संस्करण: 16 जनवरी- 2012

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मनु के विधान पर एक और मुहर

गोमांस संग्रहण पर सात साल जेल मगर शरीर पर अवैध परीक्षण करनेवालों को बस्स थोड़ा जुर्माना !

           गर कोई डॉक्टर किसी मरीज की सहमति के बिना उस पर दवा परीक्षण करे, उसके शरीर को गिनीपिग की तरह अर्थात परीक्षण चूहे की तरह इस्तेमाल करे, जिसमें कभी उसकी मौत भी हो तो उसकी क्या सज़ा मिलनी चाहिए ?

               निश्चित तौर पर ऐसे सभी डॉक्टरों का पंजीकरण तत्काल रद्द कर उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे चलने चाहिए ताकि आइन्दा कोई डाक्टर ऐसी हरकत न करे।

  ?  सुभाष गाताड़े


काश, भावी माताओं (कन्याओं) को

गो-माता का स्टेकटस मिल सकता

        ध्य  प्रदेश सरकार ने गो-वंश हत्या पर कठोर दंड का कानून बना दिया. इस कानून की सबसे बड़ी विशेषता, जो भविष्य में विचित्रता भी सिध्द हो सकती है, यह होगी कि इसके तहत गिरफ्तार आरोपी को स्वयं यह सिध्द करना होगा कि वह  निर्दोष है अन्यथा सीधे 7 वर्ष का कठोर कारावास।  यह कैसे संभव होगा क्योंकि गाय या उसके वंशजों से जिरह बहसकूट परीक्षण कैसे होंगे। इस कानून से गायों तथा उनके वंशजों को कितना लाभ होगा, यह कहना कठिन है क्योंनकि मध्य प्रदेश में गायें हत्या से नहीं बल्कि कुपोषण तथा बीमारियों से मर रही हैं किंतु इस कानून का सबसे अधिक लाभ मध्य प्रदेश की पुलिस तथा सांप्रदायिकता आधारित राजनीति करने वालों को होगा।

? मोकर्रम खान


इस पाखंड से

किसका नुकसान करती है भाजपा?

      भी शायद 100 दिन भी पूरे नहीं हुए होंगें जब उत्तर प्रदेश से लेकर देश तक के राजनीतिक मिजाज को मथने के लिए भाजपा के कई दिग्गज रथों पर सवार होकर निकल पड़े थे और उनका दावा था कि वे भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों से भरी प्रदेश की बसपा और केन्द्र की संप्रग सरकार को उखाड़ फेंकेंगें। उनकी बड़ी-बड़ी बातों से किसी का राजनीतिक मिजाज बदला या नहीं, यह तो आने वाले मार्च के पहले सप्ताह में पता चल जाएगा, लेकिन भ्रष्टाचार की गंगोत्री को गर्भ नाल से ही सुखा देने का दम भरने वाले ये बड़बोले नेता किस तरह छॅटे हुए दागियों, पापियों और भ्रष्टाचारियों को गले लगाना शुरु कर दिए हैं, यह देखकर मतदाता जरुर भौचक हैं।

? सुनील अमर


फिर उजागर हुआ संघ परिवार का षडयंत्रकारी चरित्र

          मारे मुल्क में साम्प्रदायिक दंगों और हिंसा की जांच रिपोर्टों में यह बात कई बार साबित हो चुकी है कि दंगे की वजह धार्मिक न होकर अक्सर राजनीतिक होती है। महज सियासी फायदा पाने और असल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए कुछ सियासी पार्टियां व खुद को 'सामाजिक','सांस्कृतिक'बतलाने वाले संगठन मंसूबाबंद तरीके से साम्प्रदायिक दंगे करवाते हैं। साम्प्रदायिक दंगा, उपद्रव फैलाने की ऐसी ही एक साजिश का खुलासा हाल ही में बीजेपी शासित सूबे कर्नाटक में हुआ। कर्नाटक के बीजापुर जिले में सिंदगी तहसील के कार्यालय पर एक जनवरी की रात कुछ लोगों ने पाकिस्तानी झंडा फहरा दिया।

? जाहिद खान


पत्रकारिता विश्वविद्यालय या संघ की शाखा

         सा कोई संस्थान नहीं, ऐसा कोई शासकीय विकास का कार्यक्रम नहीं जिसका उपयोग मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा का प्रचार करने के लिए न कर रही हो। इसी श्रृखंला में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भी शामिल है। इस समय विश्वविद्यालय का संचालन इस प्रकार से किया जा रहा है जैसे वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा हो। सभी कानूनों, नियमों और परंपराओं को ताक में रखकर विश्वविद्यालय में ऐसे लोगों की नियुक्तियां हो रही हैं जो या तो स्वयं संघ के सदस्य है या जो संघ के सामने साष्टांग दंडवत करने को तैयार हैं।

 ? एल.एस.हरदेनिया


छोटे शहरों को मिलेंगी महानगरों जैसी सहूलियतें

केन्द्रीय बजट में योजना शामिल होगी

           केन्द्र सरकार अगले वित्तीय वर्ष से महानगरों की तरह की छोटे शहरों और कस्बों में भी मूलभूत सहूलियतें प्रदान करने की योजना लागू करने जा रही है। योजना लागू होने पर छोटे-छोटे शहरों-कस्बों में रह रहे लोगों की दिक्कतें दूर हो जायगी। हाल ही में इस उद्देश्य के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त एक विशेषज्ञ समिति (हाई पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी) ने केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय को एक प्रतिवेदन सौंपा है। इस समिति ने अपनी सिफारिश में छोटे शहरों के विकास कार्यों के क्रियान्वयन के लिए अर्बन मेनेजमेंट इंस्टीटयूट के गठन का सुझाव दिया है। इस इंस्टीटयूट में केन्द्र और राज्य सरकार की भागीदारी रहेगी। 

? राजेन्द्र जोशी


घाटे में हैं पिछडा वर्ग, आदिवासी समुदाय के लोग

       ध्यप्रदेश में पिछले दो विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीतकर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी लगभग 24 माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में भी महाविजय का रिकार्ड बनाना चाहती है। प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता पर कब्जा जमाये रखने के लिए भाजपा के थिंक टैंक सक्रिय हो गये है। उन्होने सत्ता और संगठन को ऐसे कार्यक्रम अधिक आयोजित करने का सुझाव दिया है जिनके बहाने अन्य राजनीतिक दलों का परम्परागत माने जाने वाले वोट बैकं को भी भाजपा से जोडा जा सके। भाजपा के योजनाकार कॉग्रेस एंव बहुजन समाज पार्टी सहित अन्य राजनीतिक दलों की ओर झुकाव रखने वाले थोकबंद वोट को अपने पक्ष में करने के लिए अनेक कार्यक्रमों का संचालन भी जिला,विकासखण्ड स्तर पर कर रहें है।

? अमिताभ पाण्डेय


संस्कृत, भारत की आत्मा !

        दिल्ली में संपन्न हुए पन्द्रहवें विश्व संस्कृत सम्मेलन के उद्धाटन समारोह में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने संस्कृत को भारत की 'आत्मा' बतलाते हुए, संस्कृत की महत्ता व महिमा के दृष्टिगत कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा,संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीनतम जीवंत भाषाओं में से एक है। यदि हम इसकी टूटी हुई कड़ियों को जोड़ने और बहुविषयक पहल को आगे बढ़ाते हैं तो संस्कृत में वर्तमान ज्ञान-प्रणाली और भारतीय भाषाओं को समृध्द बनाने की अद्भुत क्षमता है। उन्होंने संस्कृत को नकारने की कमजोर नब्ज पर हाथ रखते हुए बड़ी साफगोई से कहा इस भाषा के बारे में ऐसी गलत धारणा बन गई है कि इसे केवल धर्म, उपासना और रीतियों से जोड़कर देखा जाने लगा।

 

? प्रमोद भार्गव


कहां गयी लीलावती की बेटियां

महिला वैज्ञानिकों की कम होती संख्या

     99 वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस इस मायने में अलग छाप छोड़ने वाली कही जाएगी कि उसके अन्तर्गत पहली महिला कांग्रेस का आयोजन हुआ  जिसमें विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में स्त्रियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए अमेरिका में भारत की राजदूत सुश्री निरूपमा राव ने इस वैश्विक परिघटना को रेखांकित किया कि दुनिया भर में विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या कम है और इसके पीछे प्रमुख कारण समाज में व्याप्त जेण्डर आधारित विषमता ही है।

? अंजलि सिन्हा


भारतीय चीन से तकनीक क्यों सीखना नहीं चाहते?

    चीन में व्यापार करने जाने वाले भारतीय व्यापारियों पर पिछले दिनों जिस तरह से व्यवहार किया गया, उससे यही साबित होता है कि वहाँ भारतीय व्यापारी असुरक्षित हैं। आखिर क्या कारण है कि इतनी दूर जाकर भी माल लाने पर व्यापारियों को फायदा होता है?जिल्लत सहकर भी व्यापारी चीन से माल लाते हैं और भारी मुनाफा कमाते हैं। भारतीय व्यापारी यदि चीन जाकर वहाँ से माल के बजाए उनकी तकनीक सीखकर आएँ,तो फिर क्या आवश्यकता है, माल लाने की? आखिर वह कौन से कारण है कि चीन के व्यापारी को जो माल 9 लाख रुपए में पड़ता है,उसके लिए भारतीय व्यापारी को 60 लाख रुपए चुकाने होते हैं?

 

? डॉ. महेश परिमल


म.प्र. में उच्चशिक्षा में गुणवत्ता की बातें सिर्फ ढपोरशंखी

     हावत -थोथा चना बाजे घना, म.प्र में उच्च शिक्षा की हालात पर सटीक बैठती है। यहॉ चालू सत्र को उच्च शिक्षा में गुणवत्ता वर्ष के तौर पर प्रचारित किया जा जा रहा है तथा अधिकारी से लेकर मंत्री तक उच्च शिक्षा में सुधार की वयानबाजी कर रहे हैं। मगर वास्तिविकता में हालात् कुछ अलग ही है। प्रदेश में पिछले आठ सालों के दौरान उच्च शिक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ी है। उच्चशिक्षा संस्थानों के हालात से प्रतीत होता है कि सरकारी नीति इन्हें अपाहिज करने की है। शिक्षकों के मामले में महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की स्थिति काफी चिंतनीय है।

? डॉ. सुनील शर्मा


  16 जनवरी- 2012

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