संस्करण: 19 नवम्बर-2012

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राहुल गांधी : दूरदृष्टि पक्का इरादा

           लोकतंत्र की जरूरतें कहती हैं कि जनता उसके साथ चले और उसे ही चुने, जिसके पास भविष्य की दृष्टि और ऐसी योजना या कार्यक्रम हो, जो सम्मानजनक विकास की तस्वीर पेश कर सके। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में लोकतंत्र की यही सोच परिलक्षित होती है। इसीलिए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा को फिर जनादेश मिला है। बावजूद इसके, कि वह उन उम्मीदों पर अपेक्षाकृत खरे नहीं उतरे थे जो उन्होंने पिछले चुनाव में जगाई थी। लोकतंत्र की इस कसौटी पर रोमनी अपने विवादास्पद बयानों के बाद खोटे साबित हुए, जिसमें वे उन गरीब अमेरिकियों की मुखालफत करते नजर आ रहे थे, जो शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरतों के लिए सरकार से आशा लगाए थे।

? विवेकानंद


वैद्य का मोदी पर हमला तो शुरुआत है

असली लड़ाई गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद होगी

        ब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रवक्ता जीएम वैद्य ने नितिन गडकरी की हो रही थू थू के लिए नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदार ठहरा दिया, तो यह अनेक लोगों के लिए एक चौंकाने वाली घटना थी। इसका कारण यह है कि गुजरात में विधानसभा का चुनाव हो रहे हैं और इस तरह के बयान से भाजपा को वहां राजनैतिक नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है। श्री वैद्य आरएसएस की कोई छोटी मोटी शख्सियत नहीं हैं, बल्कि वह इसके प्रवक्ता का पद संभाल चुके हैं। संघ की पत्रिका तरुण भारत के वे संपादक भी रह चुके हैं।

? उपेन्द्र प्रसाद


मोदी और गडकरी को लेकर भाजपा एवं संघ परिवार विभाजित

   स समय (राष्ट्रीय स्वयं सेवक) संघ परिवार में आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर चल रहा है। बात यहीं तक सीमित होती तो गनीमत होती परन्तु अब तो संघ परिवार में षडयंत्रों का दौर प्रारंभ हो गया है। संघ परिवार में षडयंत्र होता है यह बात एक बार तो उस समय सामने आई है जब संघ के तपेतपाये वयोवृध्द स्वयंसेवक म. गौ. वैद्य ने यह आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी के विरूध्द जो मुहिम चल रही है उसके पीछे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का हाथ है। चूँकि यह आरोप संघ के इतने वरिष्ठ कार्यकर्ता ने लगाया है इसलिए उसे कुछ हद तक गंभीरता से ही लिया जाएगा।

? एल.एस.हरदेनिया


संघ से अपने रिश्तों को विराम दे भाजपा 

            संघ के पूर्व प्रवक्ता और वरिष्ठ प्रचारक एमजी वैद्य ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी की कुर्सी हिलाने का आरोपी बनाकर राजनीति में भूचाल ला दिया। अपने ब्लॉग में उन्होंने लिखा है कि मोदी की महत्वाकांक्षा प्रधानमंत्री बनने की है और वे यह भली भांति जानते हैं कि जब तक गडकरी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर काबिज हैं उनकी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति नहीं हो सकती। लिहाजा गडकरी विरोध का केंद्र गुजरात बन गया है।

? सिध्दार्थ शंकर गौतम


एक सरकार की दरकार है

       शासन प्रणाली कोई भी हो, पर उस प्रणाली को चलाने के लिए एक सरकार की जरूरत होती है। दुर्भाग्य से हमारे यहाँ जो आदर्श लोकतांत्रिक प्रणाली है उसे चलाने के लिए जो संस्थाएं हैं वे नाम के लिए भले ही सरकार हों किंतु वास्तव में सरकार होने की शर्त को पूरी नहीं करतीं। वे कानून तो बनाती हैं जो सामान्यत: जनहितैषी भी नजर आते हैं किंतु उन कानूनों को पालन कराने के लिए जिम्मेवार सरकारें, आम तौर पर उन कानूनों के उल्लंघन करने वालों की पक्षधरता में खुद लग जाती हैं और साथ ही कार्यपालिका को सुस्ती करने को प्रेरित करती हैं। ऐसा वे इसलिए भी करती हैं क्योंकि कानून तोड़ने वाले उनका वोट बैंक बनाते हैं और वे अपने सत्तासुख के मोह में उनकी पक्षधरता करने लगते हैं।

 ?   वीरेन्द्र जैन


इरोम शर्मिला थानु को जानना

क्यों जरूरी है ?

                  हात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर नवम्बर माह के पूर्वार्ध्द में हुए एक विशिष्ट किस्म के आयोजन ने राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान नए सिरेसे उस मसले की ओर खींचा, जिसकी तरफ इन दिनों बहुत कम ध्यान जाता है। इस दिन देश के अलग अलग हिस्सों में सक्रिय जनतांत्रिक एवं समतावादी संगठनों ने उत्तरपूर्व एवं कश्मीर में शान्ति एवं भाईचारे का माहौल कायम करने के लिए और इन इलाकों के लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए विवादास्पद सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम 1958को अविलम्ब वापस लेने की मांग की और सुदूर मणिपुर में अपनी ऐतिहासिक भूख हड़ताल के बारहवें वर्ष में प्रवेश कर रही इरोम शर्मिला एवम उनके संघर्ष के प्रति अपनी एकजुटता प्रगट की।

? सुभाष गाताड़े


कविता : अन्त में अन्धेरा है

जीते हुए लोग

अगर वे मृत नहीं है, हम उन्हें देख सकते हैं

कांगलाई में, इस स्व के प्रतिबिम्बित जमीन में

हमारे इतिहास के नये पन्नों पर

लाल स्याही से अंकित

 

? इरोम शर्मिला


बी.बी.सी. के महानिदेशक ने पेश की मिसाल

गलत खबर के प्रसारण पर दिया इस्तीफा

      ब्रिटिश ब्रॉडकॉस्टिंग कारपोरेशन से प्रसारित होने वाली खबरों की विश्वसनीयता पर पहले कभी ऐसा प्रश्नचिन्ह नहीं लगा था जैसा कि पिछले दिनों बी.बी.सी. द्वारा प्रसारित एक नेता के चरित्र हनन से संबंधित समाचार के प्रसारण के बाद हुआ। यूं तो रेडियो, टेलिविजन से प्रसारित होने वाले समाचारों और प्रिंट मीडिया में छपे समाचारों में मसाला खबरों और काल्पनिक आधार पर जारी होने वाली खबरों के प्रसारण को श्रोता या दर्शक सुनते और देखते तो हैं किंतु यह जरूरी नहीं होता कि आम लोग ऐसे मसालेदार, चमत्कार पैदा करने  वाले सनसनीपूर्ण समाचारों को गंभीरता से ले।

? राजेन्द्र जोशी


क्यों स्वच्छ नहीं हो पा रही

यमुना ?

        मारे मुल्क की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण और सफाई अभियान की सुस्त रफ्तार पर अपनी नाराजगी जतलाई है। अदालत ने दिल्ली, हरियाणा और उत्तार प्रदेश की सरकारों से जबाव-तलब किया है कि पिछले 18 सालों में यमुना की सफाई के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए और उसके क्या नतीजे निकले ? अदालत यहीं नहीं रुक गई, बल्कि उसने इस मसले पर खुद पहल करते हुए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली जल बोर्ड के एक-एक अधिकारी की दो सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का भी गठन कर दिया। यह समिति अब जांच करेगी कि इन सरकारों ने यमुना की सफाई के मामले में क्या कोशिशें कीं ?

? जाहिद खान


आम आदमी को लूट रहीं फर्जी कम्पनियॉ

       दीवाली के पूर्व निवेशकों से ठगी करने वाली कम्पनियों की श्रृखंला में एनमार्ट नामक का नाम और जुड़ गया है। खबर है कि रिटेल व्यापार करने वाली इस कम्पनी ने अकेले म.प्र. में निवेशकों से लगभग 1400 करोड़ रूपये ठगी की है। जगह जगह खुदरा उपभोक्ता सामान विक्रय के स्टोर्स खोल कर चेन सिस्टम जरिए निवेशकों से 5500 रूपये जमा कर उन्हें चार साल में दुगुना वापिस करने का लिखित आश्वासन देने वाली यह कम्पनी हर माह अपने स्टोर्स से खरीदी के लिए विशेष कुपन भी देती थी। ये सारी बातें निवेशकों को ललचाने के लिए पर्याप्त थीं। बड़ी संख्या में लोग इस कम्पनी से जुड़ते गए और निवेश करते गए।    

? डॉ. सुनील शर्मा


इरोम शर्मिला का अनशन कब ख़त्म होगा ?

        भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की 'लौह महिला' कहीं जाने वाली इरोम शर्मिला चानू पिछले बारह वर्षों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून को हटवाने के लिए निराहार रहकर गांधीवादी रीति से संघर्षरत हैं। कवियित्री, पत्रकार तथा सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ती इरोम को गत वर्ष भारतीय योजना एवं प्रबंधन संस्थान ने रवीन्द्रनाथ टैगोर पुरस्कार से सम्मानित किया था। पर अत्यंत दु:ख की बात है कि इस विशाल देश की लोकतांत्रिक सरकार, विपक्षी दलों, राष्ट्रीय एवं राज्य महिला आयोगों सहित किसी भी संगठन ने अब तक इरोम के अनशन पर चिंता नहीं जतलायी, न उनका उपवास तुड़वाने की पहल की है।

? डॉ. गीता गुप्त


  19नवम्बर-2012

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