पशु गणना 1993 तथा 2003 में यह घटकर क्रमश: 19.5 करोड़ और 18.7 करोड़ रह गया है। पिछले 6 वर्षों के दौरान गोवंश की संख्या में लगातार तेजी से कमी> डॉ. सुनील शर्मा


आपका पेट है या कब्रिस्तान
अपने और अपने परिवार वालों के स्वास्थ्य के प्रति बहुत ही संवेदनशील हैं। बच्चे को जरा सी छींक आई नहीं कि हम दौड़े चले जाते हैं डॉक्टर के पास। कितनी अच्छी बात है। पर यही परिवार जब किसी गंदे नाले के>डॉ. महेश परिमल


नक्सलवाद की समस्या
एक गंभीर चुनौती

नक्स
लवाद की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं। नक्सली पुन: संगठित होकर अपनी ताकत बढ़ाते जा रहे हैं। कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र में चुनाव की पूर्व संध्या पर नक्सली हमले में 18 पुलिसवालों की जाने चली> डॉ. सुनील शर्मा


19क्टूबर2009

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