संस्करण: 18 नवम्बर-2013

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प्रधानमंत्रीपद के लिए अहमक ?

नमो के इतिहासबोध पर एक नज़र

       'इसे पागलपन अवश्य कह सकते हैं, मगर उसके पीछे भी एक प्रणाली दिखती है।'

             - हैम्लेट, शेक्सपीयर

            1. नए शब्दों को गढ़ने में माहिर विद्वतजनों के लिए एक बेहद जरूरी काम आ उपस्थित हुआ है। मसला है दक्षिण एशिया के इस हिस्से में राजनीतिक भाषणों के नाम पर जो बातें परोसी जाती है, उन्हें क्या नाम दिया जाए ?

? सुभाष गाताड़े


नरेंद्र मोदी का इतिहासबोध भी सरदार पटेल

को आर एस एस का हमदर्द नहीं बना सकता

        जकल आर एस एस बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी अपनी पार्टी की राजनीति को इतिहाससम्मत बनाने के काम में जुटे हुए है। इस चक्कर में वे बहुत ऊलजलूल काम कर रहे हैं। अभी गुजरात में किसी भाषण में उन्होंने कह दिया कि उनकी पार्टी के संस्थापक डॉ श्यामा  प्रसाद मुखर्जी 1930 में स्विट्जरलैंड में मर गए थे जबकि इतिहास का कोई भी विद्यार्थी बता देगा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु 1953 में कश्मीर में हुई थी। पटना के भाषण में उन्होंने कह दिया कि सिकंदर गंगा नदी तक आया  था। या कि तक्षशिला बिहार में था।

? शेष नारायण सिंह


झूठ, झुंड और बीजेपी की

झगड़ालू जुबान

     झूठ, झुंड और झगड़ालू प्रवृत्ति के लोग, आमतौर पर यह मिश्रण उन चौक चौराहों में पर मिलता है, जहां फालतू लोगों के एकत्र होते हैं। झूंड में अपनी धाक जमाने के लिए यह लोग जमकर झूठ बोलते हैं, और कई बार जब उन्हें लगता है कि वे कमजोर पड़ रहे हैं तो ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं कि झगड़ा हो जाए। ऐसे लोगों के बीच यदि कोई सभ्य व्यक्ति खड़ा होकर कुछ बोलता है तो उसकी आवाज सुनी नहीं जाती या शोर में दब जाती है। मौजूदा राजनीतिक माहौल में यह प्रवृत्ति अच्छी खासी पैठ बना चुकी है और यह कहने में कोई पूर्वाग्रह या अतिश्योक्ति नहीं है कि राजनीति में इस सड़कछाप संस्कृति को लाने का श्रेय चाल-चरित्र और चेहरे की दुहाई देने वाली भारतीय जनता पार्टी को जाता है।

 ? विवेकानंद


आर.एस.एस. का असली इरादा भारत के वर्तमान स्वरूप को ध्वस्त करना है

      स समय अनेक लोग यह मत प्रगट कर रहे हैं कि अगला चुनाव (लोकसभा) कांग्रेस और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच होगा। जब ऐसा कहा जाता है तो इसका अर्थ यह होता है कि अगला चुनाव दो विचारधाराओं के बीच होगा। जब हम कांग्रेस की विचारधारा की बात करते हैं तो उसमें अकेले आज की कांग्रेस की विचारधारा शामिल नहीं है। उसमें वह विचारधारा शामिल है, जो आजादी के पहले कांग्रेस की विचारधारा थी, जिसमें लोकतंत्र, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता शामिल हैं।   

? एल.एस.हरदेनिया


इंसाफ और पुर्नवास से दूर होते

दंगा पीडित

        इंसाफ और पुर्नवास से दूर होते दंगा पीडित उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार के लिए इसे शर्मनाक ही कहा जाएगा कि पिछले दो महीने से अधिक समय से मुजफ्फरनगर,शामली व आस-पास के जिलों में सांप्रदायिक हिंसा के शिकार और लाखों की संख्या में विस्थापित मुस्लिम परिवारों के लोग विभिन्न राहत कैंपों में आज तक नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। प्रदेश सरकार पिछले दो महीने में सांप्रदायिक हिंसा के जिम्मेदारों के खिलाफ जहां प्रभावी कानूनी कार्यवाही करने में बुरी तरह असफल रही है,वहीं दूसरी ओर पीडितों के वाजिब मुआवजा, पुर्नवास,सुरक्षा जैसे मूलभूत सवालों को हल करने में भी वह नाकाम साबित हुई हैं।

 ?   हरेराम मिश्र


मध्य प्रदेश सद्भाव का भ्रम बनाने की कोशिश

           जिस पार्टी की सरकार में कभी सूर्य नमस्कार की अनिवार्यता व यूएपीए कानून की आड़ में मुसलमानों को लगातार जलील और प्रताड़ित करने का काम किया गया हो वहाँ उसी पार्टी द्वारा करीब 20सालों बाद चुनाव में किसी अल्पसंख्यक उम्मीदवार को प्रत्याशी बनाने की कवायद जरूर चौंकाने वाली है। गौरतलब है कि  भारतीय जनता पार्टी ने कथित समावेशी विकास पुरुष शिवराज सिंह चौहान को धर्मनिरपेक्ष स्वरूप प्रदान करने की प्रक्रिया में मधय प्रदेश में मुसलमानों के वोट हथियाने के लिए एक मुस्लिम उम्मीदवार को 20सालों बाद पार्टी का टिकट प्रदान किया है।  

? अनुज शुक्ला


म.प्र. भाजपा प्रत्याशी चयन

उमा भारती के हिस्से कुल चार सीटें

      म.प्र. भाजपा के टिकिट वितरण संग्राम में उमा भारती को उनकी हैसियत से परिचित करा दिया गया है। विरोधियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ फायर ब्रांड लीडर बतायी जाने वाली उमा भारती जब अपनी मूल पार्टी के खिलाफ ऑंखें तरेरने के बाद सरेंडर हो गयीं तो उनको गंगा सफाई अभियान की ठेकेदारी और वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसा दिखावटी पद सौंप दिया गया। उसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री पद प्रत्याशी घोषित करने का मजाक भी किया गया क्योंकि देश और प्रदेश में कोई भी नेता या विश्लेषक भाजपा या उसके किसी गठबन्धन की सरकार बनने की उम्मीद नहीं कर रहा था।

?  वीरेन्द्र जैन


मुस्लिम समुदाय के बच्चों में कुपोषण के सामाजिक एवं आर्थिक कारणों का गुणात्मक अध्ययन

(भोपाल शहर के विशेष सदर्भ में)

     मध्यप्रदेश में कुपोषण की स्थिति चिंताजनक है। देश के कुल नवजात मृत्यु दर और बाल मृत्यु दर में मधयप्रदेश सबसे बड़े योगदानकर्ता प्रदेशों में से एक है।

             राष्ट्रीय कुपोषण संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 51.9 प्रतिशत बच्चे कुपोषण की गिरत में है।

 

 

? जावेद अनीस/उपासना बेहार


चुनाव में आधी आबादी

        पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों का बिगुल फूंका जा चुका है। लगभग सभी राजनैतिक पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों की सूचि जारी कर दी है। इन सूचियों पर घमासान भी जारी है और कुछ पार्टियां इन सूचियों में थोड़ा हेरफेर भी करेंगी। महिलाओं के हितैषी होने के दावे के बावजूद फिर इस बार कैंडिडेट के रूप में अवसर अधिक नहीं मिले हैं। वैसे यह बात कोई कह सकता है कि अचानक उम्मीदवारी घोषित करना पार्टियों के लिए आसान भी नहीं रहा होगा, लेकिन वह इस हिसाब से पहले से तैयारी क्यों नहीं कर पायी यहभी मुद्दा है और यह इसी बात को साबित करता है कि उनकी मंशा में खोट है। महिलाएं अपना जनाधार विकसित कर सकें इसके लिए उन्हें वह तैयारी का अवसर उन 5 सालों के भीतर चाहिए होगा।

? अंजलि सिन्हा


युवाओं की राह में सरकारी बाधाऐं

      दुनिया में सबसे ज्यादा युवा भारत में हैं और सबसे ज्यादा बदहाल भी। अनुमान इस बात से लगाइए कि विश्व में सर्वाधिक युवा भारत में आत्महत्या करते हैं। किसी भी देश में युवा शक्ति वहाँ का एक ऐसा प्राकृतिक संसाधन होता है जिससे असीमित विकास की संभावनाऐं बनती हैं लेकिन अपने देश में 66 प्रतिशत आबादी 35 साल से कम उम्र की होने के बावजूद देश में किसी भी प्रकार के परिवर्तन की कोई हलचल नहीं है। हमारे युवाओं में योग्यता की कमी नहीं है। कमी संसाधनों के समान वितरण में है। अरुणिमा सिन्हा जैसी एक साधारण घर की लड़की जो अभी दो साल पहले ट्रेन में लुटेरों का शिकार हुई तथा अपना एक पैर गवाँ बैठी।      

 

? सुनील अमर


कहां ले जाएगी

उत्पीड़न की यह मानसिकता

        कार्मिक मंत्रालय ने कहा है कि अफसरों के खिलाफ  दर्ज इन मामलों से जुड़ी जानकारियां खुलासे के दायरे में नहीं आतीं। दरअसल कार्मिक मंत्रालय से पिछले दस साल के दौरान अखिल भारतीय सेवा दआईएएसए, आईपीएस और इंडियन

              फॉरेस्ट सर्विस के अफसरों के खिलाफ  दर्ज यौन उत्पीड़न के मामलों की जानकारी मांगी गई थी। लेकिन कार्मिक मंत्रालय ने सूचना के अधिकार के किसी एक्ट के प्रावधान के बजाय सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देकर इससे इनकार कर दिया। हमारी सरकार ने भारत की आधी आबादी के सशक्तिकरण और मुक्ति की परिभाषा गढ़ने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है।

? राखी रघुवंशी


इक्कीसवीं सदी पानी की तंगी की सदी

      मारे बुजुर्ग कह गए हैं कि पानी को घी की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। पर आज यह सीख ताक पर रख दी गई है। अब तो पानी का इतना अधिक दुरुपयोग होने लगा है कि पूछो ही मत। इसे देखते हुए यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि 21वीं सदी पानी की तंगी के लिए जानी जाएगी। आज पानी का सबसे अधिक दुरुपयोग शहरियों एवं कारखानों में किया जा रहा है। मुम्बई एवं दिल्ली जैसे शहरों की महानगरपालिकाओं नागरिकों को 24 घंटे पानी देने का की योजना बना रही हैं। इस समय मुम्बई के नागरिकों को औसतन 5घंटे पानी दिया जा रहा है।      

 

? डॉ. महेश परिमल


  18 नवम्बर2013

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