संस्करण: 16 सितम्बर-2013

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नकली लालकिले से

लालच का तुष्टीकरण

       हाल ही में नरेंद्र मोदी ने जयपुर रैली में ए बी सी डी के नए मायने समझाए। अच्छा होता पूरी पढ़ लेते। क्योंकि बी से बंगारू लक्ष्मण, और बाबूभाई बोखीरिया भी होता है, जिन्हें भ्रष्टाचार के मामले में कोर्ट ने सजा सुनाई है, बी से ही बीएस येदियुरप्पा होता है जिनकी कुर्सी भ्रष्टाचार के कारण गई है। एन से नितिन गडकरी होता है, पी से पुरुषोत्तम सोलंकी होता है जिन पर भ्रष्टाचार का केस चल रहा है। आर से राघवजी होता है, जिन पर अपने ही नौकर से कुकर्म का आरोप है।  और भी ऐसे कई नाम हैं जो ए बी सी डी से ही शुरू होते हैं।    

? विवेकानंद


गुजरात एक आदर्श राज्य नही

        ''गुजरात में वृध्दि ऋणग्रस्तता पर निर्भर करती है, और यह विकास के लिये बाधक है।''

                वामपंथियों द्वारा विकास के गुजरात ढाँचे की अक्सर उसके सामाजिक पिछड़ेपन के कारण आलोचना की जाती रही है। दरअसल, राज्य के सामाजिक सूचकांक उसके आर्थिक प्रदर्शन से मेल नहीं खाते है। 2010 में गुजरात में 23 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे  जबकि संपूर्ण भारत का औसत 29.8 प्रतिशत था। अर्थात गरीबी के मामले मे गुजरात की स्थिति देश के औसत से बेहतर थी। 

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क्रिस्टोफ जेफ्रिलोट

(लेखक पेरिस मे सी.ई.आर.आई. साइंसेस/एन.सी.आर.एस. मे वरिष्ठ शोधा सहायक है तथा किंग्स इंडिया इंस्टीटयूट लंदन मे भारतीय राजनीति एवं समाजशास्त्र के प्रोफेसर है।)


मोदी के गुजरात में किसान हो रहें हैं तबाह

      क ओर गुजरात में 9 से 11 सितम्बर के बीच विश्व कृषि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें कृषि के जरिए विकास के  संबंधा में बड़ी-बड़ी डींगें हांकी गईं। वहीं दूसरी ओर गुजरात का आम किसान इस समय बहुत ही दु:खी है। इसका मुख्य कारण गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की किसान-विरोधी नीतियां हैं। इस समय वहां के किसानों का आक्रोश पराकाष्ठा पर है। वहां के किसान इस बात से नाराज हैं कि नरेन्द्र मोदी बड़ी उदारता से किसानों के बुनियादी हितों की उपेक्षा करते हुए, कार्पोरेट जगत को बेशकीमती उपजाऊ जमीनें कौड़ियों के दाम  दिए जा रहे हैं। 

 ? एल.एस.हरदेनिया


मोदी का 'वंजारा' अतीत :

राज्य नीति के तौर पर फर्जी मुठभेड़ें

      निलंबित चल रहे अफसरों - जो गम्भीर आरोपों के अन्तर्गत सलाखों के पीछे बन्द हों - उनके इस्तीफे के पत्र हुक्मरानों के लिए कोई मायने नहीं रखते। लेकिन जहां तक गुजरात के निलम्बित डीआईजी डाहयाजी गोबरजी वंजारा का सवाल है,जो आतंकवादी विरोधी दस्ते के मुखिया रह चुके हैं और सूबे में हुकूमत की बागडोर सम्भालनेवालों के बेहद करीब रह चुके हैं, और चन्द गोपनीय उद्धाटनों से उन्हें अधिक असुविधाजनक स्थिति में डाल सकते हैं, मामला थोड़ा अलग हो जाता है।

? सुभाष गाताड़े


मुजफ्फरनगर के साम्प्रदायिक दंगे,

कुछ विचारणीय बिन्दु

         मुजफ्फरनगर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दूसरे नगरों, गाँवों के दंगों के मामले में एक बार फिर से वही भूल की जा रही है जिसमें पूरी स्थिति को तात्कालिक घटना?घटनाओं तक सीमित करके देखा जाता है। एक लड़के द्वारा किसी लड़की को छेड़ने और उसके भाइयों द्वारा सम्बन्धित को दण्डित करने के प्रयास में अति हो जाना असामान्य नहीं है। सामंती प्रभाव वाले क्षेत्रों और ग्रामों कस्बों में गाहे बगाहे ऐसी घटनाएं घटती रहती हैं।  

 ?   वीरेन्द्र जैन


कई सवालों को

जन्म दे रहे हैं यह दंगे

           मुजफ्फरनगर जल रहा है। शामली और सुल्तानपुर के दंगों की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि दिल्ली से 120 किलोमीटर दूर बसा उत्तरप्रदेश का औद्योगिक शहर जल उठा। वजह एक लड़की से छेड़छाड़ पर दो समुदायों का आमने-सामने आ जाना। समाजवादी पार्टी की धार्मनिरपेक्ष सरकार के डेढ़ वर्ष के अल्प कार्यकाल का यह 13 वां बड़ा दंगा था। वैसे समाजवाद की अवधारणा को परे छोड़ धर्मनिरपेक्षता का आवरण ओढ़कर अखिलेश सरकार की सत्ता में 40 से अधिक दंगे यह तो दर्शाते ही हैं कि उत्तरप्रदेश वाकई धर्मनिरपेक्षता का सापेक्ष उदाहरण पेश कर रहा है।  

? सिध्दार्थ शंकर गौतम


आसा ने भाजपा की

आशाओं पर पानी फेरा

      ल तक अपने आप को करोड़ों लोगों का भगवान घोषित करने वाले आसा बाबा आज  सलाखों के पीछे हैं,वह भी किसी सामान्य अथवा राजनीतिक कारणों से नहीं बल्कि बलात्कार जैसे घृणित अपराध के आरोप में गिरफ्तारी के पहले उन्होंने खूब माहौल बनाया। राजनेताओं को चमकाया कि मेरे अनुयायी लाखों में हैं,यदि इस संख्या में 4से गुणा कर दो तुम्हांरे वोटों का नुकसान करोड़ों में जायगा। इसी संख्या के बल पर यह भी बताने का प्रयास किया कि उनके विरुध्द कार्यवाही से चारों ओर आग लग सकती है,ला एंड आर्डर की समस्या आ सकती है।

?  मोकर्रम खान


'संत' की परिभाषा

विवादों में

      'संत' शब्द इतना पावन है कि इसकी परिभाषा का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। यह शब्द सम्मान सूचना, आस्था पैदा करने वाला है जो उस व्यक्ति के प्रति श्रध्दा पैदा करता है जिसमें संतों के गुणों का भंडार पाया जाता है। पौराणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों में जहां जहां भी 'संत' शब्द का उपयोग होता चला आया है वहां सहज आम आदमी के हृदय में संतों के प्रति आदर श्रध्दा और आस्था उमड़ पड़ती है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ धार्मगुरूओं और ऐसे व्यक्ति ही संत है जो वेशभूषा से बाबाजी दिखे, दाढ़ी मूंछ, और बड़े-बड़े लम्बे बालों की जटाएें रखें। 'संत' शब्द अपने आप में इतने व्यापक गुणों का खजाना है कि इसमें व्यक्ति के चरित्र में कहीं से भी काले छींटे उड़कर नहीं लग पाये हो।

 

? राजेन्द्र जोशी


कुपोषण पर करारा प्रहार-

भोजन का अधिकार

        कुछ समय पूर्व जारी की गई हंगर एण्ड मालन्यूट्रिशन रिपोर्ट स्तब्ध करने वाली थी,इसे हैदराबाद के एक एनजीओ नंदी फाउंडेषन एवं महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा कार्पोरेट समूह ने मिलकर तैयार किया था। यह रिपोर्ट बतलाती है कि देश में पॉच वर्ष से कम आयु के 42फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार है।यह कोई साधारण ऑकड़ा नहीं है विचारणीय है कि अपनी उम्र के लगभग आधे बच्चों के कुपोषित होने के बाद हमारे देश का भविष्य क्या होगा? क्योंकि कुपोषण सिर्फ शारीरिक विकास नहीं रोकता है बल्कि मानसिक विकास को भी पंगु बना देता है। कुपोषण से बच्चा या तोअसमय ही काल का ग्रास बनता है या फिर बड़ा होकर गरीबी का दंष झेलता है।  

? डॉ. सुनील शर्मा


मनुष्य के अस्तित्व का

अवमूल्यन है आत्महत्या

       स साल का जून महीना नवोदित फिल्म अभिनेत्री जिया खान की आत्महत्या की खबरों से सुर्खियों में रहा। यह भी कितना त्रासदपूर्ण था कि सुबह-सुबह जिया के आत्महत्या कर लेने की खबर टीवी पर देख श्रीगंगानगर में एक 12साल का पांचवी कक्षा में पढ़ने वाला बच्चा कुछ ज्यादा ही आहत हुआ। उसने डीवीडी प्लेयर में जिया की फिल्म लगा टीवी ऑन कर दी और फिल्म देखते-देखते फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली।      

 

? राहुल शर्मा


मप्र में कुपोषण के नाम पर किसका 'पोषण'

        ध्यप्रदेश के माथे पर लगे चुके कुपोषण के कलंग को मिटाने के लिए प्रदेश सरकार जहां पानी की तरह पैसा बहा रही है वहीं आज भी मप्र में कुपोषण के नाम पर कुपोषित का नहीं, बल्कि किसी और का पोषण हो रहा है। मध्यप्रदेश में हर साल करीब 30 हजार बच्चे अपना पहला जन्मदिन तक नहीं मना पाते और काल के गाल में समा जाते हैं। ये वो अभागे अबोध बच्चे हैं, जो धरती पर पैर रखने के साथ ही कुपोषण के शिकार होते हैं और जन्म के बाद पोषण आहार की कमी के चलते अकाल मृत्यु को प्राप्त होते हैं। इसी कलंक की बदौलत मध्यप्रदेश देश के उन पिछड़े राज्यों में शुमार है, जहां शिशु मृत्युदर सबसे ज्यादा है।  

? राखी रघुवंशी


उत्तराखण्ड में पूजा-पाठ नहीं, पुनर्निर्माण-कार्य आवश्यक है।

       ह सर्वविदित है कि तीन माह पूर्व उत्तराखण्ड में आयी प्राकृतिक आपदा ने वहां का जनजीवन तबाह कर दिया है। अब जबकि समूचे देश में त्योहारों की धूमधाम शुरू हो चुकी है, केदार घाटी में वीरानी छायी है। चार सौ से अधिक गांव आज भी आपदाग्रस्त हैं और 150 से अधिक गांवों की हालत बहुत खराब है। सड़कें, अस्पताल, स्कूल, घर-सभी कुछ ध्वस्त हो चुके हैं। सड़कों के नाम पर सिर्फ पगडण्डियां दिखाई देती हैं। आवागमन अभी सड़कों के पुननिर्माण तक संभव नहीं। अगस्त्य मुनि, गौरीकुण्ड, गुप्तकाशी के मार्ग चलने लायक नहीं हैं।    

 

? डॉ. गीता गुप्त


एक तरफ महंगाई, दूसरी तरह रिकॉर्ड कायम करती फिल्में

        र्थिक तंत्र पूरी तरह से गड़बड़ाया हुआ है। महंगाई बेकाबू है। आम जनता त्राहिमाम कर रही है। रुपए की अस्थिरता जारी है। औद्योगिक उत्पादन का ग्राफ तेजी से नीचे जा रहा है। शेयर बाजार में अपनी पूंजी लगाने वाले भ्रम में जी रहे हैं। इन विषम परिस्थितियों के बीच एक उद्योग ही ऐसा है,जो लगातार चमक रहा है। वह है बॉलीवुड। आज बॉलीवुड की फिल्में तेजी से धन कमा रही हैं। भले ही देश के हर क्षेत्र में मंदी का रुख हो,पर बॉलीवुड में आजकल सबके पौ-बारह हैं। आखिर ऐसे कैसे हो रहा है? इस पर सभी हतप्रभ हैं। 

? डॉ. महेश परिमल


  16 सितम्बर-2013

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