संस्करण: 17 नवम्बर- 2014

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मंत्रिमण्डल के ऐसे विस्तार से उठते सवाल

     गो के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दिलाकर केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में सम्मलित किया गया है। आई आई टी की डिग्री वाले वे ऐसे नेता हैं जिनकी ईमानदारी, सादगी, लगन और कर्तव्यनिष्ठा बेदाग है और उन पर व्यापक भरोसा है। अगर कोई सवालिया निशान बनता है तो सिर्फ यह कि वे अमित शाह की अध्यक्षता वाले उस दल और संगठन में कैसे हैं, जहाँ वे इतने अकेले पड़ जाते हैं कि उनके मुखौटे का स्तेमाल करने के लिए उनकी नापसन्दगी के बाबजूद गोआ छुड़ा कर उस दिल्ली में बुलाना पड़ता है, जहाँ का वातावरण उन्हें पसन्द नहीं।

? वीरेन्द्र जैन


क्या ऐसे ही शुद्ध होगी संसद...?

        त्ता मिलनेकेबादवादों से मुकर जाना राजनीति का नया पैंतरा नहीं है, इसलिए नरेंद्र मोदी सरकार जो कर रही है उसमें बहुत विस्मयकारी कुछ भी नहीं है, लेकिन सपनों को किस हद तक उभार दिया जाए और फिर उन्हें किस बेरहमी से और किस हद तक रौंदा जाए। चुनाव के पूर्व नरेंद्र मोदी और समूची बीजेपी ने उनके बताए मंत्रों पर चलते हुए जनता को सुशासन और अच्छे दिनों के बहुत से सपने दिखाए थे। लेकिन सत्ता मिलने के बाद सरकार उसके उलट चल रही है।

?

विवेकानंद


नेहरू की विरासत पर हमला?

     भारत का विभाजन, महात्मा गांधी की हत्या और नेहरू की नीतियां, पिछले कई दशकों से अनवरत बहस का विषय बनी हुई हैं। हर राजनैतिक दल व विचारधारा के लोग, इन तीनों की व्याख्या अपने-अपने ढंग से करते रहे हैं। एक तरह से, ये तीनों, आधुनिक भारतीय इतिहास में मील के पत्थर हैं। भारत का विभाजन और गांधी की हत्या, इस अर्थ में आपस में जुड़े हुए हैं कि गोडसे ने गांधी पर मुसलमानों का तुष्टीकरण करने का आरोप लगाया था।

 ? राम पुनियानी


केंद्रीय मंत्रियों पर मोदी के जासूसों की पैनी नजर

      पिछले दिनों कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनके कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व की क्षमता पर प्रश्न चिन्ह लग सकता है। प्रधानमंत्री ने पिछले रविवार को मंत्रिपरिषद में 21 नये चेहरों को शामिल किया है। इन मंत्रियों में से बहुसंख्यक बिहार और उत्तरप्रदेश के हैं। स्पष्ट है कि इन दोनों राज्यों में होने वाले चुनाव को मद्देनजर मंत्रियों को चुना गया है। शामिल किए हुए मंत्रियों में कुछ ऐसे भी हैं जो न तो लोकसभा और ना ही राज्यसभा के सदस्य हैं।  

? एल.एस.हरदेनिय


इन झूठी योजनाओं से मत बहकाइए श्रीमान

           हाल ही में नरेन्द्र मोदी सरकार ने दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना की शुरुवात यह कहते हुए की कि इससे देश के ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा जिससे उन्हें नौकरी मिलने में आसानी होगी। मोदी सरकार का दावा है कि इस प्रशिक्षण के बाद ग्रामीण युवाओं को नौकरी के लिए बाजार में भटकना नही पड़ेगा। अगर इस योजना के मसविदे को ध्यान से देखा जाए तो यह बेहद ही हास्यास्पद और देश के युवाओं को भरमाने वाली प्रतीत होती है।

  ?  हरे राम मिश्र


सिर्फ कंपनियों का मुनाफा मत देखिए जनाब

         रेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर को जो किया शायद वह बहुसंख्यक भारतवासियों को अच्छा नहीं लगा होगा। उस दिन भारत के एक महान सपूत का जन्मदिन था साथ ही भारत मां की एक बहादुर पुत्री का बलिदान दिवस भी। शायद नरेन्द्र मोदी को यह पता होगा कि 31 अक्टूबर को इंदिरा जी ने स्वयं मौत को निमंत्रण दिया था। इंदिरा जी की सुरक्षा में देश के सभी क्षेत्रों के रहने वाले शामिल थे।

? रीना मिश्र


कौन बचा रहा है दोषी सुरक्षा-खुफिया अधिकारियों को

      यूपी में आतंकवाद के आरोपी खालिद जिसकी 18 मई 2013 को हिरासत में हत्या कर दी गई थी की पुलिस विवेचना को बाराबंकी न्यायालय ने खारिज कर दिया। आतंकवाद के इस आरोपी की गिरफ्तारी की सत्यता की जांच के लिए गठित आरडी निमेश जांच आयोग ने भी गिरफ्तारी को संदिग्ध कहते हुए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। ऐसे में इस हत्या पर विवेचनाधिकारी द्वारा लगाई गई फाइनल रिपोर्ट का खारिज होना बहुतेरे सवाल खड़ा करता है?

? राजीव यादव


शाकाहार बनाम मांसाहार: क्या एक नयी जाति व्यवस्था की तरफ हम बढ़ रहे हैं ?

     क्या किसी कौम की पहचान को खाने के किसी पदार्थ के साथ जोड़ा जा सकता है ? इसका कोई आसान जवाब हां या ना मे देना मुश्किल है, मगर जहां तक फ्रांस का सवाल है जहां भोजन को चूंकि रूपक के तौर पर मुल्क की अस्मिता के साथ जोड़ा जाता रहा है, वहां पर यही मसला एक अलग अन्दाज़ में उपस्थित हुआ है, अलबत्ता बिल्कुल नकारात्मक रूप में।

 

? सुभाष गाताड़े


आसाराम प्रसंग : और कितने रहस्य बाकी हैं ?

        भी बीते सोमवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दिल्ली सरकार तथा दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि करोलबाग के आश्रम में बने अवैध निर्माण को ढहा दिया जाए। अधिकरण ने एक समिति गठित की थी जिसकी रिपोर्ट के मुताबिक संवेदनशील सेन्ट्रल रिज इलाके में आश्रम ने व्यापक पैमाने पर अवैध निर्माण किया है। निश्चित ही यह सारा निर्माण उपरोक्त आश्रम में रातोरात नहीं हुआ होगा, और यह भी सही है बकि ऐसा भी नहीं होगा कि अधिकरण या अन्य सरकारी विभाग इससे अनभिज्ञ रहा होगा।

? अंजलि सिन्हा


संदर्भः- गुजरात निकाय चुनाव में लागू हुआ अनिवार्य मतदान का कानून अनिवार्य मतदान का औचित्य

      गुजरात राज्य में होने वाले निकाय चुनावों में अनिवार्य मतदान का कानून लागू कर दिया गया है। अब जो मतदाता मतदान नहीं करेंगे उन्हें दण्डित भी किया जाएगा। हालांकि मतदान न करने वालों को क्या सजा मिलेगी,इसके नियम अब गुजरात सरकार बनाएगी। अनिवार्य मतदान लागू कर गुजरात देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जहां निकाय चुनाव में मतदाताओं को मतदान करना जरुरी होगा।

? प्रमोद भार्गव


वायु प्रदूषण फसलों को कैसे चट करता है ?

        भी तक हम बढ़ते वैश्विक ताप की वजह से उत्पन्न जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से फसलों की उत्पादकता में गिरावट को लेकर चिंतिंत थे। लेकिन अब वैज्ञानिक अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि बढ़ते वैश्विक ताप के साथ साथ बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण भी फसलों की उत्पादकता को प्रभावित कर रहा है। फसलों पर वायु प्रदूषण का बुरा प्रभाव हवा में घुलते प्रदूषक और फसलों की प्रजातियों के हिसाब से अलग अलग स्तर पर देखा गया है।

? डॉ.सुनील शर्मा


स्कूल न बने मौत का घर, कैसे शिक्षक, कैसी शिक्षा

      स्कूलों को बच्चों के लिए ज्ञान और मनोरजंन का केन्द्र माना जाता है। स्कूल पहले शिक्षा,अध्ययन,अध्यापन का ही प्रतीक हुआ करते थे। अब भी ज्यादातर स्कूल अपनी बेहतर शैक्षणिक गतिविधियों के लिए जाने पहचाने जाते हैं। कुछ स्कूल ऐसे हैं जहा जाने के नाम से बच्चे भयभीत हो जाते हैं। ऐसे स्कूल पढने-पढाने की बजाय बच्चों के साथ मारपीट के लिए ज्यादा चर्चा में रहते हैं। अनेक स्कूलों में शिक्षकों का मानसिक तनाव, बेवजह का गुस्सा बच्चों पर मारपीट के रूप में सामने आता है। अभिभावकों ने जिन शिक्षकों के भरासे अपने बच्चे को शिक्षित,संस्कारित बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है उनमें से कई शिक्षक बच्चों के साथ ऐसा अनुचित व्यवहार करते हैं कि बच्चे के मन में स्कूल के नाम से डर बैठ जाता है।

? अमिताभ पाण्डेय


जानलेवा बनते चिकित्सा के सरकारी शिविर

        त्तीसगढ़ के विलासपुर में परिवार कल्याण योजना के तहत लगाए गए सरकारी नसबंदी शिविर में जो कुछ हुआ, वह बेहद दुखद और चिन्ताजनक है। इस घटना ने एक बार फिर से सरकारी उसने सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पर कई सवालिया निशान लगा दिये हैं। इसमें डॉक्टरों की लापरवाही साफ तौर पर झलकती है।

? सुनील तिवारी


स्मार्ट फोन ने बदला बैंक का परिदृश्य

      पिछले महीने 5 लाख इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की बढ़ोत्तरी हुई है। ये सभी मोबाइल नेट का इस्तेमाल करते हैं। इस दौरान मोबाइल इकॉनामी में 5गुना वृद्धि देखी गई है। स्मार्ट फोन लाखों का ट्रांजेक्शन बैंकिंग सिस्टम में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है। इस तरह से देखा जाए तो इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम और इंटरनेट सिस्टम ने धन का ट्रांजेक्शन की बरसों पुरानी स्थिति को बदलकर रख दिया है। पहले भी लोग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते थे,पर अब मोबाइल द्वारा किए जाने वाले ट्रांजेक्शन ने पूरे सिनेरियो को बदल दिया है। स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करने वालों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ मोबाइल इकोनामी के दायरे में भी काफी बढ़ा है।

? डॉ. महेश परिमल


  17 नवम्बर- 2014

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