संस्करण: 18फरवरी-2008

अध्यक्ष अमीर, आयोग गरीब !
   अमिताभ पाण्डेय

गरीब लोगों का कल्याण करने के नाम पर किसी आयोग का गठन किया जाये और उसके अधयक्ष पद पर पार्टी के किसी गरीब कार्यकर्ता की बजाय अमीर आदमी को नियुक्त कर दिया जाये तो इसे आप क्या कहेंगे ? मधयप्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार ने हाल ही में यह काम कर दिखाया है। राज्य सरकार ने सवर्ण गरीबों के हितों पर धयान देने के लिए राज्य सामान्य निर्धान वर्ग कल्याण आयोग का विधिवत गठत किया है। गरीबों के कल्याण की नई कार्य योजना बनाने का दावा करने वाले इस आयोग के अधयक्ष भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के पूर्व उद्योग मंत्री बाबूलाल जैन नियुक्त किये गये हैं। श्री जैन मधयप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा की केबिनेट में मंत्री रहे। यह माना जाता है कि उनकी नियुक्ति श्री पटवा की सलाह पर ही की गई है। नव नियुक्त अधयक्ष श्री जैन नर्सिंग होम, मेडिकल कॉलेज के साथ ही कुछ अन्य बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष मालिक है। उन्हें किस आधार पर गरीब आयोग का अधयक्ष नियुक्त करने के काबिल माना गया, यह सवाल काँग्रेस अथवा अन्य विपक्षी दलों में ही नहीं बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा के गलियारों में भी खूब उठ रहा है। गरीबों के आयोग में की गई श्री जैन की ताजपोशी से यह सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि क्या भाजपा में महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त होने के काबिल गरीब मौजूद नहीं है ? यदि भाजपा में कोई पद लेने लायक गरीब नहीं है तो क्या यह मान लिया जाना चाहिए कि यह पार्टी अमीरों की पार्टी है जिसमें अब कोई गरीब नहीं बचा है। यदि कोई निष्ठावान, समर्पित, ईमानदार गरीब वर्षों से भाजपा में कार्य कर रहा होता तो यकीनन गरीब आयोग का अधयक्ष बनने का प्रबल दावेदार वहीं होता।गरीबों के आयोग में असरदार अमीर की नियुक्ति से यह संदेश ज़ाहिर होता है कि भाजपा में अब कोई गरीब बाकी नहीं रहा अथवा जो है वे इस काबिल नहीं की उन्हें किसी आयोग, निगम, मण्डल में अधयक्ष बनाया जाये।

प्रसंगवश उल्लेखनीय है कि मधयप्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही सत्ता पर एक ऐसे वर्ग का नियंत्रण रहा है जो केवल अपने कृपापात्र लोगों को ही महत्वपूर्ण पद देने में यकीन रखता है। पार्टी के जो कार्यकर्ता, विधायक अथवा पदाधिकारी इस प्रभावशाली वर्ग से नहीं जुड़े है वे पांच-पाँच बार विधायक निर्वाचित होने के बाद भी मंत्री पद के लायक नहीं समझे गये। इसके विपरीत यह भी देखने में आया है कि सत्तारूढ़ दल के प्रभावशाली वर्ग की यदि किसी अन्य दल के नेता पर कृपा हुई तो उसे भाजपा में प्रवेश देकर महत्वपूर्ण पद अथवा मंत्री पद का दर्ज़ा मिल गया। भाजपा में प्रभावशाली वर्ग की मनमानी और उनकी बात मानने पर मज़बूर मुख्यमंत्री को लेकर अब निष्ठावान कार्यकर्ताओं के सब्र का फैसला फलकने लगा है। जनसंघ के जमाने से पार्टी के लिए काम कर रहे और आपातकाल के दौर में जेल गये ऐसे ही कुछ निष्ठावान कार्यकर्ता अब आपसी बातचीत में अपने साथ हो रहे अन्याय की कहानी खुलकर कहने लगे है। वे यह भी कहते है कि हमारी मेहनत पर पार्टी सत्ता में आई लेकिन सत्ता का लाभ वे लोग ज्यादा ले रहे है जो कि संघर्ष में कम दिखाई देते थे। पार्टी में पदों की बंदरबाट से परेशान कुछ निष्ठावान कार्यकर्ता अब इतने निराश हो चले है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए काम करने की उनकी इच्छा नहीं रही है।

गौरतलब है कि गरीबों के कल्याण के लिए बनाये गये नवगठित राज्य सामान्य निर्धान वर्ग कल्याण आयोग से सवर्ण गरीबों को क्या मिलेगा यह तो अभी तय नहीं हो सका है लेकिन इस आयोग के अधयक्ष को सरकार की सुविधाएँ मिलना प्रारंभ हो गई है। यह आयोग मधयप्रदेश में भाजपा की सरकार रहने तक बना रहेगा, इसकी पूरी संभावना है। आने वाले दिनों में आयोग में उपाधयक्ष अथवा सदस्य का पद निर्मित कर भाजपा का प्रभावशाली वर्ग अपने कुछ ओर करीबी लोगों को इसमें नियुक्ति प्रदान कर सकता है। सनद रहे कि जनता के कल्याण के लिए मधयप्रदेश में आयोग की कोई कमी नहीं है। महिलाओं के लिए राज्य महिला आयोग, पिछड़ा वर्ग के लिए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, अनुसूचित जाति के लिए राज्य अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति के लिए राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग, गाड़िया लुहार, कंजर, बेड़िया, सांसी आदि जातियों के लिए विमुक्त जाति आयोग, अल्पसंख्यकों के लिए राज्य अल्पसंख्यक आयोग सहित एक दर्ज़न से ज्यादा आयोग पहले ही कार्यरत है। ये सारे आयोग और इनके पदाधिकारी आज तक लक्षित समूह का कितना भला कर सके यह सब जानते है। इसके बाद भी भाजपा सरकार ने एक ओर नया आयोग गठित करने की ज़रूरत महसूस की। इस ज़रूरत को दृष्टिगत रखते हुए गरीबों के लिए नया आयोग गठित कर दिया गया। विश्वास किया जाना चाहिये कि निर्धान आयोग के अधयक्ष एवं पूर्व उद्योग मंत्री बाबूलाल जैन सवर्ण गरीबों के लिए अवश्य ही ऐसी कोई योजना ज़रूर प्रारंभ करेंगे जिसके सार्थक परिणाम गरीबों के बीच दिखाई देंगे।

नवगठित आयोग के नवनियुक्त अधयक्ष के पदभार ग्रहण करने सम्ब्ध बड़े-बड़े विज्ञापन से कितने सवर्ण गरीबों को लाभ पहुँचा यह तो विज्ञापन की बड़ी रकम का भुगतान करने वाले ही जाने परंतु काँग्रेस के लोग भी भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र में रहने वाले भाजपा के समर्पित, कत्तव्यनिष्ठ व्यक्ति को ज़रूर जानते है जिसका पूरा जीवन नंगे पैर पार्टी का प्रचार करते और दो वक्त की रोज़ी रोटी के लिए संघर्ष करते बीत गया। करोंद, निशातपुरा, पारस नगर, हाऊसिंग बोर्ड की कालोनी में ठेले पर केरोसिन बेचते हुए भाजपा का प्रचार करते करते स्वर्गीय हो चुके इस व्यक्ति का नाम साधुनाथ त्यागी था। जिसकी मौत की खबर सुनकर सत्तारूढ़ भाजपा नेताओं ने उसके परिवार को खबर नहीं ली। भाजपा के इस कर्मठ कार्यकर्ता के परिवारजन आज किन परिस्थितियों में अपना गुजारा कर रहे हैं यह देखने वाला कोई नहीं है। इसके बाद भी गरीब आयोग किसी न किसी प्रकार गरीबों का कल्याण्ा कैसे करेगा यह देखना है।

अमिताभ पाण्डेय