संस्करण: 16 सितम्बर-2013

आसा ने भाजपा की

आशाओं पर पानी फेरा

? मोकर्रम खान

              ल तक अपने आप को करोड़ों लोगों का भगवान घोषित करने वाले आसा बाबा आज  सलाखों के पीछे हैं,वह भी किसी सामान्य अथवा राजनीतिक कारणों से नहीं बल्कि बलात्कार जैसे घृणित अपराध के आरोप में गिरफ्तारी के पहले उन्होंने खूब माहौल बनाया। राजनेताओं को चमकाया कि मेरे अनुयायी लाखों में हैं,यदि इस संख्या में 4से गुणा कर दो तुम्हांरे वोटों का नुकसान करोड़ों में जायगा। इसी संख्या के बल पर यह भी बताने का प्रयास किया कि उनके विरुध्द कार्यवाही से चारों ओर आग लग सकती है,ला एंड आर्डर की समस्या आ सकती है।मध्य प्रदेश चूंकि भाजपा शासित राज्यहै और भाजपा की राजनीघ्ति का मुख्यक आधार जनमानस की धार्मिक भावनाओं का दोहन है इसलिये यहां मंत्री, संतरी, नेता, अफसर सभी खुले आम बाबाओं के चरण स्पंर्श करते हैं और वीडियो क्लिपिंग्स निजी टीवी चैनलों में बांट देते हैं ताकि उनकी धर्म-परायणता का अधिक से अधिक प्रचार हो सके। तो आसा पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिये कांग्रेस शासित राजस्थान तथा दिल्ली होते हुये मध्य प्रदेश पहुंच गये। राजस्थीन तथा दिल्ली में भी उनके आश्रम हैं तथा अनुयायियों की अच्छी खासी तादाद है किंतु वह वहां नहीं रुके क्योंकि वहां उनके अनुयायी सरकार में नहीं हैं और जब तक अपने लोग सरकार में शामिल न हों, संरक्षण की आशा बेकार है। सो आसा, संरक्षण की सुनिश्चित आशा में मध्य प्रदेश आ गये क्योंकि उन्हें  पूरी आशा थी कि यहां उनकी चरण वंदना करने वाले राजनेता तथा अधिकारी उन्हें जोधपुर पुलिस के हवाले नहीं होने देंगे। प्रारंभ में कुछ ऐसा ही हुआ, सत्तासीन भाजपा नेताओं ने उनके पक्ष में बोलना शुरू किया, राजस्थान पुलिस निरीह बनी आश्रम में घंटों प्रतीक्षा करती रही।  कांग्रेस भी चाहती थी कि जनता में यह संदेश पहुंच जाय कि भाजपा सरकार बलात्कार जैसे घृणित अपराधा के आरोपी को खुले आम संरक्षण दे रही है इसलिये जोधपुर पुलिस ने आसा को राजस्थान से भी निकल जाने दिया और दिल्ली  से भी जहां कांग्रेस की सरकारें हैं। मध्य प्रदेश में भी जोधपुर पुलिस बहुत ही साधारण तरीके से आई।  केवल मुट्ठी भर पुलिस अधिकारी कर्मचारी इंदौर आये और आसा बाबा के आश्रम पहुंचे जहां बाबा के अनुयायी हजारों की संख्या में उपस्थित थे। बाबा को अपने अनुयायियों पर गर्व था इसलिये वो बीच बीच में ललकार भी रहे थे। उनकी ललकार से अनुयायी जोश में आ गये, पुलिस से झड़प हो गई, पथराव भी हुआ। आसा बाबा तानाशाह की तरह बर्ताव कर रहे थे। जोधपुर पुलिस उनसे मिल कर उन्हेंक नोटिस देना चाहती थी किंतु बाबा एपाइंटमेंट ही नहीं दे रहे थे।  पहले प्रवचन में व्यस्त थे फिर विश्राम करने चले गये। घोषणा कर दी गई कि बाबा आराम करने चले गये हैं, अब जो भी होगा, सुबह होगा अर्थात् पुलिस सुबह तक प्रतीक्षा करे।  सारा घटनाक्रम टीवी पर डायरेक्ट टेलीकास्ट हो रहा था। भाजपा सरकार को अचानक आभास हो गया कि मध्य प्रदेश शासन के इस रवैये से जनता में गलत संदेश जा रहा है इससे देश भर में भाजपा की किरकिरी हो जायगी। फौरन परिदृश्य  बदल गया, राजस्थान पुलिस की सहायता के लिये भारी पुलिस बल भेज दिया गया और आसा बाबा को आधी रात के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी के बाद वैसा कुछ भी नहीं हुआ जैसी वह आशा कर रहे थे। कहीं ला एंड आर्डर की समस्या नहीं हुई, न तो  कहीं आग लगी न कहीं कोई बड़ा धरना प्रदर्शन हुआ क्यों कि धरना प्रदर्शन और दंगे फसादों की सफलता शासकीय सहयोग के बिना असंभव है। यदि शासन चाहता है तो प्रशासन तथा पुलिस मूकदर्शक बन कर सहयोग प्रदान करते हैं अन्यपथा पुलिस डंडे मार कर बंद कर देती है। सारा खेल शुरुआत में ही समाप्त हो जाता है।

              आसा बाबा की गिरफ्तारी के बाद वह तो नहीं हुआ जिसकी उन्हें  आशा थी किंतु वह हो गया जिसकी किसी को आशा नहीं थी। भाजपा की राजनीति में भूचाल आ गया, सब कुछ उलट पुलट हो गया। आसा बाबा की गिरफ्तारी से फर्जी मुठभेड़ के आरोप में पिछले सात सालों से जेल में बंद आईपीएस अधिकारी वंजारा के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने अपने इष्ट देवता नरेंद्र मोदी पर 10 पन्नों का लेटर बम दे मारा। वंजारा ने मोदी सरकार को नपुंसक तथा कायर तक कह डाला। पत्र के अनुसार वंजारा तथा उनके साथी पुलिस अधिकारियों ने सरकार की सोची समझी नीति का कार्यान्वयन किया था, ऐसे में इस सरकार का स्थान मुंबई की तलोजा जेल या अहमदाबाद की साबरमती जेल होना चाहिये। वंजारा ने यह भी लिखा है कि वह मोदी को भगवान की तरह पूजते थे। वंजारा के पत्र का मतलब है कि एनकाउंटर मोदी सरकार के आदेश पर किये गये फिर केवल पुलिस अधिकारियों पर ठीकरा क्योंक फोड़ा गया यानि मोदी तथा अमित शाह को भी आरोपी बनाया जाना चाहिये और उनका भी स्थान जेल होना चाहिये। अपने ही भगवान पर भक्त कैसे इतना आक्रामक हो गया इसके बारे में समाचार पत्रों में छपी खबरों के अनुसार वंजारा अपने गुरु आसाराम बापू की गिरफ्तारी से बुरी तरह टूट चुके हैं और उनका विश्वा स मोदी पर से उठ गया है। वंजारा ने कुछ दिनों पहले अपने एक करीबी परिजन से कहा था कि मेरा भगवान (नरेंद्र मोदी) मेरे गुरु (आसाराम) को नहीं बचा पाया तो वह मुझे कैसे बचायेगा। वंजारा नरेंद्र मोदी पर इतने कुपित हो गये कि उन्होंने अपने पत्र की एक प्रति सीबीआई निदेशक को भी भेज दी। सीबीआई इस पत्र का उपयोग मोदी के सबसे विश्वरस्तन सिपहसालार अमित शाह जो इस समय उत्तर प्रदेश में भाजपा का झंडा उठाये हुये हैं, की जमानत निरस्त कराने के लिये इस्तेमाल कर सकती है और यदि उसे इसमें सफलता मिल जाती है तो कुछ समय बाद यह पत्र मोदी पर भी शिकंजा कसने में सहायक सिध्द हो सकता है और बहुत संभव है कि यह समय आगामी लोकसभा चुनावों के आसपास हो।  इस संभावना की अनदेखी न तो नरेंद्र मोदी कर सकते हैं और न ही संघ तथा भाजपा के नेता। शायद इसीलिये नरेंद्र मोदी अचानक प्रधानमंत्री पद से विरक्ति दिखाने लग गये।

              उल्ले्खनीय है कि गुजरात दंगों के बाद से हिंदू हृदय सम्राट की पदवी धारण किये हुये भाई नरेंद्र मोदी को संघ ने प्रधान मंत्री पद का सबसे योग्यर प्रत्याशी घोषित कर रखा है। अब हिंदू कट्टरपंथियों को प्रतीक्षा थी कि इस घोषणा से प्रथम दो शब्द हटा दिये जायें बल्कि मोदी को सीधो प्रधान मंत्री ही घोषित कर दिया जाय, चुनाव बाद में होते रहेंगे। मोदी भी आत्म  विश्वोस से भरे हुये थे क्यों कि संघ के पास उनका कोई विकल्प नहीं है और भाजपा में कोई भी नेता उन्हें चुनौती देने की स्थिघ्ति में नहीं है परंतु आसा बाबा की गिरफ्तारी से निराश वंजारा ने लेटर बम से मोदी की प्रधानमंत्री बनने की आशाओं पर ऐसा पानी फेरा कि उन्होंने स्वयं ही यह घोषणा कर दी कि वह प्रधान मंत्री बनने का सपना नहीं देखते हैं, पीएम बनने का सपना बहुत बुरा सपना है जो उन्हों बरबाद कर देगा। उन्हों ने यह भी घोषणा कर दी कि वह 2017 तक गुजरात के सीएम ही रहेंगे। कांग्रेस अब मोदी की तरफ से निश्चिंत हो सकती है।

               इस कथा के नायक अथवा खलनायक को लोग अभी तक संत आसाराम बापू के नाम से जानते थे, कई दिग्गज उन्हें भगवान भी मानते थे किंतु गिरफ्तारी के बाद उनके बारे में ऐसे ऐसे खुलासे हो रहे हैं कि जनता आश्चर्यचकित है और अनुयायी आहत। एक समाचार आया कि वह इस वृध्दावस्था में भी सेक्सुअली फिट हैं फिर समाचार आया कि वह महिलाओं तथा लड़कियों से अकेले में मिलते थे। उनके आश्रम से जुड़े शिवा चांडक ने बताया कि उसने बाबा को सेक्सो करते देखा है। आसा बाबा पर पुलिस अधिकारियों को धमकाने तथा रिश्वत की पेशकश करने के भी आरोप लगे हैं। जमीनों पर अवैध कब्जों के भी आरोप हैं। इन सब कारणों से इस कथा से कथावाचक आसाराम के नाम से राम शब्द हटा दिया गया है क्योंकि राम से करोड़ों हिंदुओं की आस्थाच जुड़ी हुई है।  

? मोकर्रम खान