संस्करण: 18  जून-2012

कीटनाशकों के जहर के असर

बच्चों की बुद्विमत्ता पर भी  ?

? डॉ. सुनील शर्मा

               कीटनाशक वो हैं जो हमारी फसलों को चट करने वाले कीड़ों को मार देता हैं। लेकिन अब फसलों के कीटों को मारने वाले ये कीटनाशक हमारे अस्तित्व को खतरा बन गएँ हैं। कीटनाशकों के जहरीले अणु हमारे वातावरण के कण कण में व्याप्त हो गए हैं। अन्न,जल,फल,दूध और भूमिगत जल सबमें कीटनाशकों के जहरीले अणु मिल चुके हैं और वो धीरे धीरे हमारी मानवता को  मौत की ओर ले जा रहें हैं। कण-कण में इन कीटनाशकों की व्याप्ति का कारण है आधुनिक कृषि और जीवन शैली। कृषि और बागवानी में इनके अनियोजित और अंधाधुंध प्रयोग ने कैंसर,किडनी रोग,अवसाद और एलर्जी जैसे रोंगों को बढ़ाया है। साथ ही ये कीटनाशक जैव विविधता को खतरा साबित हो रहें हैं। कीटनाशकों का दुष्प्रभाव नवजात शिशुओं पर पड़ा है विशेष रूप से कीटनाशकों ने शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता और मस्तिष्क के विकास को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इस संदर्भ में  अभी हाल ही में अमेरिका के वैज्ञानिकों के अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि फलों और सब्जियों की फसलों पर इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक आर्गेनोफास्फेट्स से बच्चों का आई क्यू घट रहा है। अत:बुद्विमान बच्चे की कामना करने वाली महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान कीटनाशकों के सम्पर्क से बचना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत ज्यादा कीटनाशकों के सम्पर्क में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के बच्चों का बौद्विक स्तर कम होता है। शोधकर्ताओं ने इसकी जॉच के लिए तीन अलग अलग अध्ययन किए। प्रथम दो अध्ययन न्यूयार्क शहर में किए गए औरदूसरा अध्ययन उत्तरी कैलीफोर्निया के खेतों की बहुलता वाले क्षेत्र सेलिनास में हुआ। ये अध्ययन लगभग एक दशक तक चले। अध्ययन में मॉ बनने वाली महिलाओं में कीटनाशकों के स्तर का पता लगाया गया और 9साल तक की उम्र के करीब 1000बच्चों की जॉच की गई। शोधकर्ताओं ने फलों  और सब्जियों की फसलों पर इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक आर्गेनोफास्फेट्स का अध्ययन किया। कैलिफोर्निया में हुए अध्ययन में कुल 392 छात्र शामिल थे। अध्ययन के अनुसार जिन माताओं की गर्भावस्था के दौरान उनमें आर्गेनोफॉस्फेट्स की मात्रा 10 गुना बढ़ गई थी,उनके सात साल की उम्र तक के बच्चों के बौद्विक स्तर अर्थात आई क्यू में 5.5 अंकों की कमी देखी गई।न्यूयार्क के माउंट सिनाई के शोधकर्ताओं ने 400 महिलाओं और उनके 1998 के बाद जन्म लेने वाले बच्चों का अध्ययन किया। उन्होंने देखा कि गर्भवती महिलाओं के आर्गेनोफास्फेट्स के सम्पर्क में आने का असर उनके बच्चों की अवधारणात्मक तर्क शक्ति पर पड़ता है। तीसरा अध्ययन कोलंबिया यूनिवर्सिटी में किया गया। इसमें क्लोरपायरिफॉस कीटनाशक को केन्द्र में रखा गया। अध्ययन में इस कीटनाशक पर पाबंदी लगने से पहले जन्मे 265बच्चों पर परीक्षण किया गया। यह देखा गया कि मॉ-बाप के इस कीटनाशक के सम्पर्क में आने से बच्चों की बुद्विमत्ता कम हो गई।

                अमेरिका का अधययन कहता है कि क्लोरपायरिफॉस के सम्पर्क में मॉ बाप आने का असर बच्चों की बुद्विमत्ता पर पड़ता है। लेकिन अहमदाबाद से एकत्र दूध के प्रसिद्व ब्रांड अमूल में क्लोरपायरीफास नामक कीटनाशक के अंश पाए गए हैं। जबकि अमूल का दूध हम गुणवत्ता की गारण्टी मान कर उपयोग करतें है तथा इसके उपयोग नवजात शिशु,बच्चे और गर्भवती माताएॅ सभी करते हैं। दूध में इस कीटनाशक के अंश फसलों के अवशिष्ठ और भूसे को जानवरों के खिलाने से मिलते हैं। सारी दुनिया में प्रतिबंधित यह कीटनाशक हमारे देश में फसलों पर लगे कीटों को मारने धड़ल्ले से उपयोग किया जाता है। उल्लेखनीय है कि यह कीटनाशक कैंसरजन्य है तथा संवेदीतंत्र को नुकसान पहुॅचाता हैं। दूध के साथ फल और अण्डों को बच्चों और गर्भवती माताओं के लिए उपयुक्त आहार माना जाता है लेकिन इन सभी में अत्याधिक मात्रा में कीटनाशकों के अंश पाए जाने की पुष्टि हुई है। भारत सरकार के कृषि विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार सत्र 2009और 2010के बीच देश के विभिन्न हिस्सों से एकत्र किए गए फल,सब्जियों और खाद्यान्न के नमूनों का अध्ययन देश के 20 प्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं किया गया तथा अधिकांश नमूनों में डी.डी.टी.,लिण्डेन और मानोक्रोटोफास जैसे खतरनाक और प्रतिबंधित कीटनाशकों के अंश इनकी न्यूनतम स्वीकृत मात्रा से अधिक मात्रा में पाए गए हैं। इलाहाबाद से लिए गए टमाटर के नमूने में डी.डी.टी.की मात्रा न्यूनतम् से 108 गुनी अधिक पाई गई है,यहीं से लिए गए भटे के नमूने में प्रतिबंधित कीटनाशक हेप्टाक्लोर की मात्रा न्यूनतम स्वीकृत मात्रा से 10 गुनी अधिक पाई गई है,उल्लेखनीय है कि हेप्टाक्लोर  लीवर और तंत्रिकातंत्र को नष्ट करता है। गोरखपुर से लिए सेब के नमूने में क्लोरडेन नामक कीटनाशक पाया गया जो कि लीवर,फेफड़ा,किडनी,ऑख और केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुॅचाता है। मुम्बई से लिए गए पोल्ट्री उत्पाद के नमूने में घातक इण्डोसल्फान के अंश न्यूनतम स्वीकृत मात्रा से 23 गुनी अधिक मात्रा में मिले हैं। वही अमृतसर लिए गए फूल गोभी के नमूने में क्लोरपायरीफास की उपस्थितिसिद्व हुई है। असम के चाय बागान से लिए गए चाय के नमूने में जहरीले फेनप्रोपथ्रिन के अंश पाए गए जबकि यह चाय के लिए प्रतिबंधित कीटनाधाक है। गेंहू और चावल के नमूनों में ऐल्ड्रिन और क्लोरफेनविनफास नामक कीटनाशकों के अंश पाए गए हैं ये दोनों कैंसरकारक है। इनका जहरीला असर आम आदमी से भी ज्यादा घातक शिशुओं और बच्चों पर पड़ने वाला है।

               
? डॉ. सुनील शर्मा