संस्करण: 19 अगस्त-2013

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT


भाजपा तय कर ले पहले कौन डूबेगा

       भारतीय जनता पार्टी के अघोषित पीएम इन वेटिंग गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जून को हैदराबाद में जो भाषण दिया और जिस तरह पाकिस्तान के कायराना हमलों और चीन की घुसपैठ पर यूपीए सरकार को खरीखोटी सुनाईं,उससे किसी देशवासी के असहमत होने का तो सवाल ही नहीं है। हर देशवासी अपने देश को दुनिया का सरताज देखना चाहता है,उसकी ओर आंख उठाने वालों का विनाश चाहता है। नरेंद्र मोदी ने शायद आम आदमी की इस भावना को आंदोलित करने के लिहाज से न केवल यह बयान दिया बल्कि विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को डूब मरने की सलाह दे डाली।    

? विवेकानंद


चुनावों में जाति के नाम पर भटकाव कब तक ?

        मारे स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नायकों में से एक सुभाष चन्द्र बोस ने कहा था- तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा। यह कर्म और प्रतिफल का सिध्दांत दर्शाता है।

                किसी भी त्याग की अपेक्षा के लिए कुछ लक्ष्य निर्धारित किये जाते हैं। लोग धार्मिक सलाहों पर दान देते समय भी कल्पित सुखदायी स्वर्ग में अपना स्थान सुरक्षित होने की संभावनाओं से प्रभावित रहते हैं। किंतु चुनावों में जातिवाद पर अधारित समर्थन एक निरर्थक भटकाव के अलावा कुछ भी नहीं है।

?

वीरेन्द्र जैन


ऐसा क्या कह दिया था कि रजा मुराद पर क्यों भड़के भाजपा के नेता

      गता है अब भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार के सदस्य सपने में भी नरेन्द्र मोदी की आलोचना सहन नहीं कर पाते हैं। ईद के दिन जानेमाने अभिनेता रजामुराद जो भोपाल के रहने वाले हैं, भोपाल की ईदगाह पर ईद की बधाईयां देने पहुंचे थे। ईद मिलन के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को किसी ने टोपी पहना दी और चौहान ने सहजता से उस टोपी को पहन लिया। उसी दरम्यान रजा मुराद ने यह कह डाला कि टोपी पहनने से धर्म नहीं बदलता, उनने यह भी कहा कि किसी को भी किसी की टोपी पहनने से इंकार नहीं करना चाहिए। विशेषकर उच्च पद पर बैठे लोगों को, क्योंकि उनकी जिम्मेदारी सभी को साथ ले चलने की है।

 ? एल.एस.हरदेनिया


अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अपराधीकरण

दलित लेखक कंवल भारती पर लगे कब वापस होंगे ?

      नागरिक अवज्ञा हमारी समस्या नहीं है। हमारी समस्या है नागरिक आज्ञाकारिता/हुक्मबरदारी। हमारी समस्या है दुनिया भर के तमाम लोगों द्वारा अपनी सरकारों के नेताओं के निर्देशों पर किया गया अमल,उनके आदेशों पर किए गए युध्द और इसी आज्ञाकारिता के कारण मारे गए करोड़ो लोग। हमारी समस्या है कि गरीबी,भूखमरी, युध्द और बर्बरता के समक्ष आज्ञाकारी बने दुनिया भर के लोग। हमारी समस्या है कि आज जबकि दुनियाभर के कारागार मामूली चोरों से भरे हैं और जबकि बड़े चोर मुल्क को चला रहे हैं और लूट रहे हैं,फिर भी लोग आज्ञाकारी बने हुए हैं।

? सुभाष गाताड़े


मोदी बनाम मुलायम और मुसलमान

         गामी लोकसभा चुनाव में भाजपा नेता नरेन्द्र मोदी अगर प्रधानमंत्री पद के दावेदार रहते हैं तो उन्हें केन्द्र में आने से रोकने के लिए उत्तर प्रदेश के मुस्लिम मतदाता किसको समर्थन दे सकते हैं? समाजवादी पार्टी को या यूपीए की हेड कॉग्रेस को? यह एक ऐसा सवाल है कि जिसका उत्तर देश की आगामी राजनीति की दिशा तय करेगा और सपा प्रमुख मुलायम सिंह का भी। सभी जानते हैं कि समाजवादी पार्टी मुसलमानों की खैरखाह दिखने का कोई भी अवसर नहीं छोड़ती और उत्तर प्रदेश में अपने गठन के समय से ही सपा मुसलमानों का समर्थन पाती रही है।

 ?   सुनील अमर


मध्यप्रदेश में फैली भ्रष्टाचार की अमरबेल

           ध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भ्रष्टाचार को नासूर मानते हैं और उसके खात्मे के लिए कड़ा कानून बनाने का दावा भी करते हैं। इसके अलावा वे अपने ब्लॉग पर भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ने का संकल्प भी व्यक्त करते हैं, किंतु उन्हीं की नाक के नीचे भ्रष्ट मंत्री और अधिकारी न सिर्फ मौज मजे कर रहे हैं, बल्कि अपनों को उपकृत करने में भी लगे हैं। लोकायुक्त ने भी इस सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार पर चिंता जताते हुए अपरोक्ष रूप से सरकार को चुनौती भी दी है। 

? महेश बाग़ी


राजनीति है या नौटंकी

      नाटक कम्पनी के कलाकारों को जब नाटक ही करना है तो उनको कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि वे कब, कहां किस मंच पर कौनसा नाटक खेल रहे हैं और उन्हें किस तरह के रोल में किस तरह का मेकअप करना चाहिए या किस तरह से उनकी कास्टयूम होना चाहिए। एक मान्यता यह भी है कि यह दुनिया एक रंगमंच है जिसपर प्रत्येक व्यक्ति एक कलाकार के रूप में अपनी भूमिका अदा करता चला आ रहा है। प्रत्येक कलाकार उसे मिले अभिनय के अनुरूप सजता-संवरता है, मेकअप करता है और पात्र के चरित्र के मुताबिक अपने हावभाव पेश करता है और उसी की तरह की वेशभूषा में रंगमंच पर उपस्थित होकर अपनी अदाकारी को अंजाम देता है।। 

? राजेन्द्र जोशी


इशरत के परिवार के साथ ईद

      कुछ वर्ष पहले आजमगढ़ की एक सभा में, मेरी मुलाकात इशरत जहां की मां, शमीमा से हुई थी। ज्यादा बात करने का मौका तो नहीं मिला, लेकिन उनकी खामोश शालीनता ने मुझे बहुत प्रभावित किया। इस वर्ष, जब मुझे पता चला कि ईद के मौके पर मैं मुंबई में रहूंगी,तो मैंने उनसे संपर्क किया और पूछा कि क्या मैं उनसे और उनके बच्चों से ईद मिलने उनके घर आ सकती हूं।

 

? सुभाषिनी अली


सभी विकल्प खुले रखे सरकार

        से भारत सरकार की दिग्भ्रमिता कहें या विपक्ष की ओर से पड़ता चौतरफा दबाव, कश्मीर के पुंछ में पाकिस्तान के कायरतापूर्ण हमले का सीधा असर अब दोनों देशों की बातचीत पर पड़ता नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच सचिव स्तर की बातचीत फिलहाल रोक दी गई है। दरअसल अक्टूबर तक हर महीने भारत और पाकिस्तान के बीच उच्च स्तरीय बातचीत की जानी थी। यह बातचीत सर क्रीक के जरिए पानी की साझेदारी पर चल रही थी। पाकिस्तान ने अगली बातचीत के लिए तारीखें सुझाई थी, लेकिन सीमा पर बढ़े तनाव के बाद भारत ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया।  

? सिध्दार्थ शंकर गौतम


मानसिकता बदले तो

रूकेगी महिला हिंसा

       हिलाओं के साथ होने वाली अपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए सरकारी और सामाजिक स्तर पर जो प्रक्रिया चलाई जा रही हैं,वे अब तक हिसां को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं कर पाई हैं। इसका नतीजा यह है कि महिलाओं के साथ होने वाले अपराध का प्रतिशत बढ रहा है। देश-विदेश-प्रदेश से लेकर गॉव-शहर, गली-मुहल्ले तक में महिलाओं के साथ हो रही हिंसा बताती है कि अपराधी मानसिकता के पुरूष उनकों आसान शिकार समझते हैं। एकांत हो या भीड भरे इलाके महिलाओं के साथ कभी भी ,कुछ भी घटना हो सकती है।     

 

? अमिताभ पाण्डेय


डीजिटल ड्रेगन का बढ़ता जाल

        ज हर कोई कंप्यूटर या मोबाइल से इस तरह से जुड़ गया है, मानो उससे बढ़कर बेहतर चीज दुनिया में कोई है ही नहीं। लोग दिन भर कभी कंप्यूटर तो कभी अपने मोबाइल से चिपके रहते हैं। इसमें उनका कितना वक्त बरबाद होता हे, इसका आभास उन्हें अभी नहीं है, पर पानी जब सर से ऊपर निकल जाएगा, तब शायद समझ में आ जाए। कंप्यूटर तो शायद कुछ लोगों के पास है, पर मोबाइल जिस तरह से एक नशे के रूप में हमारे सामने आया है, उससे यही लगता है कि आज के युवाओं के पास अब कोई काम ही नहीं बचा। एक शोध से पता चला है कि दिन भर कंप्यूटर और मोबाइल के उपयोग से अंगूठा और पंजों में पीड़ा होती है, माऊस के उपयोग से भी स्नायु में दबाव बढ़ रहा है। 

? डॉ. महेश परिमल


संशोधित विवाह-कानून क्या स्त्री को सशक्त बनायेगा ?

संदर्भ : सरकार द्वारा प्रस्तावित विवाह (संशोधन) विधेयक

       भारत में विवाह और तलाक संबंधी कानूनों में सुधार की कवायद लम्बे समय से चल रही है। इसके पीछे एक ही उद्देश्य दर्शाया जाता है और वह है-स्त्री के हितों की रक्षा। वैसे तो विवाहित स्त्री अपने पति और पिता,दोनों की सम्पत्ति में अधिकार रखती है परन्तु व्यवहार में इसकी विसंगति या कमी तब उजागर होती है जब उसका वैवाहिक जीवन ठीक पटरी पर नहीं चलता अथवा विवाह विच्छेद हो जाता है। यद्यपि उसे तलाब के बाद कानूनन पति से अपने और अपने बच्चों के भरण-पोषण हेतु प्रति माह एक निश्चित राशि प्राप्त होती है तथापि उसके सिर पर छत की समस्या तो बनी रहती है।    

 

? डॉ. गीता गुप्त


  19 अगस्त-2013

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved