संस्करण: 18 जुलाई- 2011

जन धन लूटती

चिट फण्ड कम्पनियॉ

? अमिताभ पाण्डेय

               कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने जब चिट फण्ड कम्पनियों में मध्यप्रदेश के मंत्रियों का पैसा लगा होने की बात कही तब राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल हुई लेकिन किसी भी मंत्री ने सामने आकर उनके आरोप का खण्डन नहीं किया। दिग्विजय सिंह की बात को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गलत बताया। इसके कुछ ही दिनों बाद दिग्विजय की बात सही साबित होती नजर आई जब यह समाचार अखबारों की सुर्खियां बना कि मध्यप्रदेश के गृह राज्यमंत्री नारायण सिंह कुशवाह का दामाद बालकिशन फरार हो गया है। उसने कुछ माह पहले गृहराज्यमंत्री श्री कुशवाह के प्रभाव क्षेत्र वाले गृह जिले ग्वालियर में गरिमा रियल एस्टेट नाम से एक चिट फण्ड कम्पनी खोली। इस कम्पनी के ग्वालियर चम्बल संभाग के अनेक शहरी ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यालय खोले गये जहॉ जनता ने पैसा दुगना हो जाने के लालच में अपनी रकम जमा कर दी। जनता का करोडों रूपया जमा हो जाने के बाद अचानक गरिमा रियल एस्टेट कम्पनी बन्द हो गई। बालकिशन सहित इससे जुडे प्रमुख लोग फरार हो गये। ऐसी ही कुछ और भी चिट फण्ड कम्पनियॉ है जो आकर्षक योजनाओं के जाल में फसांकर जनता से मोटी रकम ले चुकी है। इन कम्पनियों का अब कही पता नहीं चल रहा है। जिन्होंने इनमें अपना पैसा लगाया था वे लोग अब अपनी जमा पूंजी वापस पाने के लिए कोर्ट कचहरी पुलिस थाने के चक्कर काट रहें है। चिट फण्ड कम्पनियों के जिम्मेदार लोग पैसा बटोरकर गायब हो चुके है। गृह राज्य मंत्री के दामाद भी फिलहाल फरार ही है। उनकी पुलिस तलाश कर रही है लेकिन मामला ठण्डा होने के पहले वह पकडा जायेगा इसकी संभावना कम ही है।

               उधर ग्वालियर के पुलिस सूत्रों की मानें तो जनता से धोखधडी कर बालकिशन कुशवाह चिट फण्ड कम्पनी की रकम के साथ राजस्थान की ओर भागा है। राजस्थान के धौलपुर में गरि एस्टेट के नाम से बहुत से कारोबार से आरोपी पहले ही जुडा बताया जाता है। बताते हैं कि बालकिशन और उसके भाई वी एल कुशवाह का धौलपुर में गरिमा मिल्क फूड के नाम से बडा कारोबार है जिसकी कीमत लगभग आधा अरब रूपये है। माना जाता है कि इस कारोबार में ग्ृह राज्य मंत्री कुशवाह का भी पैसा लगा है। गरिमा एस्टेट का कारोबार ग्वालियर में उनके संरक्षण में ही आगे बढा है। 

               गृह राज्य मंत्री श्री कुशवाह से जुडी इस चिट फण्ड कम्पनी का पर्दाफाश हो जाने के बाद यह साफ हो गया है कि कॉग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के आरोप में दम है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चाहे माने या न माने लेकिन चिट फण्ड कम्पनियों से मंत्रियों के जुडे होने की बात धीरे-धीरे सामने आ रहीं है।यदि निष्पक्षता के साथ प्रशासन की कार्यवाही आगे भी जारी रही तो कुछ और मंत्रियों के भी चिट फण्ड कम्पनियों के घपले घोटाले में जुडे होने का खुलासा जरूर होगा।

               इस मामले की चर्चा मधयप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में भी चल निकली है। कॉग्रेस के वरिष्ठ विधायक गोविंद सिंह सहित कुछ अन्य विपक्षी सदस्यों ने धयानाकर्षण, स्थगन के माधयम से राज्य सरकार को घेरने का प्रयास किया है। गोविदं सिंह का आरोप है कि राज्य सरकार ने चिट फण्ड कम्पनियों पर असरदार कार्यवाही नहीं की जिसके कारण प्रदेश में जनता को इन कम्पनियों द्वारा ठगे जाने की घटनाएं बढ रही है। राजगढ़ जिले के युवा विधायक हेमराज कलपोनी और ब्यावरा के विधायक पुरूषोत्तम दांगी ने भी जिले में चिट फंड का कारोबार कर रही कंपनियों के प्रति अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की है। इस संम्बन्ध में राज्य के वित मंत्री राघव जी जिला कलेक्टर को कार्यवाही के लिए सक्षम बताकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाना चाहते है।

               यहॉ यह बताना जरूरी होगा कि केवल ग्वालियर ही नहीं बल्कि मधयप्रदेश के अधिकाशं जिलों में चिट फण्ड कम्पनियॉ अलग अलग नाम से अपना कारोबार कर रही है। इन कम्पनियों के पास रिजर्व बैकं से भी वित्तीय कारोबार के लिए अनुमति या लायसेंस नहीं है। इसके बावजूद ज्यादातर जिलों में प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कार्यवाही करने से बच रहे है। फिलहाल मधयप्रदेश में ग्वालियर ही एकमात्र ऐसा जिला है जहॉ कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने बिना किसी दबाव प्रभाव के 35 से ज्यादा चिट फण्ड कम्पनियों की तालाबन्दी कर दी। बुलन्द हौंसले के साथ कलेक्टर के पद को गरिमा प्रदान करने वाले इस अधिकारी ने चिट फण्ड कम्पनियों की 170 से अधिक परिसम्पतियॉ सील कर डाली। अधिकारिक जानकारी के मुताबिक इन सभी परिसम्पत्तियों पर कुर्की की कार्यवाही के लिए जिला न्यायालय में पेश किया जा चुका है। जिला न्यायालय से स्वीकृति के तुरंत बाद अचल सम्पत्ति को नीलाम करके निवेशको का धन वापस किया जायेगा । कलेक्टर श्री त्रिपाठी ने इस कार्यवाही के माधयम से पीडित जनता को उनका पैसा वापस दिलाने की पहल की है। बिना राजनितीक दबाव और चिट फण्ड कम्पनियों द्वारा शुरू किये गये अल्पज्ञात समाचार पत्रों,पत्रिकाओं के दबाव को नकारते हुए श्री त्रिपाठी ने जिस दबंग शैली में अपने काम को अजांम दिया वह काबिले तारीफ है। अफसोस यह है कि ऐसी कार्यवाही भोपाल, इन्दोर,सागर, जबलपुर, खण्डवा, खरगोन, राजगढ, मण्डला आदि जिलों में पदस्थ कलेक्टर अब तक शुरू नही कर पाये इसलिये इन जिलों में चिट फण्ड कम्पनियॉ बेरोकटोक जनता की जमा पूंजीं को लुभावने वायदे के साथ कब्जे में करती चली जा रही हैं। पुलिस प्रशासन की उदासीनता एंव जनता के लालच के कारण अब भी चिट फण्ड कम्पनियों का कारोबार प्रदेश के विभिन्न जिलों में फल फूल रहा है। ग्वालियर के कलेक्टर आकाश त्रिपाठी की तरह बाकी जिलों के कलेक्टर चिट फण्ड कम्पनियों के विरोध में जोरदार कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे ? यह बडा सवाल है।

               इधर चिट फण्ड कम्पनियों के पैसा खाकर भाग जाने की घटनाएं लगातार बढती जा रही है लेकिन राज्य सरकार की ओर से कडी कार्यवाही के निर्देश जारी नहीं हुए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से जुडे अधिकारी भी यह कह चुके हैं कि अब तक ऐसे कोई निर्देश जारी नही हुए । ऐसे में जनता की कमाई का धन चिट फण्ड कम्पनियॉ कब तक लूटती रहेगीं? चिट फण्ड कम्पनियों की लूट का शिकार हुए लोगों को राज्य शासन से भले ही कोई राहत नहीं मिल पाई हो परन्तु इस मामले में न्यायालय की भूमिका प्रशंसनीय है। हाल ही में उच्च न्यायालय की ग्वालियर खण्डपीठ ने प्रदेशभर में संचालित चिट फण्ड कम्पनियों के विरूध्द सख्त कार्यवाही करने के निर्देश जारी किये हैं। माननीय न्यायधीश एस के गंगेले और शील नागू की बैंच ने इस सम्बन्ध में धर्मवीर सिंह की ओर से दायर की गर्इ्र याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि राज्य सरकार पूरे मामले की जॉच करने में सक्षम नहीं है। इंसाफ की खातिर यह उपयुक्त होगा कि पूरे मामले की जॉच सी बी आई से कराई जाये । माननीय न्यायधीशों ने चिट फण्ड कम्पनियों की जॉच का काम सी बी आई के निदेशक को सौंपने तथा इसे तीन माह में पूरा कर उसकी रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने के लिए कहा है।

               उल्लेखनीय है कि मधयप्रदेश में अब तक चिटफण्ड कम्पनी के रूप में कारोबार करने वाली 35 से अधिक कम्पनियों की पहचान हो गई है।इनमें जनता का 27 करोड 35 लाख से अधिक रूपया लगा हुआ है। इन कम्पनियों के विरूध्द 14 हजार से ज्यादा शिकायतें मिली है जिनमें से मात्र 15 कम्पनियों के विरूध्द ही पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबध्द किये है। चिट फण्ड कम्पनियों के विरूध्द न्यायालय के निर्देश जारी हो जाने के बाद जनता इन कम्पनियों से अपना पैसा वापस ले  लेना चाहती है लेकिन जितना पैसा जमा किया गया वह पूरा वापस मिल ही जायेगा यह कहना मुश्किल है।


? अमिताभ पाण्डेय