संस्करण: 17मार्च -2008

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT

किसान रैली में सोनिया की हुंकार

'वोट-युध्द' के लिए कांग्रेस हुई तैयार

रामलीला मैदान, नई दिल्ली में आयोजित किसान रैली ने संपूर्ण देशवासियों को स्पष्ट संदेश पहुँचा दिया है कि देश सिर्फ़ कांग्रेस के ही हाथों में सुरक्षित रह सकता है। अखिल भारतीय कांग्रेस की अधयक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने जिस तेवर के साथ     >राजेन्द्र जोशी



     


क्यों तय है भाजपा का डूबना ?
मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार सत्ता में वापसी के लिए भरसक प्रयास कर रही है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने 'मिशन 2008' कार्यक्रम बनाया है, जिसके तहत् सरकार द्वारा विभिन्न वर्गों की पंचायतें आयोजित कर घोषणाओं का अंबार लगा दिया गया है।हाल ही में सरकार ने किसानों की महापंचायत आयोजित कर 5600 करोड़ रुपयों की घोषणाएं कर डाली।    > डॉ. दर्शना सिंह


यह कैसा 'शिव-राज' ?
मध्यप्रदेश में अपराधों का ग्राफ़ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। राजधानी भोपाल में लूटमार और राहजनी की बढ़ी वारदातें इस ओर इशारा कर रही हैं कि प्रदेश के सुदूर अंचलों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। एक ओर जहाँ मुख्यमंत्री खुद हत्याभिमुखों का संरक्षण कर उनका मान-मर्दन कर > महेश बाग़ी


      


                    


भाजपा का महिला सशक्तिकरण बनाम दुर्गति

प्रत्येक दिन महिला दिवस मनाता है मधयप्रदेश। यहाँ महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान उपलब्धा है यह शिवराज के शब्द कितने सच है देखिये। हमारे देश में आम जनता की नज़र में > राजेन्द्र श्रीवास्तव


केन्या और हम -क्या हम वैसे ही दुष्परिणाम के लिए तैयार हैं?

पिछले दिनों राज ठाकरे और फिर बाल ठाकरे परिवार ने उत्तर भारतीय, खासकर बिहारी और तथा उत्तरप्रदेशी लोगों के खिलाफ असमय व अकारण उत्तेजना फैलायी जिसमें दो निर्दोष लोगों की जानें गयीं तथा पुणे  >वीरेन्द्र जैन


                  


         


पूरब का रूख करता अंतर्राष्ट्रीय शक्ति केन्द्र

अपनी बौद्धिक क्षमता व लगातार मजबूत हो रही आर्थिक वृद्धि के बूते भारत कालांतर में अंतरराष्ट्रीय शक्ति का केन्द्र बनने जा रहा है ? यदि ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलीबैंड की टिप्पणी पर भरोसा करें >प्रमोद भार्गव


उ.प्र. में भ्रष्ट परीक्षा व्यवस्था
उ0प्र0 में इन दिनों चल रही माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट परीक्षाओं के पहले ही दिन लगभग डेढ़ लाख तथा अब तक कुल साढ़े चार लाख परीक्षार्थियों ने इसलिए परीक्षा छोड़ दी कि इस बार नकल  > सुनील अमर


        


    


सुभाष बोस के विचारों से सम्प्रदायवाद व साम्राज्यवाद के विरुध्द अभियान

 दस और ग्यारह मार्च 2008 जबलपुर के इतिहास में हमेशा याद रहेगा। ठीक इन्हीं तारीखों पर 1939 में कांग्रेस का ऐतिहासिक अधिवेशन हुआ था। उस अधिवेशन के अध्यक्ष नेताजी सुभाष चन्द्र बोस चुने   > एल.एस.हरदेनिया


'शिव' तक कब पहुँचेगा राज
बीमार, बेसहारा बुजुर्गों की परवाह करते हुए सरकार ने भले ही अनेक कल्याणकारी योजनाएँ बना डाली हों परन्तु यह तय है कि इन योजनाओं पर आज तक शत प्रतिशत अमल संभव नहीं हो सका है। सरकार, समाज की उपेक्षा तले,अनुभवों की गठरी को ढ़ोत

 > अमिताभ पाण्डेय


      


            


''कर्जमाफ़ी के बाद खेती''
 
किसानों के कल्याण के प्रति सजग यू.पी.ए. सरकार ने अपने आखिरी बजट में किसानों के 60 हजार करोड़ रुपये कर्जमुक्ति का ऐलान किया है।वास्तव में सरकार का देश के अन्नदाता के पक्ष में अहम् फैसला है मरते किसान और मिटती खेती को जीवनदान >डॉ. सुनील शर्मा


22 मार्च-विश्व जल संरक्षण दिवस पर विशेष ''पेयजल संकट-एक विश्वव्यापी समस्या''

आज भारत ही नहीं विश्व के अनेक देश जल संकट की पीड़ा से ग्रस्त हैं। पेयजल की बढ़ती समस्या विश्वव्यापी समस्या का रूप ले चुकी है। अब वह दिन दूर नहीं जब पानी से आच्छादित इस पृथ्वी पर पेयजल के लिए त्राहि-त्राहि मचेगी।  > स्वाति शर्मा


          


               


गिल का अहं व हॉकी की अमावस्या
 फिल्म 'चक दे इंडिया' से मिली प्रेरणा भी भारतीय हॉकी को ढाई दशक से अभिशाप मुक्त नहीं कर सका। गुटबाज़ी, अहं, आलस्य, धानलोलुपता से लैस भारतीय टीम क्रिकेट के खिलाड़ियों की तरह मान-सम्मान, दौलत व लोकप्रियता चाहती है।राष्ट्रीय खेल की ऐसी > अंजनी कुमार झा


23 मार्च-शहीद दिवस पर विशेष

जिनके बलिदान पर हमें गर्व है: शहीद भगत सिंह

शहीदे आज़म भगतसिंह का जीवन उन बलिदानी वीरों में अप्रतिम है, जिन्होंने हँसते-हँसते देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये। अविभाजित पंजाब प्रांत के ज़िला लायलपुर में 27 सितम्बर 1907 को एक देशप्रेमी सिख परिवार में उनका जन्म हुआ    >डॉ. गीता गुप्त


                 



ओंकारेश्वर बांध विस्थापितों की एक ओर जीत

जमीन के बदले जमीन दी जाये ये बांध विस्थापितों की पुरानी मांग रही है और ये मांग कहीं से भी नाजायज नहीं है। क्योंकि यह जमीन ही उसकी आजीविका का प्रमुख स्त्रोत है। और जमीन के अभाव में उसकी और परिवार की जिंदगी बेसहारा हो जायेगी।  > जाहिद खान


कल्पनाओं में ही रह जाएंगे बाघ !

एक जमाना था जब बाघ भारत की शान हुआ करते थे. उनकी गिनती के लिए गिनतियां ही पड़ जाया करती थीं. कभी अठखेलियां तो कभी शिकार करते बाघ अक्सर जंगलों में दिख जाया करते थे. पर वक्त अब बदल गया है. अभयारण्यों  > नीरज नैयर



                  17 मार्च 2008
 

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved