संस्करण: 17  अक्टूबर- 2011

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प्रधानमंत्री जी, जोर से बोलिए।

            2जी स्पेक्ट्रम विवाद अब वैश्विक चिन्ता का विषय बनता जा रहा है, उसने शासन तथा विकास और निरंतर आगे बढ़ रहे वैश्विक विकास की दर में भारतीय अर्थव्यवस्था की भूमिका को कमजोर किया है। दुनियाँ की भलाई, भारत के विकास,अपने राजनीतिक दल और सरकार की साख तथा अपनी व्यक्तिगत छवि को बचाने के लिये डॉ. मनमोहन सिंह को इस विषय पर स्पष्ट बात करनी चाहिये।

  ? टी.के. अरुण

 ( ''इकोनॉमिक टाइम्स'' से साभार)


भाजपा में वरिष्ठ

नागरिकों की दशा

        पिछले दिनों विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित एक गैर सरकारी संस्था 'सम्पूर्णा' की ओर से वरिष्ठ नागरिकों क सम्मान किया गया था। इस सम्मान समारोह में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा था कि न केवल समाज सेवी संस्थाएं और सरकार अपितु औद्योगिक घरानों को भी वरिष्ठ नागरिकों की सेवा के लिए आगे आना चाहिए ताकि वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव का प्रयोग देशहित में किया जा सके।

? वीरेन्द्र जैन


अन्ना हजारे भ्रष्टाचार से लड़ना चाहते हैं या कांग्रेस से?

      पिछले कुछ दिनों में देश के राजनीतिक मंच पर कुछे ऐसी बातें हुई है जिनसे कई लोगों के चेहरे से नकाब उठ गये हैं।

               इस तरह की घटनाओं में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत का यह दावा शामिल है कि अन्ना हजारे के आंदोलन को न सिर्फ हमारा समर्थन था वरन् उसके संचालन में हमारे स्वयंसेवकों की प्रमुख भूमिका थी। जब से अन्ना हजारे का आंदोलन प्रारंभ हुआ था उस समय से ही यह आरोप लगाया जा रहा था कि उनके आंदोलन के पीछे आर.एस.एस. का हाथ था।

? एल.एस.हरदेनिया


हिसार में कांग्रेस भले हारे,

पर अन्ना जीतने वाले नहीं

    गस्त में दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हजारे ने जिस तरह से भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चलाया था,उससे लोगों में एक जोश देखा गया था। आज बदलते हुए हालात को देखकर यही लगता है कि अन्ना अपनी राह से भटक गए हैं। हिसार में कांग्रेस के प्रत्याशी का विरोध कर वे एक तरह से भ्रष्टाचार को बढ़ावा ही दे रहे हैं,क्योंकि अन्य दो प्रमुख प्रत्याशी पूरी तरह से ईमानदार हैं,यह कहना मुश्किल है।

? डॉ. महेश परिमल


आडवाणी की जन चेतना यात्रा

कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना

          भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा सबसे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भ्रष्टाचार के खिलाफ रथ पर सवार हो चुके हैं। जन चेतना नामक इस हाईटेक रथ से देशभर में घूमकर वे जनता को जागरूक करेंगे। लेकिन कोई भी इस बात को पचा नहीं पा रहा है कि जब पहले से ही दो व्यक्ति जिन्हें जनता से भारी समर्थन मिला हुआ है, भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगा रहे हैं ऐसे में आडवाणी जी अलग से अपनी यात्रा लेकर क्यों निकल पड़े हैं।

 ? विवेकानंद


बदहाली की कगार पर मध्यप्रदेश

     ध्यप्रदेश बदहाली की कगार पर है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आत्ममुग्ध होकर व्यर्थ की नौंटंकियों में व्यस्त हैं और प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा मुंगेरीललाल की तरह हसीन सपने देख रहे हैं। प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति सबके सामने हैं। हत्या, लूट, बलात्कार और डकैती की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। नौकरशाही बेलगाम हो चुकी है। सरकार ख़जाना पहले से ही खाली है और कर्ज का भार लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

? महेश बाग़ी


आखिर क्यों ?

खाद्यांन संकट और मंहगाई :

       विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर हमारे देश सहित पूरे दुनिया मे संगोष्ठीयों का आयोजन हो रहा है। कई संस्थानो के द्वारा बडे जोर शोर से प्रदर्शनिया लगाई जा रही है, जो किसी मेले से कम नही आंका जा सकता है। बम्बई में अन्नपूर्णा संस्थान द्वारा 16 से 18 नवम्बर तक विशाल कार्यक्रम का आयोजन रखा गया है जिसमें लगभग 250 से अधिक प्रर्दशनियां लगने का अनुमान है तो वही इस भव्य कार्यक्रम में लगभग 8000 से अधिक लोग भाग लेगे।

? जगदीश खातरकर


केन्द्र सरकार के अच्छे कार्यों को अन्ना करें सलाम!  

    सूचना के अधिकार के नाम पर भी केन्द्र सरकार को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। हवाला दिया जा रहा है कि भ्रष्टाचार के खुलासे से भयभीत मंत्रीगण इसकी धार को कुंद करने के लिए इसमें संशोधन करवाना चाहते हैं। जबकि खबर यह है कि आम आदमी और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती को प्रदर्शित करने वाले इस अधिकार को केन्द्र की कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने पहले से अधिक मजबूती प्रदान की है अभी हाल ही में

 

? डॉ. सुनील शर्मा


अब लाएगी सरकार :

मानसिक स्वास्थ्य नीति

     ह चिन्ताजनक बात है कि भारत में मानसिक व्याधियों से पीड़ित लोगों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत विश्व का सर्वाधिक अवसादग्रस्त देश है, जहां हर तीसरा-चौथा व्यक्ति अवसाद से पीड़ित हैं। दुनिया के 18 देशों में नब्बे हज़ार लोगों का अध्ययन करने के लिए दु:ख, निराशा, अनिद्रा, अरुचि आदि लक्षणों को अवसाद का मानक निर्धारित किया गया था। 

? डॉ. गीता गुप्त


संदर्भ : संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट

मनरेगा में मनमानी

    हात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना जैसा कि नाम से बजाहिर है, ग्रामीण बेरोजगारों के लिए सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा भुगतान देने की योजना है। यह योजना साल 2006 से जब मुल्क में अमल में आई तो ग्रामीण भारत में कई अहमतरीन बदलाव देखने को मिले। मसलन-गांव से शहर की ओर बड़े पैमाने पर होने वाला मजदूरों का पलायन रूका,गांवों में ही नए-नए रोजगार सृजित हुए और इससे गांवों के अंदर बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ। यहां तक कि 

 

? जाहिद खान


  17  अक्टूबर-2011

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