संस्करण: 16  जुलाई-2012

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT


मनमोहन सिंह अंडर-एचीवर, 

ओबामा एचीवर ?

           पिछले दिनों इस खबर ने देश में बड़ा तहलका मचाया कि अमेरिका की टाइम मैग्जीन ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अंडरएचीवर यानि उम्मीद से कम सफल बताया है। वैसे भारतीय बाजार में देशी समाचार पत्रों तथा पत्रिकाओं की संख्या लाख का आंकड़ा छू रही है,इनमें से बहुत से पत्र पत्रिकायें एक से बढ़ कर एक सनसनीखेज समाचार छापते हैं किंतु हमारे देश में कुछ लोगों को इंपोर्टेड चीजों का आवश्यकता से अधिक चस्का लग चुका है जैसे देशी दवाओं के खरीदार ढूंढे नहीं मिलते लेकिन विदेशी दवाओं तथा परफ्यूम्स के लिये हजारों खर्च करने को कई लोग तैयार रहेंगे। 

  ?  मोकर्रम खान


सरकार के खिलाफ

शब्दाडंबर और षडयंत्र..?

        कुछ समय पहले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि डालर के मुकाबले रुपए का गिरना स्वाभाविक नहीं बल्कि एक साजिश का हिस्सा है। आशय यह था कि सरकार विदेशों खासकर अमेरिकी कंपनियों को लाभ दिलाने के लिए जानबूझकर रुपए को रसातल में लिए जा रही है। पता नहीं मोदी के किन मुखबिरों ने ऐसी सूचना दी या संदेह व्यक्त किया, इनकी सत्यता कितनी प्रमाणिक है, क्योंकि इसके समर्थन में न तो उन्होंने कोई तथ्य दिया और न ही कोई उदाहरण है। 

? विवेकानंद


आपका कथन

सच नहीं है अडवाणीजी   

    दरणीय अडवाणीजी देश के सवसे चतुर नेताओं में से एक हैं और बहुत ही सही समय पर कूटनीतिक कदम उठाते हैं। वे कई बार ऐसे मुद्दे छेड़्ते हैं जिस पर आयी तीव्र प्रतिक्रिया का वार उनके प्रतिद्वन्दी को झेलना पड़्ता है। पिछले दिनों अडवाणीजी ने भाजपा में प्रधानमंत्री पद के अपने प्रतिद्वन्दी नरेन्द्र मोदी के पक्ष में बयान देते हुए गोलमाल तरीके से कहा कि जितना गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को बदनाम किया गया उतना इतिहास में किसी को नहीं किया गया।

? वीरेन्द्र जैन


आडवानी जी, मीडिया समेत

सभी के साथ अन्याय किया है मोदी ने

          भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की यह शिकायत है कि मीडिया ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ न्याय नहीं किया है। उनका यह भी दावा है कि इतिहास में जितना अन्याय मोदी के साथ हुआ है उतना किसी ओर राजनेता के साथ नहीं हुआ है। यह आरोप लगाने के पहले आडवाणी जी को कुछ होमवर्क कर लेना था। यदि वे ऐसा करते तो उन्हें यह पता चल जाता कि जितना अन्याय स्वयं मोदी ने मीडिया के साथ किया है शायद उतना किसी और राजनीतिज्ञ ने भारत के प्रजातांत्रिक इतिहास  नहीं किया होगा।

? एल.एस.हरदेनिया


भाजपा की बलिहारी-

इधर अडवाणी कर रहे मोदी का बचाव

उधर कोस रहे हैं केशुभाई !

         जब-गजब है भारतीय जनता पार्टी की बलिहारी। पार्टी के भीतर एक दूसरे को निशाना बनाकर खूब तीर छोडे ज़ा रहे हैं। भाजपा शासित एक प्रदेश कर्नाटक में तो भाजपा के अंदरूनी कलह का हश्र सामने आ ही गया। पूर्व मुख्यमंत्री येदियूरप्पा के दबाव में आकर भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को झुकना पड़ा और मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा को पद से हटाकर येदि के चहेते जगदीश शेट्टार को नया मुख्यमंत्री बनाने की घोषणाएं करना पड़ गई। इधर भाजपा शासित दूसरे प्रदेश गुजरात में कलह का एक ऐसा दौर शुरू हो चुका है जो थमने का नाम नहीं ले रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता केशुभाई पटेल और नरेन्द्र मोदी के बीच का घमासान किसी से छुपा नहीं है।

 ? राजेन्द्र जोशी


क्या हिन्दुत्व आतंक के खिलाफ संघर्ष

अंधी गली में पहुंचा है?

                  दिल्ली की उच्च अदालत के पास, बम्बई, बंगलौर में बम विस्फोट हुए हैं। ऐसे बम धमाकों के चन्द घण्टों के अन्दर टीवी चैनलों ने यह समाचार दिखाना शुरू किया कि इण्डियन मुजाहिदीन,जैश ए मोहम्मद या हरकतुल-जिहाद इस्लाम ने बम विस्फोटों की जिम्मेदारी लेते हुए ई मेल भेजे हैं या एसएमएस भेजे हैं। इन कथित संगठनों के नाम हमेशा ही मुस्लिम होते हैं। अब एक ईमेल को किसी भी शरारती व्यक्ति द्वारा भेजा जा सकता है,मगर टी वी चैनलों पर इन्हें दिखा कर और अगले दिन अख़बारों में प्रकाशित करके,कोशिश यही रहती है कि देश के सभी मुसलमानों को आतंकी और बम फेंकने वाले कहा जाए ...क्या मीडिया को चाहिए कि वह जानबूझकर/गैरजानकारी में बांटो और राज करो की इस नीति का हिस्सा बने ?

? सुभाष गाताड़े


सुप्रीम कोर्ट की कृपा से

गुजरात में शान्ति भी होगी और इंसाफ भी

      जिन लोगों ने मार्च 2002 में  वली गुजराती की दरगाह को जमींदोज करके सड़क बनावा दी थी ,कानून की मुनादी उनके दरवाजों पर फिर बज रही है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है कि अब सरकार को एक लिस्ट तैयार करनी पड़ेगी जिसमें उन सारी दरगाहों और पूजा स्थलों का नाम होगा जिन्हें  नफरत के  सौदागरों ने तबाह कर दिया था । सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस लिस्ट में उन सारी मस्जिदों,दरगाहों और अन्य पूजास्थलों का उल्लेख होगा जिनके लिए प्रभावित लोगों ने राज्य सरकार से मुआवजा माँगा है ।इसके पहले गुजरात हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि सरकार उनसभी दरगाहों की मरम्मत करवाए जो 2002के नरसंहार के दौरान नष्ट कर दी गयी थीं ।

? शेष नारायण सिंह


स्वास्थ और चिकित्सा

शिक्षा के क्षेत्र में सुधार जरूरी

      मारे देश में मौजूद स्वास्थ सुविधाओं को लेकर अक्सर चिंता जतलाई जाती रही है। सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी देश की एक बड़ी आबादी स्वास्थ सुविधाओं से वंचित है। खासकर,ग्रामीण इलाके। जहां बुनियादी ढांचे से लेकर डॉक्टर,नर्स सभी की कमी है। ये हालात तब हैं,जब सरकार बरसों से पूरे देश में स्वास्थ व परिवार कल्याण कार्यक्रम चला रही है। सरकार हर साल इस कार्यक्रम के लिए करोड़ो रूपए का बजट आवंटित करती है। लेकिन फिर भी तस्वीर है कि बदलने का नाम नहीं ले रही। इसके कारणों में यदि जाएं तो चिकित्सक,नर्सों और सार्वजनिक पेशेवरों की कमी,सर्वव्यापी स्वास्थ कवरेज देने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। यह बात अब खुद, हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने एक वक्तव्य में स्वीकारी है।

? जाहिद खान


बच्चों के फेसबुक पर

पालकों का नियंत्रण आवश्यक

        दिल्ली के डॉ. समीर मल्होत्रा आजकल कुछ नया पढ़ रहे हैं। वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे जानना चाहते हैं कि आजकल के फेसबुकिया बच्चों को किस तरह से ठीक किया जाए। वे ऐसे बच्चों को मनोरोगी मानते हैं। उनके पास रोज कम से कम दो बच्चे ऐसे आते हैं, जो फेसबुक में डूब चुके थे और उसके माध्यम से उन्हें मानसिक यंत्रणाएँ सहनी पड़ी थी। कई बच्चे इस कारण डिप्रेशन का भी शिकार हो रहे हैं। ऐस तब से अधिक हुआ है, जब से यह तय किया गया है कि अब 13वर्ष के बच्चे भी फेसबुक पर अपना एकाउंट खोल सकते हैं। इसका पूरे विश्व में विरोध हो रहा है। इंटरनेट इस्तेमाल करने वाला भारत तीसरे नम्बर का देश है?

? डॉ. महेश परिमल


खौफज़दा समय में दम तोड़ती जिंदगी

       म्मीदों का खत्म हो जाना जिंदगी को खत्म कर देता है। जब तक उम्मीद की एक भी किरण बाकी रहती है, आदमी जीने के हजार गलत-सही जुगत करता रहता है। यह कैसी बिडम्बना है कि जैसे-जैसे हम जिंदगी जीने के आसान रास्ते खोजते जा रहे हैं, वैसे-वैसे जिंदगी से निराश होने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है! नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की ताजा रपट में बताया गया है देश में आत्महत्या करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है और खासकर उत्तर प्रदेश में यह प्रवृत्ति बहुत तेजी से बढ़ रही है। यहाँ आत्महत्या करने वालों की संख्या में एक तिहाई की खतरनाक वृध्दि हुई है।च

    

? सुनील अमर


हिग्स बोसॉन की खोज :

तार्किकता के नए आयाम

     ब्रम्हांड के बनने के विषय में शुरू से ही कई अवधारणायें प्रचलित रही हैं जिनमें तार्किक व अतार्किक दोनों प्रकार की धारायें शामिल हैं। भौतिकी व अन्तरिक्ष विज्ञान की तमाम खोजों व शोधों ने यह स्थापनायें दीं कि ब्रम्हाण्ड किसी दैवीय शक्ति द्वारा प्रतिपादित एवं महज कुछ ही दिनों के सृजन का परिणाम नहीं बल्कि इसके उदय व विस्तारण के पीछे प्रकृति के सुव्यवस्थित नियम व पदार्थ के अपने जाने व अनजाने गुणधर्मों की भूमिका है। ब्रम्हांड के अस्तित्वमान होने की सबसे तार्किक व सुव्यवस्थित व्याख्या देने वाले सिध्दान्त को ''बिग-बैंग थ्योरी''के नाम से जाना जाता है।

? राहुल शर्मा


बच्चों को बीमार बनाते स्कूल?

    गोलू राजधानी के प्रतिष्ठित स्कूल में पहली कक्षा के छात्र हैं। गोलू की कक्षा सुबह की पारी में लगती है और प्रात: साढ़े सात बजे कक्षा प्रारम्भ हो जाती है। चूॅकि गोलू का घर अपने स्कूल से ज्यादा दूर नहीं हैं। फिर भी स्कूल बस सुबह सात बजे गोलू के घर के पास पहुॅच जाती है अत: गोलू को पॉच मिनिट पहले बस स्टाप पर आना पड़ता है। चूॅकि स्कूल पूरे सात घण्टे लगता है यानि ढाई बजे तक कक्षाएॅ चलती हैं,इसलिए गोलू को पूरा तैयार होकर स्कूल आना पड़ता है और तैयार होने में न्यूनतम एक घण्टे का समय लगता हैं। अर्थात गोल को छह बजे बिस्तर छोड़ना पड़ता है। अब गोलू की नींद पूरी हो या न हो उसे छह बजे बिस्तर छोड़ना ही होगा नही तो बस निकल जाएगी और स्कूल छूट जाएगा शायद यह उसके मम्मी पापा को भी अच्छा नहीं लगेगा।

? डॉ. सुनील शर्मा


  16जुलाई2012

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved