संस्करण: 17 फरवरी-2014

चीन जहां भ्रष्टाचार विरोधियों को दंडित किया जाता है

 

? एल.एस.हरदेनिया

        हां हमारे देश में उनको सम्मानित किया जा रहा है जो भ्रष्टाचार के विरूध्द आवाज उठाते हैं। यहां तक कि दिल्ली के नागरिकों ने ऐसे ही एक भ्रष्टाचार विरोधी समूह के हाथ में सत्ता सौंप दी। वहीं चीन में एक के बाद एक ऐसे लोगों को सजा दी जा रही है जो भ्रष्टाचार के विरूध्द आवाज उठाते हैं।

                पिछले सप्ताह चीन की एक अदालत ने ऐसे ही एक व्यक्ति को जो पेशे से वकील हैं और भ्रष्टाचार के विरूध्द अभियान चलाते हैं,चार वर्ष की सजा दी है। उसके बाद बीजिंग की एक और अदालत ने दो ऐसे व्यक्तियों को सजा दी जो भ्रष्टाचार के विरूध्द जनता में जाग्रति फैला रहे थे। इन दोनों पर यह आरोप लगाया गया कि वे समाज में अव्यवस्था फैलाते हैं। इन लोगों को इसलिए सजा दी गई क्योंकि वे चीन के अनेक शहरों में प्रदर्शन करते हुए यह मांग करते थे कि कम्यूनिस्ट पार्टियों के पदाधिकारी और अन्य शासकीय अधिकारी उनकी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करें। पिछले वर्ष चीन के वकीलों,छोटे उद्योगपतियों,विद्वतजनों और अन्य जागरूक नागरिकों ने मिलकर एक संगठन बनाया था। इस संगठन का नाम है ''नव नागरिक आंदोलन''। इस आंदोलन के सदस्य बीजिंग में रात्रि भोज पर मिलते हैं और किसी न किसी आंदोलन की रूपरेखा बनाते हैं। इनकी मांग रहती है कि समाज व सरकार से जुड़े मामलों में आम लोगों की भूमिका बढ़ाई जाए। इस तरह की बैठकों में भाग लेने वाले 10 लोगों के विरूध्द मुकदमें चल रहे हैं और इसी तरह के 12 लोग पुलिस की हिरासत में हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व जो कर रहे हैं उनका नाम अंग्रेजी में एक्सयू है। ये पेशे से वकील हैं और उनकी ख्याति पूरे चीन में फैल चुकी है। एक समय ऐसा था जब सरकारी मीडिया भी उनकी प्रशंसा करता था। अन्य कामों के अतिरिक्त इन्होंने पुलिस हिरासत से संबंधित नियमों में परिवर्तन की मांग की थी। यह मांग उन्होंने उस समय की जब एक छात्र की पुलिस हिरासत में रहस्यपूर्ण परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। यह आरोप था कि छात्र की मृत्यु पुलिस द्वारा की गई पिटाई के बाद हुई थी। इसके अलावा उन्होंने घुमक्कड़ मजदूरों की समस्याओं को भी उठाया। इस तरह के लोग जो अपने घरों को छोड़कर अन्य स्थानों पर जाकर मजदूरी करके रोजी रोटी कमाते हैं, अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जैसे उनके बच्चों को शिक्षा की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है। एक्सयू की वकालत की फर्म को जबरदस्ती बंद करवा दिया गया। आरोप यह लगाया गया कि फर्म आयकर कानून का उल्लंघन कर रही है। लगे आरोप को बेबुनियाद बताते हुए यह कहा गया कि उन्होंने किसी भी कानून या नियम का उल्लंघन नहीं किया है। ''हमने मजदूरों के बच्चों के लिए शिक्षा की सुविधा की मांग की है तथा यह भी मांग की है उच्च पद पर बैठे लोग अपनी संपत्ति का ब्यौरा दें तथा यह भी बताएं कि उन्होंने कमाई के स्त्रोतों से ज्यादा संपत्ति कैसे अर्जित की।'' उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि इस तरह की मांग करने का अधिकार उन्हें देश के संविधान ने दिया है। एक्सयू पहले व्यक्ति नहीं हैं जिन्हें इस तरह के बेबुनियाद आरोप पर गिरतार किया गया हो।

             पिछले सप्ताह चीन के दक्षिण प्रांत में भी तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था। ये भी यह मांग कर रहे थे कि सत्ता में बैठे लोग अपनी संपत्ति का ब्यौरा दें। इनमें से एक व्यक्ति ऐसे हैं जिनने एक आजाद उम्मीदवार की हैसियत से चुनाव लड़ा था। उन्होंने बताया कि उनके चुनाव लड़ने का एक मात्र उद्देश्य जनचेतना फैलाना था। आपने समाचार पत्र से चर्चा करते हुए बताया कि स्थानीय स्वायक्त संस्थाओं के लिए आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़ सकते हैं। मैंने अपने  इसी अधिकार का उपयोग करते हुए चुनाव लड़ा था। अपने चुनाव प्रचार के दौरान मैंने व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया था। यह बात सत्ताधारियों को अच्छी नहीं लगी और मेरे चुनाव प्रचार में जगह-जगह बाधा पहुंचायी जाने लगी। मेरे अभियान को चारों तरफ भरपूर समर्थन मिलने लगा। इससे सत्ताधारियों का आक्रोश और बढ़ा। उन्होंने मेरे प्रचार कार्य में रोड़े अटकाए। यहां तक कि कालेज में पढ़ने वाली मेरी बेटी पर दबाव बनाया कि वह मुझे समझाए कि मैं अपना अभियान बंद कर दूं। इसके बाद मैं नव नागरिक आंदोलन का हिस्सा बन गया। इससे मुझे एक बड़े प्लेटफार्म पर काम करने का अवसर मिला। इस संस्था पर भी दबाव बनाया गया। परन्तु इससे कुछ अंतर नहीं आया। इसके बावजूद इस मुद्दे पर बहस जारी है कि कैसे शासकों पर संविधान के अनुसार काम करने का दबाव बनाया जाए। इस उद्देश्य के मद्देनजर बीजिंग के 78 से ज्यादा बुध्दिजीवियों ने एक खुला पत्र लिखा। इस पत्र के माध्यम से सरकार से अपील की गई कि वह संविधान के अनुसार आचरण करें और यह सुनिश्चित करे ताकि नागरिक अपना संगठन बनाने और विरोधा करने के अपने अधिकार का बिना किसी बाधा के उपयोग करते रहें। इसके बाद अनेक लोगों पर यह आरोप जड़ दिया गया कि वे कानून-व्यवस्था को भंग करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी आरोप के आधार पर भ्रष्टाचार विरोधी तत्वों को अदालत से दंडित करवाया जा रहा है। अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए यह दावा किया कि संविधान की धारा 35 के अनुसार उन्हें संगठन बनाने और प्रदर्शन करने का अधिकार प्राप्त है। हमारे इस अधिकार पर लगातार हमला हो रहा है। इन सब बातों का उल्लेख चीन के एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तेंग बियो समेत 77 बुध्दिजीवियों ने सरकार को एक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र में यह मांग की गई कि यह मुद्दा चीन की संसद में उठाया जाए जिसका वार्षिक सत्र 5 मार्च से प्रारंभ हो रहा है। चीन के एक बड़े इतिहास वेत्ता ने कहा है कि संविधान के अनुसार देश का संचालन हो, यह सुनिश्चित करना सत्ताधारियों की जिम्मेदारी है। बुध्दिजीवियों ने यह याद दिलाया है कि चीन के नए शासकों ने रिश्वत और भ्रष्टाचार के विरूध्द विश्व अभियान चलाने का वायदा किया था। परन्तु दु:ख की बात है कि सत्ता में बैठे लोग इस घोषणा के ठीक विपरीत कार्य कर रहे हैं। इतिहास वेत्ता जेंग लिफान ने याद दिलाया कि 1911 में चीन में संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष प्रारंभ हुआ था। जापान 20 वर्ष के अभियान के बाद विश्वशक्ति बन सका। भारत ने एक सफल प्रजातांत्रिक व्यवस्था बनाई। संवैधानिक अधिकारों के लिये शुरू किए गए अभियान को 100 वर्ष से ज्यादा हो चुका है। परन्तु चीन में इतने लंबे समय में भी कुछ नहीं बदला है। आज भी चीन के नागरिकों को संवैधानिक अधिकार पाने के लिये संघर्ष करना पड़ रहा है। भ्रष्टाचार के विरूध्द अभियान चलाना भी हमारा प्रजातांत्रिक हक है।

 

? एल.एस.हरदेनिया