संस्करण: 16 मई-2011

वित्तीय जागरूकता बने पाठयक्रम का हिस्सा
 

? डॉ. सुनील शर्मा

               रिजर्व बैंक का आंकलन है कि पिछले पॉच वर्षो के दौरान तेजी से पैसा बढ़ाने का झॉसा देकर नागरिकों के कई हजार करोड़ रूपये फर्जी वित्त कंपनियों ने हड़प लिए हैं। ये कंपनियॉ लुभावने नाम और वायदों के साथ बाजार में आती है,झकाझक आफिस खोलती हैं स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार का आश्वासन देकर वसूली के काम पर लगाती है और अल्प समय में स्थानीय लोगों के बीच विश्वास पैदाकर लम्बी रकम इक्ट्ठा होने पर आफिस बंद कर अपना बोरिया बिस्तर समेट गायब हो जाती है। आम आदमी को जब कम्पनी का आफिस बंद मिलता है और कंपनी द्वारा दिए गए चैक बाउंस हो जाते है तब अपने लुटने का अहसास होता है। जैसा कि पिछले माह म.प्र.की राजधानी के आसपास के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय एक कंपनी ने जमाकर्ताओं को जमा राशि पर एक निश्चित राशि देने का वचन स्टांप पेपर पर लिखकर दिया तथा जमाकर्ताओं को अग्रिम चैक भी जारी कर दिए थे लेकिन यह कंपनी भी अच्छी खासी रकम लेकर चंपत हो गई, अब लुटे हुए जमाकर्ता हैरान है।

 

               इस कंपनी का कहना था कि वह जमाराशि शेयर बाजार में लगाती है जिसमें तेजी से पैसा बढ़ता है। शेयर बाजार की अनिश्चितताओं से अंजान आम आदमी इसके झॉसे में आ गया और अपनी खून पसीने की गाढ़ी कमाई कंपनी को सौंपकर शीघ्र ही धनवान होने के सपनों के बीच कंगाल हो गया।

 

               वास्तव में हमारे देश में पिछले दो दशकों से यह खुली लूट चल रही है। कभी कोई कम्पनी प्लांटेशन के नाम पर,कभी बकरी या सुअर पालन के व्यवसाय में पैसा लगाने के नाम पर तो कभी जमा पूजी पर बैंक से अधिक ब्याज का लालच देकर नागरिकों का पैसा जमा कर गायब हो जाती है।अपराधी पकड़े ही नहीं जाते है और संभव है कि अब तक कुछ पकड़ में भी आए हो मगर इनसे आम आदमी का पैसा शायद ही वापिस मिला हो?ऐसा नहीं कि है कि सरकारी स्तर पर इस फर्जीबाड़े से बचने से जनता को सावधान नहीं किया जाता हो,हमेशा विज्ञापनों के जरिए इनके वायदों से दूर रहने की हिदायतें दी जाती हैं फिर भी हर दो चार माह में फर्जी वित्त कंपनियों के झॉसे में आकर लोगों के लुटने की खबरें मिल ही जाती हैं। प्रश्नचिन्ह है कि सतर्कता के बाद भी आम आदमी लुट रहा है,और यह चुनौती है कि उसे इस लूट से कैसे बचाया जाए ?यह सच है कि आज हर आदमी अमीर बनना चाहता है,एवं अमीर और ज्यादा अमीर। अमीरी का यह मंत्र हर मस्तिष्क में कंपित होता रहता है। आम आदमी की जल्दी और चमत्कारिक तरीके से अमीर होने की चाहत ने ही वित्तीय धोखाधाड़ी को भी बढ़ाया है। इसके साथ ही मुद्रास्फीति और निवेश से अनिभिज्ञ आदमी में अमीर होने की चाहत तो है लेकिन वो वित्तीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली से भी बिल्कुल अंजान है,बैंक,बीमा की कार्यप्रणाली तो वह नहीं जानता है,साथ ही शेयर बाजार की बात उसे अजूबा सी प्रतीत होती है। और उसकी इस अज्ञानता का फायदा शातिर लोग उठाते है।

 

               सोचिए अगर उसे शेयर बाजार की अनिश्चितताओं का ज्ञान होता तो इसमें निवेश से निश्चित राशि वापिसी की गारण्टी के झॉसे में कभी नहीं आता है ?अगर उसे शेयर बाजार में निवेश के तरीके का ज्ञान होता तो वह किसी दूसरे को अपना पैसा शेयर बाजार में लगाने क्यों देता ?आम आदमी म्युचुअल फण्ड से परिचित होता तो किसी अनजानी सी संस्था को शेयर बाजार में लगाने पैसा कभी नहीं देता। आम आदमी को यह पता होता कि बैकों को राशि जमा करने का अधिकार रिजर्व बैंक देती है तो वह इन फर्जी संस्थाओं में पैसा जमा करने के पूर्व यह जरूर पता कर लेता कि फलॉ कम्पनी को यह अधिकार है कि नहीं ?यह सच है कि देश के अधिसंख्यक लोगों को आधुनिक वित्तीय बाजार एवं उसमें निवेश की प्रक्रिया के संबंध में ज्ञान का अभाव है। इसके अतिरिक्त देश के बड़े वर्ग को अपनी आमदानी एवं बचत के प्रभावकारी उपयोग का ज्ञान नहीं है उसे आधारभूत बचत,ऋण्,बीमा,पेंशन और जीवन सबंधी योजनाओं की भी जानकारी नही है ऐसी स्थिति में वह लुट रहा है,मेहनत कर कमाने के बाद भी खाली हाथ की स्थिति का सामना करने की स्थिति कभी भी उसके सामने आ सकती है। वर्तमान स्थिति से समझा जा सकता है कि देश के नागरिक वित्तीय साक्षर नही है और वित्तीय साक्षरता या जागरूकता का अभाव देश के आर्थिक विकास में भी बाधाक है,क्योंकि इससे निवेश भी प्रभावित हो रहा है।

 

                आज देश के नागरिकों को वित्तीय साक्षर करना जरूरी है। सभी वर्गों को वित्तीय जागरूकता कार्यक्रम तो जरूरी है ही साथ ही जरूरत इस बात की है कि स्कूली एवं महाविद्यालयीन पाठयक्रम में वित्तीय जागरूकता को शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि आज का विद्यार्थी कल का नागरिक है कल का निवेशक है। स्कूली पाठयक्रम में बचत की जरूरतें बताकर छात्रों में बचत की रूचि जाग्रत की जा सकती है ,इन्हें बैंक और पोस्ट आफिस बचत योजनाओं की जानकारी तथा खाता खोलने की प्रक्रिया का ज्ञान कराया जाना चाहिए। महाविद्यालयीन आधार पाठयक्रम में बजट,बचत और निवेश की जरूरत,मुद्रास्फीति और मंहगाई दर,बैंकिग की कार्यप्रणाली,खाता और बचत योजनाओं की जानकारी,रिजर्व बैंक के दिशा निर्देश। बीमा की जरूरत,बीमा और बचत का अंतर तथा बीमा कंपनियों की उपयोगी योजनाओं की जानकारी से अवगत कराया जाना चाहिए। शेयर बाजार आज दिनप्रतिदिन महत्तवपूर्ण होता जा रहा है इसके प्रति लोगों की जिज्ञासा बढ़ रही है अत:विद्यार्थियों को शेयर बाजार के नियामक तथा इसमें निवेश की जरूरत,निवेश की प्रक्रिया एवं इसके जोखिम तथा निवेश के निश्चित वापिसी की अनिश्चितताओं का ज्ञान कराया जाना जरूरी है। शेयर बाजार में निवेश के संस्थागत तरीके जैसे म्युचुअल फण्ड और यूलिप स्कीम की अच्छाइयों और जोखिमों का ज्ञान छात्रों को बाजार में आने वाली फर्जी कंपनियों के वायदों से भ्रमित होने से बचाएगा। छात्रो को बचत के तरीकों का ज्ञान उनके भावी जीवन की आवश्यकतों की पुर्ति में सहायक बनेगा। छात्रों का यह ज्ञान कि रूपए में वृद्वि कभी भी जादुए अंदाज से नहीं होती है वरन यह बाजार की वास्तिविकताओं पर आधारित होती है,उनके पालकों को भी फर्जी कंपनियों के लुभावने वायदों से दूर रहने की सीख देगी। वास्तव में वित्तीय जागरूकता एक सतत प्रक्रिया है,इसे क्रमश:सिखाया जा सकता है जो कि पाठयक्रम के जरिए ज्यादा सहज होगा।

 

 ? डॉ. सुनील शर्मा