संस्करण: 17 दिसम्बर -2012

किसान विरोधी

भाजपा सरकार

? अमिताभ पाण्डेय

               ध्यप्रदेश में शासन कर रही भाजपा सरकार से जुड़े नेता बार-बार किसानों के कल्याण, खेती को लाभ का धंधा बनाये जाने की लोक लुभावन बातें करते हैं। शासन की बैठकों से लेकर सार्वजनिक आमसभा, सेमिनार, पार्टी संगठन की बैठक में बार-बार किसानों के हित को लेकर चर्चा चिंतन देखने सुनने को मिलता है। सत्तारूढ नेता किसान हितों की जितनी बातें करते है यदि गंभीरता से उन पर काम हो तो प्रदेश में खेती करने वाले सभी किसान समृध्द हो गये होते। हकीकत यह है कि किसानों के कल्याण के जो दावे किये जा रहे हैं उनमें से ज्यादातर कागजी साबित हो रहे है। किसान खेत, खलिहान, कृषि से संबंधित समस्याओं के लिए सरकारी कार्यालयों से लेकर सत्तारूढ़ दल के नेताओं के घर तक लगातार चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी परेशानियां खत्म नही हो रही। यही कारण है कि उपज का उचित मूल्य खाद, बीज सहित कृषि संबंधी अन्य समस्याओं का समाधान करने की मांग को मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में किसान आंदोलन करने पर मजबूर है। सरकार किसानों की समस्या को हल करने के बजाय किसानों की आवाज को लाठी गोली के दम पर बंद कर देना चाहती है। रायसेन जिले के बरेली में तो आंदोलनकारी किसानों पर प्रशासन ने ए.के.47 अति आधुनिक बंदूक से गोलियां चलाई जिसमें किसान मारे गये तथा बड़ी संख्या में घायल भी हुए। जो सरकार किसानों की हितचिंतक होने का दावा करती है उस सरकार से किसानों को समाधान के बदले मौत मिली जो दुर्भाग्यपूर्ण है। किसान अब भी मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट,नकली खाद बीज, पर्याप्त खाद बीज की उपलब्धता न होने जैसी दिक्कतों के कारण परेशान हो रहे है। पर्याप्त बिजली न मिलने के कारण किसान खेत में खड़ी फसल की पर्याप्त सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में फसल खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है। कहीं कहीं तो पर्याप्त बिजली न होने से बोवनी में भी विलम्ब हो गया। यहां यह बताना जरूरी होगा कि राज्य सरकार पावर प्लांट के नाम पर किसानों से जबरन उनकी जमीन छीन रही है। अब तक अलीराजपुर, देवास, ओंकारेश्वर, श्योपुर, खण्डवा, शहडोल, सिंगरौली, कटनी, बालाघाट, मण्डला, सतना, पन्ना, रीवा में किसानों से जमीन लेकर सरकार ने पावर प्लांट के लिए उद्योगपतियों को दे दी। मधयप्रदेश में हजारों हेक्टेयर जमीन उद्योगपतियों ने पावर प्लांट के नाम पर ली लेकिन इनमें से कहीं भी बिजली उत्पादन की स्थिति संतोषजनक नहीं है। ऐसा लगता है कि पावर प्लांट के नाम पर उद्योगपतियों का लक्ष्य केवल जमीन को हड़पना ही रह गया है। कटनी जिले में तो जो किसान अपनी जमीन नहीं देना चाहते उन पर उद्योगपतियों को जमीन देने के लिए सरकारी अफसरों ने ऐसा दबाव डाला कि परेशान होकर दो किसानों ने आत्महत्या कर ली। खबर है कि कटनी जिले के बरही क्षेत्र में डोकरिया और भुजभुजा गांव के किसान जबरन जमीन छुड़ाये जाने के विरोध में अपने-अपने खेत में चिता सजाकर बैठ गये है। उनका कहना है कि अफसरों ने जबरन जमीन लेने की कोशिश की तो वे अपने ही खेत में बनाई गई लकड़ियों की चिता पर बैठकर खुद को आग लगा लेंगे। कटनी में किसानों की जमीन जबरन छुड़ाकर उद्योगपतियों को देने का मामला मध्यप्रदेश विधानसभा में भी चर्चा का विषय बना। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं ने राज्य सरकार पर किसान विरोधी होने के आरोप लगाये। उधर कटनी जिले के बरही क्षेत्र में जबरिया अधिग्रहण के विरोध में आयोजित किसान रैली को सम्बोधिात करते हुए कांग्रेस महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों को बर्बाद कर रही है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ राज्य शासन की किसान विरोध नीतियों के विरूध्द प्रदेशभर में संघर्ष करेगी।

                उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में इन दिनों किसान अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए परेशान है जबकि सरकारी अफसरों के पावर पाइंट प्रेजेन्टेशन किसानों की अलग ही तस्वीर बताने में लगे है। हाल ही में राज्य विधानसभा में राजगढ़ विधायक हेमराज कलपोनी, ब्यावरा विधायक पुरूषोत्तम दांगी ने किसानों की समस्याओं से संबंधित जो प्रश्न किये उनके जवाब चौकांने वाले है। लिखित उत्तर से यह जाहिर हो रहा है कि राज्य सरकार किसानों पर तरह-तरह के कर लगाकर उनकी तकलीफ को बढ़ा रही है तथा किसान कल्याण के दावे गलत है। कांग्रेस विधायक हेमराज कलपोनी, पुरूषोत्तम दांगी ने बताया कि केन्द्र सरकार किसानों के समग्र विकास के लिए संकल्पित है और कृषि विकास के लिए अनेक योजनाओं में शत प्रतिशत अनुदान दे रही है जबकि मध्यप्रदेश में शासन कर रही भाजपा सरकार केन्द्र सरकार से अनुदान प्राप्त योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन नहीं करवा पा रही है। केन्द्र सरकार विभिन्न कृषि योजनाओं के लिए शत प्रतिशत अनुदान देकर किसानों को संपन्न बनाना चाहती है लेकिन भाजपा शासित मध्यप्रदेश में राज्य सरकार द्वारा किसानों पर, कृषि यंत्रों पर तरह-तरह के कर लगाये जा रहे हैं।

               इस संबंध में मध्यप्रदेश विधानसभा में लिखित उत्तर में बताया गया कि राज्य शासन द्वारा टे्रक्टर एवं ट्राली पर लगने वाले वेट कर को 4प्रतिशत से बढ़ाकर 5प्रतिशत कर दिया गया है। विद्युत एवं डीजल से चलने वाले पम्पों पर पहले 4प्रतिशत वेटकर लगता था जिसको भी बढ़ाकर 5प्रतिशत कर दिया गया है। पहले प्रवेश कर नहीं लिया जाता था लेकिन अब भाजपा सरकार 1प्रतिशत की दर से प्रवेश कर ले रही है। लोहा पाईप पर वेट कर 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया जबकि 2प्रतिशत प्रवेश कर भी लिया जा रहा है। कृषि उपयोग में आने वाले पाईप पर भी राज्य शासन का वेटकर 4से बढ़कर 5प्रतिशत हो गया तथा 1प्रतिशत प्रवेश कर भी लिया जा रहा है। इसी प्रकार किसानों के उपयोग में आने वाली रासायनिक खाद पर लगने वाले वेट कर को भी 4प्रतिशत से बढ़ाकर 5कर दिया गया है।

               प्रसंगवश बताना आवश्यक होगा कि प्रदेश के किसानों को शासन की योजनाओं का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है। किसान कल्याण की योजनाएं भ्रष्ट अफसरों,मुनाफाखोर व्यापारियों घटिया खाद बीज बेचने वालों में उलझकर रह गई है। कृषि विभाग के अधिकारी केन्द्र सरकार से किसान हित में चलाई जा रही योजनाओं के तहत मिली राशि का पूर्ण उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। अधिकारिक सूत्र बताते है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार से मध्यप्रदेश के कृषि विभाग को किसान कल्याण संबंधी 9योजनाओं के लिए पिछले 4वर्षों में साढ़े 26अरब रूपये से ज्यादा दिये गये है। इनमें से अब तक राज्य का कृषि विभाग साढ़े 24अरब रूपये ही खर्च कर पाया है। किसान कल्याण संबंधी कृषि विभाग की योजनाओं के लक्ष्य पर्याप्त राशि के बाद भी समय पर पूरे नहीं हो रहे है। प्रदेश में अब भी बड़ी संख्या ऐसे किसानों की है जिनको कल्याणकारी योजनाओं का पता नहीं है। ऐसे में केन्द्र सरकार की आलोचना करने से पहले भाजपा नेताओं को यह देखना होगा कि किसानों के हित की योजनाओं में बाधक तत्व कौन है? क्या राज्य सरकार इनको पहचान कर दण्डित करेगी?

   ? अमिताभ पाण्डेय

(लेखक सामाजिक मुद्दों के पत्रकार है)