संस्करण: 18 अगस्त- 2014

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क्या 'हिन्दू' हमारी राष्ट्रीय पहचान है?

     न् 1980 के दशक से पहचान-आधारित राजनीति ने हमारे देश में जड़ें जमानी शुरू कीं। शाहबानो मामले, राममंदिर की समस्या और रथयात्राओं ने पहचान पर आधारित मुद्दों को देश के सामाजिक-राजनीतिक रंगमंच के केन्द्र में ला दिया। इस राजनीति का सबसे पहला बड़ा शिकार बनी बाबरी मस्जिद। कुछ लोग गंभीरतापूर्वक यह विश्वास करने लगे कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र है और 'हम सब हिन्दू हैं' के नारे की गूंज जगह-जगह सुनाई देने लगी।      

? राम पुनियानी


धर्मनिरपेक्षता की हिफाजत में न्यायपालिका

        देश के अलग अलग हिस्सों में बढ़ती साम्प्रदायिक तनाव की ख़बरों के बीच पिछले दिनों आपसी सामंजस्य पर जोर देने वाली आवाज़ आला अदालत से सुनायी दी।

                 मालूम हो कि सर्वोच्च न्यायालय की त्रिसदस्यीय पीठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक जिले से एक स्त्री के कथित धर्मांतरण के मसले को लेकर,जिसे लेकर पूरा इलाका सरगर्म है,दायर याचिका पर विचार कर रही थी। याचिकाकर्ता संस्था ने अदालत से गुजारिश की थी कि इस घटना की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया जाए। 

? सुभाष गाताडे


बीजेपी-आरएसएस में श्रेय की जंग

     ई सरकार आने के बाद महंगाई और सी-सैट विवाद से लेकर ताजा-ताजा कश्मीर में विद्युत परियोजनाओं के उद्धाटन तक कई ऐसे घटनाक्रम हैं जिन पर एनडीए सरकार का व्यवहार स्वार्थी और लालची किस्म का रहा है। जब भी कोई अच्छा काम हुआ अपनी पीठ ठोंकने लगे, भले ही उस काम में उनका रत्ती भर का हाथ न रहा हो और जिस-जिस काम की आलोचना हुई उसे यूपीए के मत्थे मढ़ दिया। मसलन मोदी सरकार बनते ही सबसे पहले कालेधन को लेकर एसआईटी का गठन किया गया।

 ? विवेकानंद


'लव जेहाद' का जातीय समाज शास्त्र

      सुप्रिम कोर्ट ने एक गैर सरकारी संगठन जयति भारतम की याचिका पर कड़ी टिप्पड़ी करते हुए कहा कि भारत धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है। धर्म को न्यायालय में न लाने की नसीहत देते हुए मामले को जो रंग जयति भारतम दे रहा था, उस पर चिंता व्यक्त की।

? राजीव यादव


खाने और न खाने देने के मध्य म.प्र. सरकार

            श्री नरेन्द्र मोदी सिर्फ देश के प्रधानमंत्री पद पर ही पदारूढ नहीं हैं, अपितु वे सत्तारूढ दल भाजपा के भी सर्वेसर्वा बन गये हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री काल में अपने कनिष्ठ मंत्री रहे अमित शाह को पार्टी के अध्यक्ष पद पर पदासीन करवा दिया है, और इस तरह पूरी पार्टी भी उनकी मुट्ठी में है। उल्लेखनीय है कि अनेक गम्भीर आरोपों से घिरे श्री शाह को अध्यक्ष पर बैठाने के फैसले का विरोध करने का साहस भी किसी भाजपा नेता ने नहीं किया जबकि उनके पूज्य श्री मोदी को प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी बनाये जाने तक का विरोध श्री लाल कृष्ण अडवाणी, और सुषमा स्वराज जैसे वरिष्ठ नेताओं ने किया था और वे मुम्बई अधिवेशन से आमसभा को सम्बोधित किये बिना ही दिल्ली लौट आये थे।

 ?  वीरेन्द्र जैन


फिर बदनाम हुआ मध्यप्रदेश

         म जनता और किसानों को सस्ती बिजली मुहैया कराने का वादा करने वाली मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर फिर विफल हो गई। खरगोन जिले के मंडलेश्वर में एस.कुमार्स समूह की निजी पन बिजली परियोजना का भविष्य डांवाडोल नजर आ रहा है। देश की सबसे बड़ी वित्तीय संस्था पॉवर फायनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) के इतिहास का सबसे बड़ा घाटा इस परियोजना के जरिये हो रहा है।

? महेश बाग़ी


पाकिस्तान के शिया और अहमदियों पर भी ईसाई व हिन्दुओं जैसी ज्यादतियां हो रही हैं

      स समय पाकिस्तान दुनिया के उन चंद देशों में से है जहां धार्मिक सहिष्णुता लगभग समाप्त हो गई है। इसी तरह पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक भी स्वयं को पूरी तरह असुरक्षित मानते हैं। प्रारंभ में तो वहां हिन्दू और ईसाई अपने को असुरक्षित समझते थे परंतु अब वहां रहने वाले शिया और अहमदियों के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया जाने लगा है जैसा पिछले वर्षों से हिन्दुओं और ईसाईयों के साथ होता रहा है।

?  एल.एस.हरदेनिया


सरफरोशी की तमन्ना में कौन है बिस्मिल?

     बात उन दिनों की है जब मैं जामिया केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोध छात्र था। 2009 के नवंबर का महीना था। उन दिनों हम लोग शाम को जामिया के पश्चिमी छोरपर स्थित चाय की एक दुकान पर एकाध घण्टे तो गुजार ही दिया करते थे। इस दुकान पर बैठने के लिए कोई बेंच नही होती थी। पत्थरों और जमीन पर लोगजमे रहते थे। यहां बैठने वाले इस जगह को लाल चौक कहते थे।

? शाह आलम


सरकार को मशीनी नौकर चाहिए

        व्यवस्था को सरकार की नीतियों के अनुरूप चलाने के लिए नीतियों के अनुरूप नौकरशाहों की जरूरत होती है। संघ लोकसेवा आयोग द्वारा कराई जाने वाली अखिल भारतीय स्तर की परीक्षा में सी-सैट के विवाद को इसी रूप में देखा जाना चाहिए। मसले को केवल हिंदी या भारतीय भाषाओं को जगह देने या ना देने के रूप में देखने से बात अधूरी रह जाएगी। सत्ता को अपनी पूंजीवाद नीतियों को चलाने के लिए ऐसे नौकरशाहों की जरूरत है जो बिना कुछ सोचे-बोले हुक्म बजाने को तत्पर रहें। 

? विजय प्रताप


किशोर अपराध : सजा नहीं सुधार कीजिये

      ह कहानी भोपाल में रहने वाला बारह साल के सोहन( बदला हुआ नाम ) की है, वह अपने  तायी के पास इन्दौर गया था तायी के बेटे के साथ खेलते हुए दोनो में झगड़ा शुरू हो गया और इसी दौरान सोहन ने पास में रखे नेल कटर से तायी के बेटे पर वार कर दिया जो उसके ह्रदय में लग गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गयी। किशोर न्याय बोर्ड द्वारा बालक के व्यवहार परिर्वतन के लिए बाल गृह में रखने के लिए चाइल्ड लाइन भोपाल के सुपुर्द किया गया।

? जावेद अनीस


बाजारू ताकतों के हवाले मजदूर

        मैन्यूफैक्चरिंग की धीमी रफ्तार से निजात पाने तथा रोजगार के नए अवसर के श्रृजन के नाम पर, देश के मजदूरों के न्यूनतम अधिकार और लोकतंत्र की गारंटी कहे जाने वाले श्रम कानूनों में व्यापक फेरबदल की तैयारी मोदी सरकार द्वारा बड़े जोर शोर से की जा रही है। इन कानूनों में बदलाव के पीछे सरकार का यह तर्क है कि श्रम कानूनों में सुधार किए बिना देश में बडे विदेशी पूंजी निवेश को आकर्शित करना काफी मुश्किल है।                   

? हरे राम मिश्र


हँसाने वाले रुलाकर चले गए......

      कामेडियन विलियम्स के जाने के बाद जगजीत सिंह द्वारा गाई गई पंक्तियां याद आ रही हैं- तुम जो इतना मुस्करा रही हो, क्या गम है, जिसको छुपा रही हो। कहा गया है कि हमेशा मुस्कराते रहो, इसके लिए धन की आवश्यकता नहीं होती। वरना गरीब तो मुस्करा ही नहीं पाते। मुस्कराहट एक ऐसा धन है, जिसे जितना अधिक खर्च किया जाए, वह उतना ही बढ़ता है। जो हमेशा मुस्कराते रहते हैं, वे अनजाने में लोगों को अपनी ऊर्जा ही देते रहते हैं।

? डॉ. महेश परिमल


पर्यावरण पर भारी न पड़े धार्मिक आस्था

        भारत पर्वों-त्योहारों का देश है। पर्व-त्योहार जीवन में आनंद, उत्साह और ऊर्जा का संचार करते हैं। इनमें निहित संदेश बड़े अर्थवान होते हैं, जो प्रकृति और मानव-मूल्यों की रक्षा में सहायक होते हैं। वस्तुत: प्रकृति और पर्वों के बीच अन्योन्याश्रित संबंध है।                     

? डॉ. गीता गुप्त


  18 अगस्त- 2014

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