संस्करण: 16 सितम्बर-2013

एक तरफ महंगाई, दूसरी तरह रिकॉर्ड कायम करती फिल्में

? डॉ. महेश परिमल

        र्थिक तंत्र पूरी तरह से गड़बड़ाया हुआ है। महंगाई बेकाबू है। आम जनता त्राहिमाम कर रही है। रुपए की अस्थिरता जारी है। औद्योगिक उत्पादन का ग्राफ तेजी से नीचे जा रहा है। शेयर बाजार में अपनी पूंजी लगाने वाले भ्रम में जी रहे हैं। इन विषम परिस्थितियों के बीच एक उद्योग ही ऐसा है,जो लगातार चमक रहा है। वह है बॉलीवुड। आज बॉलीवुड की फिल्में तेजी से धन कमा रही हैं। भले ही देश के हर क्षेत्र में मंदी का रुख हो,पर बॉलीवुड में आजकल सबके पौ-बारह हैं। आखिर ऐसे कैसे हो रहा है? इस पर सभी हतप्रभ हैं।

               डीजल-पेट्रोल के दाम हाल ही में बढ़े हैं। इस पर विपक्षी दल के लोग हाय-तौबा मचा रहे हैं। सब्जियों के दाम आसमान पर हैं। आम आदमी की हालत खराब हो रही है। दूसरी ओर लोग फिल्में देखने के लिए टिकट की लंबी लाइन में खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। शाहरुख की फिल्म ने तीन दिन में 200 करोड़ रुपए कमाने का कीर्तिमान रचा है। उस फिल्म को अब तक की सबसे सफल फिल्म का दर्जा दिया गया है। समझ में नहीं आता कि प्याज की कीमतें आसमान पर पहुंचने के कारण लोग सड़कों पर उतर आते हैं। सरकार वाहनों को क्षति पहुंचाते हैं। रास्ता जाम करते हैं, पर फिल्मों के प्रति उनका रुझान किसी तरह से कम नहीं होता। अब तो लोग फिल्में सफल होने का पैमाना भी यही मानने लगे हैं कि वह एक सप्ताह में कितना बिजनेस कर पाती है। किसी ने बहुत ही सही कहा है कि मनोरंजन की दुनिया 'लिपस्टिक' की तरह होती है। होठों पर लगाई जाने वाली इस लिपस्टिक के लगाने से लोगों को आनंद आता है, यही हाल मनोरंजन करने वाली फिल्मों का भी है। एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है, जिन्हें नई फिल्मों का  पहला शो देखने का शौक होता है। इसके लिए वे समय भी निकालकर बैठे होते हैं। फिल्म वाले इस वर्ग की इस आदत को जानकर ही अब उस फिल्म के प्रमोशन के लिए कई तरह की मार्केटिंग करते हैं। इस दौरान वे अपने प्रशंसकों के सामने जाकर उनसे फिल्म देखने की विनती करते हैं। पहले ऐसा नहीं होता था, लोग अपने कलाकारों को परदे पर ही देख पाते थे। सामान्य जीवन में उन्हें देख पाना बहुत ही मुश्किल होता था। अब तो बड़े से बड़ा कलाकार धन के लिए परदे के बाहर भी वह भौंडे डांस करने के लिए तैयार है। छोटी-छोटी वेलरी की दुकानों या फिर सेलून तक के उद्धाटन के लिए ये कलाकार आ जाते हैं। अब तो टीवी धारावाहिकों के बीच में भी ये कलाकार आकर अपनी फिल्मों का प्रचार करने लगे हैं।

              आज चेन्नई एक्सप्रेस की कमाई एक्सप्रेस की स्पीड से बढ़ रही है। उधर धीरे-धीरे ही सही मद्रास कैफे भी कमाई की ओर चल पड़ी है। आज फिल्मों की कमाई के अलावा उसके राइट्स आदि की आय को भी गिना जाने लगा है। भारत और भारत से बाहर अन्य देशों में उनकी फिल्मों से होने वाली आवक को भी ध्यान में रखा जाने लगा है। सभी फिल्में तो करोड़ों की कमाई नहीं करती, पर वे अपना प्रोडक्शन का खर्च शुरुआती महीनों में ही निकाल लेती है। इन समय बॉक्स ऑफिस की बड़ी चर्चा है। उसके कलेक्शन से ही कमाई के आंकड़े तय होते हैं। देश भर में जहां-जहां फिल्म रिलीज होती है, वहां-वहां होने वाले कलेक्शन से कमाई के आंकडे निकाले जाते हैं। हाल की फिल्मों के औसतन टिकट 75 रुपए (मार्निंग शो ) होता है। रेट कम होने के कारण इस समय मार्निंग शो का क्रेज अधिक है। उधर सामान्य रूप से टिकट दर 125 रुपए है। इतने अधिक टिकट दर पर जो कमाई होगी, निश्चित ही वह लाखों में होगी। पहले टिकट दर ही इतनी कम होती थी कि इतनी राशि के कलेक्शन की कल्पना ही नहीं की जा सकती थी। फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस में शाहरुख खान भले ही बड़ी उम्र के लग रहे हों और उनके सामने दीपिका नवयुवती लग रही हो, पर उस फिल्म ने जो कमाई की, उससे समीक्षकों की आंखें फटी की फटी रह गई। उसके सामने सिंह इज किंग और जोध अकबर केवल 90-91 करोड़ पाकर संतुष्ट हो गई।

                इतना तो तय है कि बॉलीवुड ने अब दर्शकों की नब्ज को पकड़ ली है, इसलिए अब उन पर मंदी का कोई असर नहीं होता। दर्शकों को आइटम सांग अच्छे लगते हैं, इसे देखते हुए अब फिल्म निर्माता अपनी फिल्म में आइटम सांग के लिए विशेष रूप से परिश्रम करते दिखाई देते हैं। चेन्नई एक्सप्रेस में आइटम सांग का फिल्म से कोई संबंध नहीं है, फिर भी फिल्म के आखिर में दिखाए गए इस डांस का यह असर है कि आज हर युवा उस गाने पर डांस करना चाहता है। उस गाने की ताल पर डांस कर वह स्वयं में गर्व का अनुभव करता है। यह बात तो तय है कि देश में मनोरंजन उद्योग और होटल उद्योग ऐसे हैं, जिन पर मंदी का कोई असर नहीं होता। मनोरंजन में पहला नमबर बॉलीवुड का है,दूसरे नम्बर पर क्रिकेट है। इसीलिए आईपीएल क्रिकेट के दौरान बॉलीवुड की फिल्में पिटने लगती हैं। उनकी कमाई कम हो जाती है। पर इस बार हुए आईपीएल के दौरान भी फिल्में नहीं पिटी। इससे सिध्द हो गया कि आईपीएल भी मनोरंजन पर किसी तरह से हावी नहीं हो सकता। इसीलिए बॉलीवुड मंदी से नहीं डरता। यही कारण है कि अब आगामी दिनों में कृश 3 और धूम 3 जैसी बड़े बजट की फिल्में अपना लोहा मनवाने के लिए तैयार हैं। तय है कि ये फिल्में भी चेन्नई एक्सप्रेस का रिकॉर्ड तोडेंग़ी। मतलब साफ है कि जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है, उसी तरह से फिल्मों की लोकप्रियता भी। महंगाई को कोसने वाला जब फिल्म देखने के लिए लाइन पर खड़ा होता है, तो उसके सामने होता है, एक वायवीय संसार, जो उसे थोड़ी देर के लिए ही सही, पर यथार्थ की दुनिया से दूर ले जाता है। फिल्मों की सफलता के पीछे भी यही कारण है।     

                
? डॉ. महेश परिमल