संस्करण: 16 दिसम्बर -2013

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पं जवाहरलाल नेहरू को अपमानित करने की

साजिश कर रहा है आर एस एस

       पिछले कुछ वर्षों से संघ परिवार के लोग पंडित जवाहर लाल नेहरू की अहमियत को कम करने के लिए अनर्गल बातें कर रहे हैं। संघ के मीडिया प्रबंधकों की ओर से सोशल मीडिया पर पंडित नेहरू के बारे में जिस तरह की बातें लिखी जा जा रही हैं चरित्र हनन का उससे निकृष्ट उदाहरण हो ही नहीं सकता, महात्मा गांधी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को अपना वारिस मनोनीत किया था और उनको स्वतन्त्र भारत का पहला प्रधानमंत्री बनाने का निर्णय लिया था। संघ के लोग इस बात पर भी अजीबोगरीब बातें करते पाए जाते हैं। 

? दिग्विजय सिंह


मताभिव्यक्ति और मतदान,

सन्दर्भ म.प्र. विधानसभा चुनाव

        लोकतंत्र नागरिक को मत व्यक्त करने की आजादी देता है। यही आजादी सरकार चुनने के लिए प्रत्येक नागरिक को आम चुनाव में मत देने का अधिकार देती है। किंतु देखा गया है कि सरकार बना कर सत्ता पर अधिकार करने की वासना पालने वाले तत्व चुनावों को येन केन प्रकारेण प्रभावित करने के लिए नागरिकों के स्वतंत्र विचारों को दुष्प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। ऐसे लोग मतदाता की वैचारिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर उसे एक सौदागर बनाने के लिए प्रेरित करते हैं और इसी प्रभाव में सरल मतदाता त्वरित ठोस लाभ के लिए अपने मत चन्द रुपयों, कम्बलों, या शराब की बोतलों के बदले बेच कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पथभ्रष्ट कर देते हैं।

?

वीरेन्द्र जैन


मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में मोदी का जादू नहीं चला

     ध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और दिल्ली में हुए चुनावों के परिणाम के घोषित होने के बाद यह बहस चल पड़ी है कि इन चुनाव परिणामों को मोदी ने कितना प्रभावित किया है। मैं परिणाम घोषित होने के बाद मध्यप्रदेश के एक वरिष्ठ मंत्री के यहां बैठा था। उनकी अद्भुत विजय के लिये बधाई देने वालों का हुजूम एकत्रित था। वे सभी भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता थे। वे आपस में चर्चा कर रहे थे कि मध्यप्रदेश के चुनाव में मोदी फैक्टर की कोई भूमिका नहीं रही है। चुनाव में भाजपा की जीत और कांग्रेस की हार के लिए स्थानीय कारण ही जिम्मेदार हैं।

 ? एल.एस.हरदेनिया


भाजपा को नरेंद्र मोदी ने नहीं

कांग्रेस ने जिताया

      ध्यप्रदेश, छत्तीससगढ़, राजस्थान तथा दिल्ली में भाजपा ने जीत का परचम लहरा दिया है। इन विधान सभा चुनावों में भाजपा ने नरेंद्र मोदी को भावी प्रधान मंत्री तथा भाजपा के खेवनहार के रूप में पेश किया। मोदी भी अति उत्साह में धुआंधार प्रचार में जुट गये।विचित्र किंतु सत्य,4राज्यों में जीतने के बाद भी मोदी का गुणगान भाजपा के किसी बड़े नेता ने नहीं किया। स्वंयं नरेंद्र मोदी ने भी खामोशी अख्तियार कर रखी है।   

? मोकर्रम खान


इन्साफ सबके लिए

साम्प्रदायिक हिंसा या लक्षित हिंसा विधेयक 2011 क्यों जरूरी है ?

              चार साल की खुशनुमा की अब महज यादें बची हैं।

                अभी ज्यादा दिन नहीं हुआ जब ठंड लग कर उसकी मौत हुई। सात भाई बहनों में सबसे छोटी खुशनुमा शामली, उत्तर प्रदेश के किसी राहत शिविर में रह रही थी, जहां उनका परिवार अन्य कई परिवारों के साथ साम्प्रदायिक हिंसा के नाम पर अपने गांव से खदेड दिया गया था। अभी जैसे हालात हैं उनमें उनका परिवार वापस जाने की भी नहीं सोचता। मुजफरनगर, शामली एवं आसपास के इलाकों में दंगों की लपटें भले ही फिलवक्त थम गयी हों, मगर अभी तनाव बरकरार है।

 ?   सुभाष गाताड़े


मोदी का बचाव करें,

चाहे कुछ भी करना पड़े।

           त्तीसगढ़ में दूसरे चरण के मतदान के बाद भी दिल्ली के एक टीवी चैनल के अलावा किसी ने भी नरेन्द्र मोदी के नाम को राज्य में चुनाव परिणाम को प्रभावित करने वाला कारक नही माना। इस दौरान भाजपा में मोदी के विरोधी और कांग्रेस उस खुलासे की बात कर रहे है जिसमें गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री को कथित तौर पर एक महिला की गैर कानूनी तरीके से जासूसी की गतिविधि में शामिल होने का आरोप है। कांग्रेस ने इस खुलासे को लेकर कुछ समाचार चौनलों के माधयम से भाजपा पर हमला करने का निश्चय किया है।  

? शेष नारायण सिंह


डरिए डराइए नहीं, वातावरण बदलिए !

      कार्यस्थल या अन्य स्थानों पर यौन उत्पीड़न मामलों के सूर्खियों में आने के बाद - जिसके चलते एक चर्चित पत्रकार-सम्पादक इन दिनों हिरासत में हैं और सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ भी जांच चल रही है - इधर बीच इस परिघटना को लेकर राजनेताओं के अलग अलग किस्म के बयान आए हैं। समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल की इस टिप्पणी के बाद कि 'अब लोग महिलाओं को नौकरी देने से कतराएंगे'या 'उन्हें अपना असिस्टेंट/सहयोगी बनाने से बिदकेंगे'को लेकर उठे विवाद के शमन के बाद ताजा मामला केन्द्रीय मंत्री फारूख अब्दुल्ला की तरफ से आया है।

?  अंजलि सिन्हा


ज्यादा गंभीर हैं

महिलाओं की सुरक्षा के सवाल

     र्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त जज, एक स्वनामधान्य पत्रकार तथा एक विश्वविद्यालय के विधि विभाग के चेयरमैन के उपर युवतियों से यौन उत्पीड़न अथवा बलात्कार के आरोप इन दिनों चर्चा में हैं। जॉच कमेटी ने उक्त जज को प्रथम दृष्टया दोषी पाया है, पत्रकार न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस उन्हें रिमांड पर लेकर उनकी मेडिकल जाँच व अन्य परीक्षण कर रही है तथा विधि विभाग के चेयरमैन को विश्वविद्यालय प्रशासन ने निलम्बित कर दिया है। बड़ा जज, बड़ा पत्रकार और बड़ा प्रोफेसर, ये समाज के आधार स्तम्भ माने जाते हैं और इन पर इस तरह के संगीन आरोप इशारा करते हैं कि समाज का कैसा विचलन हो रहा है।

 

? सुनील अमर


सुविधाविहीन स्कूलों में

लेपटाप का सपना

        र्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त जज, एक स्वनामधान्य पत्रकार तथा एक विश्वविद्यालय के विधि विभाग के चेयरमैन के उपर युवतियों से यौन उत्पीड़न अथवा बलात्कार के आरोप इन दिनों चर्चा में हैं। जॉच कमेटी ने उक्त जज को प्रथम दृष्टया दोषी पाया है, पत्रकार न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस उन्हें रिमांड पर लेकर उनकी मेडिकल जाँच व अन्य परीक्षण कर रही है तथा विधि विभाग के चेयरमैन को विश्वविद्यालय प्रशासन ने निलम्बित कर दिया है। बड़ा जज, बड़ा पत्रकार और बड़ा प्रोफेसर, ये समाज के आधार स्तम्भ माने जाते हैं और इन पर इस तरह के संगीन आरोप इशारा करते हैं कि समाज का कैसा विचलन हो रहा है। उक्त प्रकार के मामलों के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर औरतें सुरक्षित कहाँ हैं?

? सुनील अमर


मिलावटी दूध पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती कितनी कारगर ?

      दूध में मिलावट पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने कहा है कि जो कोई भी दूध में मिलावट करता है या उसका कारोबार करता है, उसे उम्र कैद की सजा होनी चाहिए। पर मौजूदा कानून में इतनी सख्त सजा का प्रावधान ही नहीं है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने सलाह दी है कि राज्य सरकारें कानून बदलें। दूध में मिलावट करने वालों को उम्र कैद की सजा का प्रावधान करे। अभी मिलावट के मामलों में फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड एक्ट के तहत कार्रवाई होती है। इस कानून के तहत दोषी को अधिकतम छह माह की सजा हो सकती है। कोर्ट ने इस पर ऐतराज जताया है। जस्टिस केएस राधाकृष्णन और एके सीकरी की बेंच ने कहा कि दूध में मिलावटखोरी रोकने के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था नाकाफी है।     

 

? डॉ. महेश परिमल


संदर्भ : मिजोरम विधानसभा चुनाव

भूमि उपयोग नीति ने दिलाई जीत

        पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में एक बार फिर शानदार चुनाव प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस ने सत्ता में दोबारा वापिसी की है। पार्टी ने विधानसभा चुनावों में दो तिहाई बहुमत हासिल करते हुए राज्य की 40 सीटों में से 32 सीटों को अपनी झोली में डाल लिया है। वहीं राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टियां सिर्फ 6 सीटों पर ही सिमटकर रह गईं। इन पार्टियों में मिजो नेशनल फ्रंट यानी एमएनएफ को पांच और मिजोरम पीपुल्स कांफ्रेंस को एक सीट मिली। मिजो नेशनल फ्रंट पिछले चुनावों के मुकाबले अपनी सीटों में सिर्फ 2 सीटों का ही और इजाफा कर पाई। पूर्वोत्तर राज्यों में अपनी जड़े जमाने की कोशिश कर रही बीजेपी को यहां निराशा झेलना पड़ी।

? जाहिद खान


24 दिसम्बर : राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस पर विशेष

उपभोक्ता कब तक छले जाते रहेंगे ?

      क्कीसवीं सदी को यदि उपभोक्तावादी संस्कृति की सदी कहा जाए तो शायद ग़लत न होगा। आज बाजार का स्वरूप बदल गया है। विक्रय हेतु वस्तुएं आकर्षक रूप में प्रस्तुत की जा रही हैं। ख़रीदार भी अब क्रेता से उपभोक्ता बन गया है जिसके हितों की रक्षा का दायित्व सरकार पर है। इसके लिए सरकार ने बाकायदा एक स्वतंत्र मंत्रालय की स्थापना की है तथा आवश्यक अधिनियमों का निर्माण किया है तथापि आज वस्तुओं की कालाबाजारी, वस्तुओं की गुणवत्ता से खिलवाड़ और वस्तुओं की अनुपलब्धता राष्ट्रव्यापी समस्या हो गई है।     

 

? डॉ. गीता गुप्त


  16 दिसम्बर -2013

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