संस्करण: 16 अप्रेल- 2012

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शिव राज या शकुनि राज ?

स्त्रियों के हालात पर जारी श्वेतपत्र के निहितार्थ

           गृहमंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2010में अनुसूचित जनजातियों पर देश में हुए 5,885मामलों में से 23.4प्रतिशत अर्थात 1,384सूबा मध्यप्रदेश में हुए। इस मामले में राजस्थान दूसरे नम्बर पर रहा जहां 22.4प्रतिशत अर्थात 1319मामले सामने आए। आंकड़ों के मुताबिक एक साल के अन्तराल में आदिवासियों पर अत्याचार में 8.5 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखी गयी।

               आदिवासियों पर अत्याचार के मामलों में सूबा मध्यप्रदेश के फिर एक बार सूर्खियों पर होने की प्रस्तुत ख़बर अख़बारों में प्रकाशित हुई ही थी,

  ? सुभाष गाताड़े


म.प्र. भाजपा

प्रदेश कार्यसमिति की बुन्देलखण्ड में बैठक और उमा भारती की अनुपस्थिति

        ध्यप्रदेश में तीसरी बार सरकार बनाने का सपना देखने वाली भाजपा ने अपनी कार्यसमिति की बैठक, अयोध्या के बाद रामलला का दूसरा स्थान माने जाने वाले ओरछा में की और इस बैठक में भाजपा को बुन्देलखण्ड में जगह दिलाने वाली उमा भारती को झांकने भी नहीं दिया गया। उल्लेखनीय है कि  मध्यप्रदेश की सरकार उमा भारती को कश्मीरी पंडितों की तरह पहले ही प्रदेश निकाला दिला कर गदगद थी और उसके बाद उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में उन्हें चरखारी से टिकिट दिला कर जिताने में चौहान सरकार ने सारी ताकत झोंक दी थी। जिन शिवराज सिंह चौहान पर सुश्री भारती उनकी हत्या कराने का आरोप लगा चुकी थीं

? वीरेन्द्र जैन


आदिवासी संस्कृति पर

हिंदुत्वादी ग्रहण

    झारखण्ड का आदिवासी समाज इस समय हिंदुत्व के सांस्कृतिक हमलों के निशाने पर है। जहां दाव पर उनकी हजारों साल पुरानी सभ्यता और संस्कृति है,जिस पर उनकी एक अलग और स्वायत्त पहचान टिकी है। इस हमले की रणनीति का मुख्य एजेंडा उनको अल्पसंख्यक विरोधी अपने फासीवादी अभियान में हिंदुत्व की पैदल सेना के बतौर इस्तेमाल करना है। जैसा कि गुजरात 2002में मुस्लिम विरोधी और उडीसा के कंधमाल में हुये इसाई विरोधी जनसंहारों के दौरान उन्होंने किया था।

? राजीव कुमार यादव


विधानसभा अध्यक्ष सहित तीन भाजपा नेता आरोपों के घेरे में भाजपा की प्रतिष्ठा को जबरदस्त धक्का

          स समय मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के तीन नेताओं पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इन तीन नेताओं में मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी, मंत्री नरोत्तम मिश्रा और एक जिला स्तर के नेता शामिल है। 

               अभी कुछ दिन पूर्व जबलपुर में रज्जाक नामक एक व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई थी। रज्जाक एक अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति है। उसपर सिमी से मिले होने का भी आरोप है। रज्जाक की गिरफ्तारी के बाद यह तथ्य उभरकर सामने आया कि रज्जाक को मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी का संरक्षण प्राप्त है।

? एल.एस.हरदेनिया


मप्र में सरकारी जमीनों पर

मकानों का खेल

         ध्यप्रदेश में जब से भाजपा, खासकर शिवराज सरकार आई है, तब से सरकारी जमीनों और मकानों की ऐसी बंदरबाँट हो रही है वैसी प्रदेश के संसदीय इतिहास में पहले कभी नही हुई। मुख्यमंत्री,मंत्रियों ,विधायकों और रसूखदारों के संरक्षण में एक ओर जहां सरकारी जमीनों पर बड़े पैमाने पर कब्जे किए गए, वहीं दूसरी ओर खुद सरकार ने बड़े उद्योग घरानों और बिल्डर्स को भी जमकर उपकृत किया। इसके अलावा सत्ता साकेत में बैठे लोगों ने आम जनता के हितों पर डाका डालते हुए बड़े-बडे बंगलों को औने-पोने दामों पर खरीद लिया। इसमें भी उन्होंने शासन के साथ सरेआम धोखाधड़ी भी की।

 ? महेश बाग़ी


बज रहा है सत्ता और संगठन का ढोल

जिसके भीतर है पोल ही पोल

           तिपय राजनैतिक पार्टियां अपने चुनावी घोषणा पत्रों, वायदों, आश्वासनों और निरीह जनता को नाना प्रकार के प्रलोभनों के जरिए भ्रमित कर राज्यों में सत्तासीन तो हो जाती हैं किंतु वे इतनी क्षमतावान और जन के प्रति इतनी अधिक वफादार नहीं रह पाती, जितनी कि उन्हें अपने बड़बोलेपन में झलकती है। जनता को अपने बीच के उन राजनैतिक आकाओं से बड़ी आशायें बंध जाती हैं, जो उसकी बदोलत राजसत्ता का स्वाद चखने लगते हैं। किंतु जनता को तब निराशा का सामना करना पड़ता है, जब उससे इलेक्ट्रॉनिक मशीन की बटन दबवाकर उसकी तरफ से पीठ फेर ली जाती है।

? राजेन्द्र जोशी


न्याय की राजनीति

       क महत्वपूर्ण घटनाक्रम में पिछले दिनों उत्तर प्रदेश की सपा सरकार ने आतंकवाद के आरोप में बंद दो मुस्लिम युवकों को छोडने की मंशा जाहिर की है। गौरतलब है कि आतंकवाद के आरोप में जो मुस्लिम नौजवान बिना किसी ठोस बुनियाद के लम्बे समय से जेलों में बंद हैं उन्हें छोडने का वायदा समाजवादी पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में भी किया था। इसलिये सरकार के इस निर्णय से मुस्लिम समाज में न्याय मिलने की उम्मीद बढी है। यहां यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि जिन दो युवकों को छोडने की बात हो रही है वे 2007 में प्रदेष की तीन कचहरियों लखनउ, फैजाबाद और बनारस में हुए सिलसिलेवार विस्फोटों के आरोपी हैं।

? शाहनवाज आलम


बुखारी के भयादोहन से बचें सपा प्रमुख

      माजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव विचित्र दुविधा में फंस गये हैं। एक तरफ उनके पुराने मित्र आजम खाँ हैं तो दूसरी तरफ जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी। जिस तरह एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकती ठीक उसी तरह आजम खॉ के रहते सपा में उनसे बड़ा कोई और मुस्लिम नेता नहीं रह सकता। इस तथ्य के बावजूद सच्चाई यह है कि आजम खॉ एक राजनीतिक व्यक्ति हैं और वे धर्मगुरु होने का दिखावा नहीं करते जबकि श्री बुखारी इमाम होने के बावजूद राजनीतिक में पूरी दखल की इच्छा रखते हैं। इसी के साथ यह भी एक जाहिर तथ्य है कि श्री बुखारी अपनी इमामत और व्यवहार, दोनों में खासे तानाशाह हैं और ऐसे कई अवसर आये हैं जब उन्होंने अपने विरुध्द सवाल पूछने पर सरे-आम पत्रकारों की भी पिटाई की है।

? सुनील अमर


क्या बहुजन राजनीति की

कोई सीमा है?

        त माह पाँच राज्यों मे संपन्न विधानसभा चुनावों के परिणामों, विशेषकर उत्तरप्रदेश के परिणामों ने राजनीतिक पंडितों की सभी भविष्यवाणियों को गलत साबित कर दिया। कुछ लोगों के अनुसार इन चुनावों का एक महत्वपूर्ण संदेश यह है कि उत्तरप्रदेश राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों को राज्य की सत्ता से अलग-थलग करके दूसरा तमिलनाडु बन रहा है। यह एक कोरी कल्पना हो सकती है जिसकी सही पड़ताल के लिये भारतीय राजनीति के परिप्रेक्ष्य में गहन अध्ययन की आवश्यकता है। दूसरे लोग कहते है कि बसपा ने चुनावों में कोई खास प्रदर्शन नही किया और मायावती के आसपास जो उल्लासोन्माद पैदा किया गया था वह 6 मार्च को चुनाव परिणामों के साथ ही शान्त हो गया किन्तु यह तथ्यों पर आधाारित प्रतीत नही होता है।

? के.एस.चलम


खाद्य सुरक्षा मानक कानून का विरोध, राजनीतिक अपराध

    ड़ी विचित्र स्थिति है...। एक ओर केंद्र सरकार कमजोर लोकपाल के लिए विरोध लानतें झेल रही है तो दूसरी और सख्त खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के लिए। पहले कहा जाता है कि बदमाशी करने वालों में कानून का खौफ नहीं है, यदि इन्हें सबक सिखाना है तो मजबूत कानून बनाने होंगे, और जब सख्त कानून बनता है तो कहा जाता है कि यह बेहत कड़े हैं इनसे लोगों का जीना मुश्किल हो जाएगा। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि जो भाजपा मजबूत लोकपाल की मांग कर रही है उसी की मध्यप्रदेश इकाई सख्त खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम का विरोध कर रही है। क्या मिलावटखोरी अपने आप में भ्रष्टाचार नहीं है? क्या आम आदमी को इसके खिलाफ वैसे ही अधिकार नहीं दिए जाने चाहिए जैसा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ देने की मांग की जा रही है?

 

? विवेकानंद


प्रत्यक्ष विदेशी निवेश :

मुद्रास्फीत का एक समाधान

     भारत में विगत कुछ वर्षों से बढ़ रही समग्र मुद्रास्फीति के पीछे एक बड़ा कारक खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृध्दि होना है। हाल ही में विशेषकर कृषि संबन्धी खाद्य पदार्थों की  कीमतों में तेजी से उछाल आया है। गत वर्ष से सब्जियों की कीमतों में 18 प्रतिशत, दालों में 14 प्रतिशत, दूधा 10 प्रतिशत और अण्डे, मांस एवं मछली की कीमतों में 12 प्रतिशत की वृध्दि हुई है। फलों की कीमतों में तुलनात्मक रूप से कम अर्थात 5 प्रतिशत वृध्दि हुई है जबकि अनाज की कीमतों में यह वृध्दि 3 प्रतिशत है।

? नंदिता दास गुप्ता


स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण में

भारत दुनिया में अव्वल

    ब यह तथ्य पूर्णत: बहस से परे है कि आर्थिक व सामाजिक विषमताएँ पोषण व स्वास्थ्य की असमान उपलब्धियों को जन्म देती हैं,। हमारे देश की 70 प्रतिशत संपत्ति व स्त्रोतों पर दो हजार से भी कम धनकुबेरों का कब्जा है जिन्होंने लोकतंत्र की नई व विकृत परिभाषा को जन्म दिया है कि ''पँजीपतियों की सरकार, पूँजीपतियों के लिए और पूँजीपतियों द्वारा।'' आज हमारे देश की तकरीबन आधी आबादी 20 से 32 रूपयों में प्रतिदिन का जीवन गुजारने को मजबूर है लेकिन दूसरी ओर मात्र कुछ हजार लोग 5 से 6 करोड़ रूपयों का हर महीने पैकेज पाते हैं। असमानता की खाई का चौड़ापन लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इस असमानता का प्रत्यक्ष संबंधा आम लोगों के स्वास्थ्य व शिक्षा जैसे मुद्दों से है।

? राहुल शर्मा


  16 अप्रेल2012

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