संस्करण: 17 जनवरी -2011

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT


मुझे गलत कहने वाले कांग्रेस को नहीं जानते

  बीते साल सरकार से बाहर के नेताओं में वह कांग्रेस के सबसे चर्चित चेहरे थे। उनके बेलौस बयानों से कई बार संप्रग सरकार से लेकर संगठन के भीतर तक सियासत गरमाई भी। >महासचिव दिग्विजय सिंह


भाजपा का मिशन कश्मीर यह हिंसा के दलदल में कूदने का नतीजा ह


  छोटी भूल का बड़ा होना जैसे मुस्लिम चरमपंथ ने हिंसा के बोझ को पाकिस्तान के लिए ढोया क्या हिन्दू चरमपंथ को इसी तरह का अनुकरण करना सही है? >महमूद-उर-राशिद


आस्था और जनहित का द्वंद ? धार्मिक स्थलों को प्रतिस्थापित करने का मामला

 

  वैध प्रार्थनास्थलों का मसला अब एक राष्ट्रीय चिन्ता का सबब बनता जा रहा है। यह अकारण नहीं कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप कर सभी राज्यों को निर्देश देकर >सुभाष गाताडे


लगभग सिद्ध हो गया है  कि संघ ने भी आतंकवाद का रास्ता चुन लिया है

 

  दो जनवरी 2011 से जो सूचनायें सामने आयी हैं उनसे यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि मालेगाँव, हैदराबाद, अजमेर शरीफ और समझौता एक्सप्रेस के विस्फोटों में राष्ट्रीय सेवक संघ >एल. एस. हरदेनिया


क्या अब माटी कुम्हार को रौंदने लगी है

 

   रूपम पाठक नामक महिला ने अपने यौन शोषण के खिलाफ एक बाहुबली विधायक की चाकू मार कर हत्या करके यही चरितार्थ कर दिया है कि जब जुल्म की इंतिहा हो जाती है >वीरेन्द्र जैन


प्रसंगवश

केसरी की हत्या से उठे सवाल

  बिहार के पूर्णिया जिले के भाजपा विधायक राजकिशोर केसरी की हत्या कर दी गई। हत्या करने वाली महिला रूपम पाठक एक निजी स्कूल की संचालिका है। >महेश बागी


इधर किसान - कल्याण की घोषणाओं से आत्ममुग्ध है सरकार

उधर विपदाओं से घिरे किसान कर रहे हैं खुदकुशी

 

  किसानों के हित में बढ़चढ़कर घोषणाएं करने और उनको खुशहाल बनाने का दावा कर वाहवाही लूटने वाली मध्यप्रदेश सरकार की जमीनी हकीकत का अब पर्दाफाश होता जा रहा है >राजेन्द्र जोशी


किसानों को पागल करार देने की हठधर्मिता

 

  देश की किसी भी संवेदनशील राज्य सरकार के लिए यह कितनी शर्मनाक और हकीकत से मुंह चुराने वाली स्थिति है कि वह प्रदेश में एक के बाद एक मरने वाले किसानों को पागल करार देने >प्रमोद भार्गव


सरकारी नीतियों के चलते मप्र क़ा किसान आत्महत्या को मजबूर

 

  प्र में किसानों द्वारा आत्महत्या की खबरें लगातार आ रही हैं। प्रतीत हो रहा है कि शोषण,फसलों पर मौसम की मार और कर्ज से बर्बाद,बेहाल और हताश किसान ने आत्मघात को मुक्ति का >डॉ सुनील शर्मा


ग्लोबल कूलिंग की चपेट में मध्यप्रदेश

 

  यूरोप, ब्रिटेन, अमेरिका सहित पश्चिम के कई देश भीषण बर्फबारी और भयानक ठंड की चपेट में यदि हों तो शायद ही किसी को आश्चर्य हो पर इस शरद ऋतु में पश्चिम और पूर्व के कई देश >शब्बीर कादरी


हाशिया छोड़ कर केन्द्र में पहुंचते सवाल

 

  क्कीसवीं सदी की दूसरी दहाई की दहलीज पर समाज में महिलाओं की स्थिति पर क्या कुछ कहा जा सकता है। स्पष्ट है कि समाज में महिलाओं की स्थितियों में सुधार के प्रयास आगे आनेवाले सालों >अंजलि सिन्हा


सम-सामयिक

वसंत वसंत क़हाँ हो तुम

 

  भी-अभी ठंड ने गमए का चुम्बन लिया है समझ गया बस वसंत आने वाला है। पर वसंत है कहाँ? वह तो खो गया है, सीमेंट और कांक्रीट के जंगल में। अब प्रक़्रति के रंग भी बदलने लगे हैं। >डॉ महेश परिमल


17 जनवर-2011 

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved