संस्करण: 16 सितम्बर-2013

कुपोषण पर करारा प्रहार-

भोजन का अधिकार

? डॉ. सुनील शर्मा

        कुछ समय पूर्व जारी की गई हंगर एण्ड मालन्यूट्रिशन रिपोर्ट स्तब्ध करने वाली थी,इसे हैदराबाद के एक एनजीओ नंदी फाउंडेषन एवं महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा कार्पोरेट समूह ने मिलकर तैयार किया था। यह रिपोर्ट बतलाती है कि देश में पॉच वर्ष से कम आयु के 42फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार है।यह कोई साधारण ऑकड़ा नहीं है विचारणीय है कि अपनी उम्र के लगभग आधे बच्चों के कुपोषित होने के बाद हमारे देश का भविष्य क्या होगा? क्योंकि कुपोषण सिर्फ शारीरिक विकास नहीं रोकता है बल्कि मानसिक विकास को भी पंगु बना देता है। कुपोषण से बच्चा या तोअसमय ही काल का ग्रास बनता है या फिर बड़ा होकर गरीबी का दंष झेलता है। हंगर एण्ड मालन्यूट्रिशन रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत के आठ राज्यों में जितना कुपोषण है,उतना अफ्रीका और सहारा उपमहाद्वीप के राज्यों में भी नहीं है। दुनिया भर में  कुपोषण से पॉच वर्ष की अवस्था मे जितनी मौते होती हैं, उनमें से 21फीसदी सिर्फ भारतीय बच्चे होते हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट बतलाती है कि भारत के कुछ इलाकों में कुपोषण की समस्या बहुत ज्यादा है और दुनिया का हर चौथा कुपोषित बच्चा भारतीय है जिसकी वजह से विश्व में कुपोषण से जितनी मौते होती हैं,उनमें भारत का स्थान दूसरा है। संयुक्त राष्ट्र मानव विकास सूचकांक रिपोर्ट भी यह बतलाती है कि भारत में कुपोषण स्थिति अनेक अफ्रीकी देशों से बदतर है यहॉ बच्चे ही नहीं बल्कि माँए भी कुपोषण की षिकार है। गर्भवती महिलाएॅ,बच्चे और नवजात शिशु कुपोषण की चपेट में जल्दी आते हैं। माताओं के कुपोषण से स्थिति यह बन रही है कि 51 फीसदी माताएॅ अपने नवजात षिषु को अपना पहला दूध नहीं पिलाती और 56 फीसदी मॉए छह माह से पहले नवजात को पानी देना प्रारम्भ कर देती हैं।

               उल्लेखनीय है कि भारत की यह स्थिति 2004 में शाइनिंग इंडिया के ढोल पीटने के 10 दस बाद की है और आज का गुजरात और म.प्र.भी कुपोषण के मामले में बदतर हालात को प्रदर्शन करने वाले राज्यों की जमात में ामिल है। भारत में कुपोषण के परिप्रेक्ष्य में यह जान लेना जरूरी है कि कुपोषण है क्या? वस्तुत: आहार में कमी या अंसुतलन के कारण उत्पन्न शारीरिक कमियॉ या खराबी कुपोषण कहलाती है। हमारे शरीर में जीवन  संचार के लिए लिए पर्याप्त मात्रा में  उर्जा, जल और लगभग 40 प्रकार के पोषक तत्वो की आव्यकता होती है और इनमें से एक या अधिक पर्दाथों की कमी होती है तो कुपोषण प्रारंभ हो जाता है। हमारे देश में पोषक तत्वों की कमी से ही कुपोषण बढ़ रहा है। अब प्रश्न यह है कि एक तरफ तो हम हर साल खाद्यान्न उत्पादन में रिकार्ड बनाते है दूसरी तरफ कुपोषण से होने वाली मौंतो का ऑकड़ा भी बढ़ाते हैं आखिर ऐसा क्यों? इसका सीधा सा उत्तर है कि इसके लिए हमारे देश की कमजोर खाद्यान्न वितरण प्रणाली और प्रासकों में जबावदेही का अभाव जैसे कारण जिम्मेदार है, कमजोर खाद्यान्न वितरण प्रणाली की वजह है -सुपात्रों तक राषन नहीं पहुॅच पाना,वितरण प्रणाली में लीकेज और भारी भ्रष्टाचार। और कोई मरे या कुपोषित रहे इसके बाद भी प्रषासक पर उॅगली नहीं उठती है तो फिर कुपोषण पर चिंता कौन करे?

               वास्तव में अब तक की नीतियों में कमी के कारण कुपोषण बेलगाम रहा है लेकिन अब देश से कुपोषण के खात्में के दिन आ गए है। और कुपोषण पर करारी चोट करेगा - भोजन का अधिकार। केन्द्र की यूपीए सरकार के इस उपहार से कुपोषण का खात्मा तय है। अभी हाल ही लागू भोजन के अधिकार से देश की 85 करोड़ आबादी को सस्ता भोजन मिलना तय है साथ वह साधिकार इसकी मांग कर सकता है अर्थात अब देश में कोई गरीब भूखा नहीं सोयेगा, और भूख कुपोषण की जनक होती है। अभी तक भोजन के अभाव में गर्भवती माताएॅ अपने साथ गर्भ में पल रहे बच्चे को भूखा रखने मजबूर रहती थीं क्योंकि कुछ रोटियॉ जो उनके पास होती थी वो सामने बैठे भूखे बच्चे को खिला देतीं थीं और स्वयं भूखे पेट सो जाती थी परिणाम मॉ कमजोर, जन्म लेने वाला बच्चा कमजोर और जो कि भविष्य का कुपोषित बच्चा बनता था। लेकिन अभी तक इस दर्द पर केवल कविताएॅ लिखी जाती थीं इसे दूर करने की इबारत नहीं। तो भोजन का अधिकार इसे मिटाने की इबारत भी बनेगा। क्योंकि इसके तहत प्रत्येक सुपात्र को 3 रूपये किलोग्राम की दर से चावल, 2 रूपये किलोग्राम की दर से गेहूॅ और 1रूपये किलो ग्राम की दर से मोटा अनाज मुहैया कराने का प्रावधान है और सबसे महत्तवपूर्ण प्रावधान है - गर्भवती महिलाओं को 6 महीने तक 1000रूपये मासिक भत्ता और  6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए पके हुए अनाज के हक की बात। अब निश्चित तौर पर कोई मॉ भूखी नहीं सोएगी और गर्भ में पल रहे बच्चे के हक की कटौती करने मजबूर नहीं होगी। जिसका परिणाम होगा स्वस्थ बच्चे का जन्म और उस बच्चे को पके हुए अनाज के हक की गारण्टी, जो उसे निश्चित तौर पर कुपोषित होने से रोकेगा। भोजन की गारण्टी से मॉ अपने बच्चे की देखभाल के लिए भी समय निकलाने में सक्षम होगी।

               वास्तव में कुपोषण का उन्मूलन देश के विकास में मददकार होगा शामिल है। क्योंकि कुपोषण का सीधा संबंध िक्षा और कार्य क्षमता से होता है क्योंकि कुपोषित बच्चे न तो अच्छे से षिक्षा प्राप्त कर पाते हैं और न कार्य में दक्षता हासिल कर पाते है ऐसे वो गरीब बने रहते हैं और असमय ही काल का ग्रास बनते हैं लेकिन सुपोषित अर्थात स्वस्थ बच्चे िक्षा और कार्यक्षेत्र में श्रेष्ठ प्रदर्न करते हैं तो अब भोजन के अधिकार के बाद देश के ब्च्चे स्वस्थ और दक्ष बनेगें।

? डॉ. सुनील शर्मा