संस्करण: 17 मार्च-2014

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पुराना है संघ और भाजपा का कॉर्पोरेट प्रेम

     राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा के कॉर्पोरेट प्रेम को 16वीं लोकसभा के चुनावों में स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता हैद नीलसन इकोनॉमिक्स टाइम्स समाचारपत्र की ओर से किये गए एक सर्वेक्षण के अनुसार 100 उद्योगपतियों में से 74% नरेन्द्र मोदी को अगले पीएम के रूप में देखना चाहते हैं देश-विदेश की सारी कॉर्पोरेट शक्तियां लम्बे समय से पीएम पद के लिए नमो नमो का जाप करते नहीं थक रही हैं।      

? मोहम्मद आरिफ


क्या अब संत समाज बनाएगा

मोदी को पीएम

        से महज एक सामान्य बात भर मानकर खारिज नहीं किया जा सकता कि, देश के हिन्दुओं को आगामी बीस सालों में मुसलमानों के मुकाबले अल्पसंख्यक होने का भय दिखाकर दो की जगह पांच बच्चे पैदा करने की सलाह देने के बाद (देश में अल्पसंख्यक होने के खतरे और इसके पीछे के पॉलिटिक माइंडसेट को समझने की जरूरत), विश्व हिन्दू परिषद के संयोजक अशोक सिंघल इन दिनों पूरे देश के दौरे पर हैं। सिंघल द्वारा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के चहेते व उग्र हिन्दुत्व के चेहरे नरेन्द्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनाने के लिए हिन्दू धार्मिक संस्थाओं के मुखियाओं,संतों को चुनाव प्रचार के लिए आगे लाने की जीतोड़ कोशिश की जा रही हैं ताकि मोदी की राह को आसान बनाया जा सके।

?

हरे राम मिश्र


उम्मीद से जगा उन्माद और अहंकार

     हाल ही में दिल्ली सहित देश के कुछ हिस्सों में जिस तरह से आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसात्मक झड़पें देखीं गईं वे राजनीति में कोई पहली घटनाएं नहीं हैं। चुनावी वक्त में इस तरह की घटनाएं आम हैं। कुछ वक्त पहले ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र में आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी मारपीट हुई थी, इसकी बाकायदा उभयपक्षीय एफआईआर भी दर्ज हुई थी। अमेठी में कुमार विश्वास अपनी ताकत का अहसास कराने गए थे। 

 ? विवेकानंद


मोदी के कारण शीर्ष भाजपाइयों में कलह

      त सप्ताह भाजपा के वयोवृध्द व वरिष्ठतम नेता लालकृष्ण आडवानी ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा अब 'एक व्यक्ति की पार्टी' हो गयी है। उनका आशय पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी से था। वे संभवत: कहना चाहते थे कि भाजपा में अब नरेन्द्र मोदी के अलावा किसी और की कुछ नहीं चलती। बीते 8 मार्च को कुछ ऐसा ही नजारा दिल्ली में आयोजित पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में था जब पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के गोलमोल और टरकाऊ जवाब से खीझकर दो वरिष्ठ नेता- मुरली मनोहर जोशी और सुषमा स्वराज बैठक के बीच से उठकर चले गए।

? सुनील अमर


'आप' की नौटंकी आखिर कौन सा स्वराज लाएगी?  

              जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव की तारीख करीब आ रही है, आम आदमी पार्टी आप की नौटंकी बढ़ती जा रही है। आप को वन मैन शो बना चुके अरविंद केजरीवाल अब अपनी हदें तोड़ते नजर आ रहे हैं। यहां तक कि आप के जो कार्यकर्ता अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी की टोपी पहन खुद को राजनीतिक भीड़ से अलग प्रस्तुत करते हैं सर्वाधिक हिंसा पर उतारू हो गए हैं। केजरीवाल का दिवास्वपन कार्यकर्ताओं से उनकी हदें पार करवा रहा है।

 ?   सिध्दार्थ शंकर गौतम


भागीरथ प्रसाद ने कांग्रेस को झटका नहीं

धोखा दिया है

           क समाचार पत्र ने डा. भागीरथ प्रसाद के दल-बदल के समाचार को ''डा. भागीरथ प्रसाद का कांग्रेस को झटका''शीर्षक से छापा। मेरी राय में समाचार का शीर्षक होना था ''डा.भागीरथ प्रसाद का कांग्रेस को धोखा''। डा.भागीरथ प्रसाद की इस घिनौनी हरकत की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। दल-बदल तो सभी करते हैं किंतु जिस ढंग से डा. प्रसाद ने किया वह भर्त्सना के काबिल है।

? एल.एस.हरदेनिया


मानव विकास सूचकांक स उभरती तस्वीर

      नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने कुछ समय पहले सामाजिक न्याय के विचार को किस तरह देखा जाना चाहिए इस पर रौशनी डाली थी। उन्होंने न्याय की प्रणालीकेन्द्रित अवधारणा (arrangement focussed view of justice) और कार्यान्वयन केन्द्रित समझदारी (realisation focused understanding of justice) के बीच फरक करने की बात कही थी। इस प्रक्रिया पर निगाह डालते हुए जहां न्याय को चन्द सांगठनिक प्रणालियां - कुछ संस्थाएं, कुछ नियमन, कुछ आचारसम्बन्धी नियम - जिनकी सक्रिय उपस्थिति यह दर्शाती है कि न्याय को अंजाम दिया जा रहा है, उन्होंने कहा कि ......

?  सुभाष गाताड़े


नक्सलियों की समस्या समझने की जरूरत

     क बार फिर बस्तर क्षेत्र के सुकमा जिले में नक्सलियों ने जवानों के साथ खून की होली खेलते हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और पुलिस के 17 जवानों और एक ग्रामीण को मौत के घाट उतार दिया। यह वही सुकमा है, जहां पिछले साल छत्तीसगढ़ विधान सभा चुनाव के पहले माओवादियों ने खून खराबा करके कांग्रेस के नेताओं को मारा था। नक्सलियों की क्रूरता और हिंसा में अब तक हजारों निर्दोश लोग और सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं।  

? सुनील तिवारी


यह कैसा उत्सव?

        चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव की घोषणा कर दी गयी है। घोषणा के अगले दिन अखबारों के पहले पन्ने पर बड़े-बड़े अक्षरों में खबरे छपी जिनमे से एक का शीर्षक था 'फिर आया प्रजातंत्र का उत्सव'उत्सव शब्द पढ़ते-सुनते तो वैसे मन में प्रसन्नता की लहर सी दौड़ जाती है,किन्तु न जाने क्यों यह उत्सव हर बार प्रसन्नता कम बल्कि बहुत सी आशंकाओं, निराशा, अवसाद और अज्ञात भय को साथ लेकर आता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में भय....?   

? ओ. पी. शर्मा


अब जनप्रतिनिधित्व कानून में भी हो संशोधन

     दागियों को विधायिका से दूर करने की दिशा में एक और अहम कदम बढ़ाते हुए हाल ही में हमारे सर्वोच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार व अन्य गंभीर अपराधों में आरोपी सांसदों व विधायकों के मुकदमों की सुनवाई एक साल में पूरी करने का आदेश दिया है। यह निर्देश न्यायमूर्ति आर.एम.लोढा की अध्यक्षता वाली पीठ ने राजनीति का अपराधीकरण रोकने के लिए दागियों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए। याचिका में कहा गया था कि अदालतों में केस की सुनवाई में देरी के कारण आरोपी सांसद या विधायक पद पर बने रहते हैं।

? जाहिद खान


फिल्म समीक्षा

गुलाबी गैंग, यथार्थवादी विषयवस्तु पर व्यावसायिक फिल्म

        गुलाबी गैंग सोलहवीं लोकसभा के लिए चुनावी प्रचार के दौर में रिलीज हुयी एक ऐसी फिल्म है जिसमें एक डाक्यूमेंटरी फिल्म से विषयवस्तु ले लोकप्रिय और मँहगे सितारों के साथ एक व्यावसायिक फिल्म बना डाली गयी है। फिल्म की पब्लिसिटी के लिए उसे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के एक दिन पूर्व ही रिलीज किया गया और उससे कुछ दिन पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट से स्थगन लेने और उससे मुक्त होने का खेल भी चला जिसकी खबर के प्रसारण ने फिल्म को ज्यादा बड़े क्षेत्र तक पहुँचाया।

? वीरेन्द्र जैन


22 मार्च : विश्व जल दिवस पर विशेष

जल संरक्षण हर नागरिक का दायित्व है

      ज प्राकृतिक सम्पदा का संरक्षण समूचे विश्व में चिंता का विषय है। जल संकट को देखते हुए भविष्यवाणी की जा चुकी है कि यदि तृतीय विश्व युध्द हुआ तो पानी के लिए होगा क्योंकि सभी देश पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। धरती पर जल का अभाव नहीं है। लेकिन धरती में विद्यमान जल का केवल 3.5 प्रतिशत ही उपयोग करने लागय है जिसमें से एक प्रतिशत से भी कम पीने योग्य है। हमारे पेयजल स्रोत निरन्तर घटते जा रहे हैं।       

? डॉ. गीता गुप्त


  17 मार्च-2014

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