संस्करण: 19 मई-2014

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चुनावी शतरंज में मीडिया के मोहरे

     क टीवी चौनल के लोकप्रिय एंकर ने सही कहा था कि चुनाव परिणाम आने के बाद मीडिया की भूमिका पर देशव्यापी बहस जरूरी हो जायेगी। यह वह एंकर है जो गाँवों से लेकर महानगरों तक, और राजनेताओं से लेकर बुध्दिजीवियों तक लगातार चुनावों से सम्बन्धित चर्चाएं करता रहा है। 2014 के चुनाव पिछले चुनावों से कई मामलों में भिन्न रहे। ये चुनाव सबसे अधिक चरणों वाले और सबसे अधिक समय तक चलने वाले चुनाव थे ताकि शांतिपूर्वक सुरक्षित माहौल में सम्पन्न हो सकें।   

? वीरेन्द्र जैन


'दो राहे पर फंसा संघ'

        अंतिम चरण में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन जब नरेन्द्र मोदी कुशीनगर की जनसभा में किसानों की बदहाली पर घड़ियाली आंसू बहा रहे थे, ठीक उसी वक्त संघ के दिल्ली स्थित कार्यालय में मोहन भागवत के नेतृत्व में भाजपा के बहुमत से दूर होने की स्थिति में उन साथियों की खोज के लिए मंथन चल रहा था जो भाजपा को सरकार बनाने में मदद कर सकें। सन् 1977 के आम चुनावों के बाद, भाजपा की सरकार बनवाने के लिए संघ के कार्यकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर काम किया। भारी भरकम चुनावी खर्च, मीडिया प्रचार, और संघ के कार्यकर्ताओं के स्वयं भाजपा का चुनाव प्रचार करने के बावजूद यह साफ हो गया है कि नरेन्द्र मोदी का प्रभा मंडल एनडीए को बहुमत तक पहुंचा पाने में नाकाम रहा। 

? हरे राम मिश्र


खतरों भरी है पाकिस्तान में पत्रकारिता

     'अभी हाल में पाकिस्तान के एक अत्यधिक प्रभावशाली और प्रसिध्द पत्रकार हामिद मीर पर कातिलाना हमला हुआ था। यह पहली बार नहीं है कि पाकिस्तान के किसी पत्रकार पर कातिलाना हमला हुआ हो। पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की पताका लहराना काफी कठिन काम है। कभी-कभी इस पताका को लहराते हुए पाकिस्तान के पत्रकारों को अपनी जान से तक हाथ धोना पड़ता है। हमले के बाद हामिद मीर ने एक लंबा लेख लिखा है। इस लेख में उन्होंने पाकिस्तान में पत्रकारिता की स्थिति पर विस्तृत प्रकाश डाला है।

 ? एल.एस.हरदेनिया


लोकसभा चुनाव नतीजे के बाद हो सकता है भारी बदलाव

मुलायम सिंह खुद बन सकते हैं मुख्यमंत्री

      लोकसभा चुनाव के नतीजे उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा को बदल सकते हैं। इसका असर तो पूरे प्रदेश के राजनैतिक समीकरण पर पड़ेगा,लेकिन इसका प्रभाव अखिलेश सरकार के अस्तित्व पर भी पड़ सकता है। समाजवादी पार्टी की सरकार को तो कोई खतरा नहीं है,लेकिन अखिलेश यादव मुख्यमंत्री का पद खो सकते हैं और उनकी जगह खुद मुलायम सिंह यादव सरकार का नेतृत्व कर सकते हैं।

? प्रदीप कपूर


देश को गंगा कैसे लौटाएंगे?

अपने अस्तित्व से संघर्ष करती गंगा

             ''न मुझे किसी ने भेजा है,न मै यहाँ आया हूँ, मुझे तो माँ गंगा ने बुलाया है '' वाराणसी में चुनाव प्रचार के लिए नरेंद्र मोदी का ये स्लोगन मीडिया में भाजपा की प्रचार रणनीति का मुख्य हिस्सा था। लोकसभा चुनाव में गंगा की सफाई का मुद्दा एक फिर चर्चा में  है ,भाजपा की तरफ से पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बनारस की जनता से वादा किया है कि गंगा को स्वव्छ और निर्मल बनायेगे। सच बात तो यह है कि पतित पावनी और जीवन दायिनी गंगा खुद अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रही है ।

 ?  शशांक द्विवेदी


क्या विवाह जबरन सहवास का लाईसेन्स जारी करता है ?

           क केस की सुनवाई के दौरान दिल्ली की एक सत्र अदालत ने कहा कि पति का पत्नी के साथ जबरन सहवास करना बलात्कार नहीं है, भले ही पत्नी की सहमति या इच्छा के बगैर हो और इसी आधार पर उसने एक युवक को दोषमुक्त घोषित किया। उपरोक्त युवक पर यह आरोप था कि उसने अपनी पत्नी को नशीला द्रव्य पिला कर उसके साथ बलात्कार किया।

? अंजलि सिन्हा


लड़कियां कब घर लौटेंगी ?

      फ्रीकी देश नाइजीरिया के उत्तर पूर्वी प्रांत बोर्नो के चिबोक शहर के एक विद्यालयीन छात्रावास से पिछले माह 14 अप्रैल को लगभग 300 छात्राओं को अगवा कर लिया गया। अब एक माह बीत चला है, फिर भी छात्राओं का कुछ पता न चल पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। संसार के एक देश में ऐसी भयंकर त्रासदी हुई मगर वर्तमान तकनीक एवं संचार युग में भी उक्त संदर्भ में वांछनीय जानकारी नहीं मिल पा रही है तो ऐसे संसाधनों की उपलब्धता,उनपर किए जाने वाले शोध-अनुसंधान और धन के व्यय का औचित्य क्या है ?

?  डॉ. गीता गुप्त


कब तक वोट बैंक बने रहेंगें मुसलमान ?

     देश में चुनावी नगाड़ा बजते ही मुस्लिम समुदाय राजनीति के केंद्र में आ जाता है, सियासी पार्टियाँ इस सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय के असली हितेषी होने का दम भरने लगती हैं। इस दौरान मुसलमानों के सामने एक तरफ तो वो सियासी जमातें होती है जो उनके हक में काम करने का दावे करते नहीं थकतीं तो दूसरी तरफ दक्षिणपंथी जमातें होती हैं जो उनके तुष्टिकरण का आरोप लगाती हैं।

 

? जावेद अनीस


एंटी सोशल हो रहा सोशल मीडिया

        ई तकनीक ने हमारे समाज में ज्ञान और सुविधाओं का विस्तार किया है। नई तकनीक पर आधारित उपकरण हमारी जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर हमारे कामकाज को अधिक सुविधाजनक बना रहे हैं। इसी सिलसिले में कम्प्यूटर का जिक्र करें तो यह ऐसा चमत्कारी उपकरण है जिसने समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन किये। सूचना की आमजन तक पहॅुच को आसान बनाया। सारा ज्ञान, सारी दुनिया कम्प्यूटर में सिमटकर हमारे घर तक आ गई। घर बैठे -बैठै ही हमने सारी दुनिया को जान लिया।      

? अमिताभ पाण्डेय


वायु प्रदूषण को लेकर हम कब होंगे गंभीर

      मारे देश में प्रदूषण ने आज एक विकराल समस्या का रुप ले लिया है। जिसमें भी वायु प्रदूषण के मामले में स्थिति और भी ज्यादा खराब है। वायु प्रदूषण की स्थिति इतनी नासाज है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की गिनती दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर के रूप में होने लगी है। वायु प्रदूषण को लेकर हाल ही में आया विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक अध्ययन हमें बतलाता है कि दिल्ली की हवा में पीएम 25 (2.5 माइक्रोन छोटे पार्टिकुलेट मैटर) में सबसे ज्यादा पाया गया है।

? जाहिद खान


मातृभाषा की मानसिकता से उबरें

        शिक्षा के माध्यम को लेकर अभी हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश आर.एम. लोढा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने स्पष्ट कहा है कि राज्य सरकारें भाषाई अल्पसंख्यक शिक्षक संस्थानों में क्षेत्रीय भाषाओं को नहीं थोप सकतीं। अदालत  का यह फैसला अत्यन्त महत्वपूर्ण है और इसका दिल खोलकर स्वागत किया जाना चाहिए। यह फैसला कर्नाटक सरकार द्वारा सन 1994 में बनाये गये उस कानून पर विचार करते हुए सुनाया गया है,

? शशिमान शुक्ला


संदर्भ-: सर्वोच्च न्यायालय ने पंढरपुर के विठोवा मंदिर में दलित एवं महिला को दिया पूजा का अधिकार।

दलितों को मिला मंदिर में पूजा का अधिकार

      हाराष्ट्र के 900 साल पुराने पंढरपुर के विठोवा मंदिर में अब निचली जाति के पुरूष एवं महिला पुरोहित पूजा कर सकेंगे। दलितों को यह अधिकार सर्वोच्च न्यायालय ने दिया है विट्ठल रूक्मिाणी मंदिर न्यास के अध्यक्ष अन्ना डेंगे ने इस आदेश पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि यह मंदिरों में पूजा और धार्मिक कार में ब्रह्मणों के प्रभुत्व को समाप्त करने की दृष्टि से ऐतिहासिक फैसला है। अब पूजा और धार्मिक कार सभी जातियों विशेषकर गैर-ब्राह्मण जातियों के लोग कर सकेगें।      

? प्रमोद भार्गव


देश की सौ होटलें बिकने को तैयार! बोलो खरीदोगे?

        देश की कई होटलें इस समय सुस्त चल रहीं हैं। अभी तो वह अपना खर्च भी नहीं निकाल पा रहीं हैं। कर्मचारियों को समय पर वेतन भी नहीं दे पा रहीं हैं। इस स्थिति में एक नहीं, दो नहीं, बल्कि पूरे सौ होटलें हैं। इनके मालिक इन्हें बेचने की तैयारी कर रहे हैं। पर सही दाम न मिलने के कारण मामला अटका हुआ है। होटल व्यवसाय में करोड़ों रुपए की लागत आती है। फिर इसे चलाने के लिए लाखों रुपयों की आवश्यकता होती है। ऐसे में होटल व्यवसाय इन दिनों घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

? डॉ. महेश परिमल



  19 मई-2014

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