संस्करण: 15 सितम्बर- 2014

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आईसिस, तेल की राजनीति और इस्लाम के प्रति घृणा का चरम

     गभग एक माह पहले (अगस्त 2014), मुस्लिम कार्यकर्ताओं-अध्येताओं के एक समूह ने विभिन्न शहरों में प्रेस वार्ताएं आयोजित कीं। उन्होंने आईसिस द्वारा की जा रही क्रूर हिंसा की भर्त्सना करते हुए वक्तव्य जारी किये। इन वक्तव्यों पर सबसे ऊपर, बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा गया था, इस्लाम मीन्स पीस (इस्लाम का अर्थ है शांति)।     

? राम पुनियानी


धर्म परिवर्तन की राजनीति और अम्बेडकर

        प्रेम विवाह भी अंततः विवाह ही होता है और उसमें भी परम्परागत विवाह की तरह कभी कभी टूटन पैदा हो जाती है। जब ऐसी टूटन अंतर्धार्मिक विवाहों के बीच आती है तो धर्म के आधार पर राजनीति करने वाले इसे धर्म परिवर्तन से जोड़ने लगते हैं ताकि एक सम्प्रदाय की भावनाओं को भड़का कर उसका राजनीतिक लाभ ले सकें। लव जेहाद शब्द भी एक धर्म विशेष से जुड़े शब्द से मिला कर एक षड़यंत्र की रचना है। धर्म परिवर्तन के नाम पर किये जा रहे साम्प्रदायिक धृवीकरण के परिप्रेक्ष्य में इस बात को विस्तार से समझने की जरूरत है कि भारत रत्न डा.भीमराव अंबेडकर ने कई लाख दलितों के साथ नागपुर में जोर शोर से धर्म परिवर्तन किया था। 

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वीरेन्द्र जैन


स्पंदित गुजरात - अल्पसंख्यकों के लिए जगह ?

     होटल मालिक मुस्तफा पटेल - इन दिनों बेहद दुखी हैं। अहमदाबाद से बमुश्किल नब्बे मिनट वाहन की दूरी पर विरमगाम हाईवे पर स्थित ज्योति होटलउन्हें अन्ततः बन्द करना पड़ा है। कोई भी शख्स जिसने कभी उस सड़क से यात्रा की हो, इस होटल के खाने की तारीफ करने से नहीं चूकेगा। लेकिन अब महज यादें बची हैं। कई दशकों से उनके साथ काम कर रहे कर्मचारियों ने भी अब दूसरी नौकरी की तलाश शुरू की है।

 ? सुभाष गाताडे


धर्म परिवर्तन एवं लवजिहाद को लेकर सांप्रदायिक तनाव फैलाया जा रहा है

      त्तरप्रदेश की तरह मध्यप्रदेश में भी सांप्रदायिक फिजा बिगाड़ने के योजनाबद्ध प्रयास जारी हैं। उत्तरप्रदेश की तरह मध्यप्रदेश में भी तथाकथित लवजिहाद के मामले खोज-खोजकर निकाले जा रहे हैं। इसी तरह धर्मांतरण की घटनाओं को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त पिछले कुछ दिनों से मध्यप्रदेश में छुटपुट सांप्रदायिक घटनाएं जारी हैं। भोपाल के पड़ोस में स्थित रायसेन शहर में सांप्रदायिक तनाव की कुछ घटनाएं हुईं और नतीजे में वहां कर्फ्यू लगाना पड़ा।

? एल.एस.हरदेनिया


बच्चों के बहाने वोट पर नजर

           देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्म दिन 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। पंडित नेहरू को बच्चों से बहुत प्रेम था बच्चे उन्हें चाचा पुकारते थे इसलिए यह विशेष दिन बच्चों के लिए उत्सव के रूप में आरक्षित किया गया। वर्षों बीत गए इस दिन बच्चे सज-धज कर स्कूल जाते हैं और अपनी बनाई हुई वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाते हैं। इसमें बच्चे अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। नृत्य, गान, नाटक आदि प्रस्तुत किए जाते हैं। नुक्कड़ नाटकों के द्वारा आम लोगों को शिक्षा का महत्व बताया जाता है। यानि बच्चे इस दिन अपना हुनर दिखाते हैं।

 

 ?  विवेकानंद


अमीरों, उद्योगपतियों के नाम रहा सौ दिन

         केन्द्र की मौजूदा मोदी सरकार ( शुरु से ही इसे भाजपा सरकार नहीं कहा जा रहा है ) के 100 दिन पूरे हो गए हैं और परम्परानुसार इसे सरकार ने जश्नपूर्वक मनाया है। समाचार माध्यमों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर सरकार ने अपनी उपलब्धियों को गिनाया तो सरकार का यशोगान करने में लगे तमाम अखबारों-चैनलों ने इस अवसर पर विशेष प्रशंसात्मक सामग्री दी है।

? सुनील अमर


सांप्रदायिक मत बनाइए मुकद्दर के सिकंदर को

      क्या देश में चुनाव आचार संहिता के दौरान ही नेता विवादास्पद बोलते हैं या फिर अक्सराहां बोलते रहते हैं? अगर बोलते रहते हैं तो उस दरम्यान कौन उनको नोटिस भेजता है जैसे चुनाव आयोग, चुनाव के दौरान भेजता है? भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ को नोटिस भेजते हुए आयोग ने 17 सितंबर तक जवाब देने का समय दिया। इस तरह किसी धर्म और समुदाय को लेकर शत्रुता के भाव को बढ़ावा देने और नफरत फैलाने के लिए योगी आदित्यनाथ को भेजा गया नोटिस चुनाव अयोग की आचार संहिता के प्रति उसकी गंभीरता और जिम्मेदारी का बेमिसाल उदाहरण है कि वह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनाव के प्रति कितना (अ)गंभीर है।

?  राजीव यादव


दिव्या और सभ्या बचाएंगी सिंधु घाटी सभ्यता को

     मलेश वाजपेई और राकेश अवस्थी का परिवार अब अपने को अलगाव में महसूस करता है। उनके गांव के अधिकांश हिंदू उनसे किसी तरह का संबन्ध नहीं रखना चाहते और उन्हें मुसलमान कहकर तंज करते हैं। उनके परिवार की बच्चियां भी अब इसी वजह से बस से स्कूल नहीं जातीं, क्योंकि उनकी सहेलियां उन्हें मुसलमान कह कर चिढ़ाती हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से तीस किलोमीटर दूर स्थित भीतरगांव के इन बािंदों के प्रति व्यवहार में आए इस बदलाव का कारण यह है कि उन्होंने पिछले दिनों 24 अगस्त 2014 को हुई

? गुफरान सिद्दीकी


संदर्भः- आधी से अधिक सजा काट चुके विचाराधीन कैदियों के पक्ष में

सर्वोच्च न्यायालय का फैसला नागरिक अधिकारों की रक्षा की पहल

        य आरोप की आधी से अधिक सजा काट चुके विचाराधीन कैदियों के परिप्रेक्ष्य में सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला मानवीय संवेदना और नागरिक आधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इस फैसले की दृष्टि में उन कैदियों को राहत मिलेगी,जिन पर गंभीर व जघन्य आपराध दर्ज नहीं हैं। इस कार्रवाई से जेलों में भीड़ कम होगी। साथ ही जेलों में अपराधियों के बीच खूनी-संघर्ष के जो हालात बन जाते हैं,उनमें भी कमी आएगी।   

? प्रमोद भार्गव


नालंदा से फिर बहेगी ज्ञान की गंगा

      ह सुखद है कि भारतीय इतिहास की महान विरासत नालंदा विश्वविद्यालय 800 साल बाद फिर खुल गयी है। शिक्षा के इस महान केंद्र के प्रति लोगों में कितना जबरदस्त आकर्षण है इसी से समझा जा सकता है कि पहले ही सत्र में देश-दुनिया से दाखिले के लिए एक हजार से ज्यादा छात्रों ने आवेदन किया है। एक सितंबर से विश्वविद्यालय का पहला शैक्षिक सत्र शुरु हो गया है और इतिहास एवं पर्यावरण विषय की पढ़ाई भी शुरु हो गयी है। आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय के सभी सात विभागों में पठन-पाठन शुरु हो जाएगा।

? अरविंद जयतिलक


श्रम कानून संशोधनों के निहितार्थ क्या है ?

        केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने फैक्टरी कानून, एप्रेंटिस कानून और श्रम कानून (कुछ प्रतिष्ठानों को रिटर्न भरने और रजिस्टर रखने से छूट) कानून में संशोधन को मंजूरी दी। सरकार ने संसद में बताया कि वर्तमान श्रम कानूनों में संशोधन की जरूरत है। श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986, कारखाना अधिनियम 1948, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948, प्रशिक्षु अधिनियम 1961 तथा श्रम विधि विवरणी देने तथा रजिस्टर रखने से कुछ संस्थानों को छूटरू अधिनियम 1988 में संशोधन किया है।                   

? शैलेन्द्र चौहान


लड़कियों को खुद जागरूक होना होगा

      दुनिया भर में आए-दिन महिलाएं यौन हिंसा का शिकार होती हैं। यौन हिंसा भी कई तरह की। छेड़-छाड़, भद्दी टिप्पढि़यों से लेकर जबरन यौन संबंध और जघन्य सामूहिक बलात्कार। महिलाओं के खिलाफ होने वाली इस यौन हिंसा को रोकने के लिए हर देश अपनी-अपनी तरह से कोशिशें भी कर रहा है, बावजूद इसके इन यौन अपराधों में कोई कमी नहीं आ पा रही है। इस मामले में खास तौर से दक्षिण एशिया में स्थिति और भी ज्यादा खराब है, जहां महिलाएं कहीं भी महफूज नहीं।

? वसीमा खान


तिहाड़ जेल का वह अनोखा कैदी

        ड़े-बूढ़े कह गए हैं कि कभी किसी गरीब की हाय नहीं लेनी चाहिए। वह कभी न कभी अपना असर दिखाती ही है। इसमें कई बार भले ही देर हो जाए, पर इसमें कभी अंधेर नहीं होता। सोचो, जिस व्यक्ति के नाम से सरकार चलती हो, जिसके बड़े-बड़े नेताओं से सीधा सम्पर्क हो। जो देश के प्रधानमंत्री से सीधी बातचीत करता हो। राज्य के वित्तमंत्री जिससे मिलकर बजट तैयार करते हों, मुख्यमंत्री उनके बाएं हाथ की तरह हों, यदि वह सीखचों के पीछे चला जाए और सुप्रीमकोर्ट उसे जेल में ही सारी सुविधाएं मुहैया कराए, उसकी स्थिति क्या होगी?                   

? डॉ. महेश परिमल


किसानों का खेती से मोहभंग: बढाएगा जनसंघर्ष?

      निल कुमार खेती  को छोड़ किसी दूसरे काम की तलाश में हैं क्योंकि उनके लिए अब खेती के सहारे परिवार चलाना कठिन होता जा रहा है। अनिल के खेतों की सोयाबीन की फसल पिछले साल ज्यादा बारिस के कारण नष्ट हो गई,चने को ओलों ने बर्बाद कर दिया और इस सत्र में समय पर पानी न गिरने से सोयाबीन की फसल लगाई ही नहीं खेत खाली हैं। ऐसे हालात केवल पिछले सत्र से बन रहें हों ऐसा नहीं है बल्कि खेती के लिए ओला,पानी, अवर्षा और कीट प्रकोप लगभग हर साल की नियति बन चुका है।

? डॉ.  सुनील शर्मा


  15 सितम्बर- 2014

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