संस्करण: 19  दिसम्बर- 2011

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उत्तरप्रदेश को मायावती की 

सनक पर बॉटा नही जा सकता।       

           त्तरप्रदेश में एक कहावत है जो उन चारों क्षेत्रों में समान रूप से प्रचलित है जिन्हे मायावती संयुक्त उत्तरप्रदेश में से बॉटना चाहती है--''जाको राखे सॉइयाँ, मार सके न कोय।'' अर्थात जिसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करता है उसे कोई भी सांसारिक शक्ति नुकसान नही पहुंचा सकती। वर्तमान संदर्भ में उत्तरप्रदेश के लोग ही है जो स्वयं के भाग्यविधाता है।  क्या वे अपने राज्य का विभाजन चाहते है?मजेदार बात यह है कि मायावती के इस कदम से मीडिया के विश्लेषकों,यहाँ तक कि प्रिंट मीडिया के काफी गंभीर लोगों ने भी जनता की इच्छा और उत्तरप्रदेश के जटिल सांस्कृतिक इतिहास को नही समझा। 

  ? अमरेश मिश्रा


पिछड़ा वर्ग और बसपा की सोच

        पिछले महीन बसपा ने राजधानी लखनऊ में दलित-पिछड़ा वर्ग सम्मेलन किया और भारी भीड़ इकट्ठी की। बसपा की रैलियों में भीड़ होती ही है। अगले सप्ताह वह क्षत्रिय और मुस्लिम रैली करने जा रही है। शुरुआत, बसपा ने ब्राह्मण रैली से की थी। प्रदेश में विधानसभा के चुनाव नजदीक हैं,और ऐसे अवसर पर प्रत्येक राजनीतिक दल ऐसी जातिगत रैलियॉ या रथ यात्रा सरीखे अन्य प्रदर्शन करता ही है, सो बसपा की रैलियॉ कोई अपवाद नहीं है, लेकिन यह जरुर देखा जाना चाहिए कि बसपा के इस जाति प्रेम की झलक क्या उसके संगठन और प्रशासनिक फैसलों में भी दिखती है या यह महज चुनावी स्टंट ही होता है।

? सुनील अमर


राजनीतिक दलों में उद्योगपति, भूमाफिया, बिल्डर, और शिक्षामाफिया

      कोई भी भारतीय नागरिक देश में चुनाव आयोग के पास  पंजीकृत डेढ हजार दलों में से कैडर आधारित एक बामपंथी दल को छोड़ कर, किसी भी दल की सदस्यता सरलता पूर्वक ग्रहण कर सकता है और शायद ही किसी दल ने सदस्यता के लिए आवेदन करने वाले नागरिक को साधारण सदस्य बनाने से इंकार किया हो। जो दल साम्प्रदायिक समझे जाते हैं वे भी दूसरे समुदाय के सदस्य मिलने पर अपने ऊपर लगे दाग को धोने का नमूना बनाते हुए उसे खुशी खुशी सदस्यता देते हैं, और अन्यथा न जीतने की सम्भावना वाली सीटों से टिकिट भी देते हैं।

? वीरेन्द्र जैन


कितने ईमानदार हैं भाजपा नेता

          विरोध का शोर मचाने में भाजपा का कोई शानी नहीं है, यह एक बार फिर भाजपा ने सिध्द कर दिया। काले धन से लेकर अवैध उत्खनन और भ्रष्टाचार के हर पायदान पर भाजपा ने स्वयं को ऐसा खड़ा करने की कोशिश की है मानो वह हरिश्चंद हो और शेष पार्टियों के नेता भ्रष्टाचार के दलदल में गले तक धंसे हों। लोकपाल के मुद्दे पर तो भाजपा का रवैया ऐसा है मानो उसने हर बार यह बिल लाने की कोशिश की हो और अन्य दलों के कारण वह इसमें सफल न हो सकी हो। जबकि असलियत यह है कि भाजपा शासित कोई भी राय ऐसा हो जहां भाजपा नेता भ्रष्टाचार में लिप्त न हों।

? विवेकानंद


मध्यप्रदेश में

फैलती अराजकता

         ध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हाल में गांव में आत्मचिंतन कर लौटे। राजधानी में आते ही उन्हें यह अहसास हुआ कि प्रदेश में अवैध खनन हो रहा है। उन्होंने तत्काल वीड़ियों काफ्रेंसिंग की ओर ज़िला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाई जाए। मुख्यमंत्री के इस निर्देश से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। पहला यह है कि पिछले दिनों विधानसभा के शीतकालीन सत्र में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में कांग्रेस ने प्रदेशभर में भारी पैमाने पर हो रहे अवैध खनन का आरोप लगाया था। साथ ही दो मंत्रियों और उनके रिश्तेदारों को भी इस मामले में कटघरे में खड़ा किया था।

 ? महेश बाग़ी


नौकरशाही से

नियत्रंण खोती सरकार

           ''भ्रष्टाचार करने वालों के विरूध्द सख्त कार्यवाही की जायेगी। भ्रष्ट लोगों को बख्शा नहीं जायेगा।'' मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने 6वर्ष से अधिक के कार्यकाल में अब तक सैकडों बार उक्त आशय का ऐलान कर चुके है। भ्रष्टाचार से लड़ाई को लेकर जब जब मुख्यमंत्री ने हुकाँर भरी है,आक्रमक तेवर दिखाये हैं तब घपले घोटालों से जुडी कोई बडी खबर अखबारों की सुर्खियां बन जाती है। चपरासी,पटवारी, आरक्षक, हवलदार से लेकर आई.ए.एस., आई.पी.एस. हो या राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता,नेता अथवा मंत्री,निगम,मण्डल अध्यक्ष। सभी किसी न किसी छोटे या बडे भ्रष्टाचार के आरोप से घिरे है।

? अमिताभ पाण्डेय


जयपुर, मालेगांव, मक्का मस्जिद बेगुनाहों को 'आतंकवादी' साबित करने की इन कोशिशों पर लगाम कब लगेगा?

       राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, अपनी ताजपोशी की तीसरी सालगिरह के मौके पर अपनी एक पुरानी तकरीर को याद नहीं करना चाहेंगे। ढाई साल पहले दिल्ली में आन्तरिक सुरक्षा पर आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में जनाब गहलोत ने यह दावा किया था कि मई 13 2008 को जयपुर में हुए बम धमाके, जिसमें 69 लोग मारे गए थे, का मामला हल हो चुका है। उनके मुताबिक उसके लिए दिल्ली एवं राजस्थान के चन्द रैडिकल युवा तथा 'सिमी' अर्थात स्टुडेण्टस इस्लामिक मूवमेण्ट आफ इण्डिया, के चन्द सदस्य जिम्मेदार थे।

? सुभाष गाताड़े


आंध्र प्रदेश सरकार ने

पेश की एक अनूठी मिसाल

    मारे मुल्क की संवैधानिक व्यवस्था में नागरिक अधिकार बहुमूल्य हैं। राज्य की कोई भी विधि, अध्यादेश, रूढ़ि या प्रशासनिक आदेश इसमें न तो कोई कमी कर सकते हैं और न ही इन्हें विघटित कर सकते हैं। यानी, कोई भी कानून उस सीमा तक शून्य होगा, जिस सीमा तक वह नागरिकाधिकारों का उल्लंघन करता हो। बावजूद इसके व्यवहार में यदि देखें तो नागरिक समाज में इनकी रक्षा को लेकर जागरूकता का अभाव रहा है। यही वजह है कि मुल्क में आए दिन ऐसे मामले सामने आते रहते हैं,जिनमें नागरिक अधिकारों का जमकर उल्लंघन किया जाता है। और ये उल्लंघन वे एजंसियां करती हैं, जिनकी जिम्मेदारी इनके संरक्षण की है।

 

? जाहिद खान


निर्माण कार्यों में लगे कामगारों के हितों की अनदेखी

राज्यों को सुप्रीम कोर्ट की लताड़

     वन निर्माण और विभिन्न निर्माण कार्यों में लगे कामगारों के हितों के संरक्षण के प्रति अनदेखी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में विभिन्न राज्यों को लताड़ लगाई है। सुप्रीम कोर्ट में एक अशासकीय संगठन (एन.जी.ओ.) और राष्ट्रीय अभियान समिति ने इन कामगारों के हितों के संरक्षण के लिए बने कानून का पालन कराने का अनुरोध किया था। उल्लेखनीय है कि निर्माण कार्यों में लगे कामगारों के हितों के संरक्षण के लिए एक कानून 'रेगुलेशन आफ एम्पलायमेंट एंड कंडीशन्स आफ सर्विस' एक्ट 1996 बना हुआ है।

? राजेन्द्र जोशी


मानवाधिकारों की रक्षा में असफल रहा है

म. प्र. मानवाधिकार आयोग

    ध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग प्रदेश के निवासियों के मानवाधिकारों की रक्षा में पूरी तरह असफल रहा है। एक जन सुनवाई के दौरान अनेक लोगों ने आयोग की असफलता के अनेक उदारहण पेश किए।

     जनसुनवाई का आयोजन दिल्ली स्थित ह्यूमन राईट्स ला नेटवर्क द्वारा किया गया था। सुनवाई के लिए एक जूरी पेनल बनाया गया था जिसमें आर.डी.शुक्ल, पूर्व हाईकोर्ट न्यायाधीश एवं पूर्व अध्यक्ष म.प्र. मानव अधिकार आयोग, आर.सी.चंदेल, अवकाश प्राप्त जिला जज, सुभाषचन्द्र त्रिपाठी, पूर्व महानिदेशक म.प्र.पुलिस, एल.एस.हरदेनिया, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक एवं भोपाल स्थित ला यूनीवरसिटी की प्रोफेसर डॉ. राका आर्य थे।

? एल.एस.हरदेनिया


महिला कर्मचारियों की एक अहम जीत

     ड़ान के दौरान महिला क्रू मेम्बर के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ दशकों से जारी संघर्ष में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। महिलाओं के एक छोटेसे समूह ने हासिल की यह छोटीसी जीत जो सुपरवाइजर पद से सम्बधित है, महिलाओं के विभिन्न स्तरों पर जारी भेदभाव के खिलाफ एक अहम जीत है। ज्ञात हो कि एअर इण्डिया के विमान के अन्दर काम करनेवाले महिलाओं ने अपने लिए बराबर के ओहदे की मांग की थी। यहां उडान के दौरान काम करनेवाली महिलाओं को सुपरवाइजर का पोस्ट नहीं मिलता था।

? अंजलि सिन्हा


डरबन में भारत की चहुॅओर जीत

    लवायु परिवर्तन की समस्या को लेकर डरबन में आयोजित सम्मेलन की समाप्ति के बाद हम गर्व महसूस कर सकते है क्योंकि दुनिया ने हमारे  प्रतिनिधि मंडल की बात स्वीकार  कार्बन की गर्मी से तपती धरती को राहत दिलाने के लिए आगे कदम बढ़ाया है। हम सभी जानते है कि कार्बन उत्सर्जन विकास की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है लेकिन इसके कारण बढ़ते वैश्विक ताप और जलवायु में आ रहे परिवर्तन से जल में समाने तैयार धरती का अस्तित्व ही खतरें में हैं। इसके बाद भी कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार विकसित राष्ट्र इसमें कटौती की बात स्वीकार करने की बजाए विकासशील देशों पर ही इसका आरोप मढ़ते रहे हैं।

 

? डॉ. सुनील शर्मा


सिंगरौली : कोयले की खदानों में टीबी का दर्द

     धूल और धुएं का टीबी से सीधा संबंध है, वहीं यदि बात कोयले की खदान वाले इलाके की हो तो बात और भी गंभीर हो जाती है। क्योंकि कोयले की खान में काम करने वाले और उस क्षेत्र में निवास करने वाले लोग प्रतिदिन बडी मात्रा में कोयले की धूल और धुएं के शिकार होते हैं। वे जहां खदान में काम करते हुए बड़ी मात्रा में कोयले की धूल श्वांस के साथ फेफड़ों के अंदर लेते हैं।

? दयाशंकर मिश्र


सरकार ने डाले : न्यायाधीशों की ज़बान पर ताले

    पिछले दो-तीन वर्षों में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की टिप्पणियों से सरकार कई बार आहुत हुई है। आहत सरकार ने अन्तत: ज्यूडिशियल (स्टैण्डर्ड एण्ड अकाउण्टबिलिटी) बिल 2010 में एक महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़कर उनकी अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर लगाम लगाने की तैयारी कर ही ली है। संसदीय समिति ने 30अगस्त को न्यायाधीशों के विरुध्द ओछी शिकायतों के मुद्दे पर अपनी रपट प्रस्तुत करते हुए सिफ़ारिश की थी कि उच्च एवं सर्वोच्च न्यायालयों के कार्यरत न्यायाधीश जटिल मुद्दों, राजनीतिक मसलों, लम्बित मामलों और न्यायालयों में किसी संवैधानिक संस्था या कार्यालय के विषय में सरेआम या जनता के बीच अपनी राय व्यक्त न करें।

? डॉ. गीता गुप्त


  19  दिसम्बर-2011

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