संस्करण: 17नवम्बर-2008

विकास की दौड़ में पिछड़ा म.प्र.

 

 

डॉ. सुनील शर्मा

स समय म.प्र. में विधानसभा चुनाव का प्रचार पूरे शबाब पर है वर्तमान सत्ताधारी भाजपा येनकेन प्रकारेण पुन: प्रदेश की सत्ता प्राप्त करने आतुर है। भाजपा द्वारा अपने पॉच वर्षीय कार्यकाल में किए गए कार्यों को कथित विकास का आईना बताकर एवं अपने नेतृत्व को विकास पुरूष की उपाधि से विभूषित कर वोट बटोरने की कवायद की जा रही है। वास्तव में अपने स्वभाव और अपनी प्रकृति के अनुरूप ऐसा कर भाजपा प्रदेश की भोली जनता को भ्रमित ही कर रही है।जहाँ तक किसी राज्य या क्षेत्र के विकास की बात है तो इस विषय पर  विशेषज्ञों एव नियोजन कर्ताओं की एकमत राय होती है कि वहाँ मानव विकास की क्या स्थिति है?एवं मानव विकास के सूचकांक में रोटी, शिक्षा और जन-स्वास्थ की स्थिति की अहम् भूमिका होती है। कोई राज्य विकास के दावे तब ही कर सकता है जबकि वह अपने नागरिकों को सम्मानजनक तरीके से रोजी रोटी की व्यवस्था कर सके, हर बच्चे को शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। तथा राज्य के हर नागरिक को अच्छे स्वास्थ्य एवं बीमारी से उपचार की गारंटी मिले। वास्तव में विकास की डींगें हांकने वाली भाजपा सरकार की स्थिति इन बिंदुओं पर बिल्कुल उलट है तथा मान विकास के सूचकांक के अहम ये तीनों मुद्दों पर म0प्र0 की स्थिति काफी निराशाजनक हैं। इस बात की पुष्टि स्वयं प्रदेश की मानव विकास रिपोर्ट 2007 से होती है। साथ ही एशियाई विकास बैंक एवं कई अन्य वैश्विक एजेंसियों की रिपोर्टों में भी म0प्र0 विकास के मानकों में काफी पिछड़ा है। हम मानव विकास के पहले अंग रोजी-रोटी की उपलब्धता पर म0प्र0 की उपलब्धि की चर्चा करते हैं तो म0प्र0 की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना मे बदतर है। म0प्र0 में 37 फीसदी लोग अब भी गरीबी की रेखा के नीचे रह रहे हैं जोकि राष्ट्रीय औसत 27 फीसदी से 10 फीसदी अधिक है। एशियाई विकास बैंक मनीला द्वारा 31 मई 2007 को  जारी रिपोर्ट के अनुसार म0प्र0 का  मानव विकास सूचकांक 0.394 के स्तर का है जो कि राष्ट्रीय सूचकांक स्तर 0.472 की तुलना में काफी नीचे है। अभी अक्टूबर महीने में म0प्र0 में कुपोषण से सैंकड़ों बच्चों की मौत का मामला सुर्खियों में था तथा विशेषज्ञों द्वारा म0प्र की स्थिति की तुलना अफ्रीकी देश इथोपिया और चाड जैसे अविकसित देशों से की है। वास्तव पिछले पाँच वर्षो में म0प्र0 में रोजगार उपलब्धता की दर में गिरावट आई है जिससे आम लोगों की दैनिक आमदनी में कमी आई है जिसका पूरा प्रभाव उसके खानपान और स्वास्थ्य पर पड़ा है। रोजगार की तलाश में लोगों का पलायन बढ़ा है। विकास के नाम पर इनवेस्टर्स मीट की तथाकथित सफलता की बातें अब सबके सामने हैं।

        मानव विकास के दूसरे प्रमुख सूचकांक शिक्षा की बात है तो म0प्र0 में शिक्षा की स्थिति काफी बदतर हो गई  है। यहां शिक्षा के नाम पर काफी वादे-इरादे किये गये है, परंतु अभी हाल ही में भारत सरकार द्वारा जारी शैक्षिक विकास इंडेक्स 2006-07 के अनुसार म.प्र. की स्थिति 2005-06 की तुलना मे एक पायदान नीचे गिरकर 30 वें स्थान पर आ गई। सर्व शिक्षा अभियान की पूरी राशि  ही सरकार खर्च नहीं कर पाई एवं लगभग 40 प्रतिशत राशि का कोई उपयोग ही नहीं किया गया। शिक्षा व्यवस्था की आधारभूत संरचना के लिए स्कूल भवन की उपलब्धता जरूरी है परंतु म.प्र. की 2.3 प्रतिशत प्राथमिक शालायें और 47.5 फीसदी माधयमिक स्कूल भवन विहीन हैं। तथा 26 प्रतिशत शालायें कक्षा विहीन हैं। म0प्र0 की 21 प्रतिशत प्रायमरी एवं 39.7 प्रतिशत मिडिल स्कूलों में बच्चों को पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। 40 प्रतिशत प्रायमरी एवं 59.2 प्रतिशत मिडिल स्कूलों में टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है। शिक्षक, छात्र अनुपात भी 1:48 है जो कि मानक अनुपात से काफी अधिक है। पूरे प्रदेश में शिक्षकों की काफी कमी है। बड़े ही हास्यादपद तरीके से अतिथि शिक्षकों के जरिए बच्चों की पढ़ाई की रस्म अदायगी की जा रही है। हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि पिछले पांच वर्षों में शिक्षा के विकास के प्रति घोर लापरवाही की गई है। म0प्र0 में शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था पूरे तरीके से ढप्प पड़ गई है। यहा शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाओं के नाम पर कागजी संस्थानों की बाढ़ सी आ गई है।

           विकास के तीसरे महत्वपूर्ण विषय जनस्वास्थ्य में भी म0प्र0 की स्थिति काफी बदतर है। म0प्र0 मानव विकास रिपोर्ट 2007 के अनुसार म0प्र0 में पुरूषों की औसत आयु 59.19 वर्ष तथा महिलाओं की औसत आयु 58.58 वर्ष है जो कि राष्ट्रीय औसत पुरूषों की औसत आयु 63.87 वर्ष तथा महिलाओं की औसत आयु 66.91 वर्ष से काफी कम है। औसत आयु के मामले में म0प्र0 बीमारू कहे जाने वाले राज्य बिहार एवं उड़ीसा से भी काफी पीछें है क्योंकि बिहार में पुरूष और महिलाओं की औसत आयु क्रमश: 65.66 वर्ष व 64.79 वर्ष है। इसी प्रकार उड़ीसा में यह औसत क्रमश: 60.75 वर्ष व 59.71 वर्ष हैं। यहां के नागरिकों की औसत आयु कम होना इस बात का संकेत है कि यहाँ बेहतर जीवन की  उचित परिस्थितियों का  सर्वथा अभाव है। शिशु मृत्यु दर एवं जननी मृत्यु दर के मामले में भी म.प्र. की स्थिति बदतर है। म0प्र0 में 22 फीसदी जनता स्वच्छ जल के लिए मोहताज है तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता की रीढ़ मानी जाने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या आवश्यकता से 26 फीसदी कम है। वास्तव में म0प्र0 जन स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है। म.प्र. में चिकित्सक तैयार करने वाले संस्थानों पर ही मूलभूत सुविधाओं के अभाव में तालाबंदी का खतरा मंढरा रहा है। इस प्रकार रोटी, शिक्षा और जन स्वास्थ्य की बदतर स्थिति  म0प्र0 की भाजपा सरकार के विकास के दावे की वास्तविकता उजागर करती है तथा यह भी स्पष्ट होता है कि सिर्फ विकास का भ्रम फैलाकर ही भाजपा अपनी बाजी जीतनर चाहती है।

 

 

डॉ. सुनील शर्मा