संस्करण: 18 फरवरी-2013

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तोगड़िया कब

गिरफ्तार होंगे?

       पुलिस ने भले ही विश्व हिन्दू परिषद के अगुआ प्रवीण तोगडिया के खिलाफ 22 जनवरी को भोकर नगर में भडकाऊ भाषण के लिए मामला दर्ज किया हो,मगर जहां तक उनकी गिरफ्तारी का सवाल है तो उसका सवाल ही नहीं उठता। 'मेल टुडे' ने गुरूवार को ख़बर दी थी कि हालांकि पुलिस ने तोगडिया के खिलाफ भड़काउ भाषण देने को लेकर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की है,मगर जब तक राज्य सरकार निर्देश नहीं देती वह उन्हें गिरफ्तार नहीं करेंगे।

?    सुभाष गाताड़े


क्या अफजल की फांसी से

दुखी है बीजेपी ?

       ष्या रखने वाला, घृणा करने वाला, असंतोषी, क्रोधी, शंकालू और दूसरे के भाग्य पर जीवन जीने वाले, जिन लोगों के स्वभाव में ऐसे दोष होते हैं, वह सदा दुख और कष्टों से घिर रहते हैं। इसलिए ऐसी विकृतियों से दूर रहना चाहिए। लेकिन हमारे राजनीतिज्ञों को देखें तो वे इन गुणों की खान हैं। सरकार चाहे कुछ भी कर ले लेकिन विपक्ष कभी उससे संतुष्ट नहीं होता। टांग खिंचाऊ संस्कृति का ऐसा उदाहरण और कहां मिलता है पता नहीं, किंतु कहीं मिलता भी होगा तो भारत जैसा नहीं होगा।

? विवेकानंद


सावरकरवादी हिंदुत्व की राजनीति के पैरोकारों के सामने

अस्तित्व का संकट

       बीजेपी और आर एस एस के बीच 2014 के लोकसभा चुनावों के मुद्दों के बारे में भारी विवाद है। आर एस एस की कोशिश है कि इस बार का चुनाव शुध्द रूप से धार्मिक धृवीकरणको मुद्दा बनाकर लड़ा जाए ।शायद इसीलिये सबसे ज्यादा लोकसभा सीटोंवाले राज्य उत्तर प्रदेश में किसी सीट से नरेंद्र मोदी को उम्मीदवार बनाने की बात शुरू कर दी गयी है। उत्तर प्रदेश में मौजूदा सरकार में मुसलमानों के समर्थन के माहौल के चलते मुस्लिम बिरादरी में उत्साह है। उम्मीद की जा रही है कि राज्य सरकार के ऊपरबीजेपी वाले बहुत आसानी से मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप चस्पा कर देगें।

? शेष नारायण सिंह


तीर्थस्थलों में हादसे-

बढ़ते व्यक्तिवाद का दुष्परिणाम

         हिन्दुओं में धर्म को मूलत: व्यक्तिगत कर्म के रूप में ही विकसित किया गया था तथा सामूहिक रूप से किये जाने वाले धार्मिक कर्म बहुत ही कम रहे हैं। जब अंग्रेजों ने हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच टकराव पैदा किया तब प्रतिक्रिया में प्रभावित हिन्दुओं ने भी धार्मिक कर्मों में सामूहिकता की प्रतियोगिता शुरू की पर जिसका असर संघ परिवार के लगातार प्रयासों के बाद भी बहुत कम है।  

? वीरेन्द्र जैन


साम्प्रदायिक हिंसा एवं दंगों का

असली उद्देश्य राजनीतिक होता है

       साम्प्रदायिक दंगे मात्र कानून और व्यवस्था की समस्या नहीं है। वास्तव में उनका उद्देश्य राजनीतिक होता है। यह मत उन अनेक वक्ताओं का था जो भोपाल में आयोजित एक सेमीनार में अपने विचार प्रगट कर रहे थे। सेमीनार का आयोजन मेरे द्वारा लिखित एक पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर किया गया था। पुस्तक का शीर्षक है ''साम्प्रदायिक दंगों का सच'', पुस्तक का प्रकाशन भारतीय ज्ञान विज्ञान समिति ने किया है। पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम की मुख्य अतिथि तीस्ता शीतलवाड थीं। तीस्ता जी अनेक वर्षों के साम्प्रदायिकता के विरूध्द संघर्ष कर रही हैं। 

 ?   एल.एस.हरदेनिया


आतंकवादियों के मानव अधिकार

                  भारत में अव्यवस्था,आतंक और अत्याचार के दोषी साबित हो चुके दो आतंकवादियों को हाल ही में दी गई सजा ए मौत इन दिनों देश दुनिया में चर्चा का विषय बन गई है। केन्द्र सरकार का यह कदम दुनियाभर में आतंकवाद के विरूधद एक जोरदार कार्यवाही का सदेन्श देता है। केन्द्र सरकार ने आतंकवादियों को फॉसी पर लटकाकर यह बता दिया है कि इस देश में आतकंवाद के लिए कहीं,कोई जगह नहीं है। देशद्रोहियों के विरूधद कठोरतम कार्यवाही की जायेगी। फॉसी यह फन्दा अभी उन देशद्रोहियों का भी इंतजार कर रहा है जो पडोसी देश की गोद में बैठकर आतंकवादी गतिविधियों को अजांम देने का प्रयास करते रहते हैं। 

? अमिताभ पाण्डेय


धर्माचार्य और

उनका यह आचरण

      लाहाबाद में इन दिनों अंतरराष्ट्रीय महत्त्व का कुंभ मेला चल रहा है जहाँ दुनिया भर के श्रध्दालु तथा देश भर के साधु-संत इकट्ठा हैं। कुंभ मेले का धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक महत्त्व है तथा यह दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। देश के चार स्थानों- प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन तथा नासिक में कुंभ मेला क्रम से प्र्रत्येक तीसरे वर्ष आयोजित किया जाता है और इस प्रकार किसी एक स्थान पर यह बारह वर्षों के बाद ही दुबारा आयोजित होता है।

? सुनील अमर


वायदे, घोषणा,आश्वासन

क्या इसी का नाम है सुशासन !

      रना धारना कुछ नहीं ! फोकट के कामों में आत्ममुग्ध होकर वाहवाही लूटने के मामलों में राज्य सरकारों का कोई जवाब नहीं! आम जनता को सुशासन देने के नाम पर ग्रामीण और शहरी इलाकों की दुर्दशा हो रही है, इसका अंदाजा शासन शासन में बैठे लोग नहीं लगा सकते। जिस तरह की गवर्नेंस को सुशासन बताकर विज्ञापनों के माधयम से ढिंढोरा पीटा जाता है वह नीचे तक पहुंचते-पहुंचते कुशासन का रूप धारण कर लेता है।

? राजेन्द्र जोशी


समुदायों के लिए पर्सनल लॉ या मुक्तिदायी सिविल कानून

        खालोद सुक्कारियह, एक सुन्नी लेबनानी महिला और निदाल दरविश, एक शिया लेबनानी पुरूष, इन दोनों ने पिछले दिनों लेबनान में अपनी शादी बिल्कुल अलग ढंग से की। उन्होंने नागरिक कानून के तहत अपनी शादी का पंजीकरण किया। अठारह अलग अलग धार्मिक सम्प्रदायों की आबादी वाले इस देश में, जहां लोगों के विवाह एवं तलाक, बच्चे की देखभाल, विरासत आदि व्यक्तिगत जीवन के सभी मामले इन सम्प्रदायों के अपने नियमों के तहत तय होते हों, उनके इस कदम से हंगामे की स्थिति बनी। राष्ट्रपति ने जहां उनके इस कदम का समर्थन किया तो प्रधानमंत्री ने विरोध किया।

? अंजलि सिन्हा


प्याज के बढ़े दामों के पीछे

       राजधानी दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात में आज-कल प्याज के दाम सातवें आसमान पर हैं। अचानक बढ़े इन दामों से आम आदमी परेशान हैं। प्याज उसे खून के आंसू रुला रही है। बेतहाशा बढ़ी कीमतों ने गृहणियों का रसोई बजट बिगाड़ के रख दिया है। आलम यह है कि हर सब्जी का स्वाद बढ़ाने वाला प्याज लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है। बीते एक महीने में इसकी कीमतों में दोगुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। जो प्याज पहले 12 से 15 रुपये प्रति किलो मिल रहा था, वो अचानक बढ़कर 28 से 30 रुपये प्रति किलो हो गया है। सरकार इसके पीछे दलील दे रही है कि प्याज की कम आवक इसकी वजह है।    

? जाहिद खान


यह तो सांस्कृतिक आतंकवाद है

        भिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारे मौलिक अधिकारों में से एक है। इसके बाद भी आजकल कला और अभिव्यक्ति को लक्ष्य बनाया जा रहा है। कमल हासन की विश्वरूपम का विवाद अभी थमा नहीं है कि कश्मीर की किशोरियों के म्युजिकल बैंड के खिलाफ फतवा जारी कर दिया गया है। डर के मारे उन किशोरियों ने अपने श्प्रगाशय को खामोश कर दिया। जिसके लिए हमें गर्व करना था, उसी के खिलाफ फतवा जारी कर धार्मिक कट्टरता का ही परिचय दिया है। पिछले पखवाड़े कुछ ऐसी घटनाएं हमारे देश में हुई, जिसमें धर्म, संप्रदाय या मान्यताओं के नाम पर हमारी सामजिक असहिष्णुता ही सामने आई है।

? डॉ. महेश परिमल


कुछ सामयिक छंद

       

श्वर जो न कर सके, करते यहाँ दलाल,

टिकिट अगर न मिल सके, कर लो इन को कॉल,

कर लो इन को कॉल, तुरत कन्फर्म कराएँ,

सर्टिफिकेट, लायसेंस, आप को सब दिलवाएं,

कहें 'अखिल' कविराय, जड़ें हैं इन की गहरी

रक्षा में भी दखल, व्यवस्था अंधी बहरी

    

? अखिलेंदु अरजरिया


  18 फरवरी-2013

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