संस्करण: 17मार्च -2008

भाजपा का महिला सशक्तिकरण बनाम दुर्गति

राजेन्द्र श्रीवास्तव

प्रत्येक दिन महिला दिवस मनाता है मधयप्रदेश। यहाँ महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान उपलब्धा है यह शिवराज के शब्द कितने सच है देखिये। हमारे देश में आम जनता की नज़र में बिहार और उत्तर प्रदेश को अपराधों का राज्य कहा जाता रहा है। किन्तु वास्तविकता कुछ और ही बताती है। महिलाओं पर हो रहे अपराधों के मामलों में मधयप्रदेश नम्बर वन राज्य है। अपराधों में मामलों में इसने देश के सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। पिछले एक वर्ष 2006-2007 के दौरान म.प्र. में 11 हजार से अधिक बलात्कार की घटनाएँ हुई। जिसमें एक हजार से अधिक तो सामूहिक बलात्कार के मामले सामने आये हैं। ये घटनाएँ अधिकांशत: गांव और छोटे शहरों में हुई। वैसे तो यह संख्या बहुत अधिक है, किंतु यह सरकारी आंकड़ों में बताया गया है।

पिछले 4 माह के अन्दर 148 महिलाएँ दुष्कृत्यु। बलात्कार की शिकार हुई। पिछले 4 वर्षों में जब से भाजपा की प्रदेश में सरकार आई है। 12 हजार 283 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना घटी हैं। प्रदेश में महिला अपराधों में वृध्दि हुई है। इनमें 5930 वयस्क महिलाओं और 6390 नाबालिगों के साथ यह घटना हुई। इन गांवों और छोटे शहरों में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त गिरोह सक्रिय है। जो इन्हें अंजाम दे रहे हैं।

हमारे प्रदेश में बाल विवाह का चलन आज भी गांवों में जारी है। कानूनी रूप से तय 21 और 18 की उम्र से पहले ही लड़के-लड़कियों का विवाह यहाँ हो जाता है। 4 प्रतिशत लड़कियाँ विवाह की आयु से 3 वर्ष पूर्व ब्याह दी जाती हैं। इतना ही नहीं 5 से 8 वर्ष की कच्ची उम्र में चार प्रतिशत दुल्हनें तीन साल की उम्र में श्रीमती घोषित हो जाती हैं। 8 से 13 उम्र की बच्चियों का यह आंकड़ा 6 प्रतिशत का है। यह स्टडी सेंटर फॉर सोशल रिसर्च एण्ड द नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ पब्लिक को-आपरेशन एण्ड चाइल्ड डेवलपमेंट ने की है जिसने दिसम्बर 07 में 870 लोगों से भेंट कर प्राप्त की।

नीमच के निकट सिंगोली में पिछले दिनों 100 गांवों के 400 लोगों की 3 दिन एक पंचायत चली। पंचायत धाकड़ समाज की भी। जिसका विषय था बलात्कार के अपराधी को बचाना। जबकि बलात्कार की इस घटना के 5 आरोपी जेल में बन्द है, जिन पर न्यायालयीन कार्यवाही चल रही है। घटना 20 अक्टूबर 07 की है फुसरिया नामक ग्रामीण की 15 वर्षीय बालिका दशहरा मेले से अचानक गायब हो गई है। पिता ने 22 अक्टूबर को बालिका के गायब होने की रिपोर्ट थाने में दर्ज़ कराई। 26 अक्टूबर को बालिका खुद थाने पहुँची और उसने 5 युवकों जो धााकड़ समाज के थे, उस पर बलात्कार किये जाने की रिपोर्ट दर्ज़ करवाई। पुलिस ने इन पांचों युवकों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किये।

घटना के 3 माह बाद आरोपियों के पिताओं ने धाकड़ समाज की उक्त पंचायत बुलाई। जिसमें समाज की ओर से राजनेताओं ने भी भाग लिया था। जिन्होंने 5 युवकों की तरफदारी की थी।

महासमुंद से 3 किमी दूर ग्राम बेमचा से 3 वर्ष पहले सरपंच चुनी गई 35 वर्षीय नंदकुमारी आज भी पहले की भांति गांव में झाड़ू लगाती हैं। 15 सालों से चली आ रही उसकी दिनचर्या में पद मिलने के बाद कोई अंतर नहीं आया।समूचे म.प्र. में दलित वर्ग की इकलौती महिला सरपंच नंदकुमारी है। उसका कहना है कि इस झाड़ू ने उसे सरपंच की कुर्सी पर पहुँचाया है। गांव की पुरुष प्रधान राजनीति इस दलित महिला सरपंच को परेशान करने से बाज नहीं आती है।बालाघाट जेल में 15 फरवरी 05 की रात 9 बजे एक जेल अधिकारी ने महिला वार्ड खुलवाकर महिला बन्दियों के साथ बलात्कार किया। जिसकी जानकारी जेल रिपोर्ट में भी अंकित है। पिछले वर्ष होली के मौके पर 4 मार्च 07 को जेल अधिकारियों ने कैदियों के साथ मिलकर महिला बन्दियों से जबरर्दस्ती होली खेलने के बहाने नैतिकता की मर्यादाओं को त्याग सब कुछ किया जो नहीं करना चाहिये था।

होली के दिन महिला बंदियों के खाने में नशे की गोलियां मिलाकर खाना दिया गया। खाना खाने के बाद महिला बंदी बेहोश हो गई, फिर इन अधिकारियों ने उनका बलात्कार किया। इस नरकीय जिंदगी से तंग आकर यह महिला कैदियों ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा जिसमें इस बात की जानकारी हासिल हुई। इसी प्रकार भोपाल की जेल में अबुल सलेम की प्रेमिका मोनिका बेदी के बाथरूम में कैमरे लगाये गये थे। जहाँ उसे स्नान करते समय निर्वस्त्र चित्रों को लिया गया था, जिसका खुलासा स्वयं मोनिका बेदी ने किया था। इस प्रकार जेलों में महिला कैदियों का यौन शोषण म.प्र. में जारी है।

समाचार पत्रों और बड़े-बड़े आयोजनों के माधयम से मधयप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की मुनादी भले ही की जा रही है। किन्तु भाजपा सरकार महिला अत्याचार और शोषण के मामलों में पूरे देश में नम्बर वन पर है। प्रदेश में आदिवासी, दलित एवं नाबालिक युवतियां बड़ी संख्या में बलात्कार की शिकार हुई हैं। बैतूल-572, छिंदवाड़ा-512, सागर-508 और धार में 440 महिलायें सर्वाधिक इसकी शिकार हुई।

दलित महिलाओं की जिंदा जलाने जैसी वीभत्स एवं हृदय विदारक घटनाओं में लगातार वृध्दि हो रही हैं। महिलाओं के साथ हो रही आये दिन लूट, अपहरण की घटनाऐं समाचार पत्रों की मुख्य स्टोरी रहती हैं इससे राजधानी भी अछूती नहीं है। गांव और छोटे शहर की बात और है, किन्तु भोपाल में भी महिलायें और युवतियाँ सदैव अपने को असुरक्षित महसूस करती हैं।

महिला थानों की अगर बात करें तो 38 महिला डेस्क स्थापित हुए, लेकिन उनके परिणाम शून्य ही रहे। वर्तमान में 141 थानों में महिला डेस्क हैं। जिन्हें दुर्गा सेना का नाम दिया जा रहा है। यहाँ महिला आरक्षक दुर्गा सैनानी कहलायेंगी। विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, और दुर्गावाहिनी से प्रभावित भाजपा की सरकार अब थानों में भगवाकरण करने में रूचि दिखा रही है।

पूर्व से संचालित परिवार परामर्श केन्द्रों की तरफ शासन का धयान शायद हट सा गया है इनके कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दिया जा रहा है। यह परिवार परामर्श केन्द्र बंद होने की स्थिति में आज खड़े हैं। यही हाल महिला परामर्श केन्द्रों का भी है वहाँ भी शिशु-बालिका भ्रूण हत्या को प्रदेश सरकार ने कठोर अपराधों की श्रेणी में रखा है। लेकिन पिछले 4 वर्षों में एक भी प्रकरण इसके अंतर्गत पंजीबध्द नहीं किया। इसी प्रकार भ्रूण हत्या की जानकारी देने वाले व्यक्ति की 10 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा इस सरकार ने की थी, किंतु गत दो वर्षों से किसी को भी यह ईनाम नहीं बांटा गया। इससे निष्कर्ष निकलता है कि सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर है, जबकि सर्वविदित है कि भारत के 14 जिलों में से मधयप्रदेश के भिण्ड और मुरैना में भ्रूण हत्याऐं सर्वाधिक होती हैं। महिलाओं के लिये संचालित अनेक योजनाएँ भ्रष्टाचार से अछुती नहीं है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका पर्यवेक्षक, आदि की नियुक्ति में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। साइकिल घोटाला, जननी सुरक्षा योजना, पोषण आहार, गरीबी रेखा, राशन कार्ड में धांधाली, पेंशन, नर्सिंग, कन्यादान योजनान्तर्गत दहेज खरीदी, लाड़ली लक्ष्मी योजना, अन्न प्राशन योजना, गोद भराई आदि योजनाएँ मात्र विज्ञापन और कागजों पर ही फलफूल रही हैं।

31 सदस्यीय शिवराज सिंह चौहान मंत्रीमंडल में केवल 3 महिलाओं को स्थान मिला। यशोधारा राजे सिंधिया एवं अर्चना चिटनीस को पृथक कर दिया था। वरिष्ठ महिला मंत्री सुश्री कुसुम मेहदले इनसे असंतुष्ट हैं। 24 निगम मंडलों में से मात्र एक महिला को निगम का अधयक्ष बनाया गया है। जबकि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की भोपाल बैठक में मुख्यमंत्री ने 50 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने की बात कही थी। किंतु मंत्रिमंडल में उनका दूसरा ही स्वरूप दिखा।

महिलाओं के लिये संचालित आयुष्यमति योजना को भी श्री चौहान ने बंद कर दिया। भाजपा की वरिष्ठ नेता स्व. विजयाराजे सिंधिया के नाम से संचालित विजयाराजे बीमा कल्याण योजना को एक वर्ष बाद बस्तों में बंद कर दिया। भाजपा की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती द्वारा शुरू की गई पंचज कार्यक्रम को बन्द कर दिया गया। कहने का अर्थ है भाजपा महिलाओं की हितैषी कम दुश्मन ज्यादा है।

भाजपा सरकार के बजट में महिलाओं के हित में कोई घोषणा नहीं की गई। 4 वर्ष पूर्व घोषित महिला नीति का अभी तक क्रियान्वयन नहीं हुआ। शायद ठंडे बस्ते बंद ही रहेगी। नई महिला नीति बनाने के लिए 30 जुलाई 06 में महिला पंचायत आयोजित की गई थी। जिसमें महिला पंचायत पर महिलाओं के सुझाव लेकर नई महिला नीति तैयार की गई। 18 माह व्यतीत हो जाने के बाद शिवराज को एक आयोजन के तहत पुन: महिला पंचायत की याद हो आई और उन्होंने शीघ्र राजधानी में पूर्व में आयोजित अन्य महापंचायतों की तरह महिला पंचायत अप्रैल में करने की घोषणा कर डाली। चुनाव के नज़दीक समय को देखकर 50 प्रतिशत मतदाताओं को आकर्षित करने के लिये कुछ तो खेल खेलना ही पड़ेगा, उसमें से एक महिला पंचायत होगी।

राजेन्द्र श्रीवास्तव