संस्करण: 18  जून-2012

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सर्वोपरि तो संसद ही रहेगी

           ब अंगुली सांसदों पर उठती है, तो साफ है कि उन्हें चुनने वाली जनता पर भी अंगुली उठाई गई है। सड़क पर बेवजह ड्रामा भीड़तंत्र है, लोकतंत्र नहीं।

                मेरे दिमाग में जो दो प्रश्न है। अगर आपके पास इनके जवाब हों, तो जरूर बताए। पहला, कितने लोग भारतीय संविधान पर विश्वास नहीं रखते हैं, यानी वे लोग जिनका भरोसा संसदीय प्रणाली से उठ गया है ? और दूसरा, अगर सचमुच उनका भरोसा संसदीय लोकतंत्र से पूरी तरह से उठ गया है, तो उनके पास इसका क्या विकल्प है ? मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि आप खुद को निरुत्तर पाएंगे।

  ? सोमनाथ चटर्जी


हमारे वक्त में मैकबेथ !

आखिर प्रचारक संजय जोशी से जनाब मोदी इतना डरते क्यों हैं ?

        हान नाटककार शेक्सपियर की एक चर्चित रचना है 'मैकबेथ।' प्रस्तुत नाटक एक स्कॉटिश सेनापति मैकबेथ की जबरदस्त सत्तापिपासा, राजा बनने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए उसकी तैयारी, यहां तक कि अपने कहे जानेवाले लोगों को भी बली बनाने की उसकी कोशिशें और इस काम में उसे सहयोग प्रदान करती उसकी पत्नी लेडी मैकबेथ के इर्दगिर्द घुमता है। राजा बनने के लिए आमादा मैकबेथ स्काटलंण्ड के न्यायप्रिय राजा डंकन की भी हत्या कर देता है। नाटक एक टै्रजेडी है जिसमें अन्तत: लेडी मैकबेथ आत्महत्या कर लेती है तो मैकबेथ जान को हाथ धो बैठता है। 

? सुभाष गाताड़े


रीढ विहीन होती जाती भाजपा

    जैसे कि सुब्रम्हण्यम स्वामी उस जनता पार्टी के प्रमुख हैं जिस नाम की पार्टी ने कभी इमरजैन्सी लगाये जाने से आक्रोशित जनता का समर्थन हासिल करते हुए केन्द्र में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनायी थी, पर  सुब्रम्हण्यम स्वामी की यह जनता पार्टी,आज वही जनता पार्टी नहीं है केवल उसका साइनबोर्ड भर है। वैसे ही अब भाजपा रूपी जनसंघ वह पार्टी नहीं रह गयी है जो आज से कुछ दशक पहले थी, या अपने जनसंघ रूप में जन्म लेने के समय थी। इसकी रीढ टूट चुकी है और अब यह एक अपंग पार्टी हो गयी है।

? वीरेन्द्र जैन


क्या भारत का संविधान

एक लॉग-बुक है?

          सा कहा जा रहा है कि प्रस्तावित राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी केन्द्र (एन.सी.टी.सी.) के मामले में दिल्ली में हाल ही में हुई मुख्यमंत्रियों की बैठक में कुछ मुख्यमंत्रियों ने देश संघीय ढाँचे में अपनी शिकायतों के मद्देनजर संविधान की समीक्षा की माँग उठाई। पदोन्नतियों में आरक्षण पर दिये अपने ताजा फैसले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राजनीतिक वर्ग से तथा प्रधानमंत्री से संविधान के अनुच्छेद 16(4) में संशोधन करने की अपील की है, जो एक दशक में तीसरी बार है। इस प्रकार की कार्यवाहियाँ हमें निराश करती है क्योंकि संविधान के मूल्यों को बरकरार रखने वाले लोगों ने ही संविधान के प्रति अपने आदर में कमी दिखाई है।

? के.एस.चलम


सहारा तलाशती अमरबेलें

         मरबेल को यदि सहारा न मिले तो उसका जीवन संकट में पड़ जाता है। लेकिन यह बहुत विनाशकारी लता है, जिस पेड़ का सहारा लेती है, उसे सुखाने में कोई कसर बाकी नहीं रखती है, अमरबेल पौधे को बढने नहीं देती, फूलने नहीं देती,फलने नहीं देती। इसलिए बेहद उपयोगी होने के बावजूद इसे हर पेड़ सहारा नहीं देता अधिकांशत बबूल, कीकर, बेर यानि कांटों वाले पौधों पर ही यह परवान चढ़ती है।

 ? विवेकानंद


फीकी पड़ गई अन्ना वाणी

                  पने साथियों के विवादास्पद बयानों के कारण और अपनी बेबसी के कारण अन्ना की आवाज में अब लोगों में जोश भरने का दम नहीं रहा। टीम के सदस्यों द्वारा समय-समय पर सीधे प्रधानमंत्री को निशाना बनाया जा रहा है। पहले प्रशांत भूषण ने प्रधानमंत्री को शिखंडी कहा, अब हाल ही में किरण बेदी ने प्रधानमंत्री को धृतराष्ट्र कहा है। ऐसे ही बयानों से पूरी टीम की छवि धूमिल हो रही है। अधिक समय नहीं हुआ है,जब लोग अन्ना टोपी पहनकर गर्व महसूस करते थे। पर अब बार-बार बदलते बयान के कारण लोग अब उन्हें उतनी प्राथमिकता नहीं देते।

? महेश परिमल


अकाली दल का एसजीपीसी ग्रंथी को समर्थन भाजपा भी अवसरवादिता दिखा रही है

       चंडीगढ़: पिछले दिनों कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं, जो पंजाब और देश के लिए शुभ नहीं हैं। दोनों घटनाएं एक दूसरे से जुड़ी हैं। उन घटनाओं पर सत्तारूढ़ अकाली दल ने जो रवैया अपनाया है, वह आपत्तिजनक तो है ही, सहयोगी भाजपा ने चुप्पी साधकर अपनी अवसरवादिता का प्रदर्शन किया है।

? बी.के.चम


मप्र लोनिवि में फर्जीवाड़ा

      निर्धारित से कम चौड़ाई की सड़कें, सिलेक्टेड स्वाइल की परत की मोटाई आधी,  लेकिन भुगतान पूरा? लोक निर्माण विभाग में  सड़क निर्माण की यह बिटलू-तकनीक  पिछले कुछ वर्षों से खूब परवान चढ़ रही है।  बिटलू महराज के 'काबिल' अधिकारियों ने  इस तकनीक का सफल प्रयोग मुख्यमंत्री के  पूर्व संसदीय क्षेत्र विदिशा जिले के शमशाबाद  क्षेत्र में बनी एक सड़क से किया है। इसतकनीक में सड़कें भले ही बनते-बनते टूट-फूट जाती हों,लेकिन संबंधित अधिकारी, ठेकेदार और खुद मंत्री महोदय के लिए संभवत: यह भारी मुनाफे का सौदा साबित होगा, तभी तो अनियमितताओं के उजागर हो चुके मामलों में सभी की जुबां खामोश है?

? महेश बाग़ी


कई लाड़लियों को है रोजी-रोटी की तलाश

कूड़े-कर्कट के आसपास

        स्तियों में जगह-जगह कूड़े-कर्कटों के ढेरों के आसपास कंधों पर बड़ा सा बोरा लटकाये प्राय: हर दिन देखी जा सकती हैं, एक नहीं अनेक लड़कियां ये लड़कियां किसी की लाड़ली बेटी है, किसी की बहन या बुआ हैं तो किसी की भानजी या भतीजियां हैं। विडम्बना है कि इनका जन्म ऐसे परिवार या ऐसे माहौल में हुआ है कि जहां इन्हें न तो कभी स्कूल की बस लेने आती हैं और न ही इनके माता-पिता उस हैसियत के रहे हैं कि वे उनको स्कूल में दाखिला दिला सके। सबेरा हुआ नहीं कि मुर्गे की बांग के साथ उठ जाना इनकी नियति है।

? राजेन्द्र जोशी


मुसलमानों का घटता प्रतिनिधित्व : राष्ट्रव्यापी चिंतन आवश्यक

    न्यायपालिका की राय भले कुछ भी हो अल्पसंख्यकों को सभी क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व देना हमारे देश की एक ऐसी समस्या है जिसका हल उच्चतम प्राथमिकता देकर ढूंढा जाना चाहिए। 

               अभी हाल में आंध्रप्रदेश के हाईकोर्ट ने मुसलमानों को दिये गये आरक्षण को संविधान विरोधी बताते हुए आंध्रप्रदेश सरकार द्वारा दिये गये आरक्षण को रद्द कर दिया है। यदि किसी देश में सभी वर्गों,सभी धर्मों के मानने वालों, विभिन्न भाषाओं को बोलने वालों को  प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता है तो उस देश में प्रजातंत्र पर हमेशा खतरे की तलवार लटकी रहती है।

? एल.एस.हरदेनिया


अंडमान-निकोबार के जारवा आदिवासियों के लिए कानून-

जारवा आदिवासियों को कानूनी संरक्षण

     लुप्तता के कगार पर खड़ी जारवा आदिवासी जनजाति को कानूनी संरक्षण मिलने जा रहा है। इस कानून के अमल के आने के बाद जरवा समुदाय नुमाइश और मनोरंजन के जीव नहीं रह जाएंगे। केंद्र सरकार ने इनके लिए 'अंडमान-निकोबार द्वीप समूह (आदिवासियों का संरक्षण) संशोधन नियमन विधेयक 2012 को मंजूरी दे दी है।' राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद यह कानून प्रभावशील हो जाएगा। कानून के मुताबिक जारवा आदिवासी सुरक्षित क्षेत्र के आस-पास 5 किमी के दायरे में पर्यटन करना अपराध होगा। साथ ही विडियो या फोटोग्राफी करना भी अनाधिकृत कर दिया गया है।

? प्रमोद भार्गव


कितना त्रासद है यह असहायता बोध !

अनाथालयों, संरक्षणगृहों में बच्चों, महिलाओं के साथ यौन अत्याचार का मामला....आगे ये गृह सुरक्षित होंगे इसकी क्या गारण्टी है ?

    रियाणा के गुडगांव के 'सुपर्णा का आंगन' तथा रोहतक जिले की श्रीनगर कालोनी में 'अपना घर'' जैसे अनाथालय/संरक्षणगृह में रह रहे बच्चों तथा लडकियों के साथ हुए यौनहिंसा तथा तस्करी के मामले में अभी भी नए-नए तथ्य उजागर होते जा रहे हैं तथा घटनाक्रम की खबरें मीडिया में प्रमुखता से छायी है। 'अपना घर'की दर्जनों महिलाएं लापता हैं जिनकी सूचि रोहतक पुलिस ने जारी की है तथा इनके फोटो अखबारों में प्रकाशित हुए है। अबतक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। 'सुपर्णा के आंगन' का रसोइया सन्तोष जिसने 11 साल की लडकी, जो दोनों पैरों से लाचार है, के साथ ...............

? अंजलि सिन्हा


कीटनाशकों के जहर के असर

बच्चों की बुद्विमत्ता पर भी  ?

     कीटनाशक वो हैं जो हमारी फसलों को चट करने वाले कीड़ों को मार देता हैं। लेकिन अब फसलों के कीटों को मारने वाले ये कीटनाशक हमारे अस्तित्व को खतरा बन गएँ हैं। कीटनाशकों के जहरीले अणु हमारे वातावरण के कण कण में व्याप्त हो गए हैं। अन्न,जल,फल,दूध और भूमिगत जल सबमें कीटनाशकों के जहरीले अणु मिल चुके हैं और वो धीरे धीरे हमारी मानवता को  मौत की ओर ले जा रहें हैं। कण-कण में इन कीटनाशकों की व्याप्ति का कारण है आधुनिक कृषि और जीवन शैली। कृषि और बागवानी में इनके अनियोजित और अंधाधुंध प्रयोग ने कैंसर,किडनी रोग,अवसाद और एलर्जी जैसे रोंगों को बढ़ाया है। साथ ही ये कीटनाशक जैव विविधता को खतरा साबित हो रहें हैं।

? डॉ. सुनील शर्मा


  18जून2012

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